Saturday, 4 August 2012

थर्मल प्लांट: दो को हां और को ना, Only two thermal plant would get coal in Punjab


पंजाब में बिजली उत्पादन
-दो प्लांटों के लिए दिक्कत नहीं तीसरा जीवीके कंपनी अपनी कोयला खदान से चलाएगी: चेयरमैन
भूपेश चट्ठा, पटियाला
पंजाब को बिजली सरपल्स राच्य बनाने का सपना देखती आ रही राच्य सरकार को केंद्र की कोयला लिंकेज नीति से एक और तगड़ा झटका लग गया है। पंजाब में अब पांच में से दो ही थर्मल प्लांटों को केंद्र की कोयला खदानों से कोयला मिल पाएगा। केंद्रीय नीति के चलते दो अन्य प्लांटों का भविष्य लगभग समाप्त हो गया है।
नई कोयला अलाटमेंट नीति अनुसार 2014 तक कमीशन होने वाले प्लांटों को चलाने के लिए ही कोयले का कोटा तय किया गया है। वर्तमान में फाइलों में अटके किसी भी प्लांट को लगा कर चालू करने में प्रयोग किए जाने वाले कोयले का प्रबंध प्लांट का निर्माण करने वाले को ही करना होगा। जिसका एकमात्र उपलब्ध विकल्प विदेशों से कोयला आयात करना है। इसके अलावा पहले कोयला खदान लेनी होगी फिर प्लांट बना बिजली पैदा करने के बारे में सोचना होगा।
पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड के उच्च स्तरीय सूत्र बताते हैं कि इस स्थिति में तलवंडी साबो का 1980 मेगावाट और राजपुरा के निकट नलास में लग रहा 1320 मेगावाट का प्लांट ही आ रहा है। इनमें से भी राजपुरा प्लांट की दूसरी यूनिट देरी होने पर तकनीकी रूप से फंस सकती है। इन प्लांटों के लिए भी 20 फीसद कोयला आयात करना होगा। जिसे देसी कोयले में मिक्स कर जलाया जाएगा हालांकि इसे तकनीकी जरूरत बताया जा रहा है।
वहीं पावरकाम के चेयरमैन इंजी. केडी चौधरी कहते हैं कि इन दोनों प्लांटों के लिए कोई दिक्कत नहीं होगी उन्हें भरोसा दिया गया है, जबकि गोइंदवाल साहिब में जीवीके पावर लिमिटेड का 540 मेगावाट का प्लांट भी बिजली उत्पादन करना शुरु कर देगा। इस कंपनी की अपनी कोयला खदान है। शेष प्लांट तो अभी आरंभिक चरण में ही हैं।
दिलचस्प है कि थर्मल प्लांट को यदि चीन अथवा आस्ट्रेलिया से कोयला आयात करने को कहा जाता है तो वे बिजली के दामों को इससे जोड़ देते हैं और मंहगी बिजली देने की बात होती है। बिजली का प्रति यूनिट मूल्य 6-7 रूपये थर्मल प्लांट से निकलते ही हो जाता है। इस भाव पर खरीदी गई बिजली के उपभोक्ता तक पहुंचने से पहले कई और खर्चे जुडऩे होते हैं।

किन पर गिरेगी गाज

प्रदेश के सबसे बड़े और गिदड़बाहा में लगने वाले 2640 मेगावाट के थर्मल प्लांट के लिए नैशनल थर्मल पावर कारपोरेशन के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर हो चुके हैं, जमीन का अधिग्रहण भी हुआ पर कोल लिंकेज ना मिलने के चलते एनटीपीसी ने बात आगे नहीं बढ़ाई।
तलवंडी साबो के पास ही गोविंद पुरा में निजी क्षेत्र की कंपनी इंडिया बुल्स भी 1400 मेगावाट के थर्मल प्लांट पर काम कर रही है ये प्लांट सात सौ मेगावाट की चीन निर्मित टरबाइन पर आधारित है। हालांकि यहां पर किसानों के साथ ीाी जमीन अधिग्रहण को लेकर विवाद चल रहा है।

No comments:

Post a Comment