फोटो:
भूपेश चट्ठा, पटियाला
एक दशक पहले तक एक सफल व्यवसायी और क्षेत्र में अच्छे खासे दबदबे और एक प्रकार से जागीरदार ठेकेदार बलविंदर सिंह ने अपने आसपास के गरीब व पिछड़े लोगों के उत्थान के लिए एक छोटी सी शुरुआत की, लेकिन ये प्रयास उनके हद्य की तरह बढ़ता चला गया और इतना बढ़ा की उन्हें कर्जदार भी कर गया लेकिन गुरू साहिबान के इस बंदे ने अपने सेवा नहीं छोड़ी। इस सब कुछ ने ठेकेदार बलविंदर सिंह सैफदीपुर को 'राशन वाले बाबा जीÓ का नाम जरूर दे दिया।
स्वतंत्रता सैनानी स्व. रणजीत सिंह के पुत्र सैफदीपुर आज खुद संस्थान हो गए हैं। उनकी सेवा देख प्रश्न उठते हैं कैसे मैनेज होता है? कहां से पैसा आता है? क्यों करते हैं? इन सवालों पर सैफदीपुर कहते हैं कि वाहे गुरु की कृपा है...मेरी डयूटी लगाई है...मैं कर रहा हूं...संतुष्टी मिलती है...सब परमात्मा देता है...वो ही करता है।
दिलचस्प है कि अर्तराष्ट्रीय भाऊ भाईचारा के बैनर तले सैफदीपुर की ओर से शुरु किए गए मोदी खाने और मुफ्त राशन लेने वालों को कार्ड बना कर पूरे परिवार के लिए आटा-दाल से लेकर नमक, मिर्च, तेल, चाय, चीनी आदी हर घरेलू उपयोग की सामग्री दी जाने लगी तो राजनीतिक दलों की आंख भी उन पर आ गई। शिरोमणि अकाली दल की सरकार के पिछली बार सत्ता में आने से पहले हुए चुनावों के प्रचार के दौरान सनौर से प्रकाश सिंह बादल ने बहु प्रचारित आटा-दाल योजना की घोषणा कर दी। कहा गया कि सत्ता में आए तो हर गरीब के लिए मोदी खाने खोल दिए जाएंगे। हुआ भी कुछ ऐसा ही। फर्क इतना रहा की सरकार ने सस्ता आटा दाल दिया तो सैफदीपुर का मुफ्त रहा। आजकल सैफदीपुर पूरा राशन तो नहीं दे रहे पर आटे में कोई कमी नहीं है वो भी अच्छे ब्रांड के।
दूसरी ओर उनकी ओर से चलाए गए स्कूल व नशा पुनर्वासन केंद्र में होने वाले खर्च का अब आर्थिक प्रबंधन करने के सवाल पर वे कहते हैं कि दुबई के होटल व्यवसायी एसएस ओबेराय ने उनकी बांह थामी है। उन्होंने मूक बधिरों के लिए बनाए गए स्कूल में आठ दस करोड़ रूपये लगाने का विश्वास दिलाया है। इस स्कूल में 152 बच्चे पढ़ रहे हें। वैसे जब कभी जरूरत ज्यादा होती है तो पुराने दोस्तों की मदद भी ले लेते हैं, वैसे सारा खर्च जमीन जायदाद से ही चल रहा है।
उपलब्धियां
-मुफ्त राशन बांटने राज्य भर में 517 मोदी खाने खोले, लाभ लेने वालों की संख्या हजारों में
-वर्ष 2003 में 50 लड़कियों की शादी करवाई, प्रत्येक को 21 हजार रूपये की घरेलू वस्तुएं दी, अब तक आंकड़ा एक हजार के पार योगदान 10-15 हजार में सिमटा
-पटियाला डेफ एंड डम्ब स्कूल को पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला के साथ एक एकड़ जमीन दी,
-निशुल्क मेडिकल कैंप लगाना, मुफ्त दवा और चश्में बांटना
-अंगहीनों के लिए अलग कैंप लगा कैलीपर, ट्राई साइकिल, सुनने वाली मशीन देना
-ढ़ाई एकड़ में नशा पुनर्वासन केंद्र खोला, 30-35 लड़कों के लिए एसी उपचार केंद्र
No comments:
Post a Comment