उपमुख्य संवाददाता, पटियाला
पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड (पावरकॉम) के कर्मियों की ओर से की जाने वाली 10 व 11 नवंबर की हड़ताल स्थगित कर दी गई है। पावरकॉम मुख्यालय की ओर से इसके न होने की पुष्टिके अलावा कुछ नहीं कहा गया है जबकि पावरकॉम के सबसे बड़े कर्मचारी संगठन टैक्नीकल सर्विस यूनियन के महासचिव सुखवंत सिंह सेखों ने बताया कि पीएसईबी एंपलाइज ज्वाइंट फोरम ने हड़ताल वापिस ले ली है, ऐसे में उनका संगठन यदि अकेले हड़ताल पर जाता है तो इसके पूर्ण सफल होने की संभावना कम ही रहती है। वे कहते हैं कि ऐसे में हड़ताल पर जाने का कोई औचित्य नहीं बनता। हालांकि 12 नवंबर से टीएसयू मुख्यमंत्री के कार्यक्रमों में विरोध प्रदर्शन करता रहेगा और ज्ञापन दिए जाएंगे।
कर्मियों ने बोर्ड के निगमीकरण के फैसले को वापस करवाने, पहली सेवा शर्तो को बहाल करने की मांगों को लेकर 10, 11 नवंबर को दो दिन की हड़ताल घोषित की थी। टीएसयू के महासचिव ने बताया कि संघर्ष लक्ष्य प्राप्ति तक जारी रहेगा। उन्होंने बताया कि पंजाब सरकार ने जिस झूठे आधार पर नेताओं के साथ मिलकर बिजली कर्मियों को गुमराह करके निगमीकरण का फैसला लिया था, टैक्नीकल यूनियन पहले ही रद्द करके संघर्ष की राह पर चल पड़ी है। बिजली कर्मियों की सेवा शर्तो में कंपनी के मुनाफे की जरूरत के मुताबिक तबदीली करने का निर्णय कर लिया गया है। जिस के कारण बिजली कर्मचारियों को पक्का रोजगार, पक्की वेतन प्रणाली पेंशन, सेवाकाल के समय में होने वाली किसी किस्म की हानि की पूर्ति का पहला प्रबंध जैसे सब अधिकार खतरे में आ गए हैं। सुखबीर-कालिया कमेटी की सिफारिश के मुताबिक किसानों व मजदूरों को मिलती बिजली रियायत पर भी झपटना शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री का निगमीकरण करने के लिए दिया गया विश्वास बिल्कुल झूठा साबित हो गया है। इस हालात में कर्मचारियों के पास निगमीकरण को वापिस करवाने व अपनी रोजी रोटी की रक्षा करने के लिए संघर्ष करने के अलावा और कोई दूसरा रास्ता नहीं है। 12 नवंबर से मुख्यमंत्री के फील्ड में आने पर उनके विरूद्ध रोष प्रदर्शन कर कर्मचारियों की मांगों को बातचीत के जरिए करने के लिए मजबूर किया जाएगा।
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