Wednesday, 12 January 2011

अब तारें-ट्रांसफार्मर बदलने लगने लगे कट

-31 मार्च तक चलेगा बिजली कटों का सिलसिला
-सिस्टम में बदलाव लाकर ही गर्मियों में हर आम तक पहुंचाई जा सकती है बिजली: डायरेक्टर
-68 फीसदी ओवर लोड है पावरकॉम का ढांचा
भूपेश चट्ठा, पटियाला
गर्मियों में बिजली की कमी के चलते कट लगना आम बात है और हर किसी की समझ में भी आ जाती है, लेकिन पंजाब में कई क्षेत्रों को सिर्फ इसी वजह से बिजली कटों में झोंक दिया जाता है कि यदि गर्मी व धान के सीजन में जिस अनुपात में बिजली की मांग की जा रही है यदि वह दे दी जाए तो सारा सिस्टम ही बैठ जाएगा। ट्रांसफार्मर जल जाएंगे और तारें शार्ट सर्किट हो जाएंगी, ऐसे में मांग बढऩे पर कट लगा कर काम चला दिया जाता है। दिलचस्प है कि सिस्टम के ओवरलोड होने का सिलसिला वर्षों से चलता आ रहा है और बीते साल बढ़ कर इसके 68 फीसदी पर आ जाने के बाद अब इस पर काम चालू हुआ है। कंडक्टर अथवा तारें और ट्रांसफार्मर बदलने का कार्य शुरू होने के साथ ही राज्य की जनता दो घंटे के घोषित कटों के साथ कई-कई घंटों के अघोषित कटों की मार तले आ गई है।
वहीं पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड के
डायरेक्टर प्रबंधन गुरबचन सिंह बची कहते है कि सिस्टम में बदलाव किए बिना सुधार लाना खासा मुश्किल है, ऐसे में इन दिनों के कट हर क्षेत्र में बर्दाश्त किए जा सकते हैं पर गर्मियों में ये खासा परेशान करते है। वे स्वीकार करते है कि पिछले साल के अलावा, बिजली होने पर भी हम बिजली नहीं दे पाए थे। हालांकि वे दावा करते हैं कि सारा काम 31 मार्च से पहले निपटा दिया जाएगा। और इसके बाद कम से कम किसी को बिजली होने पर कट का सामना करना पड़े, ऐसा बिलकुल नहीं होगा। चुनावी वर्ष में ही कार्य के सिरे चढऩे के सवाल पर वे बताते है कि 2003 के बाद से ओवर लोडिंग लगातार बढ़ी है और पावरकॉम के आंतरिक सर्वेक्षण अनुसार 34 हजार 822 ट्रांसफार्मर ओवर लोड हो चुके है। इतना ही नहीं साढ़े पांच हजार किलोमीटर लंबी तारे जिन्हें ट्रांसमिशन की भाषा में कंडक्टर कहा जाता है को बदलना एक लंबी पेचीदा प्रक्रिया रही है। इस साल भी एक हजार करोड़ रूपये का बजट रखा गया है।
पावरकॉम क डायरेक्टर कहते हैं कि सभी टेंडर इत्यादि हो चुके है जनवरी अंत तक मोटे तार पर बीस हजार ट्रांसफार्मर बदल दिए जाएंगे जबकि दो हजार किलोमीटर लाईनें बदली जा चुकी है। चालू वित्तिय वर्ष में सारा काम निपटा दिया जाएगा। साथ ही वे यह भी कहते है कि ग्रिड सब स्टेशनों के बड़े ट्रांसफार्मर बदलने का कार्य इससे अलग है।

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