स्वतंत्रता के सारथी-अभिव्यक्ति का अधिकार
-एक पटवारी के चक्कर में उलझे एसएसपी स्तर के कई अधिकारी
-2009 में मौके के एसएसपी विजीलेंस से मांगे थे फरद के 20 रूपये
-मुख्यमंत्री ने अपने विशेष सचिव की सिफारिश पर छह अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज करने को कहा
फोटो:
भूपेश चट्ठा, पटियाला
'बात सोलह आने सच्ची हो तो जरूर कहो...ईश्वर पर विश्वास रखो...गलत काम मत करो...फिर परमात्मा के अलावा किसी से मत डरोÓ कुछ ऐसा ही संदेश रुड़की गांव के पटवारी मोहन सिंह भेड़पुरा देते हैं। राज्य सरकार के राजस्व विभाग में चौथी श्रेणी से उपर लेकिन ठीक से तीसरी श्रेणी का भी दर्जा प्राप्त ना करने वाले एक पटवारी ने साबित किया की सच, सच होता है और कमजोर से कमजोर व्यक्ति भी दृढ़ता से बोले तो ताकतवर तो ताकतवर व्यक्ति का झूठ उसके आगे नहीं टिक पाता।
पटवारी मोहन सिंह की कहानी कुछ ऐसी है कि 2009 में मौके के एसएसपी विजीलेंस से उन्होंने एक जमीन की तबदीली पर ली जाने वाली फरद के लिए 20 रूपये मांग लिए। यहीं से परेशानियों, तनाव व अधिकार की लड़ाई का सिलसिला चल निकला। बकौल मोहन सिंह उक्त अधिकारी ने उसे पैसे तो दे दिए पर अगले ही दिन बुलवा भेजा। मुख्यमंत्री, एसजीपीसी तक पहुंची शिकायत का हवाला दे मोहन सिंह बताते हैं कि उन्हें कथित रूप से धमकाया गया, एक इंस्पेक्टर की डयूटी पक्के रूप से लगा दी, उसकी जमीन जायदाद के आंकड़े जुटाए गए। गुमनाम शिकायतें हुई।
अपने इरादों के पक्के भारतीय सैना के इस पूर्व सैनिक के कदम नहीं डगमगाए। मोहन सिंह याद करते हैं कि एक ओर उन पर दवाब बढ़ रहा था तो दूसरी ओर वाहे गुरु उन्हें बर्दाश्त करने की शक्ति देता गया। पटियाला से उठा मोगा ले जाया गया। मामला दर्ज कर लिया गया। अमृत भी भंग हुआ पर हार नहींं मानी अपनी बात उन्होंने श्री अकाल तख्त साहिब, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी और मुख्यमंत्री के पास रखने से लेकर मीडिया तक में उठाई। राजस्व विभाग के कर्मी भी उनके समर्थन में आए काम का बायकाट हुआ, हड़ताल भी हुई।
मामला आगे बढ़ता देख मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने अपने विशेष सचिव काहन सिंह पन्नू की अध्यक्षता में जांच बिठा दी। दिलचस्प है कि इस साल आई कमेटी की रिपोर्ट में की सिफारिशों पर हूबहू कार्रवाई करते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से छह अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज करने के आदेश जारी कर दिए गए हैं। हालांकि आदेश अभी लागू नहीं हुए है। वहीं उक्त एसएसपी व एक एसपी सेवा मुक्त हो चुके हैं जबकि एक इंस्पेक्टर से लेकर ज्वाइंट डायरेक्टर तक के कुल छह अधिकारियों पर तलवार लटक रही है।
याद रहे कि जमीन के एक अन्य मामले में करीब 12 साल पहले पटियाला जिले के रहने वाले तत्कालीन लोक निर्माण मंत्री के भाई से भी मोहन सिंह उलझ गए थे तब नौबत गोली चलने और सैंकड़ों लोगों की ओर से रास्ते जाम करने तक बात पहुंची थी। मोहन सिंह तभी अडिग थे और अपनी बात पर कायम थे और आज भी हैं।
No comments:
Post a Comment