Thursday, 9 August 2012

शहर के दुकानदारों ने किया बस स्टैंड चौंक जाम, PUDA seals 101 shops in urban estate




फोटो:
उपमुख्य संवाददाता, पटियाला
हाई कोर्ट के आदेशों के चलते शहर में होने वाली सीलिंग के विरोध में वीरवार सुबह दुकानदारों ने बस स्टैंड चौंक पर जाम लगा दिया। दिलचस्प है कि एक ओर जहां अर्बन एस्टेट में पूडा व प्रशासन पुलिस की मौजूदगी में दुकानें सील कर रहा था। वहीं शहर में दुकानदार विरोध में जमकर नारेबाजी कर रहे थे।
भारी तादाद में व्यापारियों के पहुंचने के साथ ही करीब दस बजे शुरु हुआ धरना दो घंटे से अधिक तक जारी रहा। इस दौरान दुकानदारों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी के बीच मुख्य मार्ग को बंद रखा। जिसके चलते वाहनों की लंबी कतारें लग गई। व्यापार बचाओ कमेटी के बैनर तले दुकानदारों ने 'सभी आओ मिल कर सीलिंग जैसी भयानक मुसीबत का मिलकर सामना करेंÓ। दुकानदारों का कहना है कि वे अपना व्यापार बचाने के लिए हर मुसीबत का सामना करने को तैयार हैं। जरूरत पडऩे पर जान की बाजी भी लगा देंगे।
दुकानदारों का कहना है कि पिछले कई दशकों से वे विभिन्न क्षेत्रों के बाजारों में अपना कारोबार कर रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें इससे पहले किसी ने कुछ नहीं कहा पर अब उनके व्यापार को तबाह करने की कोशिश की जा रही है। जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अगर दुकानें नाजायज हैं तो पहले क्यों बनने दी गई। कारोबार शुरु से ही क्यों चलने दिया गया।
मुख्य रूप से दुकानदारों का परिवार उनके इसी व्यवसाय से चलता है ऐसे में दुकानों के सील होने की स्थिति में उनका परिवार भी भूखा मरने की स्थिति में आ जाएगा। ऐसे में सीलिंग का डट कर विरोध किया जाएगा।

क्या है मामला

शहर के रिहायशी क्षेत्रों में चल रही कामर्शियल गतिविधियों पर रोक लगाने और नगर निगम की अनुमति के बिना व टाउन प्लानर की योजना के विपरीत दुकानें बना ली हैं उन्हें बंद करवाने के हाई कोर्ट ने आदेश जारी कर दिए हैं। आदेश है कि इन संस्थानों व दुकानों को सील कर हाईकोर्ट को रिपोर्ट किया जाए। इससे पहले अपर माल रोड पर दर्जन भर दुकानों व शो रूम को ऐसे ही आदेशों के तहत सील किया गया है। जो अभी तक नहीं खुले हैं।

मेयर ने की शांति की अपील

मेयर अजीतपाल सिंह कोहली ने सीलिंग को लेकर हाई कोर्ट के आदेशों के बाद पैदा हुए हालातों के संबंध में नए पुराने चुने गए पार्षदों के साथ बैठक कर शांति व्यवस्था कायम रखने की अपील की है। कोहली ने कहा है कि ऐसे हालात में कुछ शरारती तत्व अपने उद्वेश्यों की पूर्ति के लिए नाजायज लाभ उठा सकते हैं। ऐसे में सजग रहने की अपील के साथ ही उन्होंने दुकानदारों से भी अपील की है कि वे कानून में विश्वास रखें। और कानून के दायरे में रह कर ही अपील करें। साथ ही मेयर ने कहा है कि यदि किसी व्यक्ति को किसी तरह की जानकारी अथवा स्पष्टीकरण  चाहिए तो वो उनसे, सीनियर डिप्टी मेयर, कमिश्नर, संयुक्त कमिश्नर अथवा म्यूनिसिपल टाउन प्लानर से ले सकता है।

फोटो:
उपमुख्य संवाददाता, पटियाला
हाईकोर्ट के आदेश पर शहर के अर्बन एस्टेट क्षेत्र में शुरु हुई सीलिंग के तहत पंजाब अर्बन डेवलेपमेंट एंड प्लानिंग अथारिटी (पुडा) ने अपने अधीन आती 101 दुकानें सील कर दी हैं। इस अवसर पर जिला प्रशासन व पुलिस के अधिकारी बड़ी संख्या में मौजूद रहे। इसके अलावा दी गई कड़ी चेतावनी के चलते कोई अप्रिय घटना नहीं हुई है।
एडीसी अनंदिता मितरा, एसडीएम गुरपाल सिंह चहल और पूडा के अधिकारियों की मौजूदगी में अर्बन एस्टेट की राणा मार्केट, साहिब इंक्लेव और थेड़ी सहित बड़ी संख्या में आसपास की दुकानें सील की गई हैं। इन दुकानों को सील करते समय कई दुकानदारों ने अंतिम समय में अपना सारा सामान दुकानों में से निकाल लिया, जबकि कई ऐसा नहीं कर पाए। जिसके चलते सीलिंग कर रहे अधिकारियों ने सामान सहित दुकानों को सील कर दिया है।

फोटो-
शटर के आगे दीवार करने वाले भी नहीं बचे
पूडा व हाईकोर्ट को गच्चा देने की मंशा से अर्बन एस्टेट के कुछ दुकानदारों ने बीती शाम अपनी दुकानों के आगे ईटों की दीवार करनी शुरु कर दी। इसमें शहर के एक बड़े प्रापर्टी डीलर का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है। इन दुकानों में से कुछ की दीवार गिराकर दुकानें सील की गई तो शेष के बाहर कंटीली तार लगाकर टीम ने इन्हें भी सील की हुई दुकानों का हिस्सा बना दिया।

विरोध भी हुआ पर हाईकोर्ट के आगे नतमस्तक
जैसी की उम्मीद की जा रही थी दुकानों की सीलिंग को लेकर विरोध के स्वर उठेंगे। ऐसा हुआ भी कुछ दुकानदारों ने विरोध करने का प्रयास किया पर भारी संख्या में पुलिस की मौजूदगी में सीलिंग कर रही टीम ने हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देकर कहा कि यदि किसी ने इस कार्रवाई में विघ्न डालने का प्रयास किया तो उसे अदालत की अवमानना का सामना करना पड़ेगा। सीलिंग को किसी भी स्थिति में रोका नहीं जाएगा, चाहे दुकानदार कितना भी विरोध करें।



धरने ने धाराशाही की ट्रैफिक व्यवस्था
उपमुख्य संवाददाता, पटियाला
 शाही शहर में वीरवार सुबह शुरु हुआ धरने प्रदर्शन का दौर दोपहर बाद तक जारी रहा। बस स्टैंड पर जहां व्यापार बचाओ कमेटी के सदस्यों ने धरना दिया वहीं माल रोड पर भारतीय किसान यूनियन एकता डकौंदा के नेताओं ने जाम लगाया। इन्हीं धरनों के चलते ट्रैफिक व्यवस्था धाराशाही हो गई। हालांकि प्रशासन की ओर से कुछ उपाय किए गए और रूट भी बदले गए लेकिन धरना हटने तक ये नाकाफी ही रहा।
जाम लगने के कारण कामकाज पर पहुंचने वालों को खासी मुश्किल का सामना करना पड़ा और इसमें फंसने वाला हर व्यक्ति अपने गंतव्य स्थान पर देरी से ही पहुंचा। व्यापार बचाओ कमेटी ने हालांकि दो घंटे बाद अपना धरना उठा लिया लेकिन किसानों का घेराव सांय साढ़े चार बजे तक जारी रहा और मालरोड बंद रही।  


पटियाला बंद का आहवान किया
उपमुख्य संवाददाता, पटियाला
पटियाला व्यापार बचाओ संघर्ष कमेटी ने दस अगस्त को शहर को बंद रखने का आहवान किया है। साथ ही सभी दुकानदारों को सुबह आठ बजे शेरांवाला गेट पर पहुंचने की अपील भी की है। कमेटी के प्रधान राकेश गुप्ता, राकेश मंगला, जसप्रीत सिंह भाटिया, डा. धर्मवीर गांधी आदि ने कहा है कि उनका संघर्ष सीलिंग की लटकती तलवार हटने तक जारी रहेगा।
इससे पहले कमेटी के सदस्यों ने मिनी सचिवालय में डिप्टी कमिश्नर, एसएसपी, मेयर, कमिश्नर नगर निगम के साथ कांफ्रेंस हाल में बैठक भी की है। इस बैठक में प्रशासन ने जहां भरोसा दिलाया है कि जो भी संभव होगा वो किया जाएगा, लेकिन उच्च न्यायालय के आदेशों के आगे हर कोई बेबस है। एक ओर जहां प्रशासन ने अपनी मजबूरी गिनाई वहीं कमेटी ने अपना आंदोलन आगे जारी रखने का फैसला भी सुना दिया।

Tuesday, 7 August 2012

राजिंदरा अस्पताल की इमरजेंसी में मिला नवजात शव, New born baby boy found in Rajindra hospital’s bathroom


-किसी को नहीं पता शिशु मृत फेंका गया या डिलीवरी बाथरूम में हुई
-सुरक्षा कर्मी बाथरूम के दरवाजे से मात्र दो फुट की दूरी पर बैठा रहा
-इमरजेंसी के मुख्यद्वार के आसपास ही तैनात हैं पांच सुरक्षा कर्मी
फोटो:
उपमुख्य संवाददाता, पटियाला
राजिंदरा अस्पताल की इमरजेंसी में बने बाथरूम में एक नवजात शिशु मिला है। लिंग से लड़के इस शिशु की डिलीवरी यहीं पर हुई या इसे कोई बाहर से लाकर डाल गया इस बात की खबर फिलहाल कम से कम अस्पताल प्रशासन को नहीं है। सुबह मिला उक्त शिशु मृत पाया गया है।
 पुलिस को मामले की खबर कर दी गई है। पुलिस अपने स्तर पर जांच कर रही है, वहीं अस्पताल के फारेंसिक विभाग के विशेषज्ञ जांच कर रहे हैं कि शिशु की मौत कहीं बाथरूम में फेंके जाने से अथवा गिरने से तो नहीं हुई है? या फिर मृत अवस्था में ही यहां तक लाया गया है।
दिलचस्प है कि इमरजेंसी में जिस स्थान पर शिशु पड़ा मिला है उस बाथरूम के दरवाजे से मात्र दो फुट की दूरी पर ही सुरक्षा कर्मी बडी टेबल लगा कर बैठा रहता है और सुबह हुए हंगामे के बाद जब सुरक्षा कर्मी से पूछा गया कि वो कहां था? इस पर जवाब दिया गया कि 'वो डयूटी पर ही थाÓ
इतना ही नहीं अस्पताल की सुरक्षा का जिम्मा अथवा ठेका छह लाख रूपये में दिया गया है और सुरक्षा व्यवस्था 'कई मायनोंÓ में खासी कड़ी भी है। इमरजेंसी में प्रवेश करने से पहले मुख्यद्वार पर एक सुरक्षा कर्मी तैनात है। इसके अगले गेट पर दो सुरक्षा कर्मी इमरजेंसी में आने वालों को रोकने व पूछताछ के लिए तैनात है जबकि चौथा बाथरूम के बाहर मेज लगा कर बैठता है। यहीं से लिफ्ट भी चलती है, उसमें भी तैनात व्यक्ति को शामिल कर लिया जाए तो संख्या पांच हो जाती है। सुरक्षा तंत्र के बीच ही उक्त नवजात शिशु का शव मिला है।
पुलिस और विभागीय जांच अभी जारी है इसके बाद ही पता चल पाएगा कि, डिलीवरी हुई? या गलती हुई? या फिर व्यवस्था में ही कोई खामी है?

बाक्स
अस्पताल में लगेंगे सीसीटीवी कैमरे
भूपेश चट्ठा, पटियाला
नवजात शिशु के शव मिलने की सूचना पर सरकारी राजिंदरा अस्पताल मेडिकल कालेज के प्रिंसिपल डा. केडी सिंह कहते हैं पहली नजर में मामला अवैध संतान का लगता है और कोई महिला अस्पताल के बाहर डिलीवरी करवाने के बाद यहां पर आकर शिशु को छोड़ गई। रही बात सुरक्षा कर्मियों की तो महिलाओं की जांच में कई तरह की बंदिशें होती हैं। सुरक्षा व्यवस्था में तकनीक के प्रयोग करने पर वे कहते हैं कि सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने का प्रस्ताव पहले से ही विचाराधीन है। कालेज के होस्टल में ऐसा होना था पर अब इसे अस्पताल में भी सभी तरफ लगाया जाएगा।
संभव है कि सीसीटीवी कैमरे लगने के बाद अस्पताल में एसी के सिलेंडरों से गैस चोरी होने से लेकर, कुत्तों के सरेआम कोरीडोर में घूमने, साफ सफाई का प्रबंध सही रहने और 'बधाईÓ लेने देने जैसी कई प्रवृतियों पर 'आंखÓ लगातार रहेगी। कौनसा डाक्टर कब और कैसे आता है? नर्स आकर क्या करती है? अस्पताल में लड़ाई झगड़े के केस आपस में कैसे 'सुलझाएÓ गए जैसी चीजों पर फुटेज की मदद ली जा सकेगी।

...इतने में तो लग जाता थर्मल प्लांट, Punjab’s electricity purchase bill increases 1.5 crore every hour


-38 करोड़ प्रति दिन पर आया बिजली खरीद का आंकड़ा, 52 दिनों की खरीद दो हजार करोड़ के पार
-चार करोड़ रूपये प्रति मेगावाट थर्मल प्लांट लगाने में तो पांच करोड़ रूपये पन बिजली केंद्र जबकि माइक्रो हायडल पर खर्च साढ़े सात करोड़ रूपये आता है
भूपेश चट्ठा, पटियाला
पंजाब का बिजली खरीद बिल रिकार्ड स्तर जा पहुंचा है और यह हर घंटे डेढ़ करोड़ रूपये से ज्यादा की गति से और  35 से 38 करोड़ प्रति दिन की दर से बढ़ रहा है। आलम ये है कि 10 जून से धान का सीजन शुरु होने के बाद से अब तक के पहले 52 दिनों में आंकड़ा दो हजार करोड़ के पार जा चुका है। दिलचस्प है कि इतने में पंजाब एक नया थर्मल प्लांट लगा लेता जो अगले 25 साल राज्य को बिना कमाई और कमीशन की बिजली देता।
बिजली क्षेत्र के विशेषज्ञ बताते हैं कि थर्मल प्लांट लगाने में खर्च चार करोड़ रूपये प्रति मेगावाट पर पहुंच गया है और ये खर्च भी अति आधुनिक सुपर क्रिटिकल व पर्यावरण को कम हानि पहुंचाने वाली तकनीक का है। हालांकि कुछ साल पहले पुरानी तकनीक के प्लांट सार्वजनिक क्षेत्र में तीन करोड़ प्रति मेगावाट पर भी लगते रहे हैं।
वर्तमान में सात सौ मेगावाट क्षमता की लग रही एक यूनिट के अलावा सस्ती बिजली देने वाले पन बिजली केंद्र पर प्रति मेगावाट कुछ अधिक पांच करोड़ रूपये, जबकि छोटे माइक्रो हायडल पर खर्च साढ़े सात करोड़ रूपये आता है।
इसी संबंध में पीएसईबी इंजीनियर्स एसोसिएशन वर्तमान सरकार की आलोचना भी करती है कहती है कि अपना बिजली उत्पादन बढ़ाने की बजाए बिजली खरीद पर सारा जोर लगाया जा रहा है। आंकड़े बताते हैं कि  पिछली बार सत्ता में आने के समय 2007-08 में पंजाब में कुल उपलब्ध बिजली का 41 फीसद हिस्सा खरीदी गई बिजली का होता था पर अब बिजली खरीद पर निर्भरता इस कदर बढ़ गई है कि पिछले साल उत्पादन की तुलना में कुल खरीदी गई बिजली का हिस्सा 53 फीसद पर आ गया है और यह किसी भी सूरत में इस साल छह हजार करोड़ से कम नहीं रहने वाला। याद रहे कि इतनी राशि में उस संस्थान के लिए प्लांट लगाना मुश्किल नहीं है जिसके पास अपनी मूलभूत सुविधाओं का पूरा ढ़ांचा हो और प्लांट लगा कर सफलता पूर्वक चलाने का अनुभव रहा हो।
 वहीं पावरकाम के चेयरमैन इंजी. केडी चौधरी कहते हैं कि हर तरह के प्रबंध किए गए है। कुछ 20 से 25 सालों के लंबी अवधि के खरीद समझौते हैं तो कुछ 10 जून से 15 सितंबर के लिए किए गए हैं। पंजाब में थर्मल प्लांट भी लग रहे हैं अगले साल मार्च-अप्रैल में तलवंडी साबो का पहला यूनिट चालू हो जाएगा, अगस्त-सितंबर में राजपुरा में यूनिट बिजली उत्पादन शुरु कर देगा। फिर छह छह माह के अंतराल पर कमीशन होंगे।

Saturday, 4 August 2012

पापुलर ने दिया एफडी से च्यादा रिर्टन, Popular gives batter returns then bank FDR



-चार साल में दोगुने हुए दाम
-बैंक दे रहे बिना किश्त का नौ साल के लिए लोन
भूपेश चट्ठा, पटियाला
पंजाब में गेहूं-धान की द्वी-फसलीय चक्र चाहे किसी से ना टूटा हो पर राज्य में खेतों की मेढ़ पर लगने वाला पापुलर खासा पापुलर होने लगा है। कारण सरकार के किसी विभाग अथवा डाईवर्सिफीकेशन  प्रेमियों के प्रयास नहीं है। इसे सिर्फ और सिर्फ आर्थिक कारणों ने लोकप्रिय कर दिया है। हालांकि पहली नजर में पापुलर की बढ़ रही कटाई इसका क्षेत्र कम होने की ओर इशारा कर रही थी, लेकिन सामने आया कि एफडी से ना केवल च्यादा रिर्टन दे रहा है बल्कि लोगों में और च्यादा 'पापुलरÓ हो रहा है।
इसकी कीमतें पिछले चार सालों में दोगुनी हो गई है। 300 रुपये क्विंटल तक बिकने वाला पॉपलर 500 रुपये से लेकर 800 रुपये क्विंटल तक पहुंच गया और पंजाब से बाहर इसके दाम 12 सौ रूपये क्विंटल भी हैं। हरियाणा के जगाधरी, यमुनानगर क्षेत्र में ये दाम अच्छी क्वालिटी और मात्रा होने पर मिलते हें। ऐसे में बैंक एफडी से कहीं अधिक रिर्टन दे रहा है।
नैशनल नर्सरी के एमडी अब्दुल वाहिद बताते हैं कि किसान को सवार्धिक फायदा देने वाला पेड़ है।  20 फुट का तो नर्सरी, में ही किया जा सकता है। पांच साल में किसान को अतिरिक्त आय दे देता है। वे ही हर साल 20 हजार पौधे बेच रहे हैं। उत्पादन च्यादा हो तो च्यादा भी बिक जाऐंगे।
दिलचस्प है कि 90 सेमी. मोटाई पर बिकना आम है पर इसे ढ़ाई मीटर तक फैलने दिया जा सकता है। प्रदेश में सर्दी के दिनों में झड़े इसके पत्ते सूरज की किरणें नहीं रोकते और खेत में ही खाद बन जाते है। तो गर्मी में हर फसल को राहत देते है। यों आठ नौ साल बाद फसल ली जाती है पर कुछ लोग तीन साल बाद ही इसकी कटाई के बारे में सोचने लग जाते हैं।
 प्रदेश में बैंक भी पॉपुलर के नाम पर लोन देने को तैयार है। कम से कम 150 पेड़ो के लिए दिए जाने वाले इस लोन की वापसी के लिए ना तो किश्तें है और ना ही किसी को पहले आठ साल लोन के बारे में पूछा जाता है, साल बाद केवल ब्याज के रूप में मामूली भुगतान करना होता है। फार्म की जमीन में कोई बड़ी गड़बड़ ना हो तो नौ सालों के लिए पॉपुलर पर लोन दिए जा रहे है। सिर्फ जनवरी-फरवरी मं लगने वाले पॉपुलर पर वन विभाग की ओर से सबसिडी पर 12 से 15 फीट के पौधे दिए जाते है और बैंक किसान के नाम पर बैंक को ही भुगतान कर देता है। इतना ही नहीं बैंक आठ सालों तक लगातार लोन भी देते है अगर किसी ने एक हैक्टेयर में पांच हजार पौधे लगाने हों।
वन विभाग अगले साल से हरियाली मिशन के तहत खेतों में मोटर के पास, पानी की खाल व मेढ़ पर लगाने के लिए कुछ इसी तरह के पौधे लगाने जा रहा है जिनमें साधारण मिट्टी पर पापुलर और टाली जबकि सेम वाले क्षेत्रों में सफेदा प्रमुख होगा। हालांकि इसे वन विभाग किसी बीड़ में नहीं लगवाता, लेकिन किसानों के लिए कामर्शियल रूप से खेती करवाने पौधे जरूर उपलब्ध करवाता है।

क्या कहते हैं प्रमुख सचिव

राच्य के वन व वन्य प्राणी विभाग के प्रमुख सचिव डीएस बैंस पापूलर के सवाल पर अपना निजी उदाहरण देते हैं कहते हैं कि वे छोटे किसान हैं और मुक्तसर जिले में उन्होंने अपने फार्म पर पापूलर के पौधे 11 साल पहले लगाए थे और दो साल पहले 17 लाख रूपये की कमाई हुई पिछले साल ये आंकड़ा 15 लाख रूपये रहा और इतनी ही और कमाई होने की उम्मीद अभी और है। ये पौधे भी सिर्फ खेत की मेढ़ पर लगाए गए हैं। किसान चाहे तो अतिरिक्त कमाई इस पौधे से की जा सकती है।


कहां आता है काम
पेंसिल, माचिस की तिल्लीयां, खेेलों का सामान, पैकेजिंग, के अलावा इससे पलाईवुड तैयार होता है। वर्तमान में राज्य में प्लाईवुड की करीब 100 इकाइयां चल रही हैं। जिनमें वार्षिक औसतन 30 लाख क्यूबिक लकड़ी की खपत हो रही है। पड़ोसी राज्य हरियाणा में लकड़ी की बड़ी मंडी है। इसके चलते पंजाब से बड़े स्तर पर लकड़ी बाहर जाती है। हालांकि लकड़ी बाहर भेजने पर दो फीसदी टैक्स लगा हुआ है इसके बावजूद बाहर से आ रहे व्यापारी बिना टैक्स के ही लकड़ी ले जा रहे हैं। हरियाणा से तैयार माल बिलों में जम्मु-कश्मीर के नाम पर चलता है लेकिन बिकता पंजाब में है। जिससे यहां के उद्यमी 12.5 फीसदी वैट बचा रहे हैं। राज्य के व्यापारियों को पॉपुलर कुछ ऐसे लाभ दे रहा है तो किसानों के लिए मुनाफाखोरी के रास्ते पॉपुलर ने खोले है। पंजाब वन निगम सूत्र बताते है कि हरियाणा में किसानों को पंजाब के मुकाबले लकड़ी की ज्यादा कीमत मिलती है। इसके चलते हरियाणा के साथ लगते इलाकों के किसान अपनी लकड़ी हरियाणा में बेच रहे हैं।


कहां से आया पापुलर?
सोशल साइंसेज एंड हैल्थ फोरम के डा. पीपी खोसला पॉपुलर के पंजाब में पापुलर होने के पीछे अलग से तर्क देते है कहते है कि पंजाबियों को कनाडा से इतना प्यार हुआ कि खुद तो वहां जा बसे पर वहां का पेड़ यहां भेज दिया। याद रहे कि उत्तरी अमेरिका से चला ये पेड़ यूरोप होता हुआ पश्चिमी एशिया के रास्ते पंजाब आया है और इसके ठीक विपरीत यही वो रास्ता है जहां से उल्टे पांव कबूतर बाजी होती है।

तीन लाख यूनिट बचाने तीन करोड़ का टाइम टेबल बदला, To save 3 lu units, pspcls changes schedule of 3 crores


-हमे खबर थी पर लोगों को संदेश देना जरूरी: चेयरमैन
-सरकारी कार्यालयों में एसी पर प्रतिबंध से बचे दो लाख यूनिट और लाइट के अंतर से एक लाख यूनिट अनुमानित: डायरेक्टर वितरण
भूपेश चट्ठा, पटियाला
पंजाब में बिजली की अधिकतम मांग 23 सौ लाख यूनिट का आंकड़ा छूने को है, मांग व आपूर्ति का अंतर पिछले एक महीने 20 दिन से 250 से 395 लाख यूनिट प्रतिदिन के बीच रह रहा है। इसी बीच पंजाब सरकार ने एक आदेश जारी कर सरकारी कार्यालयों का समय बदल दिया और एसी बंद करवा दिए। दिलचस्प है कि सरकार की मशक्कत से बिजली के तो कुल तीन लाख यूनिट बचे पर राज्य की करीब तीन करोड़ की आबादी का टाइम टेबल जरूर बदल गया है।
पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड के चेयरमैन इंजी. केडी चौधरी से इसी संदर्भ में बात किए जाने पर उन्होंने बताया कि एसी बंद करने से दो लाख यूनिट बिजली बची है। साथ ही वे कहते हैं कि सबसे पहले अपने कार्यालयों में एसी बंद करने वाला पावरकाम ही था। वे यह भी स्वीकार करते हैं कि ये मात्रा खासी कम है। उन्हें इस बात की खबर थी पर लोगों को संदेश देना जरूरी है कि सरकारी अफसर गर्मी में बिना एसी चलाए काम कर रहे हैं और इसे देखकर लोग भी किफायत से एसी का प्रयोग करें।
 चेयरमैन कहते हैं कि राज्य में चल रहे सभी एसी का कुल लोड 15 सौ से दो हजार मेगावाट के बीच है। यह खासा अधिक है लोग किफायत से एसी का प्रयोग करें। कम से कम बेतहाशा बर्बादी ना करें और प्रयोग में 50 फीसद कमी भी ले आएं तो कट रोके जा सकते हैं।
दूसरी ओर सरकारी कार्यालयों में एसी पर प्रतिबंध से बचे दो लाख यूनिट के अलावा समय में हुए बदलाव से लाइट के प्रयोग के अंतर से संभावित रूप से एक लाख यूनिट बचने का अनुमान है। डायरेक्टर वितरण अरुण वर्मा बताते हैं कि सटीक आंकड़े आने अभी शेष है।
याद रहे कि पावरकाम एक दिन में बिजली की मांग व आपूर्ति के बीच का अंतर रात 12 बजे से अगले दिन रात 12 बजे के बीच 24 घंटों में निकालता है। साधारण परिस्थितियों में बिजली का आंकड़ा किसी भी समय में मेगावाट में तोला जाता है तो पूरे दिन की खपत लाख यूनिट में नापी जाती है।
दूसरी ओर पावरकाम के कुछ अधिकारी कार्यालय समय बदलने के अलावा अभी किसी अन्य प्रकार के उपाय नहीं करने जा रहा है। अपने यहां पर एसी पूरी तरह से प्रतिबंधित होने का दावा करता है तो अन्य कार्यालयों में प्रतिबंध लागू करने की जिम्मेदारी डिप्टी कमिश्नरों पर डालते हैं। इतना ही नहीं पावरकाम के 65 हजार कर्मियों और सरकारी विभागों में काम करते पांच लाख कर्मियों और इन विभागों से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ी तीन करोड़ की आबादी का टाइम टेबल बदलने पर स्वयं को फिलहाल 'मानीटरÓ के नजरिए से देखते हैं।

थर्मल प्लांट: दो को हां और को ना, Only two thermal plant would get coal in Punjab


पंजाब में बिजली उत्पादन
-दो प्लांटों के लिए दिक्कत नहीं तीसरा जीवीके कंपनी अपनी कोयला खदान से चलाएगी: चेयरमैन
भूपेश चट्ठा, पटियाला
पंजाब को बिजली सरपल्स राच्य बनाने का सपना देखती आ रही राच्य सरकार को केंद्र की कोयला लिंकेज नीति से एक और तगड़ा झटका लग गया है। पंजाब में अब पांच में से दो ही थर्मल प्लांटों को केंद्र की कोयला खदानों से कोयला मिल पाएगा। केंद्रीय नीति के चलते दो अन्य प्लांटों का भविष्य लगभग समाप्त हो गया है।
नई कोयला अलाटमेंट नीति अनुसार 2014 तक कमीशन होने वाले प्लांटों को चलाने के लिए ही कोयले का कोटा तय किया गया है। वर्तमान में फाइलों में अटके किसी भी प्लांट को लगा कर चालू करने में प्रयोग किए जाने वाले कोयले का प्रबंध प्लांट का निर्माण करने वाले को ही करना होगा। जिसका एकमात्र उपलब्ध विकल्प विदेशों से कोयला आयात करना है। इसके अलावा पहले कोयला खदान लेनी होगी फिर प्लांट बना बिजली पैदा करने के बारे में सोचना होगा।
पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड के उच्च स्तरीय सूत्र बताते हैं कि इस स्थिति में तलवंडी साबो का 1980 मेगावाट और राजपुरा के निकट नलास में लग रहा 1320 मेगावाट का प्लांट ही आ रहा है। इनमें से भी राजपुरा प्लांट की दूसरी यूनिट देरी होने पर तकनीकी रूप से फंस सकती है। इन प्लांटों के लिए भी 20 फीसद कोयला आयात करना होगा। जिसे देसी कोयले में मिक्स कर जलाया जाएगा हालांकि इसे तकनीकी जरूरत बताया जा रहा है।
वहीं पावरकाम के चेयरमैन इंजी. केडी चौधरी कहते हैं कि इन दोनों प्लांटों के लिए कोई दिक्कत नहीं होगी उन्हें भरोसा दिया गया है, जबकि गोइंदवाल साहिब में जीवीके पावर लिमिटेड का 540 मेगावाट का प्लांट भी बिजली उत्पादन करना शुरु कर देगा। इस कंपनी की अपनी कोयला खदान है। शेष प्लांट तो अभी आरंभिक चरण में ही हैं।
दिलचस्प है कि थर्मल प्लांट को यदि चीन अथवा आस्ट्रेलिया से कोयला आयात करने को कहा जाता है तो वे बिजली के दामों को इससे जोड़ देते हैं और मंहगी बिजली देने की बात होती है। बिजली का प्रति यूनिट मूल्य 6-7 रूपये थर्मल प्लांट से निकलते ही हो जाता है। इस भाव पर खरीदी गई बिजली के उपभोक्ता तक पहुंचने से पहले कई और खर्चे जुडऩे होते हैं।

किन पर गिरेगी गाज

प्रदेश के सबसे बड़े और गिदड़बाहा में लगने वाले 2640 मेगावाट के थर्मल प्लांट के लिए नैशनल थर्मल पावर कारपोरेशन के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर हो चुके हैं, जमीन का अधिग्रहण भी हुआ पर कोल लिंकेज ना मिलने के चलते एनटीपीसी ने बात आगे नहीं बढ़ाई।
तलवंडी साबो के पास ही गोविंद पुरा में निजी क्षेत्र की कंपनी इंडिया बुल्स भी 1400 मेगावाट के थर्मल प्लांट पर काम कर रही है ये प्लांट सात सौ मेगावाट की चीन निर्मित टरबाइन पर आधारित है। हालांकि यहां पर किसानों के साथ ीाी जमीन अधिग्रहण को लेकर विवाद चल रहा है।

बिजली ओवर ड्रा : पंजाब अनुशासित पर यूपी, हरियाणा और राजस्थान.., Power over draw; Punjab is a disciplined state


-जुलाई महीने में 29 तक औसतन ओवर ड्रा- पंजाब ने पांच फीसद, उत्तर प्रदेश ने 31, हरियाणा ने 18 और राजस्थान ने 15 फीसद ज्यादा ली बिजली
-कई बार उत्तर प्रदेश ने 70 फीसद ज्यादा किया ओवर ड्रा, चार बार मिली 'सीÓ ग्रेड की चेतावनी
-हमारे निर्देश स्पष्ट ग्रिड को खतरे में डाल ना हो ओवर ड्रा: चेयरमैन
फोटो:
उपमुख्य संवाददाता, पटियाला
उत्तरी ग्रिड के दो दिनों में लगातार दो बार ठप होने के बाद, बिजली ओवर ड्रा करने के लग रहे आरोपों पर पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड के चेयरमैन इंजी. केडी चौधरी ने पावरकाम मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन आयोजित कर कहा है कि उत्तरी ग्रिड से बिजली लेने वाले सभी राज्यों में पंजाब सबसे अधिक अनुशासन में है और ये बात वे नहीं आंकड़े कह रहे हैं।
नार्दन रीजन लोड डिस्पैच सेंटर से प्राप्त जानकारी के हवाले से इंजी. केडी चौधरी ने बताया कि जुलाई महीने में 29 तारीख तक ग्रिड से बिजली लेने वालों के महीने भर के औसत ओवर ड्रा में पंजाब ने पांच फीसद बिजली ली है, जबकि उत्तर प्रदेश ने 31, हरियाणा ने 18 और राजस्थान ने 15 फीसद ज्यादा बिजली ली है।
इसी बीच कई बार ऐसा समय भी आया है जब उत्तर प्रदेश ने 70 फीसद ज्यादा ओवर ड्रा किया है। 'अब ग्रिड ठप हो सकता हैÓ वाली 'सीÓ ग्रेड की चेतावनी उत्तर प्रदेश को चार बार मिली है, जबकि पंजाब को एक बार भी नहीं मिली है। चेयरमैन बताते हैं कि वे अपने पावर कंट्रोल के सिस्टम आपरेशन विभाग में हाल ही में गए हैं और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि ग्रिड को खतरे में डाल कर ओवर ड्रा ना किया जाए।
इंजी. केडी चौधरी कहते हैं कि बिजली की मांग कभी भी एक स्तर पर नहीं बनी रहती। ऐसे में कभी ग्रिड से ओवर ड्रा होती है तो कभी अंडर ड्रा, लेकिन फ्रिक्वेंसी को ध्यान में रख कर ही किया जाना चाहिए और एक सीमा में ही रहना चाहिए। चेयरमैन कहते हैं कि आज बुधवार को ग्रिड में मांग कम थी तो पंजाब नो 800 मेगावाट बिजली ओवर ड्रा की है, जबकि पंजाब के लिए उपलब्ध ट्रांसमिशन कोटा 5100 मेगावाट ही है और इसे 300 मेगावाट तक बढ़ाने की ही अनुमति है।

बाक्स
हरियाणा ने नहीं किए शार्ट टर्म खरीद समझौते

गर्मी व धान के सीजन में बिजली की मांग को पूरा करने के लिए पंजाब ने 10 जून से बिजली खरीदने के शार्ट टर्म समझौते किए। नार्मल मानसून की रिपोर्ट को देखते हुए मई तक 32 मिलीयन यूनिट बिजली खरीदी गई। मानसून के ठंडा रहने की खबरों के बाद 1100 मिलीयन यूनिट बिजली के शार्ट टर्म समझौते भी पहली दरों 3.91 रूपये प्रति यूनिट की दर पर हो गए। यह काम भी मई अंत तक निपटा लिया गया। जिसने पंजाब को बचाया, जबकि हरियाणा ने ऐसी बिजली नहीं खरीदी। ऐसे में हरियाणा या तो हर रोज खरीद कर रहा है, या फिर ओवर ड्रा कर रहा है। जबकि उत्तर प्रदेश ने ओवर ड्रा का 70 फीसद तक का आंकड़ा छुआ है।

एक घंटे में चलाई बिजली, तीन में आधी सप्लाई बहाल
भूपेश चट्ठा, पटियाला
पहले 2004 और फिर 2008 की सर्दियों में उत्तरी ग्रिड के ठप होने से मिले 'सबक' संभव है उत्तर भारत के बिजली इंजीनियर भूल गए हों, लेकिन एक दिन पहले ग्रिड के ठप होने का 'अनुभव' जरूर काम आया है और उत्तरी ग्रिड व पूर्वी ग्रिड के ठप होने के बाद पंजाब में दोपहर 1:08 बजे गुल हुई बिजली को एक घंटे में चालू कर लिया गया, जबकि तीन घंटे में प्रदेश में बिजली की आधी सप्लाई बहाल कर ली गई और शेष काम शाम ढलने से पहले निपटा लिए गए।
पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड के पावर कंट्रोल के आधिकारिक सूत्र बताते हैं कि ग्रिड के ठप होते ही पंजाब को अन्य राज्यों के बिजली सिस्टम से डी-लिंक किया गया और सवा दो बजे भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड ने अपना पहला यूनिट चालू कर लिया। भाखड़ा से मिली बिजली को पहले रोपड़ के श्री गुरु गोबिंद सिंह सुपर थर्मल प्लांट को दिया गया और फिर बठिंडा के श्री गुरु नानक देव थर्मल प्लांट को। इसी बीच पंजाब के अपने सभी पन बिजली केंद्रों ने उत्पादन शुरू कर दिया। थर्मल प्लांटों के ठंडे होने से बिजली मिल जाने के चलते इन्हें जल्द चालू करने में मदद मिली। सबसे पहले रोपड़ के दो यूनिट चालू किए गए और साढ़े चार बजे तक 50 फीसद क्षेत्रों में बिजली सप्लाई बहाल कर ली गई। शेष सिस्टम को भी शाम ढलने से पहले चला लिया गया।