Friday, 25 January 2013

टेस्ट से छुटकारा, अब सिर्फ लाटरी करेगी प्रवेश तय


मिशन एडमिशन: 1
भूपेश चट्ठा, पटियाला
एक साल पहले तक नर्सरी व एलकेजी में प्रवेश लेने के लिए होने वाली तैयारी किसी आईएएस अथवा आईआईटी से कम नहीं होती थी। घर में से प्रवेश लेने वाले एक बच्चे के साथ मां बाप से लेकर दादा-दादी, चाचा बुआ के साथ ननिहाल पक्ष तक इसमें शामिल हो जाता था। यहां तक की मित्रों सहयोगियों से भी 'समय परÓ उचित मदद की गुहार लगाई जाती थी। लेकिन 17 दिसंबर 2011 को आए सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत अब बच्चों को टेस्ट व इंटरव्यू से पूरी तरह से छुटकारा मिल गया है। अब स्कूल की प्रारंभिक कक्षाओं में प्रवेश सिर्फ लाटरी ही तय करेगी। रजिस्ट्रेशन के बाद स्कूल में सभी आवेदकों के सामने ही निकलने वाला ड्रा प्रवेश लेने वाले बच्चों की किस्मत का फैसला करेगा। हालांकि इसमें भी कुछ तकनीकि पक्ष अभी शेष हैं।


नहीं होगा नर्सरी में टेस्ट पर बड़ी क्लास में प्रवेश रिक्त स्थान होने पर ही: प्रभाकर
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डीएवी स्कूल के प्रिंसिपल एसआर प्रभाकर कहते हैं कि शिक्षा के अधिकार के तहत स्कूल में प्रवेश लेने वाले छोटे बच्चों का किसी प्रकार से टेस्ट अथवा इंटरव्यू नहीं लिया जा सकता। इससे बच्चों के साथ साथ उनके परिजन दबाव में आ जाते हैं। यही अभिभावक बच्चों पर टेस्ट व इंटरव्यू के लिए अतिरिक्त दबाव बनाते है। जिसे सही नहीं माना गया है।
बड़ी कक्षाओं के संबंध में प्रिंसिपल का कहना है कि यह कक्षाओं में मौजूद रिक्त स्थानों पर ही निर्भर करता है। अगर किसी क्लास में पहले ही क्षमता से ज्यादा बच्चे हैं, वहां पर प्रवेश दे पाना संभव नहीं है। ऐसे में बड़ी कक्षाओं में प्रवेश की संभावनाएं सीमित हैं। फिर भी प्रवेश लेने के इच्छुक विद्यार्थियों के परिजन फरवरी में स्कूल में शुरु होने वाले रजिस्ट्रेशन के दौरान अपना नाम दर्ज करवा सकते हैं।

सीबीएसई के आदेश मान्य पर डीईओ के आदेशों का पालन भी: दास
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मार्डन सीनियर सेकेंड्री स्कूल के प्रिंसिपल एसएस दास का इन दिनों में शुरु हो रही स्कूलों में प्रवेश प्रक्रिया पर कहना है कि निसंदेह उनका स्कूल सेंट्रल बोर्ड आफ स्कूल एजूकेशन से संबंधित है और उनके पास सीधे आदेश वहीं से आते हैं। चूंकि वे जिस राज्य में काम कर रहे हैं ऐसे में वहां के जिला शिक्षा अधिकारी के आदेश भी जैसे ही प्राप्त होंगे वे इस पर भी अमल करेंगे।
शिक्षा के अधिकार के तहत बच्चों के प्रवेश के दौरान होने वाले टेस्ट पर प्रिंसिपल एसएस दास कहते हैं कि नर्सरी व एलकेजी में किसी प्रकार का टेस्ट अथवा इंटरव्यू नहीं लिया जाता, इस दौरान प्रवेश ड्रा से ही होगा लेकिन इस दौरान यह जरूर देख लिया जाता है कि बच्चा बोल पाता है या नहीं? स्कूल की टीचर ही बात कर देख लेती है। इस दौरान बच्चा किसी भी भाषा में जवाब दे दे तो सही है। इसके अलावा अगर बच्चा छह या सात साल का है तो प्रोफिशिएंसी जरूर देखी जाती है कि बच्चा कौनसी क्लास में प्रवेश लेने लायक है। इस दौरान माता पिता के कहे पर यकीन ना कर बच्चे की क्षमता देखी जाती है। हालांकि छठी क्लास से नौंवी तक किसी भी क्लास में प्रवेश के लिए टेस्ट अवश्य लिया जाता है।

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