Wednesday, 17 November 2010

पावरकॉम का मुख्यालय ही असुरक्षित, उपाय खोखले

भूपेश चट्ठा, पटियाला पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड और पंजाब स्टेट ट्रांसमिशन कारपोरेशन लिमिटेड के माल रोड स्थित मुख्यालय पर प्रदेश भर के कार्यालय से काफी संख्या में लाल बत्ती वाली कारें अधिकारिक रूप से हर रोज पहुंचती हैं। यही वो मुख्यालय है जो 65 हजार से ज्यादा कर्मियों को नियंत्रित व संचालित करता है लेकिन इसकी सुरक्षा व्यवस्था में खामियों की कमी नहीं है। किए गए उपाय खोखले साबित हो रहे हैं। प्रबंधन का हाल कुछ ऐसा है कि न्यायालय के आदेश भी क्रियान्वित नहीं हो पाए।
सात मंजिला भवन में कभी एक महिला कर्मी का तलवार से गला काटने वाला पकड़ में नहीं आता। हथियार कैसे गए? किसी को पता नहीं, पांच घंटे तक एक संगठन पूरे मुख्यालय को बंधक बनाकर रखता है और हर कोई बेबस नजर आता है। ठीक ऐसे ही मुख्यालय की सातवीं मंजिल पर चंद महीनों के अंतराल में एक ही संगठन के कुछ लोग दूसरी बार खुदकुशी की धमकी देकर चढ़ जाते है और किसी को खबर नहीं होती। पावरकॉम के आधिकारिक सूत्र बताते है कि पिछली बार आश्रितों के पावरकॉम मुख्यालय की छत पर चढ़कर प्रबंधन की किरकिरी करने के बाद सिविल विंग से लोहे का गेट लगाकर स्थाई रूप से ताला लगाने के निर्देश जारी किए गए। लेकिन एक ढीला-ढाला लकड़ी का दरवाजा टांग दिया गया। मृतक कर्मचारियों के पांच आश्रितों ने धक्का मारा, तो गेट गिर गया और वे आसानी से छत पर जा चढ़े।
दिलचस्प है कि पावरकॉम ने न्यायालय से सौ मीटर के दायरे में किसी तरह का धरना प्रर्दशन करने के खिलाफ स्थगन आदेश ले प्रतिबंध लगवा रखा है पर दो धरने स्थाई रूप से लगे हैं। प्रबंधन आदेश ही लागू करवाने में अक्षम साबित हो रहा है।
वहीं आश्रितों अथवा बेरोजगार लाइनमैनों को पक्की नौकरी न सही ठेके पर ही रखने के सवाल पर पावरकॉम के एक वरिष्ठ अधिकारी कहते हैं कि इसकी अनुमति पंजाब स्टेट रेग्यूलेटरी कमीशन नहीं देता, बिना अनुमति के रखे जाने पर वेतन देना संभव नहीं है। इससे आगे पावरकॉम नहीं सोचता। ऐसे में पेंच तो रहेगा।

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