Thursday, 17 January 2013
खेती में खपत पर खर्च च्यादा, उपज कम
भूपेश चट्ठा, पटियाला
गेहूं के दामों में किसानों के लिए बढ़ोतरी हो या ना हो, या फिर मात्र 65 पैसे प्रति किलो तक ही रह जाए। ऐसे ही धान के दाम 50-60 पैसे प्रति किलो की दर उसे बढ़ जाए लेकिन आटे व चावल के दामों में बढ़ोतरी सिर्फ और सिर्फ रूपये में ही हो रही है। ऐसे में गरीब आदमी को अन्न सस्ता नहीं मिलता और किसान को दाम नहीं मिल पाते। वहीं खेती पर खपत भी लगातार बढ़ रही है। लेकिन उपज के दाम उसी अनुपात में नहीं बढ़े हैं।
गेहूं के एमएसपी में मात्र 65 रूपये की बढ़ोतरी होने से परेशान किसानों की मांग है कि केंद्र सरकार गेहूं का एमएसपी भारतीय किसान आयोग के पूर्व चेयरमैन एमएस स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिशों अनुसार दो हजार रूपये प्रति क्विंटल से ज्यादा तय करे। डीएपी खाद, यूरीया, बीजों के दाम, बहाई बिजाई का खर्च, नदीननाशक व कीड़ेमार दवाओं के साथ मजदूरी व जमीन का ठेका लगातार बढ़ा है। जबकि एमएसपी उस अनुपात में नहीं बढ़ाया गया।
किसान का कुल खर्च- दस हजार रूपये प्रति एकड़ से ज्यादा
दस एकड़ जमीन का ठेका- 35 हजार प्रति एकड़ सालाना से रबी की फसल गेहूं पर 1.75 लाख रूपये
किसान की मजदूरी-पांच सौ रूपये प्रतिदिन अनुसार छह महीने के 90 हजार रूपये
बहाई-बिजाई-दो हजार प्रति एकड़, 20 हजार रूपये
बीज-एक हजार प्रति एकड़, 10 हजार रूपये
डीएपी खाद- 15 सौ प्रति एकड़, 15 हजार रूपये
कीटनाशक, नदीननाशक व अन्य दवाएं-एक हजार प्रति एकड़, 10 हजार रूपये
यूरिया-एक हजार प्रति एकड़, 10 हजार रूपये
कटाई - एक हजार प्रति एकड़, 10 हजार रूपये
मंडी तक ले जाने का खर्च-आठ सौ रूपये
टयूबवेल का बोर, मोटर, मशीनरी की टूट फूट-एक हजार प्रति एकड़, 10 हजार रूपये
रखरखाव व अन्य खर्च- सात सौ प्रति एकड़, 7 हजार रूपये
गेहूं पर मेहनत व खर्च 1921 रूपये प्रति क्विंटल
राज्य में गेहूं का औसत उत्पादन 19 क्विंटल प्रति एकड़ है। ऐसे में दस एकड़ पर फसल से कमाई 1285 रूपये प्रति क्विंटल के हिसाब से दो लाख 44 हजार 150 रूपये हुई जबकि खर्च तीन लाख 65 हजार रूपये हो गया। ऐसे में एक लाख 11 हजार 850 रूपये का घाटा होना तय है। गेहूं पर किसान की मेहनत व खर्च 1921 रूपये प्रति क्विंटल बैठती है। भारतीय किसान यूनियन एकता डकौंदा के डा. दर्शन पाल बताते हैं कि यह औसत दस एकड़ जमीन के टुकड़े पर आती है जबकि खेत छोटा होने की स्थिति में यह खर्च बढ़ता जाता है। इस औसत में 25 या 50 फीसद मुनाफा जोड़ा जाए तो न्यूनतम समर्थन मुल्य 2130 रूपये या 2500 हजार रूपये प्रति क्विंटल हो जाता है।
क्या सोचता है किसान
वकालत छोड़ किसान बने परविंदर सिंह ढिल्लों कहते हैं कि मंडी में किसान की फसल से जुड़े लोग जिसमें आढ़ती, शैलर मालिक, अनाज के व्यापारी, फूड एजेंसियों के अधिकारी व इंस्पेक्टर, रसायनिक खाद व दवा बनाने वाली कंपनियां, कृषि मशीनरी बनाने वाली फैक्ट्रियां और वर्कशाप के मालिक करोड़पति से अरबपति होते जा रहे हैं। जबकि किसान कर्ज से पीडि़त हो खुदकुशी करने को मजबूर होता है।
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment