Friday, 25 January 2013
पहले मानसून ने रुलाया, अब बर्फ का सूखा
-नहीं हुई सीजन के शुरु में अच्छी बर्फबारी, पावरकाम चिंतित
भूपेश चट्ठा, पटियाला
पहाड़ों पर बर्फबारी नवंबर में शुरु हो जाए और सर्दी लगातार रहे तो सोने पर सुहागा कहा जाता है, दिसंबर में भी बर्फ लगातार बर्फ गिरे तो यह जमी रहती है, लेकिन इस साल पहाड़ों पर बर्फबारी का सीजन चंद दिनों को छोड़ कर 'सूखाÓ ही रहा है। वो भी तब जब मानसून का सीजन पिछले साल ही रुला गया था। ऐसे में आने वाली गर्मियों में उत्तर भारत खास तौर से पंजाब के लिए पन बिजली उत्पादन के मंदा रहने के आसार बढ़ गए हैं।
पहाड़ों पर होने वाली बर्फबारी पर नजर रखने वाले पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड के अधिकारी बताते हैं कि पंजाब की नदियों को साल भर विशेष रूप से गर्मियों में पानी देने वाले पहाड़ों पर ना केवल देरी से बर्फबारी का सीजन शुरु हुआ बल्कि अब तक खासा कम भी रहा है। शुरुआती सर्दियों में हुई बर्फबारी गर्मियों में पिघलना शुरु कर पंजाब की नदियों में पानी उड़ेलती है। जबकि 13-14 जनवरी के बाद देरी से होने वाली बर्फ बारी जल्द पिघल जाती है, जिससे बांधों में पानी की आवक पर असर पड़ता है और 15 अप्रैल के बाद शुरु होने वाला बांधों का भराव सीजन ठंडा रहता है। इससे पंजाब के पन बिजली उत्पादन पर असर पड़ता है।
इसी संबंध में पावरकाम के प्रवक्ता कहते हैं कि हाल ही में तेज पड़ी ठंड से उम्मीद जरूर बंधी है। फिर प्राकृति के आगे तो अरदास ही की जा सकती है। अभी सीजन काफी है संभव है कि देर से शुरु हुई सर्दी देर तक जारी रहे। ऐसे में पहाड़ों पर बर्फ भी पड़े, जिससे बांधों में पानी की आवक अच्छी बनी रहे। भाखड़ा बांध के जल स्तर पर वे स्वीकार करते हैं कि जल स्तर गिरने की रफ्तार अब करीब करीब पौना फीट हर रोज की रफ्तार से नीचे आ रहा है। लेकिन पानी छोड़े जाने और पन बिजली उत्पादन का क्रम अभी बदस्तूर जारी है। फिलहाल किसी प्रकार की कटौती नहीं की गई है।
पावरकाम का कहना है कि बीते साल खराब मानसून का झटका केवल इस वजह से सहा गया क्योंकि साल 2011 में बांधों में पानी लबालब भरा गया था। यहां तक कि गेट खोल कर पानी छोडऩा पड़ा था पर अब हालात पहले जैसे नहीं है। साथ ही वे यह भी स्पष्ट करते हैं कि बांधों के पानी पर उनका नियंत्रण नहीं है, यह सिंचाई विभाग के अधीन है। पावरकाम केवल छोड़े जाने वाले पानी से बिजली बनाता है।
बाक्स
बांधों के जल स्तर 17 जनवरी को
भाखड़ा-
2013 में 1612 फीट, 2012 में 1637 फीट
डेहर-
2013 में 2925 फीट, 2012 में 2924 फीट
पौंग-
2013 में 1341 फीट, 2012 में 1352 फीट
रणजीत सागर-
2013 में 512 मीटर, 2012 में 507 मीटर
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