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Saturday, 4 August 2012

पापुलर ने दिया एफडी से च्यादा रिर्टन, Popular gives batter returns then bank FDR



-चार साल में दोगुने हुए दाम
-बैंक दे रहे बिना किश्त का नौ साल के लिए लोन
भूपेश चट्ठा, पटियाला
पंजाब में गेहूं-धान की द्वी-फसलीय चक्र चाहे किसी से ना टूटा हो पर राज्य में खेतों की मेढ़ पर लगने वाला पापुलर खासा पापुलर होने लगा है। कारण सरकार के किसी विभाग अथवा डाईवर्सिफीकेशन  प्रेमियों के प्रयास नहीं है। इसे सिर्फ और सिर्फ आर्थिक कारणों ने लोकप्रिय कर दिया है। हालांकि पहली नजर में पापुलर की बढ़ रही कटाई इसका क्षेत्र कम होने की ओर इशारा कर रही थी, लेकिन सामने आया कि एफडी से ना केवल च्यादा रिर्टन दे रहा है बल्कि लोगों में और च्यादा 'पापुलरÓ हो रहा है।
इसकी कीमतें पिछले चार सालों में दोगुनी हो गई है। 300 रुपये क्विंटल तक बिकने वाला पॉपलर 500 रुपये से लेकर 800 रुपये क्विंटल तक पहुंच गया और पंजाब से बाहर इसके दाम 12 सौ रूपये क्विंटल भी हैं। हरियाणा के जगाधरी, यमुनानगर क्षेत्र में ये दाम अच्छी क्वालिटी और मात्रा होने पर मिलते हें। ऐसे में बैंक एफडी से कहीं अधिक रिर्टन दे रहा है।
नैशनल नर्सरी के एमडी अब्दुल वाहिद बताते हैं कि किसान को सवार्धिक फायदा देने वाला पेड़ है।  20 फुट का तो नर्सरी, में ही किया जा सकता है। पांच साल में किसान को अतिरिक्त आय दे देता है। वे ही हर साल 20 हजार पौधे बेच रहे हैं। उत्पादन च्यादा हो तो च्यादा भी बिक जाऐंगे।
दिलचस्प है कि 90 सेमी. मोटाई पर बिकना आम है पर इसे ढ़ाई मीटर तक फैलने दिया जा सकता है। प्रदेश में सर्दी के दिनों में झड़े इसके पत्ते सूरज की किरणें नहीं रोकते और खेत में ही खाद बन जाते है। तो गर्मी में हर फसल को राहत देते है। यों आठ नौ साल बाद फसल ली जाती है पर कुछ लोग तीन साल बाद ही इसकी कटाई के बारे में सोचने लग जाते हैं।
 प्रदेश में बैंक भी पॉपुलर के नाम पर लोन देने को तैयार है। कम से कम 150 पेड़ो के लिए दिए जाने वाले इस लोन की वापसी के लिए ना तो किश्तें है और ना ही किसी को पहले आठ साल लोन के बारे में पूछा जाता है, साल बाद केवल ब्याज के रूप में मामूली भुगतान करना होता है। फार्म की जमीन में कोई बड़ी गड़बड़ ना हो तो नौ सालों के लिए पॉपुलर पर लोन दिए जा रहे है। सिर्फ जनवरी-फरवरी मं लगने वाले पॉपुलर पर वन विभाग की ओर से सबसिडी पर 12 से 15 फीट के पौधे दिए जाते है और बैंक किसान के नाम पर बैंक को ही भुगतान कर देता है। इतना ही नहीं बैंक आठ सालों तक लगातार लोन भी देते है अगर किसी ने एक हैक्टेयर में पांच हजार पौधे लगाने हों।
वन विभाग अगले साल से हरियाली मिशन के तहत खेतों में मोटर के पास, पानी की खाल व मेढ़ पर लगाने के लिए कुछ इसी तरह के पौधे लगाने जा रहा है जिनमें साधारण मिट्टी पर पापुलर और टाली जबकि सेम वाले क्षेत्रों में सफेदा प्रमुख होगा। हालांकि इसे वन विभाग किसी बीड़ में नहीं लगवाता, लेकिन किसानों के लिए कामर्शियल रूप से खेती करवाने पौधे जरूर उपलब्ध करवाता है।

क्या कहते हैं प्रमुख सचिव

राच्य के वन व वन्य प्राणी विभाग के प्रमुख सचिव डीएस बैंस पापूलर के सवाल पर अपना निजी उदाहरण देते हैं कहते हैं कि वे छोटे किसान हैं और मुक्तसर जिले में उन्होंने अपने फार्म पर पापूलर के पौधे 11 साल पहले लगाए थे और दो साल पहले 17 लाख रूपये की कमाई हुई पिछले साल ये आंकड़ा 15 लाख रूपये रहा और इतनी ही और कमाई होने की उम्मीद अभी और है। ये पौधे भी सिर्फ खेत की मेढ़ पर लगाए गए हैं। किसान चाहे तो अतिरिक्त कमाई इस पौधे से की जा सकती है।


कहां आता है काम
पेंसिल, माचिस की तिल्लीयां, खेेलों का सामान, पैकेजिंग, के अलावा इससे पलाईवुड तैयार होता है। वर्तमान में राज्य में प्लाईवुड की करीब 100 इकाइयां चल रही हैं। जिनमें वार्षिक औसतन 30 लाख क्यूबिक लकड़ी की खपत हो रही है। पड़ोसी राज्य हरियाणा में लकड़ी की बड़ी मंडी है। इसके चलते पंजाब से बड़े स्तर पर लकड़ी बाहर जाती है। हालांकि लकड़ी बाहर भेजने पर दो फीसदी टैक्स लगा हुआ है इसके बावजूद बाहर से आ रहे व्यापारी बिना टैक्स के ही लकड़ी ले जा रहे हैं। हरियाणा से तैयार माल बिलों में जम्मु-कश्मीर के नाम पर चलता है लेकिन बिकता पंजाब में है। जिससे यहां के उद्यमी 12.5 फीसदी वैट बचा रहे हैं। राज्य के व्यापारियों को पॉपुलर कुछ ऐसे लाभ दे रहा है तो किसानों के लिए मुनाफाखोरी के रास्ते पॉपुलर ने खोले है। पंजाब वन निगम सूत्र बताते है कि हरियाणा में किसानों को पंजाब के मुकाबले लकड़ी की ज्यादा कीमत मिलती है। इसके चलते हरियाणा के साथ लगते इलाकों के किसान अपनी लकड़ी हरियाणा में बेच रहे हैं।


कहां से आया पापुलर?
सोशल साइंसेज एंड हैल्थ फोरम के डा. पीपी खोसला पॉपुलर के पंजाब में पापुलर होने के पीछे अलग से तर्क देते है कहते है कि पंजाबियों को कनाडा से इतना प्यार हुआ कि खुद तो वहां जा बसे पर वहां का पेड़ यहां भेज दिया। याद रहे कि उत्तरी अमेरिका से चला ये पेड़ यूरोप होता हुआ पश्चिमी एशिया के रास्ते पंजाब आया है और इसके ठीक विपरीत यही वो रास्ता है जहां से उल्टे पांव कबूतर बाजी होती है।

Saturday, 8 January 2011

पंजाब में पॉपुलर हुआ पॉपुलर

मुनाफे का सौदा
तीन साल में हुई लकड़ी की कीमत में 40 फीसदी वृद्धि
पापुलर के नाम पर बैंक आसानी से दे देते हैं लोन
भूपेश चट्ठा, पटियाला
पंजाब में किसान ने गेहूं और धान से ज्यादा लाभ न मिलते देख पॉपुलर की ओर रुख कर लिया है। इसकी देखभाल भी कम करनी पड़ती है और मुनाफा ज्यादा मिलता है। पिछले तीन साल में इसकी कीमत में 40 फीसदी तक बढ़ोतरी हो गई है। 300 रुपये प्रति क्विंटल तक बिकने वाला पॉपुलर 500 से 800 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है और बैंक एफडी से कहीं अधिक रिटर्न दे रहा है।
सोशल साइंसेज एंड हैल्थ फोरम के डा. पीपी खोसला का कहना है कि उत्तरी अमेरिका से चला यह पेड़ यूरोप होता हुआ पश्चिमी एशिया के रास्ते पंजाब आया है और इसके ठीक विपरीत यही वो रास्ता है जहां से उल्टे पांव कबूतरबाजी होती है।
फाइव एलीमेंट हैल्थ एंड एजुकेशनल सोसायटी के डा. जोगिंदर टाईगर कहते हैं कि किसान को सर्वाधिक फायदा देने वाला पेड़ है। इसे 20 फुट का तो नर्सरी में ही किया जा सकता है। पांच साल में किसान को अतिरिक्त आय दे देता है। 90 सेंटीमीटर मोटाई पर बिकना आम है पर इसे ढाई मीटर तक फैलने दिया जा सकता है। प्रदेश में सर्दी के दिनों में झड़े इसके पत्ते सूरज की किरणें नहीं रोकते और खेत में ही खाद बन जाते हैं। साथ ही गर्मी में हर फसल को राहत भी देते हैं।
बैंक भी पॉपुलर के नाम पर लोन देने को तैयार हैं। कम से कम 150 पेड़ों के लिए दिए जाने वाले इस लोन की वापसी के लिए ना तो किस्तें हैं और ना ही किसी को पहले आठ साल लोन के बारे में पूछा जाता है, साल बाद केवल ब्याज के रूप में मामूली भुगतान करना होता है।

कहां आता है
काम पेंसिल, माचिस, खेलों का सामान, पैकेजिंग के अलावा इससे प्लाईवुड तैयार होता है। राज्य में इस समय प्लाईवुड की करीब 100 इकाइयां चल रही हैं जिनमें वार्षिक औसतन 30 लाख क्यूबिक लकड़ी की खपत हो रही है। पंजाब से बड़ी मात्रा में लकड़ी हरियाणा में भेजी जाती है। हरियाणा से तैयार माल बिलों में जम्मू-कश्मीर के नाम पर चलता है लेकिन बिकता पंजाब में है जिससे यहां के उद्यमी 12.5 फीसदी वैट बचा रहे हैं।