Friday, 4 January 2013

ना जले पराली; बिक जाए या खेत में मिल जाए

उम्मीद-2013 पर्यावरण संरक्षण
ना जले पराली; बिक जाए या खेत में मिल जाए
भूपेश चट्ठा, पटियाला
हर क्षेत्र के अपने गुण अवगुण होते हैं उत्तर भारत के दूसरे सबसे कम प्रदूषण वाले शहर पटियाला में भी पर्यावरण संबंधी समस्याएं हैं। लेकिन प्रमुख रूप से ये खेत खलिहान व ट्रैफिक के आसपास ही घूमती है। 2012 में पराली को जलने से पूरी तरह से रोका नहीं जा सका है लेकिन 2013 में यह उम्मीद अवश्य है कि पराली या तो बिक जाए नहीं तो खेत में ही मिल जाए।
जिले में बायो मास आधारित किसी नए बिजली उत्पादन करने वाले प्लांट के चालू होने की संभावना नहीं है, ऐसे में पराली को खेत में ही मिलाने पर च्यादा जोर रहेगा। शहर में इंडस्ट्री का नाममात्र होना इसे अन्य शहरों से अलग करता है। साल भर चाहे आटो रिक्शा का धुंआ लोगों को तंग करे लेकिन असली परीक्षा सितंबर अंत में शुरु हो कर अक्टूबर तक जारी रहती है जब जिले के ढ़ाई लाख हैक्टेयर से च्यादा रकबे पर लगी धान की फसल की पराली जलने लगती है।
 2012 के अक्टूबर में जिला गैस चैंबर बना था, हालांकि 2011 की तुलना में हालात कुछ बेहतर थे, लेकिन 2014 में होने वाले लोक सभा चुनावों को देखते हुए कम ही उम्मीद है कि पराली को जलाने से रोकने वाला कानून कड़ाई से इस साल लागू हो पाएगा। फिर भी उम्मीद की जा सकती है कि किसान खुद जागरुक होगा और खेती करने का तरीका बदल कर पर्यावरण को कम नुकसान पहुंचाएगा।

हैप्पी सीडरों की संख्या बढ़ेगी
मुख्य कृषि अधिकारी डा. बीएस सोहल बताते हैं कि पराली को जलाने से पूरी तरह से मुक्ति देने वाले हैप्पीसीडर की संख्या डेढ़ दर्जन हो पाई है। उम्मीद की जा सकती है कि ये अगले साल गेहूं की बिजाई तक दो गुनी हो जाएगी इससे बड़े क्षेत्र में धान की पराली बिना जलाए किसान को बेहतर विकल्प मिल सकेगा।


मिलचिंग से है फायदा बताया किसानों को

नाभा-भवानी गढ़ रोड पर माझी गांव में खेती करते 50 वर्षीय जरनैल सिंह यों तो पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ से जियोग्राफी में एमए हैं लेकिन उन्होंने कृषि का खानदानी पेशा अपनाया और उसे किया भी परंपरागत ढ़ंग से, इससे पहले खुद लाभ लिया और अब औरों के  बीच प्रसारित कर रहे हैं। खेती विरासत मिशन के महासचिव के रूप में कार्य करते हुए जरनैल सिंह माझी ने पिछले छह सात सालों से किसानों को बताया है कि धान की पराली हो या गन्ने के कचरा अगर किसान इसका सौ फीसद प्रयोग खेत में ही कर देता है तो इस मिलचिंग से क्या फायदा है? वे बताते हैं कि खेत में बिछा ये कचरा पानी का वाष्पीकरण रोक देता है और खेत में मौजूद माइक्रो आर्गेनिक तत्वों को अंधेरा अथवा छाया मिलने की वजह से वे अधिक विकसित होते है। पराली व अन्य कचरे को ना जलाने से जहां वायु प्रदूषण रुकता है वहीं जमीन की उर्वरा शक्ति बनी रहने से रसायनिक खाद व अन्य स्प्रे भी कम करने पड़ते हैं। इससे पानी में जहर नहीं घुलता है और वातावरण शुद्ध रहता है। 

31 मार्च तक 25 लाख पौधरोपण होगी
जिले में पौधरोपण का अभियान पिछले साल मानसून में शुरु किया गया था और चालू वित्तिय वर्ष में 31 मार्च तक कुल 25 लाख पौधरोपण करने का लक्ष्य रखा गया है। बीते साल लक्ष्य में से दो तिहाई हिस्सा पा लिया गया है। पिछले अभियान शहर व स्कूलों, सरकारी कार्यालयों व अन्य संस्थानों के परिसरों में चलाया गया था। अब इस साल फरवरी-मार्च के महिनों में खेतों में टयूबवेलों  तक जरूर पहुंचेगा। इसके साथ ही मानसून के शुरु होने से पहले 25 लाख पौधरोपण का अगले वित्तिय वर्ष के लक्ष्य एक बार फिर से काम शुरु होगा। वन विभाग के अमन अरोड़ा कहते हैं कि पहले तीन साल किसी पौधे के लिए सबसे महत्वपूर्ण होते हैं और इसमें गर्मी का पहला सीजन निकालना सबसे ज्यादा जरूरी। ऐसे में इस साल देख भाल पर भी ज्यादा जोर दिया जाएगा।

ध्वनि प्रदूषण के 62 मामले दर्ज
साल 2012 के दौरान जिला पुलिस ने ध्वनि प्रदूषण के 62 मामले जिला पुलिस ने दर्ज किए। इनमें सबसे ज्यादा संख्या आटो रिक्शा और उन ट्रैक्टरों की थी, जिनके चालकों ने ट्रैक्टरों पर ऊंची आवाज में म्यूजिक सिस्टम लगा लगा रखा था। जिला पुलिस के रिकार्ड अनुसार दो ऐसे मामले भी हैं, जिनमें पुलिस ने सड़क किनारे खड़े दो कार चालकों पर ऊंची आवाज में गाने बजाकर डांस करते हुए काबू किया।
जहरीला धुंआ छोडऩे वाले 240 वाहनों के हुए चालान
जिला पुलिस ने वर्ष 2012 के दौरान जिले भर में प्रदूषण सर्टिफिकेट न होने वाले 240 वाहनों के चालान किए। यही नहीं जहरीला धुआं छोडऩे वाले दो दर्जन से ज्यादा आटो रिक्शा को पुलिस ने मोटर व्हीकल एक्ट 207 के तहत बंद भी किए। सड़क सुरक्षा सप्ताह में व्यस्त डीएसपी ट्रैफिक नाहर सिंह का कहना है कि वह वर्ष 2013 के दौरान ध्वनि और वायु प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर पैनी नजर रखते हुए उन पर कड़ी कार्रवाई करेंगे। बिना प्रदूषण सर्टिफिकेट वाले किसी भी वाहन चालक को बख्शा नहीं जाएगा।

No comments:

Post a Comment