Friday, 25 January 2013
पहले मानसून ने रुलाया, अब बर्फ का सूखा
-नहीं हुई सीजन के शुरु में अच्छी बर्फबारी, पावरकाम चिंतित
भूपेश चट्ठा, पटियाला
पहाड़ों पर बर्फबारी नवंबर में शुरु हो जाए और सर्दी लगातार रहे तो सोने पर सुहागा कहा जाता है, दिसंबर में भी बर्फ लगातार बर्फ गिरे तो यह जमी रहती है, लेकिन इस साल पहाड़ों पर बर्फबारी का सीजन चंद दिनों को छोड़ कर 'सूखाÓ ही रहा है। वो भी तब जब मानसून का सीजन पिछले साल ही रुला गया था। ऐसे में आने वाली गर्मियों में उत्तर भारत खास तौर से पंजाब के लिए पन बिजली उत्पादन के मंदा रहने के आसार बढ़ गए हैं।
पहाड़ों पर होने वाली बर्फबारी पर नजर रखने वाले पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड के अधिकारी बताते हैं कि पंजाब की नदियों को साल भर विशेष रूप से गर्मियों में पानी देने वाले पहाड़ों पर ना केवल देरी से बर्फबारी का सीजन शुरु हुआ बल्कि अब तक खासा कम भी रहा है। शुरुआती सर्दियों में हुई बर्फबारी गर्मियों में पिघलना शुरु कर पंजाब की नदियों में पानी उड़ेलती है। जबकि 13-14 जनवरी के बाद देरी से होने वाली बर्फ बारी जल्द पिघल जाती है, जिससे बांधों में पानी की आवक पर असर पड़ता है और 15 अप्रैल के बाद शुरु होने वाला बांधों का भराव सीजन ठंडा रहता है। इससे पंजाब के पन बिजली उत्पादन पर असर पड़ता है।
इसी संबंध में पावरकाम के प्रवक्ता कहते हैं कि हाल ही में तेज पड़ी ठंड से उम्मीद जरूर बंधी है। फिर प्राकृति के आगे तो अरदास ही की जा सकती है। अभी सीजन काफी है संभव है कि देर से शुरु हुई सर्दी देर तक जारी रहे। ऐसे में पहाड़ों पर बर्फ भी पड़े, जिससे बांधों में पानी की आवक अच्छी बनी रहे। भाखड़ा बांध के जल स्तर पर वे स्वीकार करते हैं कि जल स्तर गिरने की रफ्तार अब करीब करीब पौना फीट हर रोज की रफ्तार से नीचे आ रहा है। लेकिन पानी छोड़े जाने और पन बिजली उत्पादन का क्रम अभी बदस्तूर जारी है। फिलहाल किसी प्रकार की कटौती नहीं की गई है।
पावरकाम का कहना है कि बीते साल खराब मानसून का झटका केवल इस वजह से सहा गया क्योंकि साल 2011 में बांधों में पानी लबालब भरा गया था। यहां तक कि गेट खोल कर पानी छोडऩा पड़ा था पर अब हालात पहले जैसे नहीं है। साथ ही वे यह भी स्पष्ट करते हैं कि बांधों के पानी पर उनका नियंत्रण नहीं है, यह सिंचाई विभाग के अधीन है। पावरकाम केवल छोड़े जाने वाले पानी से बिजली बनाता है।
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बांधों के जल स्तर 17 जनवरी को
भाखड़ा-
2013 में 1612 फीट, 2012 में 1637 फीट
डेहर-
2013 में 2925 फीट, 2012 में 2924 फीट
पौंग-
2013 में 1341 फीट, 2012 में 1352 फीट
रणजीत सागर-
2013 में 512 मीटर, 2012 में 507 मीटर
दो दर्जन होंगे सम्मानित, पर प्रशासन ने नाम रखे गुप्त
-ढ़ाई सौ आवेदनों में से हुआ चयन
-प्रोटोकाल अनुसार एक दिन पहले होने वाली रिहर्सल में राष्ट्रीय पर्व पर सम्मानित होने वालों को भी शामिल किया जाना होता है
भूपेश चट्ठा, पटियाला
गणतंत्र दिवस पर वाईपीएस मैदान में आयोजित होने वाले जिला स्तरीय कार्यक्रम में जिले भर से सम्मानित किए जाने वाले लगभग दो दर्जन विशिष्ट व्यक्तियों के नाम जिला प्रशासन ने पूर्व संध्या तक जारी नहीं किए है। हालांकि पहले बताया गया था कि ठीक एक दिन पहले दोपहर 12 बजे तक सूची जारी कर दी जाएगी।
वहीं प्रशासन के आधिकारिक सूत्र बताते हैं कि जिन 'बंदोंÓ को सम्मानित किया जाना है उन्हें भी पूरी बात 'समझाÓ कर अवगत करवा दिया है कि वे गणतंत्र दिवस पर स्टेडियम में अपने नाते रिश्तेदारों व मित्रों के लाव लश्कर के साथ आ जाएं। इतना ही नहीं 'थोक के भावÓ इन लोगों को वीआईपी कार्ड भी जारी किए गए हैं।
जिला प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम ना प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि प्रशासन के पास ढ़ाई सौ से ज्यादा आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें शिक्षक से किसान तक और समाज सेवक से डाक्टर, खिलाड़ी, विद्यार्थी वर्ग में पुरुष व महिला सभी शामिल हैं। सूत्र बताते हैं कि चयन प्रक्रिया में योग्यता के अलावा भी 'काफी कुछÓ देखा जाता है। इसमें पत्र के साथ लगाए गए अनुशंसा पत्रों के साथ कई तरह की मौखिक फोन काल के हवाले भी दिए जाते हैं। ऐसे में किसी के बंदे का नाम घोषित कर देना और किसी के बंदे का छोड़ देना आसान काम नहीं है। अंतिम समय तक बदलाव की संभावना बनी रहती है। अगर सूची प्रकाशित हो जाए तो ऐसे राष्ट्रीय कार्यक्रम से पहले कई लोगों की 'आजादीÓ छिन सकती है। संभव है कि एक सूची के स्थान पर दूसरी ही ना जारी करनी पड़ जाए। हालांकि प्रोटोकाल अनुसार एक दिन पहले होने वाली रिहर्सल में राष्ट्रीय पर्व पर सम्मानित होने वालों को भी शामिल किया जाना होता है। जिससे किसी प्रकार की गफलत ना हो।
अधिकारी कहते हैं कि अगर बात केवल योग्यता की हो और आम जनता को जज व प्रणाली पर यकीन हो तो इसमें कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन मामला तो यहां पर अटक जाता है जब हम किसी राष्ट्रीय पर्व को सत्ताधारी दल के साथ ही जोड़ देते हैं। अकाली सत्ता में उपर हैं तो भाजपाई भी पूरे नहीं आते कांग्रेसियों या कामरेडों की बात तो छोड़ ही दें। कांग्रेस सत्ता में है तो आप मेहमानों की सफेद के साथ रंग बिरंगी पगडिय़ां देख कर ही अंदाजा लगा लेंगे कि पावर कहां है लेकिन तब नीली-पीली कम ही दिखाई देगी। वहीं कार्यक्रम के आयोजक व जिला लोक संपर्क अधिकारी ईश्विंदर सिंह ग्रेवाल इस संबंध में किसी प्रकार की टिप्पणी करने से इन्कार करते हैं और कहते हैं कि सूची बन गई है और जल्द जारी होगी। संबंधित लोगों को अवगत करवा दिया गया है।
मीटर बाहर निकाले तो मांग में आठ फीसद कमी आई
इंटरव्यू : पटियाला के सुपरिटेंडिंग इंजीनियर (आपरेशन) इंजी. बलबीर सिंह सिद्धू
- 2200 किमी लंबी तारें बिछाई, 72 नए ट्रांसफार्मर लगाए
- ट्रांसमिशन एंड डिस्ट्रीब्यूशन लासेज 20 फीसद से कम होकर 12 फीसद हुए
उपमुख्य संवाददाता, पटियाला
एक ओर बिजली की मांग में लगातार दस फीसद सालाना की रफ्तार की दर से बढ़ोतरी हो रही है लेकिन पिछले एक साल में पटियाला शहर राच्य का ऐसा पहला शहर बन गया है जहां बिजली की मांग में कमी दर्ज की गई है वो भी नए कनेक्शन जारी करने के बावजूद। पटियाला के सुपरिटेंडिंग इंजी. बलबीर सिंह सिद्धू बताते हैं कि शहर में घरों के भीतर लगे बिजली मीटरों को बाहर निकालने से बिजली की मांग में आठ फीसद की कमी आई है।
वे बताते हैं कि साधारणतया दिन प्रति दिन बिजली की मांग बढऩे से ग्रिड में बिजली की मांग बढऩी चाहिए पर पटियाला में पिछले एक साल के दौरान 12 हजार नए कनेक्शन जारी किए गए और शहर में 35 हजार 851 किलोवाट का नया लोड भी सिस्टम में जुड़ा है। इंजी. सिद्धू कहते हैं कि शहर के 80 हजार बिजली मीटर अब या तो खंबे पर लगे हैं या पिलर बाक्स में। इसके बाद बिजली चोरी में भारी कमी दर्ज की गई है। शहर में ट्रांसमिशन एंड डिस्ट्रीब्यूशन लासेज 20 फीसद से कम होकर 12 फीसद रह गया है। इतना ही नहीं पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड को शहर से मिलने वाले राजस्व में 12 फीसद की बढ़ोतरी हुई है। चोरी रुकने से 23 फीसद च्यादा यूनिट कुल खपत में जुड़े हैं।
शहर में बिजली व्यवस्था को सुधारने में किए गए कार्यो पर वे कहते हैं कि एक साल के दौरान 30-40 सालों से चली आ रही पुरानी व कमजोर हो चुकी बिजली की तारों को बदला गया है। 11 केवीए व 400 वोल्ट की 2200 किमी लंबी तारें बिछाई गई हैं, जिससे बिजली के फाल्ट नाममात्र के रह गए हैं। शहर में 64 ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाई गई है जबकि 72 नए ट्रांसफार्मर लगाए गए हैं। इसके बाद शहर में कोई भी ट्रांसफार्मर ओवर लोड नहीं है। ये 70 फीसद लोड पर चल रहे हैं। हालांकि इस सबका श्रेय वे चार तकनीकि एसडीओ, दो कामर्शियल एसडीओ के साथ जूनियर इंजीनियरों की टीम को देते हैं और चालू वर्ष में टी एंड डी लासेज और कम करने पर जोर देने जा रहे हैं। वे कहते हैं कि बिजली की चोरी ही हर समस्या की जड़ है।
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पटियाला माडल की जानकारी ली दिल्ली, हरियाणा ने
बिजली चोरी रोक कर मांग में कमी लाने वाले पटियाला माडल व यहां पर हुए कार्य की लोकप्रियता दिल्ली व हरियाणा में भी पहुंच चुकी है। दोनों राच्यों ने यहां केसीनियर इंजीनियरों से डाटा लिया है और वे तरीके भी पूछे हैं जिन्हें अपना कर हरियाणा में टी एंड डी लासेज कम कर बेहतर सप्लाई दी जा सके। याद रहे कि शहर में 54 फीडरों में 11 केवीए की तारें मोटी डाली गई हैं। कई बार पूरे एक सप्ताह तक कोई ट्रिपिंग नहीं होती। ऐसे ही मीटर बाहर कर पीवीसी तारें बदले जाने से शिकायतों में कमी आई है।
प्रस्तुति: भूपेश चट्ठा
बुरे बर्ताव के चलते अध्यापिका का तबादला
पहले भी इसी स्कूल में दो अध्यापिकाएं भिड़ी थी, एक सस्पेंड, तबादला भी हुआ
उपमुख्य संवाददाता, पटियाला
बुरे बर्ताव के चलते गांव रसूलपुर जोड़ां के सरकारी प्राइमरी स्कूल में तैनात एक अध्यापिका का तबादला जिला शिक्षा अधिकारी प्राइमरी ने गांव मैण गांव में कर दिया है। प्राप्त जानकारी अनुसार डीईओ प्राइमरी ने कारगुजारी को आधार बनाते हुए नीलम रानी का तबादला किया है। डिप्टी डीईओ की ओर से पेश की गई रिपोर्ट के बाद ये आदेश जारी किए गए हैं।
डीईओ हरविंदर कौर ने बताया कि नीलम रानी की लंबे समय से शिकायतें मिल रही थी। इसलिए मामले की जांच डिप्टी डीईओ जसविंदर कौर को जांच करने के कलए कहा गया था।
उल्लेखनीय है कि इसही सरकारी एलीमेंटरी स्कूल रसूलपुर में पहले हुई एक घटना में दो अध्यापिकाएं आपस में उलझ गई। बात यहां तक पहुंची की हाथापाई की नौबत आ गई। एक अध्यापिका ने दूसरी को स्कूल प्रांगण में ही पीट डाला। हालांकि इसके बाद तेजी से बदले घटना क्रम में कथित रूप से मारपीट करने वाली अध्यापिका मधु कथूरिया को ना केवल सस्पेंड कर दिया गया अपितु तबादला भी कर दिया गया है। उन्हें गुरुदासपुर जिले फतेहगढ़ चूडिय़ां ब्लाक के सरकारी प्राइमरी स्कूल चितौडग़ढ़ में तबदील कर दिया गया था।
तब एक ही दिन में हुई थी कार्रवाई
स्कूल की दोनों अध्यापिकाओं में काफी समय से विवाद चल रहा था। कहा सुनी झगड़े में बदल गई। इसके बाद पिटने वाली अध्यापिका ने सीधे चंडीगढ़ का रुख किया और सारी स्थिति डायरेक्टर जनरल स्कूल शिक्षा पंजाब के सामने रखी। निदेशालय की ओर से भी तुरंत ही जिला शिक्षा अधिकारी को इस मामले की जांच कर रिपोर्ट करने को कहा गया। डीईओ की ओर से की गई रिपोर्ट के बाद देर सांय निदेशालय ने आदेश जारी कर दिए।
क्या थे आरोप?
निदेशालय की ओर से जारी किए गए निलंबन आदेश में आरोप है कि मधू कथूरिया ने अपनी सहकर्मी नीलम रानी के साथ डयूटी दौरान धक्का मुक्की की। मधू कथूरिया की ओर से मिड डे मील का हिसाब किताब व रिकार्ड नीलम को नहीं सौंपा गया। जिसके परिणाम स्वरूप मिड डे मील चलाने में खासी दिक्कत आई। यहां तक की जेब से पैसे खर्च करने पड़े, ना ही मांगने पर राशि दी। स्कूल प्रबंधन की उपस्थिति में अमानवीय व्यवहार किया गया। शारीरिक व मानसिक कष्ट दिया गया। स्कूल के बच्चों के सामने धक्का मार कर गिराया गया।
पहले भी डयूटी में कौताही पर हुई कार्रवाई
जिला शिक्षा अधिकारी की रिपोर्ट में कहा गया है कि डयूटी दौरान मधु कथूरिया की ओर से गंभीर अनुशासनहीनता का व्यवहार किया गया है। इससे पहले भी उनकी बदली डयूटी दौरान कोताही बरतने पर प्रबंधकीय आधार पर की गई थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि सारी घटना स्कूल प्रबंधन व विद्यार्थियों के सामने हुई। जिसकी पुष्टि सरपंच, कमेटी व कई प्रतिष्ठित व्यक्तियों की है।
Thursday, 17 January 2013
खेती में खपत पर खर्च च्यादा, उपज कम
भूपेश चट्ठा, पटियाला
गेहूं के दामों में किसानों के लिए बढ़ोतरी हो या ना हो, या फिर मात्र 65 पैसे प्रति किलो तक ही रह जाए। ऐसे ही धान के दाम 50-60 पैसे प्रति किलो की दर उसे बढ़ जाए लेकिन आटे व चावल के दामों में बढ़ोतरी सिर्फ और सिर्फ रूपये में ही हो रही है। ऐसे में गरीब आदमी को अन्न सस्ता नहीं मिलता और किसान को दाम नहीं मिल पाते। वहीं खेती पर खपत भी लगातार बढ़ रही है। लेकिन उपज के दाम उसी अनुपात में नहीं बढ़े हैं।
गेहूं के एमएसपी में मात्र 65 रूपये की बढ़ोतरी होने से परेशान किसानों की मांग है कि केंद्र सरकार गेहूं का एमएसपी भारतीय किसान आयोग के पूर्व चेयरमैन एमएस स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिशों अनुसार दो हजार रूपये प्रति क्विंटल से ज्यादा तय करे। डीएपी खाद, यूरीया, बीजों के दाम, बहाई बिजाई का खर्च, नदीननाशक व कीड़ेमार दवाओं के साथ मजदूरी व जमीन का ठेका लगातार बढ़ा है। जबकि एमएसपी उस अनुपात में नहीं बढ़ाया गया।
किसान का कुल खर्च- दस हजार रूपये प्रति एकड़ से ज्यादा
दस एकड़ जमीन का ठेका- 35 हजार प्रति एकड़ सालाना से रबी की फसल गेहूं पर 1.75 लाख रूपये
किसान की मजदूरी-पांच सौ रूपये प्रतिदिन अनुसार छह महीने के 90 हजार रूपये
बहाई-बिजाई-दो हजार प्रति एकड़, 20 हजार रूपये
बीज-एक हजार प्रति एकड़, 10 हजार रूपये
डीएपी खाद- 15 सौ प्रति एकड़, 15 हजार रूपये
कीटनाशक, नदीननाशक व अन्य दवाएं-एक हजार प्रति एकड़, 10 हजार रूपये
यूरिया-एक हजार प्रति एकड़, 10 हजार रूपये
कटाई - एक हजार प्रति एकड़, 10 हजार रूपये
मंडी तक ले जाने का खर्च-आठ सौ रूपये
टयूबवेल का बोर, मोटर, मशीनरी की टूट फूट-एक हजार प्रति एकड़, 10 हजार रूपये
रखरखाव व अन्य खर्च- सात सौ प्रति एकड़, 7 हजार रूपये
गेहूं पर मेहनत व खर्च 1921 रूपये प्रति क्विंटल
राज्य में गेहूं का औसत उत्पादन 19 क्विंटल प्रति एकड़ है। ऐसे में दस एकड़ पर फसल से कमाई 1285 रूपये प्रति क्विंटल के हिसाब से दो लाख 44 हजार 150 रूपये हुई जबकि खर्च तीन लाख 65 हजार रूपये हो गया। ऐसे में एक लाख 11 हजार 850 रूपये का घाटा होना तय है। गेहूं पर किसान की मेहनत व खर्च 1921 रूपये प्रति क्विंटल बैठती है। भारतीय किसान यूनियन एकता डकौंदा के डा. दर्शन पाल बताते हैं कि यह औसत दस एकड़ जमीन के टुकड़े पर आती है जबकि खेत छोटा होने की स्थिति में यह खर्च बढ़ता जाता है। इस औसत में 25 या 50 फीसद मुनाफा जोड़ा जाए तो न्यूनतम समर्थन मुल्य 2130 रूपये या 2500 हजार रूपये प्रति क्विंटल हो जाता है।
क्या सोचता है किसान
वकालत छोड़ किसान बने परविंदर सिंह ढिल्लों कहते हैं कि मंडी में किसान की फसल से जुड़े लोग जिसमें आढ़ती, शैलर मालिक, अनाज के व्यापारी, फूड एजेंसियों के अधिकारी व इंस्पेक्टर, रसायनिक खाद व दवा बनाने वाली कंपनियां, कृषि मशीनरी बनाने वाली फैक्ट्रियां और वर्कशाप के मालिक करोड़पति से अरबपति होते जा रहे हैं। जबकि किसान कर्ज से पीडि़त हो खुदकुशी करने को मजबूर होता है।
Thursday, 10 January 2013
पंजाबी किसान को पानी में नहीं रही दिलचस्पी!
-परीक्षण को मंत्री के गांव में लगे कैंप के दो दिनों में पांच सौ में से मात्र 71 ने करवाई जांच
भूपेश चट्ठा, पटियाला
पंजाबी किसानों का खून पानी के नाम पर उबलता रहा है। पड़ोसी राज्यों व केंद्र के खिलाफ मोर्चे लगाने वाले किसान को अब अपने ही पानी में दिलचस्पी नहीं रही है। कृषि विभाग के कार्यालय में बनी प्रयोगशाला में आकर अपने पानी की जांच करवाने में शायद किसान को पैसा व समय व्यर्थ जाता हो लेकिन अगर किसान के गांव में जाकर कैंप लगा कर पानी की मुफ्त जांच की जाए तो भी किसान को खासी दिलचस्पी नहीं रहती।
किस टयूबवेल का पानी कैसा है? कितनी और कौनसी खाद डलेगी? फसल उगाए या मछली पाले जैसी बेहद अहम जानकारी घर बैठे ही किसान को उपलब्ध करवाने वाली राज्य सरकार की महत्वकांक्षी योजना में ग्रामीण विकास एंव पंचायती राज मंत्री सुरजीत सिंह रखड़ा के गांव में ही लगाए गए पहले कैंप में सिर्फ 71 किसानों ने दिलचस्पी दिखाई, जबकि गांव में पांच सौ से च्यादा टयूब्वेल हैं और कृषि विभाग का स्टाफ दो दिनों तक डेरा जमाए बैठा रहा।
हालांकि योजना के सवाल पर पंचायती राज व ग्रामीण विकास के अधिकारी कहते हैं कि यह वाटर सप्लाई एंव सेनिटेशन विभाग की योजना है। जहां से राशि लेकर कृषि विभाग की आत्मा योजना के पास शिफ्ट की गई है। वही इसे सिरे चढ़ा रहे हैं। जबकि वाटर सप्लाई एंव सेनिटेशन विभाग के एक एक्सीयन कहते हैं कि राज्य सरकार के आदेश पर भूमिगत जल में हैवी मटैल जांचे जा रहे हैं। पानी की जांच को लगभग 25 से 30 पैरामीटर का प्रयोग किया जाता है। हैवी मैटल ज्यादा होने पर आरओ लगाने की सिफारिश की जाती है। हालांकि फसलों की सिफारिश करने के सवाल पर वे कहते हैं कि ये काम उनका नहीं है। कृषि विभाग करवा रहा है।
डिप्टी डायरेक्टर बीज रह चुके मुख्य कृषि अधिकारी डा. बीएस सोहल बताते हैं कि खेती जिस स्तर पर पहुंच गई है वहां से इसे लाभदायक बनाने के लिए या तो हमे शोध कर लागत कम करनी होगी या फिर उपज के उत्पादन के स्तर को बनाया रखना होगा। फसल व खाद का चयन पानी के आधार पर होगा। योजना के तहत अब गांव में ही जाकर किया जाएगा। पहले प्रयोगशाला में किसान आकर परीक्षण करवाता था अब उसके घर पर जा कर किया जा रहा है।
पंजाब में खेती को जिंदा रखना है: रखड़ा
पंजाब की कृषि को ना केवल जिंदा रखना है अपितु उसे लाभदायक भी बनाना है। किसानों को पेश आ रही मुश्किलों को हल करने के लिए राज्य की प्रकाश सिंह बादल की सरकार किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत कर रही है, जिससे ना तो केंद्र पर निर्भर रहना पड़े और ना ही कोई अन्य प्रकार का समझौता करना पड़े। टयूबवेलों का पानी जांच कर मौके पर ही किसानों को रिपोर्ट दी जाएगी। इसके अलावा इन रिपोर्ट का निरीक्षण करने के बाद केंद्रीय कृषि शोध संस्थान व कृषि यूनिवर्सिटी लुधियाना को भेजा जाएगा। इसके बाद अगला प्रोजेक्ट तैयार किया जाएगा।
क्या है योजना?
पानी की जांच के दौरान इसके अंदर मौजूद इलेक्टो इंडक्टिविटी, ईसी और नमकीन पदार्थों मुख्य रूप से सोडियम से संबंधित तत्वों की जांच की जा रही है। पानी के अनुसार ही किसान को बताया जाता है कि खेत में जिप्सम की जांच की जरूरत है या हरी खाद की। पानी की ईसी ज्यादा होने की स्थिति में किसान को भूमिगत जल के साथ नहरी पानी मिलाने को कहा जाता है। इसके पूरी तरह से अनफिट होने पर किसान को खेती छोड़ मछली पालने तक की सलाह भी दी जा सकती है। हालांकि ऐसी सलाह अभी कम से कम अभी तक नहीं दी गई है।
Friday, 4 January 2013
ना जले पराली; बिक जाए या खेत में मिल जाए
उम्मीद-2013 पर्यावरण संरक्षण
ना जले पराली; बिक जाए या खेत में मिल जाए
भूपेश चट्ठा, पटियाला
हर क्षेत्र के अपने गुण अवगुण होते हैं उत्तर भारत के दूसरे सबसे कम प्रदूषण वाले शहर पटियाला में भी पर्यावरण संबंधी समस्याएं हैं। लेकिन प्रमुख रूप से ये खेत खलिहान व ट्रैफिक के आसपास ही घूमती है। 2012 में पराली को जलने से पूरी तरह से रोका नहीं जा सका है लेकिन 2013 में यह उम्मीद अवश्य है कि पराली या तो बिक जाए नहीं तो खेत में ही मिल जाए।
जिले में बायो मास आधारित किसी नए बिजली उत्पादन करने वाले प्लांट के चालू होने की संभावना नहीं है, ऐसे में पराली को खेत में ही मिलाने पर च्यादा जोर रहेगा। शहर में इंडस्ट्री का नाममात्र होना इसे अन्य शहरों से अलग करता है। साल भर चाहे आटो रिक्शा का धुंआ लोगों को तंग करे लेकिन असली परीक्षा सितंबर अंत में शुरु हो कर अक्टूबर तक जारी रहती है जब जिले के ढ़ाई लाख हैक्टेयर से च्यादा रकबे पर लगी धान की फसल की पराली जलने लगती है।
2012 के अक्टूबर में जिला गैस चैंबर बना था, हालांकि 2011 की तुलना में हालात कुछ बेहतर थे, लेकिन 2014 में होने वाले लोक सभा चुनावों को देखते हुए कम ही उम्मीद है कि पराली को जलाने से रोकने वाला कानून कड़ाई से इस साल लागू हो पाएगा। फिर भी उम्मीद की जा सकती है कि किसान खुद जागरुक होगा और खेती करने का तरीका बदल कर पर्यावरण को कम नुकसान पहुंचाएगा।
हैप्पी सीडरों की संख्या बढ़ेगी
मुख्य कृषि अधिकारी डा. बीएस सोहल बताते हैं कि पराली को जलाने से पूरी तरह से मुक्ति देने वाले हैप्पीसीडर की संख्या डेढ़ दर्जन हो पाई है। उम्मीद की जा सकती है कि ये अगले साल गेहूं की बिजाई तक दो गुनी हो जाएगी इससे बड़े क्षेत्र में धान की पराली बिना जलाए किसान को बेहतर विकल्प मिल सकेगा।
मिलचिंग से है फायदा बताया किसानों को
नाभा-भवानी गढ़ रोड पर माझी गांव में खेती करते 50 वर्षीय जरनैल सिंह यों तो पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ से जियोग्राफी में एमए हैं लेकिन उन्होंने कृषि का खानदानी पेशा अपनाया और उसे किया भी परंपरागत ढ़ंग से, इससे पहले खुद लाभ लिया और अब औरों के बीच प्रसारित कर रहे हैं। खेती विरासत मिशन के महासचिव के रूप में कार्य करते हुए जरनैल सिंह माझी ने पिछले छह सात सालों से किसानों को बताया है कि धान की पराली हो या गन्ने के कचरा अगर किसान इसका सौ फीसद प्रयोग खेत में ही कर देता है तो इस मिलचिंग से क्या फायदा है? वे बताते हैं कि खेत में बिछा ये कचरा पानी का वाष्पीकरण रोक देता है और खेत में मौजूद माइक्रो आर्गेनिक तत्वों को अंधेरा अथवा छाया मिलने की वजह से वे अधिक विकसित होते है। पराली व अन्य कचरे को ना जलाने से जहां वायु प्रदूषण रुकता है वहीं जमीन की उर्वरा शक्ति बनी रहने से रसायनिक खाद व अन्य स्प्रे भी कम करने पड़ते हैं। इससे पानी में जहर नहीं घुलता है और वातावरण शुद्ध रहता है।
31 मार्च तक 25 लाख पौधरोपण होगी
जिले में पौधरोपण का अभियान पिछले साल मानसून में शुरु किया गया था और चालू वित्तिय वर्ष में 31 मार्च तक कुल 25 लाख पौधरोपण करने का लक्ष्य रखा गया है। बीते साल लक्ष्य में से दो तिहाई हिस्सा पा लिया गया है। पिछले अभियान शहर व स्कूलों, सरकारी कार्यालयों व अन्य संस्थानों के परिसरों में चलाया गया था। अब इस साल फरवरी-मार्च के महिनों में खेतों में टयूबवेलों तक जरूर पहुंचेगा। इसके साथ ही मानसून के शुरु होने से पहले 25 लाख पौधरोपण का अगले वित्तिय वर्ष के लक्ष्य एक बार फिर से काम शुरु होगा। वन विभाग के अमन अरोड़ा कहते हैं कि पहले तीन साल किसी पौधे के लिए सबसे महत्वपूर्ण होते हैं और इसमें गर्मी का पहला सीजन निकालना सबसे ज्यादा जरूरी। ऐसे में इस साल देख भाल पर भी ज्यादा जोर दिया जाएगा।
ध्वनि प्रदूषण के 62 मामले दर्ज
साल 2012 के दौरान जिला पुलिस ने ध्वनि प्रदूषण के 62 मामले जिला पुलिस ने दर्ज किए। इनमें सबसे ज्यादा संख्या आटो रिक्शा और उन ट्रैक्टरों की थी, जिनके चालकों ने ट्रैक्टरों पर ऊंची आवाज में म्यूजिक सिस्टम लगा लगा रखा था। जिला पुलिस के रिकार्ड अनुसार दो ऐसे मामले भी हैं, जिनमें पुलिस ने सड़क किनारे खड़े दो कार चालकों पर ऊंची आवाज में गाने बजाकर डांस करते हुए काबू किया।
जहरीला धुंआ छोडऩे वाले 240 वाहनों के हुए चालान
जिला पुलिस ने वर्ष 2012 के दौरान जिले भर में प्रदूषण सर्टिफिकेट न होने वाले 240 वाहनों के चालान किए। यही नहीं जहरीला धुआं छोडऩे वाले दो दर्जन से ज्यादा आटो रिक्शा को पुलिस ने मोटर व्हीकल एक्ट 207 के तहत बंद भी किए। सड़क सुरक्षा सप्ताह में व्यस्त डीएसपी ट्रैफिक नाहर सिंह का कहना है कि वह वर्ष 2013 के दौरान ध्वनि और वायु प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर पैनी नजर रखते हुए उन पर कड़ी कार्रवाई करेंगे। बिना प्रदूषण सर्टिफिकेट वाले किसी भी वाहन चालक को बख्शा नहीं जाएगा।
ना जले पराली; बिक जाए या खेत में मिल जाए
भूपेश चट्ठा, पटियाला
हर क्षेत्र के अपने गुण अवगुण होते हैं उत्तर भारत के दूसरे सबसे कम प्रदूषण वाले शहर पटियाला में भी पर्यावरण संबंधी समस्याएं हैं। लेकिन प्रमुख रूप से ये खेत खलिहान व ट्रैफिक के आसपास ही घूमती है। 2012 में पराली को जलने से पूरी तरह से रोका नहीं जा सका है लेकिन 2013 में यह उम्मीद अवश्य है कि पराली या तो बिक जाए नहीं तो खेत में ही मिल जाए।
जिले में बायो मास आधारित किसी नए बिजली उत्पादन करने वाले प्लांट के चालू होने की संभावना नहीं है, ऐसे में पराली को खेत में ही मिलाने पर च्यादा जोर रहेगा। शहर में इंडस्ट्री का नाममात्र होना इसे अन्य शहरों से अलग करता है। साल भर चाहे आटो रिक्शा का धुंआ लोगों को तंग करे लेकिन असली परीक्षा सितंबर अंत में शुरु हो कर अक्टूबर तक जारी रहती है जब जिले के ढ़ाई लाख हैक्टेयर से च्यादा रकबे पर लगी धान की फसल की पराली जलने लगती है।
2012 के अक्टूबर में जिला गैस चैंबर बना था, हालांकि 2011 की तुलना में हालात कुछ बेहतर थे, लेकिन 2014 में होने वाले लोक सभा चुनावों को देखते हुए कम ही उम्मीद है कि पराली को जलाने से रोकने वाला कानून कड़ाई से इस साल लागू हो पाएगा। फिर भी उम्मीद की जा सकती है कि किसान खुद जागरुक होगा और खेती करने का तरीका बदल कर पर्यावरण को कम नुकसान पहुंचाएगा।
हैप्पी सीडरों की संख्या बढ़ेगी
मुख्य कृषि अधिकारी डा. बीएस सोहल बताते हैं कि पराली को जलाने से पूरी तरह से मुक्ति देने वाले हैप्पीसीडर की संख्या डेढ़ दर्जन हो पाई है। उम्मीद की जा सकती है कि ये अगले साल गेहूं की बिजाई तक दो गुनी हो जाएगी इससे बड़े क्षेत्र में धान की पराली बिना जलाए किसान को बेहतर विकल्प मिल सकेगा।
मिलचिंग से है फायदा बताया किसानों को
नाभा-भवानी गढ़ रोड पर माझी गांव में खेती करते 50 वर्षीय जरनैल सिंह यों तो पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ से जियोग्राफी में एमए हैं लेकिन उन्होंने कृषि का खानदानी पेशा अपनाया और उसे किया भी परंपरागत ढ़ंग से, इससे पहले खुद लाभ लिया और अब औरों के बीच प्रसारित कर रहे हैं। खेती विरासत मिशन के महासचिव के रूप में कार्य करते हुए जरनैल सिंह माझी ने पिछले छह सात सालों से किसानों को बताया है कि धान की पराली हो या गन्ने के कचरा अगर किसान इसका सौ फीसद प्रयोग खेत में ही कर देता है तो इस मिलचिंग से क्या फायदा है? वे बताते हैं कि खेत में बिछा ये कचरा पानी का वाष्पीकरण रोक देता है और खेत में मौजूद माइक्रो आर्गेनिक तत्वों को अंधेरा अथवा छाया मिलने की वजह से वे अधिक विकसित होते है। पराली व अन्य कचरे को ना जलाने से जहां वायु प्रदूषण रुकता है वहीं जमीन की उर्वरा शक्ति बनी रहने से रसायनिक खाद व अन्य स्प्रे भी कम करने पड़ते हैं। इससे पानी में जहर नहीं घुलता है और वातावरण शुद्ध रहता है।
31 मार्च तक 25 लाख पौधरोपण होगी
जिले में पौधरोपण का अभियान पिछले साल मानसून में शुरु किया गया था और चालू वित्तिय वर्ष में 31 मार्च तक कुल 25 लाख पौधरोपण करने का लक्ष्य रखा गया है। बीते साल लक्ष्य में से दो तिहाई हिस्सा पा लिया गया है। पिछले अभियान शहर व स्कूलों, सरकारी कार्यालयों व अन्य संस्थानों के परिसरों में चलाया गया था। अब इस साल फरवरी-मार्च के महिनों में खेतों में टयूबवेलों तक जरूर पहुंचेगा। इसके साथ ही मानसून के शुरु होने से पहले 25 लाख पौधरोपण का अगले वित्तिय वर्ष के लक्ष्य एक बार फिर से काम शुरु होगा। वन विभाग के अमन अरोड़ा कहते हैं कि पहले तीन साल किसी पौधे के लिए सबसे महत्वपूर्ण होते हैं और इसमें गर्मी का पहला सीजन निकालना सबसे ज्यादा जरूरी। ऐसे में इस साल देख भाल पर भी ज्यादा जोर दिया जाएगा।
ध्वनि प्रदूषण के 62 मामले दर्ज
साल 2012 के दौरान जिला पुलिस ने ध्वनि प्रदूषण के 62 मामले जिला पुलिस ने दर्ज किए। इनमें सबसे ज्यादा संख्या आटो रिक्शा और उन ट्रैक्टरों की थी, जिनके चालकों ने ट्रैक्टरों पर ऊंची आवाज में म्यूजिक सिस्टम लगा लगा रखा था। जिला पुलिस के रिकार्ड अनुसार दो ऐसे मामले भी हैं, जिनमें पुलिस ने सड़क किनारे खड़े दो कार चालकों पर ऊंची आवाज में गाने बजाकर डांस करते हुए काबू किया।
जहरीला धुंआ छोडऩे वाले 240 वाहनों के हुए चालान
जिला पुलिस ने वर्ष 2012 के दौरान जिले भर में प्रदूषण सर्टिफिकेट न होने वाले 240 वाहनों के चालान किए। यही नहीं जहरीला धुआं छोडऩे वाले दो दर्जन से ज्यादा आटो रिक्शा को पुलिस ने मोटर व्हीकल एक्ट 207 के तहत बंद भी किए। सड़क सुरक्षा सप्ताह में व्यस्त डीएसपी ट्रैफिक नाहर सिंह का कहना है कि वह वर्ष 2013 के दौरान ध्वनि और वायु प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर पैनी नजर रखते हुए उन पर कड़ी कार्रवाई करेंगे। बिना प्रदूषण सर्टिफिकेट वाले किसी भी वाहन चालक को बख्शा नहीं जाएगा।
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