Tuesday, 7 August 2012

राजिंदरा अस्पताल की इमरजेंसी में मिला नवजात शव, New born baby boy found in Rajindra hospital’s bathroom


-किसी को नहीं पता शिशु मृत फेंका गया या डिलीवरी बाथरूम में हुई
-सुरक्षा कर्मी बाथरूम के दरवाजे से मात्र दो फुट की दूरी पर बैठा रहा
-इमरजेंसी के मुख्यद्वार के आसपास ही तैनात हैं पांच सुरक्षा कर्मी
फोटो:
उपमुख्य संवाददाता, पटियाला
राजिंदरा अस्पताल की इमरजेंसी में बने बाथरूम में एक नवजात शिशु मिला है। लिंग से लड़के इस शिशु की डिलीवरी यहीं पर हुई या इसे कोई बाहर से लाकर डाल गया इस बात की खबर फिलहाल कम से कम अस्पताल प्रशासन को नहीं है। सुबह मिला उक्त शिशु मृत पाया गया है।
 पुलिस को मामले की खबर कर दी गई है। पुलिस अपने स्तर पर जांच कर रही है, वहीं अस्पताल के फारेंसिक विभाग के विशेषज्ञ जांच कर रहे हैं कि शिशु की मौत कहीं बाथरूम में फेंके जाने से अथवा गिरने से तो नहीं हुई है? या फिर मृत अवस्था में ही यहां तक लाया गया है।
दिलचस्प है कि इमरजेंसी में जिस स्थान पर शिशु पड़ा मिला है उस बाथरूम के दरवाजे से मात्र दो फुट की दूरी पर ही सुरक्षा कर्मी बडी टेबल लगा कर बैठा रहता है और सुबह हुए हंगामे के बाद जब सुरक्षा कर्मी से पूछा गया कि वो कहां था? इस पर जवाब दिया गया कि 'वो डयूटी पर ही थाÓ
इतना ही नहीं अस्पताल की सुरक्षा का जिम्मा अथवा ठेका छह लाख रूपये में दिया गया है और सुरक्षा व्यवस्था 'कई मायनोंÓ में खासी कड़ी भी है। इमरजेंसी में प्रवेश करने से पहले मुख्यद्वार पर एक सुरक्षा कर्मी तैनात है। इसके अगले गेट पर दो सुरक्षा कर्मी इमरजेंसी में आने वालों को रोकने व पूछताछ के लिए तैनात है जबकि चौथा बाथरूम के बाहर मेज लगा कर बैठता है। यहीं से लिफ्ट भी चलती है, उसमें भी तैनात व्यक्ति को शामिल कर लिया जाए तो संख्या पांच हो जाती है। सुरक्षा तंत्र के बीच ही उक्त नवजात शिशु का शव मिला है।
पुलिस और विभागीय जांच अभी जारी है इसके बाद ही पता चल पाएगा कि, डिलीवरी हुई? या गलती हुई? या फिर व्यवस्था में ही कोई खामी है?

बाक्स
अस्पताल में लगेंगे सीसीटीवी कैमरे
भूपेश चट्ठा, पटियाला
नवजात शिशु के शव मिलने की सूचना पर सरकारी राजिंदरा अस्पताल मेडिकल कालेज के प्रिंसिपल डा. केडी सिंह कहते हैं पहली नजर में मामला अवैध संतान का लगता है और कोई महिला अस्पताल के बाहर डिलीवरी करवाने के बाद यहां पर आकर शिशु को छोड़ गई। रही बात सुरक्षा कर्मियों की तो महिलाओं की जांच में कई तरह की बंदिशें होती हैं। सुरक्षा व्यवस्था में तकनीक के प्रयोग करने पर वे कहते हैं कि सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने का प्रस्ताव पहले से ही विचाराधीन है। कालेज के होस्टल में ऐसा होना था पर अब इसे अस्पताल में भी सभी तरफ लगाया जाएगा।
संभव है कि सीसीटीवी कैमरे लगने के बाद अस्पताल में एसी के सिलेंडरों से गैस चोरी होने से लेकर, कुत्तों के सरेआम कोरीडोर में घूमने, साफ सफाई का प्रबंध सही रहने और 'बधाईÓ लेने देने जैसी कई प्रवृतियों पर 'आंखÓ लगातार रहेगी। कौनसा डाक्टर कब और कैसे आता है? नर्स आकर क्या करती है? अस्पताल में लड़ाई झगड़े के केस आपस में कैसे 'सुलझाएÓ गए जैसी चीजों पर फुटेज की मदद ली जा सकेगी।

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