Tuesday, 2 November 2010

दीप पर्व पर क्यों घुटे दम!

भूपेश चट्ठा, पटियाला : दीयों के त्योहार पर रोशनी की ही दरकार हो तो अच्छा, दम घुटने लगे तो वह त्योहार कैसा? लेकिन हो यही रहा है। पराली व पटाखों के कारण इन दिनों पंजाब में प्रदूषण का स्तर इस हद तक बढ़ने लगा है कि जागने की जरूरत है। वक्त की जरूरत पटाखा रहित दीपावली मनाने की है। पंजाब में दिवाली पर प्रदूषण फैलाने वालों में लुधियानवी सबसे आगे हैं तो पटियालवी सबसे पीछे। हालांकि कुछ साल पहले तक इस मामले में प्रदेश को लीड कर रहा अमृतसर अब दूसरे नंबर पर है और चार महानगरों में जालंधर तीसरे स्थान पर है।
दिवाली पर पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड राज्य में 22 स्थानों पर मानिटरिंग करने जा रहा है। इनमें चारों प्रमुख शहरों के अलावा मंडी गोबिंदगढ़ और नंगल भी शामिल हैं। इन शहरों में मानिटरिंग संवेदनशील, आवासीय और व्यावसायिक के आधार पर होगी। संवेदनशील क्षेत्रों में अस्पताल, धार्मिक स्थल और शैक्षणिक संस्थानों को रखा गया है। पिछले सर्वेक्षण बताते हैं कि दिवाली के दिन एसपीएम की मात्र निर्धारित सीमा से पांच सौ फीसदी तक बढ़ रही है। दिवाली पर पटाखों से होने वाले प्रदूषण में सस्पेंडिड पार्टीक्यूलेट मैटेरियल (एसपीएम) की मात्रा में यह बढ़ोतरी जारी है।
इस बार धान का सीजन के देर तक जारी रहने और पराली जलाने को नियंत्रित करने में सरकार की ओर से सख्ती न किए जाने के चलते दिवाली पर प्रदूषण के सारे रिकार्ड टूटने की आशंका ज्यादा है। दिवाली पर एसपीएम की बात करें तो लुधियाना में यह आंकड़ा एक हजार माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर छूने को है। तीन सालों में 903 से बढ़ता हुआ 973 पर आ गया है जबकि अमृतसर में गिरकर 966 पर आया है।
लुधियाना का व्यावसायिक क्षेत्र विश्वकर्मा चौक सबसे ज्यादा प्रदूषित क्षेत्र में है, यहां मिल्क प्लांट और डीएमसी पर भी मानीटरिंग होती है। अमृतसर का आवासीय क्षेत्र आफिस बिल्डिंग इस वर्ग में आगे है यहां नावल्टी चौक और गुरु तेग बहादुर अस्पताल में भी मानीटरिंग होती है। जालंधर के क्लाक टावर, प्रभात नगर और सिविल अस्पताल केंद्र बिंदु रहते हंै।
सबसे कम प्रदूषण वाले क्षेत्र में पटियाला का राजिंद्रा अस्पताल है। यहां 2006 में यह 269 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर से 2007 में बढ़कर 578 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर और 2008 में 552 माइक्रो ग्राम प्रति घनमीटर पर आ गया। हालांकि सीमा मात्र 200 ही रखी गई है। दिवाली को ध्वनि प्रदूषण सीमा से डेढ़ गुणा ज्यादा चल रहा है। दिन के समय 50 डेसीबल और रात में 65 डेसीबल की सीमा से ये पार है।
पीपीसीबी के अधिकारी बताते हैं प्रदूषण किस शहर में कितना होगा ये शहर के लोगों की पाकेट पावर पर निर्भर करता है। पटियाला में नौकरी पेशा ज्यादा है तो लुधियाना में लोगों की खर्च करने की क्षमता ज्यादा है। वे कहते है कि प्रदूषण में तब तक कमी नहीं आ सकती जब तक कि पटाखे बनाने वाले रसायन नहीं बदलते। ईको फ्रेंडली पदार्थो के प्रयोग से ही इसमें कमी लाई जा सकती है।

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