Tuesday, 18 January 2011

नेट पर कैट से ज्यादा हिट प्याज?


-प्याज को लेकर इंटर नेट पर झक मारने लगे लोग, चर्चा के साथ अफवाहें भी
-गूगल पर आनियन लिखते ही आते हैं 33 करोड़ रिजल्ट
-किसी ने तलाशा टीयर फ्री आनियन, तो किसी को मिला पाव का प्याज
भूपेश चट्ठा, पटियाला
मुन्नी कितनी बदनाम हुई और शीला का क्या हाल है जैसी इंटरनेट पर होने वाली सर्फिंग पर अब कैटरीना व सचिन की जगह प्याज ने ले ली है। दुनिया के आंकड़े जब आएंगे तब आएंगे पर पंजाब में प्याज का ही राज चल रहा है। प्याज उगाने, खाने, बेचने से लेकर आयात-निर्यात में लगे पंजाबियों ने प्याज की तलाश में दुनिया को खंगाल डाला है।
प्याज को लेकर इंटर नेट पर झक मारने का सिलसिला इस कदर बढ़ा है कि नेट पर चिपके रहने वाले लोग चर्चा के साथ अफवाहें भी फैलाने लगे है। दिलचस्प है कि गूगल पर आनियन लिखते ही मात्र आठ सेकंड मेंं 33 करोड़ 60 लाख रिजल्ट सामने आ जाते है। मोदी कालेज के पास साइबर फेंटेसी के मालिक हरदमन सिंह कहते है कि किसी ने टीयर फ्री आनियन की तलाश की है,तो किसी को मिला है एक किलो में तीन से चार चढऩे वाला पाव का प्याज।
जीएम फसलों का विरोध करने वालों के लिए राहत की बात ये है कि न्यूजीलेंड में एक कंपनी द्वारा तैयार किए गए पहले जेनेटिकली माडीफाईड प्याज का विरोध वहां के लोगों ने शुरू कर दिया है। यूरोप में कई रंगों में प्याज आता है तो मिश्र में धरती के बाहर पौधे पर गुच्छे में उगता है। हालांकि कुछ को आनियन की तलाश में मेग्जीन व टेलीविजन चैनल भी मिले है।

शहर में एक विशेष पसंद रखने वालों के बीच खासे लोकप्रिय त्रिपड़ी क्षेत्र के दिल्ली ढ़ाबे के मालिक महींदर सिंह गांधी कहते है कि आजकल प्याज की कमी है और कहीं किसी केमिकल के मिलाने से तो इसका साइज बड़ा नहीं किया जा रहा। उनका तर्क है कि प्याज तड़के के दौरान ज्यादा तेल पीने लगा है। वहीं पर्यावरणविद् अमरदीप सिंह कहते है कि अब प्याज खोखला हो चुका है। स्वाद तो गया ही, सेहत के लायक भी नहीं रहा। केलेस्ट्राल कम कर हार्ट अटैक रोकने वाला नहीं रहा है, अब प्याज। इसके लिए खेतों में डाली जा रही दवाएं दोषी है यही वो केमिकल है।

दिलचस्प है कि प्याज के औषधी गुण सबसे ज्यादा शोध का विषय है दाम का यहां कोई महत्व नहीं है। पंजाबी युनिवर्सिटी के शोध छात्र गुरजीत सिंह बताते है कि ऐसा माना जाता है कि प्याज की उत्पत्ति ईरान, पश्चिमी पाकिस्तान और उत्तर के पहाड़ी क्षेत्रों में हुई है। प्याज की प्राचीनता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पिरामिड निर्माता भी प्याज खाते थे। प्याज प्राचीन मिस्र में प्रिय भोजन सामग्री था। वहां के मकबरों पर इसे उकेरा गया है। यही नहीं ममियों के साथ भी प्याज मिले हैं। प्याज का जिक्र बाइबल और कुरान में भी आया है। कहने का आशय यह है कि प्याज का जिक्र हिप्पोक्रेटस से आज तक होता आया है।

प्याज में केलिसिन और रायबोफ्लेविन (विटामिन बी) पर्याप्त मात्रा में होता है। इसमें 11 प्रतिशत कार्बोहाइड्रेट होता है और इसकी गंध एन-प्रोपाइल-डाय सल्फाइड के कारण आती है। यह पदार्थ पानी में घुलनशील अमीनों अम्लों पर एन्जाइम की क्रिया के कारण बनता है। यही कारण है कि प्याज को काटने पर ही आँसू आते हैं। यह एक बेहतरीन औषधि भी है। प्याज अजीर्ण और पतले दस्त में लाभकारी है। यह जीवाणुरोधी, तनावरोधी व दर्द निवारक,मधुमेह नियंत्रक, प्रदाह निवारक, पथरी हटाने वाला और गठियारोधी भी है। त्वचा पर घिसने से यह बालों में वृद्धि करता है। लू-लपट में घर से निकलने से पूर्व जेब में प्याज रखकर निकलने की हिदायत तो बुजुर्ग देते ही रहते हैं।

प्याज से आंसू गायब हुए तो इसका रस सांप के काटे जाने पर सरसों के तेल में मिला पिलाने लायक रहेगा और ना ही विद्यार्थियों के काख में दबाने पर बुखार ही चढ़ाएगा, फिर प्याज प्याज नहीं आलू हो जाएगा। याद रहे कि चीन के बाद भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा प्याज उत्पादक देश है और इन दोनों ही देशों ने दुनिया की आबादी खूब बढ़ाई है।

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