-पटियाला, मंडी गोबिंद गढ़ व जालंधर में सल्फर डाई आक्साइड, नाइट्रोजन डाईआक्साइड के अलावा सस्पैंडिड पार्टीक्यूलेट मैटेरियल में भी कमी
-लुधियाना, अमृतसर में जहरीली गैसों में तो कुछ गिरावट पर एसपीएम बीते साल की तुलना में बढ़ गया
-ध्वनि प्रदूषण में के मामले में भी अमृतसर आगे बढ़ा
भूपेश चट्ठा, पटियाला
दिवाली पर होने पटाखों से होने वाले वायु व ध्वनि प्रदूषण में पिछले सालकी तुलना में इस साल मामूली गिरावट जरूर दर्ज की गई है लेकिन लुधियाना व अमृतसर दोनों ने दीप पर्व पर घुटते दम से कोई सबक नहीं लिया है। दोनों ही शहरों में दिवाली वाले दिन होने वाले प्रदूषण में इस बार भी बढ़ोतरी हुई है। हालांकि आवासीय क्षेत्र वर्ग में लुधियाना और संवेदनशील वर्ग में अमृतसर के प्रदूषण में भी मामूली कमी आई है। वहीं पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने राज्य भर में ही प्रदूषण में कमी आने का दावा कर दिया है।
बोर्ड की ओर से पांच शहरों में दिवाली वाले दिन और इसके एक दिन पहले और एक दिन बाद की गई मानीटरिंग में सामने आया है कि पटियाला, मंडी गोबिंद गढ़ व जालंधर में सल्फर डाई आक्साइड, नाइट्रोजन डाईआक्साइड के अलावा सस्पैंडिड पार्टीक्यूलेट मैटेरियल में भी कमी दर्ज की गई है। गैसें हालांकि चेतावनी के क्षेत्र में नहीं आई है। जबकि एसपीएम की मात्रा सारी हदें फिर भी पार कर गई है। आवासीय क्षेत्र के वर्ग में मंडी गोबिंद गढ़ में एसपीएम 744 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर से गिरकर 567 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर रह गया है। पटियाला में यह 662 से कम हो 487, जालंधर में यह 474 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर से बढ़कर 671, लुधियाना में 588 की तुलना में 579 और अमृतसर में 705 से बढ़कर 718 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर पर आया है।
संवेदनशील क्षेत्र कहे जाने वाले अस्पतालों के सामने की गई मानीटरिंग में सिविल अस्पताल गोबिंद गढ़ पर 563 से गिरकर 428, राजेंद्रा अस्पताल पटियाला पर 328 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर से कम हो 367, सिविल अस्पताल बाबू लाभ सिंह नगर जालंधर पर 601 से 579, शीला अस्पताल नजदीक डीएमसी लुधियाना में 449 से बढ़कर 579 हो गया और श्री गुरू तेग बहादुर हास्पिटल राम बाग अमृतसर पर 703 से कम हो 680 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर हुआ है।
कामर्शियल क्षेत्र वर्ग में मंडी गोबिंद गढ़ में 721 से 509, पटियाला में 489 से 422, जालंधर में 735 से 455, लुधियाना में 662 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर से बढ़कर 810 और अमृतसर में 744 से बढ़ कर 775 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर हो गया है।
लुधियाना, अमृतसर में जहरीली गैसों में तो कुछ गिरावट है और ये जहरीली गैसों की खतरनाक सीमा 80 माइक्रो ग्राम क्यूबिक से खासे कम है। इन दोनों शहरों में एसपीएम बीते साल की तुलना में बढ़ गया है।
वहीं ध्वनि प्रदूषण में के मामले में भी अमृतसर आगे बढ़ा है। उक्त पांचों शहरों के अलावा इस मानीटरिंग में बठिंडा, संगरूर, होशियारपुर, मोहाली और फरीदकोट को भी शामिल किया गया है।
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