भूपेश चट्ठा, पटियाला प्रत्येक 30 सालों बाद होने वाले चुनाव क्षेत्रों के बदलाव ने इस बार पटियाला जिले व लोक सभा क्षेत्र को कुछ अधिक तर्कसंगत बना दिया है। इसी परिसीमन के चलते जिले की विधानसभा क्षेत्रों में हुए भौगोलिक बदलाव के बाद नाभा विधान सभा क्षेत्र आरक्षित हुआ तो पटियाला ग्रामीण के नाम से नए विधान सभा क्षेत्र का गठन हुआ। हालांकि कुल संख्या आठ में बदलाव न होने की वजह बनूड़ क्षेत्र का अस्तित्व समाप्त होना है। डकाला सीट का नाम बदलकर सन्नौर विधानसभा क्षेत्र हो गया है। जिले में अब शुतराणा के साथ नाभा के रूप में दो सीटें आरक्षित होंगी। सबसे प्रमुख बदलाव के तहत बने पटियाला ग्रामीण सीट में पटियाला नगर निगम के 22 वार्ड रखे गए हैं, जबकि ये पहले समाना विधान सभा क्षेत्र का हिस्सा थे। इसमें समाना के 54 और नाभा ब्लाक के 32 गांवों और घन्नौर अधीन आते अर्बन एस्टेट, पंजाबी युनिवर्सिटी व बहादुर गढ़ कस्बे तक के क्षेत्र को जोड़ दिया गया है। राज्य में वोटों के लिहाज से दूसरे और लंबाई में पहले नंबर के समाना सीट के ज्यादा छोटा होने की स्थिति पुराने डकाला क्षेत्र के समाना क्षेत्र के साथ लगते और डकाला गांव के आसपास के 40 गांवों को समाना में जोड़ा गया है। पिछले चुनाव तक 90 किलोमीटर तक की दौड़ लगवाने वाला व ढाई लाख से अधिक मतदाताओं वाला यह क्षेत्र अब भौगोलिक दृष्टि से सिमट गया है। डकाला के स्थान पर बने सन्नौर क्षेत्र में घन्नौर सीट के 42 गांव जोड़े गए हैं, जबकि घन्नौर में यही कमी पूरी करने राजपुरा क्षेत्र से इतने ही गांव निकाल कर घन्नौर में मिला दिए गए हैं। बनूड़ सीट का अस्तित्व समाप्त कर दिया गया और बनूड़ कस्बा और 25 गांव राजपुरा में मिला दिए गए हैं, जबकि बनूड़ क्षेत्र के अधिकांश हिस्से से डेरा बस्सी क्षेत्र बना है जो पटियाला लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा तो रहेगा लेकिन यहां जिले का नाम एसएसटी नगर अथवा मोहाली हो गया है। इसी प्रकार लोक सभा सीट पटियाला में से संगरूर जिले के लहरागागा और सुनाम को हटा दिया गया है और आनंदपुर साहिब सीट अधीन आते नाभा को पटियाला लोकसभा में मिला दिया गया है।
Friday, 9 December 2011
एफएंडसीसी की अंतिम प्रभावी बैठक आज, muncipal corporation, f & cc
भूपेश चट्ठा, पटियाला अगले साल होने जा रहे विधानसभा के चुनावों के लिए आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू होने से पहले नगर निगम के अधीन आने वाले क्षेत्रों में योजनाबद्ध तरीके से विकास कार्यो को अंजाम तक पहुंचाने के लिए निगम की फाइनेंस एंड कांट्रैक्ट कमेटी की अंतिम प्रभावी बैठक शुक्रवार को होने जा रही है। निगम के आधिकारिक सूत्र बताते हैं कि बैठक में अधिकतर कार्य 22 नवंबर की बैठक में लिए गए निर्णयों पर तकनीकि रूप से मुहर लगाने के अलावा कुछ अन्य एस्टीमेट भी पास करवाना है। पिछली बैठक में पास हुए प्रस्तावों पर निगम के इंजीनियरों ने तय किए गए रेट पर आपत्ति जताई है। बताया जा रहा है कि ठेकेदारों की ओर से पोस्ट टेंडर निगोसिएशन के बाद दिए गए रेटों पर स्पष्ट रूप से कुछ पता लग पाने के चलते ठेकेदारों को वर्क आर्डर जारी करने में खासी समस्या पेश आ रही थी। दिलचस्प है कि22 नवंबर को पास हुए करीब 10 करोड़ के 85 कार्यो के लागत मूल्य में अब लगभग सभी में दो फीसदी की कटौती की जा सकती है। वहीं 12 नए कामों को भी इसी बैठक में मंजूरी दी जा सकती है। इसके अलावा 57 लाख रुपये के चार सड़कों के प्रोजेक्टों पर अलग से सहमति बनने के आसार हैं।
एंबेसडर कारों की खरीद में देरी
नगर निगम में अति आवश्यक कार्य निपटाने को लेकर दो एंबेसडर कारों की खरीद के लिए एडवांस में दी गई मंजूरी के बावजूद इन कारों के निगम तक पहुंचने में देरी हो गई है। स्थानीय निकाय निदेशालय की ओर से स्वीकृति के बाद कंपनी से मंगवाए गए कोटेशन में कारों की कीमत का प्रस्ताव पिछली बैठक में पास हो गया, लेकिन खरीदी जाने वाली इन कारों का बीमा, अस्थाई रजिस्ट्रेशन व एसेसरी की कीमत नहीं जोड़ी गई थी, हालांकि मेयर व कमिश्नर की ओर से अब इसकी मंजूरी दी जा चुकी है।
सुखबीर की जुबां में बोले मेयर
एफएंडसीसी की बैठक के संदर्भ में मेयर अजीतपाल सिंह कोहली कहते हैं कि आप इसे अंतिम नहीं कह सकते। निगम की सत्ता में पार्टी अभी कई साल और रहेगी। हालांकि वह स्वीकार करते हैं कि आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू होने के चलते प्रभावी रूप से ये अंतिम ही है। वह कहते हैं कि नया एस्टीमेट बना कर पास करवाने में एक लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। इसके लिए संभव है कि समय नहीं मिल पाए, लेकिन शहर में इतने प्रोजेक्ट पास कर चालू कर दिए गए हैं कि काम अगले साल अंत तक चलते रहेंगे।
अकालियों-कांग्रेसियों की वोट सघनता बढ़ी, punjab election, 2012, delimitation
...चुनाव 2012 परिसीमन
- पटियाला ग्रामीण-सन्नौर कांग्रेस के लिए और समाना-घन्नौर अकालियों के लिए 'सुरक्षितÓ हुई, नाभा आरक्षित तो काका रणदीप बेघर
भूपेश चट्ठा, पटियाला
लोक सभा क्षेत्र व जिले के अंर्तगत आते विधान सभा क्षेत्रों की सीमाओं में हुए बदलाव के बाद राच्य में दो दलों अथवा दो घटकों वाले लोकतंत्र के सिद्धांत को पूरी तरह से बल मिला है। दोनों प्रमुख दलों शिरोमणि अकाली दल और कांग्रेस ने अपनी दो-दो किलों को मजबूती प्रदान कर ली है।
भोगोलिक दृष्टि से चाहे विधान सभा का केंद्र किसी छोर से कितना दूर है इससे परिसीमन में 'बदलावÓ लाने वाले प्रभावशाली नेताओं को तो कोई फर्क नहीं पड़ता लेकिन अपने बंदों अथवा अपनी पार्टी की विचारधारा, बिरादरी के गांवों को एक साथ लाना रहा है। दिलचस्प है कि यह प्रयास जिस किसी ने भी किया उसने विरोधी खेमे को बराबरी का मौका भी उसी वक्त दे दिया।
हालांकि चुनाव आयोग की ओर से लिए गए निर्णय में नाभा सीट के आरक्षित होने से कांग्रेस के विधायक काका रणदीप सिंह अपनी पुश्तैनी सीट से बेघर हो गए हैं।
वहीं दो-दो सीटों पर कंसोलिडेटेड हुए वोटों से पटियाला ग्रामीण और सन्नौर कांग्रेस के लिए और समाना व घन्नौर अकालियों के लिए 'सुरक्षितÓ सीटें बन गई हैं। इनमें राच्य के दूसरे सबसे बड़े क्षेत्र समाना में से पटियाला शहर का मुख्य रूप से त्रिपड़ी क्षेत्र बाहर होने व पटियाला ग्रामीण कांग्रेसियों के लिए आसान सीट बन गया। पुराने डकाला क्षेत्र के कुछ अकाली पक्षीय गांवों का समाना में शामिल होने से अकालियों को राहत मिल गई।
इसी प्रकार पुराने डकाला से अकाली गांव बाहर निकले और नए नाम से बने सन्नौर क्षेत्र में घन्नौर के चंद कांग्रेसी समझे जाने वाले गांव मिला लेने से सन्नौर कांग्रेस बहुल लगने लगा है। ठीक यही वजह है कि घन्नौर में अकालियों की स्थिति मजबूत लगती है। जबकि पटियाला लोक सभा क्षेत्र अधीन आते पुराने बनूड़ को तोड़ कर बनाए डेराबस्सी में भी राजपुरा के पास के अकाली गांव मिलाए गए हैं लेकिन ऐसे ही बहावलपुर बिरादरी के गांव शामिल होने से डेरा बस्सी पर स्पष्ट दांव लगाना अब आसान नहीं है।
सरकारी जमीन पर मंदिर की उम्र तय, बस 15 साल, hindu, temple, gamada,
-ग्माडा ने दो जगहों पर मंदिर बनाने को मांगे प्रार्थना पत्र
- लीज डीड में मंदिर की जमीन 15 साल बाद स्वत: शांतिपूर्ण ढ़ंग से जमीन खाली करने की शर्त, कहा सभी टेक्स भी देने होंगे
भूपेश चट्ठा, पटियाला
सहस्त्र शताब्दियों से चलती आ रही हिंदु सभ्यता और असंख्य आक्रांताओं के हमलों के बावजूद अपना आस्तित्व बचाने में कामयाब रहे हिंदु मंदिरों की 'सरकारी उम्रÓ तय कर दी गई है। कम से कम ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलेपमेंट अथारिटी ग्माडा की ओर से सेक्टर 68 और 70 में बनने वाले दो मंदिरों पर तो यह निश्चित रूप से लागू होने जा रही है। ग्माडा की सरकारी जमीन पर बनने वाले इन मंदिरों की उम्र तय करते हुए बस 15 साल नियत कर दी गई है।
उल्लेखनीय है कि ग्माडा ने सार्वजनिक रूप से एक-एक हजार गज में दो जगहों पर मंदिर बनाने को प्रार्थना पत्र मांगे हैं। हालांकि आवश्यक्ता पडऩे पर इसे दो हजार गज तक बढ़ाया भी जा सकता है। 11 नवंबर से खुली योजना नौ दिसंबर तक लागू रहेगी। जारी किए गए विवरण अनुसार कोई नियमानुसार बनी रजिस्टर्ड सोसायटी अथवा ट्रस्ट जमीन के लिए आवेदन कर सकता है।
लीज डीड में 200 रूपये प्रति गज की दर से नॉन रिफंडेबल धरोहर राशि के अलावा लीज राशि के रूप में 1750 रूपये प्रति गज और प्रार्थना पत्र के साथ 50 हजार रूपये भी जमा करवाने होंगे।
हिंदु वेलफेयर बोर्ड के चेयरमैन रवि कांत मुनि कहते हैं कि लीज डीड में यहां तक जो है उसे तो बर्दाश्त किया जा सकता है। लेकिन मंदिर की जमीन की लीज सिर्फ 15 साल के लिए रखी गई है। अलाटमेंट पत्र जारी होने के 30 दिनों के भीतर निमार्ण शुरु कर तीन साल में बनने वाले मंदिर के लिए रखी गई अगली शर्त में कहा गया है कि ग्माडा के मुख्य प्रशासक लीज खत्म होने से पहले भी तीन महीने का नोटिस दे कर लीज समाप्त कर सकते हैं।
इसके बाद की अगली शर्त में लीज समाप्त होने अथवा रद्द होने की स्थिति में मंदिर की जमीन को अलाटी स्वत: शांतिपूर्ण ढ़ंग से जमीन खाली कर एस्टेट अधिकारी को सौंप देगा।
इतना ही नहीं 30 दिन के भीतर जमीन पर से हटाए गए मंदिर के अवशेष हटाने की शर्त भी जोड़ी गई है। कहा गया है कि सभी तरह के टेक्स जहां मंदिर भरेगा वहीं किसी तरह के मुआवजे का अधिकारी नहीं होगा।
बोर्ड के चेयरमैन कहते हैं कि जो काम गजनी जैसे लोग नहीं कर सके वो ग्माडा कर रही है। हिंदु मंदिर में एक बार प्राण प्रतिष्ठा के बाद मूर्ती स्थापित होने के बाद हिलाई तक नहीं जाती जबकि ये लोग मंदिर ढाहने की ही बात करते है, जो अनुचित है और धर्म के विरुद्ध है। इसके खिलाफ आवाज उठाई जाएगी।
'साबुन वेजीटेरियन है या नॉन वेज बताया जाए'
-हिंदु वेलफेयर बोर्ड पीआईएल दायर करेगा: महंत रविकांत मुनि
उपमुख्य संवाददाता, पटियाला
नहाने व कपड़े धोने के साबुन को वनस्पति आयल से बनाया गया है या इसमें पशुओं की चर्बी का इस्तेमाल किया गया है इस बारे में अभी तक किसी भी साबुन पर नहीं लिखा गया है। हिंदु वेलफेयर बोर्ड ने रविवार को बैठक कर निर्णय लिया है कि बोर्ड उच्च न्यायालय में इस संबंध में पीआईएल दायर करेंगे।
बोर्ड के चेयरमैन महंत रविकांत मुनि ने रविवार को संवाददाताओं को बताया कि पिछले दिनों में अबोहर में पशुओं की चर्बी से भरे गए एक ट्रक के मामले में सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त जानकारी में सामने आया कि साबुन में पशुओं की चर्बी का प्रयोग किया जाना कानूनी रूप से गलत नहीं है। उक्त मामले में वहां की पुलिस ने कुछ नोटिफीकेशन का हवाला भी दिया है। लेकिन कौनसा साबुन वनस्पति तेल से बना है और कौनसा जानवर की चर्बी से बना है इसकी सूचना किसी भी साबुन पर दर्ज नहीं है।
महंत रवि कांत कहते हैं कि जब कोई हिंदु स्नान कर अथवा धुले कपड़े पहन कर पूरी शुद्धता के साथ पूजा अर्चना करने बैठता है तो ये उसके धर्म के विपरीत है। शाकाहारी हिंदु को आप मांस लगे कपड़े में पूजा करने के लिए कह रहे होते हैं। ठीक ऐसे ही आप सोचते हैं कि नहाने से आप साफ सुथरे हो जाएंगे और अपने देवी देवता के लिए अराधना करेंगे तो भी आप पाप के भागीदार हो जाते हैं। वे कहते हैं कि साबुन में कानूनी रूप से यदि चर्बी मिलाना सही है तो उपभोक्ता को यह बताना भी जरूरी होना चाहिए कि साबुन किस चीज से बना है।
अन्नदाता का कटोरा 11 लाख टन खाली रहा,paddy, production,
-पिछले साल का उत्पादन 144 लाख पांच हजार टन था तो इस बार 133 लाख 52 हजार टन रहा
-सूखे में खर्च के साथ बढ़ता है उत्पादन, बेमौसमी रही बारिश: लक्खोवाल
भूपेश चट्ठा, पटियाला
राष्ट्र के चावल उत्पादन में आधे से अधिक का योगदान दे अन्नदाता का तगमा 60 के दशक में हासिल करने वाले पंजाब का कटोरा इस साल 11 लाख टन खाली रह गया है। राच्य में हुई सरकारी व निजी खरीद पिछले साल की तुलना में सात फीसदी कम रही है।
पंजाब मंडी बोर्ड के आंकड़े बताते हैं कि दो महीने चले धान के खरीद सीजन के बाद आए कुल खरीद के आंकड़ों से हर किसी को निराशा हाथ लगनी तय है। राच्य को जहां टेक्स का नुकसान हुआ तो किसान की उपज कम रही और सीधी आर्थिक हानि हुई तो आढ़ती को कमीशन कम मिला, कुछ ऐसा ही हाल शैलर मालिकों का रहेगा लेकिन सबसे बड़ी क्षति देश में उस आम आदमी की होगी जिसे अच्छे मानसून के बावजूद उत्पादन गिरने से सस्ता धान अथवा चावल नहीं मिलेगा।
राच्य में हुई खरीद के आंकड़े भी उल्ट कहानी बताते हैं। केंद्र की इकलौती खरीद एजेंसी फूड कारपोरेशन आफ इंडिया ने पिछले साल 5.14 लाख टन धान की खरीद की थी तो इस साल यह घट कर 1.87 लाख टन रह गई। इसके साथ ही राच्य में एफसीआई का खरीद हिस्सा चार फीसदी से कम हो 1.6 रह गया है।
जबकि निजी क्षेत्र अथवा राइस शैलर्स मिलर्स की खरीद 1.82 लाख टन से बढ़ कर 4.35 लाख टन पर आ गई। ऐसे में हिस्सा 3.7 फीसदी पर आ गया है।
मंडी बोर्ड के चेयरमैन अजमेर सिंह लक्खोवाल कहते हैं कि सात फीसदी उत्पादन कम रहा है और पूरे पंजाब में लगभग समान रूप से गिरावट दर्ज हुई है। बेमौसमी बारिश को जिम्मेदार ठहराते हुए वे कहते हैं कि दाना पडऩे के दिनों में हुई बारिश से झाड़ गिरा है। इसके अलावा वे देसी नुक्ता बता वे कहते हैं कि दाना पडऩे के दिनों में यदि पूर्व से हवा चल जाए तो उपज कम रहती है जबकि पश्चिमी हवाओं से उपज बढ़ती है। तीसरे प्रमुख कारण में सूखा व बारिश के दिनों का अंतर है सूखे में खर्च के साथ उत्पादन बढ़ता है जबकि बारिश च्यादा होने पर उपज कम रह जाती है। राच्य में उत्पादन के सवाल पर वे कहते पिछले साल का उत्पादन 144 लाख पांच हजार टन था तो इस बार 133 लाख 52 हजार टन रहा है।
विकास से शुरु हुआ चुनाव डेरे पर अटका,punjab election, 2012, samana, patiala, rural
विधान सभा क्षेत्र-पटियाला ग्रामीण-समाना
भूपेश चट्ठा, पटियाला
2007 में हुए विधान सभा चुनावों में समाना विधान सभा क्षेत्र अब बंट कर समाना के अलावा पटियाला ग्रामीण विधान सभा क्षेत्र भी हो गई है। इसमें चुनाव प्रचार की शुरुआत किसी आम चुनाव की तरह 'विकास के मुद्देÓ से ही हुई लेकिन चुनाव के शिखर तक पहुंचने तक तत्कालीन समाना विधान सभा क्षेत्र का हिस्सा रहे और नए बने व इस बार पहली बार आस्तित्व में आए पटियाला ग्रामीण विधान सभा क्षेत्र ने राच्य स्तर के सबसे प्रमुख मुद्दे 'डेरा सच्चा सौदा के प्रेमियों से समर्थन व विरोधÓ की शुरुआत हो गई।
दिलचस्प है कि क्षेत्र के लोग दुकानदारों की ओर से अपनी हद से बाहर जा कर किए गए नाजायज कब्जों से परेशान हैं तो दुकानदार क्षेत्र में मूलभूत सुविधाओं की कमी से खिन्न हैं। आम राय है कि त्रिपड़ी मैन बाजार की सड़क दुरुस्त होने के बावजूद हालात नहीं बदले हैं। त्रिपड़ी में आधे अधूरे मन से अस्पताल चालू हुआ जबकि समाना में ब्यूटिफीकेशन कुछ क्षेत्रों में हुआ है। इसी प्रकार सिवरेज सिस्टम दुरुस्त करने लाया गया प्रोजेक्ट भी अभी पूरी तरह से सिरे नहीं चढ़ा है। पटियाला ग्रामीण क्षेत्र में आज भी कई क्षेत्र हैं जहां पानी का बिल आता है पर नल में पानी नहीं आता।
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फोटो भेजी जाएगी
विपक्ष में रहते हाथ बंधे: विधायक ब्रहम महिंदरा
सरकार ही इन लोगों की है हम भला क्या कर सकते थे? लेकिन हर व्यक्ति के दुख दर्द में उन्होंने साथ दिया है। कांग्रेस से विधायक ब्रहम महिंदरा कहते हैं कि यह सवाल ही उनके लिए बेमानी है। वे विपक्ष में रहे हैं। यह सवाल सत्ता पक्ष के लिए है। हालांकि मुद्दे की बात पर वे यह भी स्पष्ट करते हैं निसंदेह पार्टी के मैनीफेस्टो पर चुनाव लड़ा गया है।
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फोटो भेजी जाएगी
विकास के नाम पर लड़े और करवाया: रखड़ा
शिरोमणि अकाली दल-भारतीय जनता पार्टी गठबंधन से चुनाव लड़े सुरजीत सिंह रखड़ा कहते हैं कि वे विकास का मुद्दा लेकर ही चुनाव में उतरे थे, क्योंकि इससे पहले के पांच सालों में कांग्रेस ने बिलकुल भी धन राशि जारी नहीं की, जिसके चलते क्षेत्र पिछड़ा रहा अब हालांकि वे विधायक नहीं हैं लेकिन पार्टी के प्रभारी होने व जिला योजना बोर्ड का चेयरमैन होने के नाते समाना में सड़क से सीवरेज तक बिलडिंग से ब्यूटीफिकेशन के अलावा एक आईटीआई, लड़कियों का कालेज, चार ग्रिड, दो पुल, प्रदेश का पहला वाटर ट्रीटमेंट प्लांट, समाना में पूरा सीवरेज इसके अलावा गांवों के विकास के अनगिनत मुद्दे हैं।
क्या नहीं हुआ
-डीएमडब्ल्यू के पास फलाई ओवर की मांग नहीं हुई पूरी,
-समाना शहर से रेलवे लिंक का सपना पूरा नहीं
-दुख निवारण साहिब के पास एलिवेटिड रोड बना ट्रैफिक समस्या का हल
-छोटी नदी को दुरुस्त किया जाना
Friday, 2 December 2011
'खुशहाल' मौसम की पड़ी मार, धान का उत्पादन गिरा, paddy, weather, yield,
-आम धान का उत्पादन तीन फीसदी तो बासमती का छह फीसदी गिरा
-अच्छे फेवरेवल मौसम में पौधा हरियाली का आंनद लेने लगता है पीढ़ी बचाने, री-प्रोडेक्शन के बारे में तनाव में ही सोचा जाता है: कृषि वैज्ञानिक
भूपेश चट्ठा, पटियाला
फसलों पर मौसम की मार के बारे में ज्यादातर बातें अकाल अथवा सूखे के बाद बाढ़ व ओलावृष्टि की ही पड़ती है लेकिन इस साल आदर्श रहे 'खुशहालÓ मौसम की मार धान के उत्पादन पर पड़ी है। जिससे प्रदेश में धान की उपज गिरी है। मानसून के दिनों और इसके अंत तक रहे अच्छे रहे मौसम के चलते आम धान का उत्पादन तीन फीसदी और बासमती व इसके जैसी किस्मों का उत्पादन छह फीसदी गिर गया है।
पंजाब कृषि विभाग के वैज्ञानिक व कृषि विकास अधिकारी डा. एएस मान उपज के इस सिद्यांत पर बताते हैं कि अच्छे फेवरेवल मौसम में किसी भी फसल का वेजीटेशन फेज बढ़ जाता है, पौधे ज्यादा हरे भरे हो जाते हैं, फैलते भी हैं, फूलते भी हैं पर फलते नहीं हैं। पौधा हरियाली का आंनद लेने लगता है। उसे किसी अन्य बात की फिक्र नहीं रहती, और वो बीज बनाने की ओर ध्यान ही नहीं देता। ऐसे में अपनी अगली पीढ़ी प्रति चिंता मुक्त पौधा उपज नहीं दे पाता।
डा. मान आगे बताते हैं कि यदि मौसम थोड़ा प्रतिकूल होता है तो पौधे तनाव में रहते हैं और वे अपनी नस्ल बचाने की कवायद में रहते हैं। सारा जोर री-प्रोडेक्शन करने में लगा देते हैं। अपना जीवन कम जान कर वे बीज बनाने लग जाते है। जिससे दाने ज्यादा बनते हैं।
दिलचस्प है कि प्रदेश मंडी बोर्ड के आंकड़े भी इसी के समर्थन में बोलते हैं। और पिछले साल की तुलना में उपज में आई गिरावट की कहानी दोहराते हैं।
उधर अपनी थ्योरी के पक्ष में उदाहरण दे डा. मान कहते हैं कि पीढ़ी बचाने के बारे में अक्सर इंसान व पशु भी तनाव में ही ज्यादा सोचता है।
साथ ही वे तर्क देते हैं कि जब कभी हम सुनते हैं कि अमुक फसल में खाद भी खूब डाली थी पर झाड़ कम रह गया इसका भी यही कारण होता है कि पौधे अथवा पेड़ न अपना आनंद तो लेते हैं पर फल कम उतरता है।
कृषि वैज्ञानिक मानते हैं कि इस बार के हालत भी कुछ ऐसे ही रहे, जब भी जरूरत हुई अंतराल पर बारिश होती रही, धूप भी खिलती रही, ना ही किसी बीमारी ने बड़ा हमला ही किया। फिर भी उत्पादन कम रहा। पिछले सालों का उदाहरण भी वे सामने रखते हैं। याद दिलाते हैं कि जब कभी अकाल की आशंका हुई या सूखे की मार पड़ी तो उपज बढ़ी है। हालांकि उन दिनों में कृषि लागत मुल्य बढ़ा और भूमिगत जल स्तर को जरूर नुकसान भी हुआ है।
धान की आम किस्मों का उत्पादन जहां पटियाला में बीते साल 12 लाख, 2768 टन की तुलना में 11 लाख 67 हजार, 688 टन रहा वहीं बासमती का उत्पादन एक लाख, 1102 टन से कम हो कर 95 हजार, 258 टन रह गया है।
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