Wednesday, 24 November 2010

विदेशी चंदे का गौरख धंधा

जमीनी हकीकत
एनजीओ को सहायता साढ़े छह गुणा बढ़ी, खुलासे में कमी
-उपलब्ध आंकड़ों में पहले 12 में से 11 दानकर्ता ईसाई।
-उत्तर-पूर्वी राज्यों में हुआ सर्वाधिक निवेश, तमिलनाडू के जिलों में प्रत्येक में 100-100 करोड़ से ज्यादा धन बांटा
भूपेश चट्ठा पटियाला
देश में दबे कुचले व जरूरतमंद लोगों की सेवा में जुटे और इसी के नाम पर अपनी डुगडुगी बजाने वाले गैर सरकारी संगठनों को मिल रही विदेशी धन की सहायता में हाल के वर्षों में साढ़े छह गुणा की बढ़ोतरी दर्ज हो चुकी है वहीं विदेश से समाज (धर्म पढ़ा जाए ) की सेवा के नाम पर आ रहे धन का खुलासा करने वालों की संख्या में लगातार गिरावट दर्ज हो रही है।
गृहमंत्रालय की ओर से जारी आधिकारिक आंकड़ों और मंत्रालय की आधिकारिक वेब साइट अनुसार विदेशी सहायता अधिनियम 1976 के तहत आ रहा अनुदान एनजीओ की वास्तविकता को ब्यान कर रहा है। वर्ष 1993 से लेकर वर्ष 2007 के दौरान विदेशों से आया धन 1865 करोड़ से बढ़कर 12290 करोड़ हो गया। वहीं फंड कहां से आए हैं? इसका खुलासा करने वालों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है। पहले 18489 एनजीओ में से 12198 बताते थे तो अब सहायता लेने वाले 33937 एनजीओ में से सिर्फ 19011 ने स्रोत का खुलासा किया है। यह आंकड़ा 66 फीसदी से गिरकर 55 पर आ गया, जबकि फंड साढ़े छह गुना बढ़ गया।
इतना ही नहीं 2006-07 सबसे ज्यादा दान देने वाले पहले 12 में से 11 दानकर्ता ईसाई है। और यही नियम दान लेने वालों पर भी लागू होता है। लाभ प्राप्त करने वालों में भी बहुसंख्यक ईसाई एनजीओ ही है। गृह मंत्रालय के ही एक पूर्व अधिकारी कहते है कि आप अपना अनुमान स्वयं लगा सकते है और यह भी इत्तेफाक कहा जा सकता है कि उत्तर-पूर्वी भारत और सीमावर्ती राज्यों में ही क्यों सेवा ज्यादा होती है। इन राज्यों में ही हुआ है सर्वाधिक निवेश, विशेष रूप से तमिलनाडू जैसे राज्य में तो कई जिलों में प्रत्येक में 100-100 करोड़ से ज्यादा धन बांटा गया है। वे कहते है कि धर्म निजी मामला है पर राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए। ऐसा ना होने पर धर्म निरपेक्षता ही खतरे में आ जाती है।
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रधान अश्विनी शर्मा इस संबंध में कहते है कि केंद्र सरकार को इस प्रकार से आ रहे धन की गहराई से छानबीन करनी चाहिए कि ये पैसा किस काम के लिए खर्च हो रहा है। भारतीय संविधान हर किसी को अपने तरीके से अपने धर्म की पूजा अर्चना करने की अनुमति देता है लेकिन प्रलोभन दे कर धर्म परिवर्तित करने-करवाने की अनुमति किसी को नहीं है, यदि ये सिलसिला जारी रहता है तो भारत का मूल धर्म निरपेक्ष स्वरूप ही बिगड़ जाएगा।
वहीं अखिल भारतीय हिंदू सुरक्षा समिति के महासचिव आशुतोष गौतम कहते है कि अगर कोई विशुद्ध रूप से सेवा करना चाहता है तो किसी को आपत्ति नहीं है लेकिन देश की आंतरिक सुरक्षा को खतरा पैदा करने वालों से सख्ती से निपटा जाना चाहिए। वे सवाल करते है कि आखिर ये पैसा सीमावर्ती जिलो में ही क्यों आता है। जिस पंजाब में आर्य समाज की शुरूआत हुई, जहां शिरोमणि गुरूद्वारा प्रबंधक कमेटी भी है उसी पंजाब के सीमावर्ती जिलों गुरदासपुर व फिरोजपुर में अचानक ईसाईयों की तादाद बढ़ती है और दंगा करने की स्थिति में आ जाते है। अमेरिका की घटना पर नवाबों के शहर मलेरकोटला में आगजनी की जाती है। किसी गरीब का धर्म ही उससे छीन लेना जैसी हरकतें करने वालों पर नजदीक से निगाह होनी चाहिए।

पंजाब की आबादी ढ़ाई गुनी ईसाईयों की बारह गुनी

धर्म जागरण के प्रांत संयोजक राम गोपाल जी बताते है कि पंजाब की आबादी विभाजन के समय एक करोड़ से थोड़ी कम तो ईसाईयों की एक लाख से कम थी। आज पंजाब की आबादी ढ़ाई गुना हुई है तो ईसाईयों की आबादी 12 लाख के पार है, इसमें तीन से चार लाख क्रिप्टो क्रिश्चयन भी है, जो सरकारी कागजों में ईसाई नहीं है। हालांकि पिछले चुनावों ईसाई भाईचारे की ओर से 25 लाख की आबादी का दावा ठोका गया था। गति यहीदरही तो 2050 तक पंजाब में हिंदु-सिखों के बराबर ईसाई-मुसलमानों का जनसंख्या औसत होगा। गुरदासपुर के पांच विधान सभा क्षेत्र, अमृतसर की सीमा बेल्ट, राजा सांसी क्षेत्र में एनजीओ जमीन खरीद कर फ्लैट बना धर्मातंरण करने वालों को सौंप रहे है। फिरोजपुर के मोगा, मक्खू में चुनावी परिपेक्ष्य में निर्णायक भूमिका में है। कुछ ऐसे ही हालत जालंधर के आस-पास आदमपुर, नकोदर, शाहकोट, टांडा की बेल्ट में हो रहे है।

विदेशी संस्थाओं के नाम

मिसरिओर पोस्टफेक जर्मनी, वल्र्ड विजन यूएसए, फंडासिओन विसींटे फैरर स्पेन, एएसए स्वीट्जरलैंड, लॉयसन ऑफ दलाईलामा जापान, गोसपल फॉर एशिया यूएसए, गोसपल फैलोशिप ट्रस्ट इंडिया यूएसए, गोसपल फॉर एशिया यूएसए,प्लान इंटरनैशनल यूके, फाउंडेशन विसेंट ई फैरर स्पेन, क्रिशचयन ऐड यूके,मिसरिओर मोजर्टस्ट्रासे जर्मनी के नाम है।

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