मुनाफे का सौदा
तीन साल में हुई लकड़ी की कीमत में 40 फीसदी वृद्धि
पापुलर के नाम पर बैंक आसानी से दे देते हैं लोन
भूपेश चट्ठा, पटियाला
पंजाब में किसान ने गेहूं और धान से ज्यादा लाभ न मिलते देख पॉपुलर की ओर रुख कर लिया है। इसकी देखभाल भी कम करनी पड़ती है और मुनाफा ज्यादा मिलता है। पिछले तीन साल में इसकी कीमत में 40 फीसदी तक बढ़ोतरी हो गई है। 300 रुपये प्रति क्विंटल तक बिकने वाला पॉपुलर 500 से 800 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है और बैंक एफडी से कहीं अधिक रिटर्न दे रहा है।
सोशल साइंसेज एंड हैल्थ फोरम के डा. पीपी खोसला का कहना है कि उत्तरी अमेरिका से चला यह पेड़ यूरोप होता हुआ पश्चिमी एशिया के रास्ते पंजाब आया है और इसके ठीक विपरीत यही वो रास्ता है जहां से उल्टे पांव कबूतरबाजी होती है।
फाइव एलीमेंट हैल्थ एंड एजुकेशनल सोसायटी के डा. जोगिंदर टाईगर कहते हैं कि किसान को सर्वाधिक फायदा देने वाला पेड़ है। इसे 20 फुट का तो नर्सरी में ही किया जा सकता है। पांच साल में किसान को अतिरिक्त आय दे देता है। 90 सेंटीमीटर मोटाई पर बिकना आम है पर इसे ढाई मीटर तक फैलने दिया जा सकता है। प्रदेश में सर्दी के दिनों में झड़े इसके पत्ते सूरज की किरणें नहीं रोकते और खेत में ही खाद बन जाते हैं। साथ ही गर्मी में हर फसल को राहत भी देते हैं।
बैंक भी पॉपुलर के नाम पर लोन देने को तैयार हैं। कम से कम 150 पेड़ों के लिए दिए जाने वाले इस लोन की वापसी के लिए ना तो किस्तें हैं और ना ही किसी को पहले आठ साल लोन के बारे में पूछा जाता है, साल बाद केवल ब्याज के रूप में मामूली भुगतान करना होता है।
कहां आता है
काम पेंसिल, माचिस, खेलों का सामान, पैकेजिंग के अलावा इससे प्लाईवुड तैयार होता है। राज्य में इस समय प्लाईवुड की करीब 100 इकाइयां चल रही हैं जिनमें वार्षिक औसतन 30 लाख क्यूबिक लकड़ी की खपत हो रही है। पंजाब से बड़ी मात्रा में लकड़ी हरियाणा में भेजी जाती है। हरियाणा से तैयार माल बिलों में जम्मू-कश्मीर के नाम पर चलता है लेकिन बिकता पंजाब में है जिससे यहां के उद्यमी 12.5 फीसदी वैट बचा रहे हैं।
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