-लांकों के साथ राजपुरा प्लांट का समझौता पहले भी रद्द हो चुका है
-राष्ट्रीय बिजली नीति नहीं कहती एमओयू साइन करो और पीएसईआरसी भी एतराज जता चुकी है
भूपेश चट्ठा, पटियाला
पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड ने निजी क्षेत्र की एक और कंपनी के साथ बिजली उत्पादन करने का मैमोरेंडम ऑफ अंडरस्टेंडिंग पर हस्ताक्षर किया है। लांको इंफ्राटेक लिमिटेड हैदराबाद के साथ 1320 मेगावाट क्षमता का थर्मल प्लांट लगाने का समझौता किया गया है। कंपनी 660 मेगावाट क्षमता की कोयला आधारित दो इकाईयां लगाएगी। बठिंडा जिले के कोट शमीर में लगने वाला यह प्लांट करीब 1200 एकड़ जमीन पर लगेगा।
कंपनी के साथ एमओयू साइन करने के बाद पावरकॉम के चेयरमैन इंजी. केडी चौधरी ने बताया कि प्लांट को सरहिंद नहर की बठिंडा ब्रांच की फूल डिस्ट्रीब्यूटरी से पानी मिलेगा और सुपर क्रिटीकल तकनीकि पर आधारित यह प्लांट कम प्रदूषण करने वाला होगा और इसकी चिमनियां 270 मीटर उंची होंगी। प्लांट के लिए कोयले का प्रबंध कंपनी खुद करेगी आर इसकी पहली यूनिट 40 महीनों में उत्पादन शुरू कर देगी जबकि दूसरी यूनिट 44 महीने में बिजली उत्पादन चालू कर देगी।
प्रदेश में बिजली उत्पादन के क्षेत्र में साइन होने वाला यह छटा एमओयू है। आधिकारिक सूत्र बताते है कि राज्य सरकार ने करीब इतने ही स्थान और तलाशे हुए है जहां पर पानी व जमीन उपलब्ध है। ऐसे में बिना उत्पादन व खरीद शर्तें तय किए एमओयू साइन करने में ना तो किसी कंपनी को एतराज है और ना ही पावरकाम का ही कुछ खर्च हो रहा है।
याद रहे कि लांकों के साथ राजपुरा प्लांट का समझौता पहले भी रद्द हो चुका है। जहां पर सिर्फ एक ही कंपनी बोली में शामिल हुई थी और 3.38 रूपये प्रति यूनिट की दर से बिजली खरीद का समझौता हुआ, जिसे बाद में मोलभाव के बाद आठ पैसे कम कर दिया गया। लेकिन पंजाब स्टेट इलेक्ट्रिसिटी रेग्यूलेटरी कमीश्न के कड़े रुख के बाद पुन: बोली हुई और एलएंडटी के खाते में प्लांट चला गया। पीएसईआरसी का कहना है कि राज्य को एमओयू साइन करने की बजाए खुली बोली की प्रक्रिया ही अपनानी चाहिए। राष्ट्रीय बिजली नीति भी यही कहती है कि एमओयू साइन ना करो और खुली बोली से निविदांए आंमत्रित करें।
Wednesday, 9 February 2011
Tuesday, 8 February 2011
अपणा पंजाब होवे.. पर न शराब होवे
अपणा पंजाब होवे पर दारू दी दुकान ना होवे
-71 गांवों की पंचायतों ने आबकारी विभाग को प्रस्ताव भेजा हमारे यहां ठेका बंद हो
-विभाग ने पूछा आखिर ऐतराज क्या है, हर्ज क्या है?
भूपेश चट्ठा, पटियाला
अपणा पंजाब होवे, घर दी शराब होवे, मूली नाल गंडा (प्याज) होवे, बाण वाला मंजा होवे..।
गुरूदास मान के इस लोकप्रिय हिट का पंजाब के गांवों विशेष रूप से मालवा क्षेत्र की पंचायतों ने नकारना शुरू कर दिया है। आबकारी नीति आने से पहले 71 गांवों की पंचायतों ने आबकारी विभाग को प्रस्ताव पारित कर दिया है कि उनके यहां शराब का ठेका ना खोला जाए और विभाग ने आज कुछ पंचायतों के प्रतिनिधियों को बुलवा कर सुनवाई भी की है कि आखिर उन्हें 'एतराज क्या है?Ó, 'हर्ज ही क्या है?Ó
पंजाब का डोमोसाइल बनते ही पैग के साथ नाता या तो जुड़ जाता है या फिर जोड़ दिया जाता है और आबकारी आयुक्त के मुख्यालय वाले शहर पटियाला में यह नाता कुछ ज्यादा ही गहरा और करीब का है। एक ओर जहां गांव की पंचायतों में शराब के ठेके बंद करवाने प्रति जागरूकता बढ़ी है वहीं विभाग ने भी 'गहराई से छानबीनÓ शुरू कर दी है कि कहीं इस सादगी के पीछे अफीम तस्करों या अवैध शराब बेचने वालों का हाथ तो नहीं है।
प्रदेश में पिछले साल ऐसी पंचायतों की संख्या 55 थी और अब बढ़ कर 71 हो गई है। सबसे अधिक जागरुकता लाने वालों में संगरूर जिला है जहां सेे 44 पंचायतों ने ऐसे आवेदन किए है। दिलचस्प है कि पिछले साल आबकारी विभाग ने कुछ पंचायतों का यह आवेदन विभिन्न तर्क दे कर रद्द कर दिया था।
संगरूर के ही एडवोकेट कमल आनंद बताते है कि पंचायत राज अधिनियम की धारा 40 के तहत गांव की पंचायत प्रस्ताव पारित करे तो गांव में से ठेका हटाया जा सकता है या फिर खुलने से ही रोका जा सकता है। पर ज्यादातर को पता ही नहीं है कि लोकतंत्र में जन प्रतिनिधियों को क्या अधिकार है। संगरूर के कुछ एनजीओ ने लोगों को बताया तो इस दिशा में प्रगति हुई है, पिछले साल कि तुलना में इस बार संख्या भी बढ़ी है।
वहीं सकरोदी गांव के सरपंच हरिंदर सिंह कहते है कि अभी तो उनके पंच को आबकारी कमीश्नर ने 'देखते हैÓ का ही आश्वासन मिला है। हम से पूछा गया कि आप गांव का शराब का ठेका क्यों बंद करवाना चाहते हो। तुम्हारे गांव में तो अवैध शराब पकड़ी गई थी मामला भी दर्ज है, लेकिन हमने उन्हें बताया कि ऐसा कुछ भी नही हुआ हम तो बस इस बीमारी को ही दूर रखना चाहते है।
उधर आबकारी कमीश्नर वैणु प्रसाद बताते है कि इस साल अभी तक उनके पास 71 आवेदन आए है और कुछ पंचायतों के प्रतिनिधियों से बुलवा कर बात की गई है लेकिन अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। वे मामला देख रहे है।
पंजाब में वर्ष 2009-10 में अंग्रेजी व देशी शराब की करीब 29 करोड़ बोतलें बिकीं। सरकार को शराब बिक्री से वर्ष 2007-08 में शराब से 1800 करोड़ रुपये, 2008-09 में 2000 करोड़ व वर्ष 2010 में 2500 करोड़ रुपये का टैक्स प्राप्त हुआ। (स्रोत : विभागीय आंकड़े
-71 गांवों की पंचायतों ने आबकारी विभाग को प्रस्ताव भेजा हमारे यहां ठेका बंद हो
-विभाग ने पूछा आखिर ऐतराज क्या है, हर्ज क्या है?
भूपेश चट्ठा, पटियाला
अपणा पंजाब होवे, घर दी शराब होवे, मूली नाल गंडा (प्याज) होवे, बाण वाला मंजा होवे..।
गुरूदास मान के इस लोकप्रिय हिट का पंजाब के गांवों विशेष रूप से मालवा क्षेत्र की पंचायतों ने नकारना शुरू कर दिया है। आबकारी नीति आने से पहले 71 गांवों की पंचायतों ने आबकारी विभाग को प्रस्ताव पारित कर दिया है कि उनके यहां शराब का ठेका ना खोला जाए और विभाग ने आज कुछ पंचायतों के प्रतिनिधियों को बुलवा कर सुनवाई भी की है कि आखिर उन्हें 'एतराज क्या है?Ó, 'हर्ज ही क्या है?Ó
पंजाब का डोमोसाइल बनते ही पैग के साथ नाता या तो जुड़ जाता है या फिर जोड़ दिया जाता है और आबकारी आयुक्त के मुख्यालय वाले शहर पटियाला में यह नाता कुछ ज्यादा ही गहरा और करीब का है। एक ओर जहां गांव की पंचायतों में शराब के ठेके बंद करवाने प्रति जागरूकता बढ़ी है वहीं विभाग ने भी 'गहराई से छानबीनÓ शुरू कर दी है कि कहीं इस सादगी के पीछे अफीम तस्करों या अवैध शराब बेचने वालों का हाथ तो नहीं है।
प्रदेश में पिछले साल ऐसी पंचायतों की संख्या 55 थी और अब बढ़ कर 71 हो गई है। सबसे अधिक जागरुकता लाने वालों में संगरूर जिला है जहां सेे 44 पंचायतों ने ऐसे आवेदन किए है। दिलचस्प है कि पिछले साल आबकारी विभाग ने कुछ पंचायतों का यह आवेदन विभिन्न तर्क दे कर रद्द कर दिया था।
संगरूर के ही एडवोकेट कमल आनंद बताते है कि पंचायत राज अधिनियम की धारा 40 के तहत गांव की पंचायत प्रस्ताव पारित करे तो गांव में से ठेका हटाया जा सकता है या फिर खुलने से ही रोका जा सकता है। पर ज्यादातर को पता ही नहीं है कि लोकतंत्र में जन प्रतिनिधियों को क्या अधिकार है। संगरूर के कुछ एनजीओ ने लोगों को बताया तो इस दिशा में प्रगति हुई है, पिछले साल कि तुलना में इस बार संख्या भी बढ़ी है।
वहीं सकरोदी गांव के सरपंच हरिंदर सिंह कहते है कि अभी तो उनके पंच को आबकारी कमीश्नर ने 'देखते हैÓ का ही आश्वासन मिला है। हम से पूछा गया कि आप गांव का शराब का ठेका क्यों बंद करवाना चाहते हो। तुम्हारे गांव में तो अवैध शराब पकड़ी गई थी मामला भी दर्ज है, लेकिन हमने उन्हें बताया कि ऐसा कुछ भी नही हुआ हम तो बस इस बीमारी को ही दूर रखना चाहते है।
उधर आबकारी कमीश्नर वैणु प्रसाद बताते है कि इस साल अभी तक उनके पास 71 आवेदन आए है और कुछ पंचायतों के प्रतिनिधियों से बुलवा कर बात की गई है लेकिन अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। वे मामला देख रहे है।
पंजाब में वर्ष 2009-10 में अंग्रेजी व देशी शराब की करीब 29 करोड़ बोतलें बिकीं। सरकार को शराब बिक्री से वर्ष 2007-08 में शराब से 1800 करोड़ रुपये, 2008-09 में 2000 करोड़ व वर्ष 2010 में 2500 करोड़ रुपये का टैक्स प्राप्त हुआ। (स्रोत : विभागीय आंकड़े
अकाली रैली संगठन की शक्ति या बसों की गिनती
- हर हल्का इंचार्ज छह हजार रूपये प्रति बस की कुर्बानी देने को तैयार
-उपर से आदेश है तो नंबर बनाने अग्रिम पंक्ति में आने वाला दो चार लाख खर्च करने को तैयार
-अभी पोस्टर वार भी देखेंगे पटियाला के लोग
भूपेश चट्ठा, पटियाला
दस फरवरी को शहर के पोलो मैदान में होने जा रही शिरोमणि अकाली दल की युवा ईकाई की रैली युवा नेताओं के बीच शक्ति प्रदर्शन करने और संगठन की शक्ति से विपक्ष को अवगत करवाने से शुरू हुई पर अब ये संख्या बल दिखाने का काम हवाई वायदों में ज्यादा तबदील होता जा रहा है।
बसों की गिनती बढ़चढ़ कर दिखाई, बताई और रैली प्रबंधकों को लिखाई जा रही है। पार्टी के सूत्र बताते है कि अगर एक विधानसभा क्षेत्र का पार्टी इंचार्ज अपने क्षेत्र में आ कर चार सौ बसों की बात कर रहा है तो दोबारा पूछने पर तीन सौ का आंकड़ा पुष्टि के साथ बताता है और कहता है कि इसमें से दो-ढ़ाई सौ तो पूरी भरी होंगी। बसें कहां से आएंगी? इस पर बठिंडा से हिसार और बीकानेर तक का नाम ले लिया जाता है।
वहीं प्रदेश की राजनीति को चार दशक से करीब से देखते आ रहे ऐसे ही एक प्रबंधक बताते है कि एक व्यक्ति जमीन पर बैठने तीन फीट की जगह लेता है, सर्दी में यह कम तो गर्मी में दायरा बढ़ जाता है और कुर्सी पर घेरा और ज्यादा जगह लेता है। वे बताते है कि पंजाब में कोई भी पांच-सात हजार लोगों की रैली लाख बंदों की हो जाती है। इससे ज्यादा तो शिव कुमार बटालवी को ही लोगों ने सुना है। या धार्मिक दीवान हों तो हों। स्टेज कितने दायरे में है? डी कैसी है? पैसेज कितना छोड़ा गया है? इसके बाद ही वर्ग फीट तय कर देता है कि क्या हुआ।
दूसरी ओर यूथ अकाली दल के पूर्व प्रधान व वर्तमान मेयर अजीत पाल सिंह कोहली कहते है कि ये एक साफ सुथरी प्रतिस्पर्धा है और साबित करती है कि हर तरफ उत्साह है, यह भी सही है कि हर कोई शक्ति प्रदर्शन की दौड़ में है पर रैली पार्टी की ही है। एक हल्का इंचार्ज की ओर से 300 बसें भर कर लाए जाने के सवाल पर मेयर कहते है कि सभी युवा नेताओं की ड्यूटियां लगी है किसी ने 35 बसें लाने की बात कही है तो कोई 40 बसें भर लाने की जिम्मेवारी लिखवा आया है। एक बस के शहर में खड़ी करने पर आखिर जगह की भी जरूरत होगी? इस पर मेयर कोहली कहते है कि पोलो मैदान के पास अमर आश्रम के पास खाली पार्किंग और निगम कार्यालय के निकट पीडब्ल्यूडी की जमीन की अनुमति ली गई है। इसी तरह सूलर रोड पर भी दो सौ के करीब बसें खड़ी की जा सकती है। अपने बारे में वे स्पष्ट करते है कि शहर में बसों की जरूरत तो है नहीं, उनकी डयूटी दो हजार बंदों की है, वो पूरी होगी।
दिलचस्प है कि पीआरटीसी के पास 1050 बसें है और इसमें किलोमीटर योजना वाली बसें भी शामिल है, शहर के बस स्टेंड में करीब 200 बसें खड़ी की जा सकती है। 32 गुणा आठ फीट की बस के लिए कम से कम चार सौ वर्ग फीट की जगह चाहिए।
सूत्र कहते है कि चुनावी वर्ष है टिकट किसे नहीं चाहिए? हर हल्का इंचार्ज छह हजार रूपये प्रति बस की कुर्बानी देने को तैयार है। उपर से आदेश है तो नंबर बनाने और अग्रिम पंक्ति में आने वाला सेकेंड लाइन नेता दो चार लाख खर्च करने को तैयार है। शहर के लोग अभी पोस्टर वार भी देखेंगे, कुछ नए पोस्टर लगेंगे, तो कुछ के फट भी सकते है और किसी के आगे बैनर लगा होगा तो किसी के उपर पोस्टर चस्पा होगा।
-उपर से आदेश है तो नंबर बनाने अग्रिम पंक्ति में आने वाला दो चार लाख खर्च करने को तैयार
-अभी पोस्टर वार भी देखेंगे पटियाला के लोग
भूपेश चट्ठा, पटियाला
दस फरवरी को शहर के पोलो मैदान में होने जा रही शिरोमणि अकाली दल की युवा ईकाई की रैली युवा नेताओं के बीच शक्ति प्रदर्शन करने और संगठन की शक्ति से विपक्ष को अवगत करवाने से शुरू हुई पर अब ये संख्या बल दिखाने का काम हवाई वायदों में ज्यादा तबदील होता जा रहा है।
बसों की गिनती बढ़चढ़ कर दिखाई, बताई और रैली प्रबंधकों को लिखाई जा रही है। पार्टी के सूत्र बताते है कि अगर एक विधानसभा क्षेत्र का पार्टी इंचार्ज अपने क्षेत्र में आ कर चार सौ बसों की बात कर रहा है तो दोबारा पूछने पर तीन सौ का आंकड़ा पुष्टि के साथ बताता है और कहता है कि इसमें से दो-ढ़ाई सौ तो पूरी भरी होंगी। बसें कहां से आएंगी? इस पर बठिंडा से हिसार और बीकानेर तक का नाम ले लिया जाता है।
वहीं प्रदेश की राजनीति को चार दशक से करीब से देखते आ रहे ऐसे ही एक प्रबंधक बताते है कि एक व्यक्ति जमीन पर बैठने तीन फीट की जगह लेता है, सर्दी में यह कम तो गर्मी में दायरा बढ़ जाता है और कुर्सी पर घेरा और ज्यादा जगह लेता है। वे बताते है कि पंजाब में कोई भी पांच-सात हजार लोगों की रैली लाख बंदों की हो जाती है। इससे ज्यादा तो शिव कुमार बटालवी को ही लोगों ने सुना है। या धार्मिक दीवान हों तो हों। स्टेज कितने दायरे में है? डी कैसी है? पैसेज कितना छोड़ा गया है? इसके बाद ही वर्ग फीट तय कर देता है कि क्या हुआ।
दूसरी ओर यूथ अकाली दल के पूर्व प्रधान व वर्तमान मेयर अजीत पाल सिंह कोहली कहते है कि ये एक साफ सुथरी प्रतिस्पर्धा है और साबित करती है कि हर तरफ उत्साह है, यह भी सही है कि हर कोई शक्ति प्रदर्शन की दौड़ में है पर रैली पार्टी की ही है। एक हल्का इंचार्ज की ओर से 300 बसें भर कर लाए जाने के सवाल पर मेयर कहते है कि सभी युवा नेताओं की ड्यूटियां लगी है किसी ने 35 बसें लाने की बात कही है तो कोई 40 बसें भर लाने की जिम्मेवारी लिखवा आया है। एक बस के शहर में खड़ी करने पर आखिर जगह की भी जरूरत होगी? इस पर मेयर कोहली कहते है कि पोलो मैदान के पास अमर आश्रम के पास खाली पार्किंग और निगम कार्यालय के निकट पीडब्ल्यूडी की जमीन की अनुमति ली गई है। इसी तरह सूलर रोड पर भी दो सौ के करीब बसें खड़ी की जा सकती है। अपने बारे में वे स्पष्ट करते है कि शहर में बसों की जरूरत तो है नहीं, उनकी डयूटी दो हजार बंदों की है, वो पूरी होगी।
दिलचस्प है कि पीआरटीसी के पास 1050 बसें है और इसमें किलोमीटर योजना वाली बसें भी शामिल है, शहर के बस स्टेंड में करीब 200 बसें खड़ी की जा सकती है। 32 गुणा आठ फीट की बस के लिए कम से कम चार सौ वर्ग फीट की जगह चाहिए।
सूत्र कहते है कि चुनावी वर्ष है टिकट किसे नहीं चाहिए? हर हल्का इंचार्ज छह हजार रूपये प्रति बस की कुर्बानी देने को तैयार है। उपर से आदेश है तो नंबर बनाने और अग्रिम पंक्ति में आने वाला सेकेंड लाइन नेता दो चार लाख खर्च करने को तैयार है। शहर के लोग अभी पोस्टर वार भी देखेंगे, कुछ नए पोस्टर लगेंगे, तो कुछ के फट भी सकते है और किसी के आगे बैनर लगा होगा तो किसी के उपर पोस्टर चस्पा होगा।
Friday, 4 February 2011
टोहरा युग के साथ, सिखों के पोप की सत्ता का अंत?
-भोग से संगत गायब, सिर्फ नेताओं का जमावड़ा
-टोहरा काल की रबड़ी जला हुआ दूध रह गई
भूपेश चट्ठा, टोहरा पटियाला
आज से छह साल पहले जत्थेदार गुरचरण सिंह टोहरा के देहांत पर उत्तर भारत की हर सड़क टोहरा गांव की ओर ही जा रही थी। राज्य में कांग्रेस और केंद्र में संयुक्त प्रगतीशील गठबंधन की सत्ता होने के बावजूद शिरोमणि गुरूद्वारा प्रबंधक कमेटी के 21 बार प्रधान रहे स्व. जत्थेदार टोहरा को सिखों का पोप कह उन्हें पंथ रत्न का दर्जा दे दिया गया। गांव में केंसर अस्पताल से लेकर युनिवर्सिटी और स्टेडियम तक की घोषणाएं हो गई। इसके बाद टोहरा गांव में अकालियों कांग्रेसियों के इतने चक्कर लगे कि एक तरह से गांव को वेंटिकन सिटी का दर्जा प्राप्त हो गया पर आज पंथ रत्न की पत्नि स्व. बीबी जोगिंदर कौर के पाठ पर साफ संदेश देने की कोशिश कर दी गई है कि एक युग का अंत हो गया है और सिखों के पोप की सत्ता का भी औपचारिक अंत हो गया है।
पंथ रत्न की बरसी पर हर बार शामिल होने वाले हरनेक सिंह कहते है कि पिछले सालों में हर बरस होने वाले कार्यक्रमों में संगत लगभग बीस फीसदी की दर से कम होती जा रही थी पर अब तो बिलकुल ही गायब है, सरकार है तो सरकारी अमला है, इंतजाम है पर देखो लंगर भी वापिस भेजा जा रहा है, दरियां पूरी बिछाई ही नहीं गई जबकि जगह सिंगोड़ दी गई है। फिर भी ये हाल है। भोग से संगत गायब, सिर्फ नेताओं का जमावड़ा है या फिर उनके साथ आई एक रंग विशेष की खुफिया पगडिय़ां दिखाई दे रही है।
ऐसे ही भादसों में तैनात सरकारी कर्मी कहते है कि टोहरा काल की रबड़ी आज जला हुआ दूध रह गई है, सड़कें टूट रही है पैच वर्क की जरूरत है पर होगा नहीं यह तय है। पहले लोग अपनी मर्जी से यहां लगंर लगाने जद्दोजहद करते थे आज एसजीपीसी पर निर्भरता है।
दिलचस्प है कि स्व. बीबी जोगिंदर कौर के भोग पर एक बार फिर जत्थेदार टोहरा की स्मृति में स्मारक बनाने और एक शानदार स्टडी सेंटर खोले जाने की घोषणा को उपहास की दृष्टि से देखा गया है, भोग पर ही दबी जुुबां से विधान सभा चुनावों में पंथ रत्न की गोद ली पुत्री को टिकट के लिए हो रही कवायद से ज्यादा जोड़ा गया। कहा गया कि बादल साहब बाकी घोषणाएं छोड़ ये कर दे तो सब शांत है। ना कोई मनप्रीत खेमे में अपने बंदे भेजेगा और ना ही कोई कांग्रेसियों के संपर्क में रहेगा।
Wednesday, 2 February 2011
टोहरा स्मारक जल्द बनाए राज्य सरकार: परनीत कौर
विदेश राज्य मंत्री पहुंची बीबी टोहरा के देहांत पर अफसोस करने
भूपेश चट्ठा, टोहरा, पटियाला
शिरोमणि गुरूद्वारा प्रबंधक कमेटी के 21 बार प्रधान रहे पंथ रत्न गुरचरण सिंह टोहरा की स्मृति में घोषित किए गए स्मारक का निर्माण राज्य सरकार को जल्द करवाना चाहिए। ये विचार आज विदेश राज्य मंत्री परनीत कौर ने टोहरा गांव में पत्रकारों के साथ अनौपचारिक बातचीत में व्यक्त किए है।
स्व. बीबी जोगिंदर कौर टोहरा के देहांत पर अफसोस करने पहुंची परनीत कौर ने कहा कि पिछली कांग्रेस सरकार ने बीबी टोहरा के लिए कई सुविधाओं की घोषणाएं की थी। इसमें पटियाला में एक घर को खाली भी रखा गया। 15 हजार रूपये मासिक पैंशन के अलावा कैबिनेट रैंक का दर्जा शामिल था। हालांकि अकाली होने का कारण बता कांग्रेस कार्यकाल में स्व. बीबी टोहरा ने उक्त सुविधाएं लेने से इंकार कर दिया था। जबकि वर्तमान सरकार ने सत्ता में आने के 36 महीने बाद पिछले साल अगस्त में बीबी टोहरा को कैबिनेट रैंक का दर्जा दिया है।
इससे पहले परनीत कौर ने स्व. जोगिंदर कौर टोहरा की बेटी कुलदीप कौर टोहरा से मिल कर अफसोस प्रकट किया। इस अवसर पर पूर्व मंत्री व पंथ रत्न के जंवाई हरमेल टोहरा और जिला परिषद सदस्य व नाती हरिंदरपाल सिंह टोहरा भी मौजूद रहे। याद रहे कि स्व. बीबी जोगिंदर कौर टोहरा का वृद्धा अवस्था की एक बीमारी के बाद 82 साल की उम्र में 26 जनवरी को देहांत हो गया था।
उल्लेखनीय है कि पंजाब सरकार ने हाल ही में बहादुर पुर गांव में जत्थेदार टोहरा की स्मृति में स्मारक बनाने की घोषणा की है, हालांकि एसजीपीसी के दो पूर्व प्रधान बीबी जागीर कौर और प्रो. कृपाल सिंह बडूंगर और वर्तमान प्रधान अवतार सिंह मक्कड़ भी ऐसी ही घोषणाएं कर चुके है। लेकिन सिरे कोई भी नहीं चढ़ी। छह साल पहले बीबी जागीर कौर ने 2004 में मोहाली के गुरूद्वारा अंब साहिब में 'जत्थेदार गुरचरण सिंह टोहरा इंस्टीटयूट आफ एडवांस सिख स्टडीजÓ बनाने की घोषणा की तो प्रो. बडूंगर ने पंथ रत्न की याद में चंडीगढ़ के सेक्टर 44 में आईएएस व आईपीएस ट्रेनिंग इंस्टीटयूट की घोषणा की। जबकि जत्थेदार मक्कड़ ने चपड़चिड़ी में एक शैक्षिक संस्थान की घोषणा कर रखी है। यह भी कागजों में ही है।
इतना ही नहीं मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने भी 10 नवंबर 2005 को ऐसा ही शिलान्यास किया लेकिन बात आज भी वहीं पर रुकी है जहां से शुरू हुई थी।
भूपेश चट्ठा, टोहरा, पटियाला
शिरोमणि गुरूद्वारा प्रबंधक कमेटी के 21 बार प्रधान रहे पंथ रत्न गुरचरण सिंह टोहरा की स्मृति में घोषित किए गए स्मारक का निर्माण राज्य सरकार को जल्द करवाना चाहिए। ये विचार आज विदेश राज्य मंत्री परनीत कौर ने टोहरा गांव में पत्रकारों के साथ अनौपचारिक बातचीत में व्यक्त किए है।
स्व. बीबी जोगिंदर कौर टोहरा के देहांत पर अफसोस करने पहुंची परनीत कौर ने कहा कि पिछली कांग्रेस सरकार ने बीबी टोहरा के लिए कई सुविधाओं की घोषणाएं की थी। इसमें पटियाला में एक घर को खाली भी रखा गया। 15 हजार रूपये मासिक पैंशन के अलावा कैबिनेट रैंक का दर्जा शामिल था। हालांकि अकाली होने का कारण बता कांग्रेस कार्यकाल में स्व. बीबी टोहरा ने उक्त सुविधाएं लेने से इंकार कर दिया था। जबकि वर्तमान सरकार ने सत्ता में आने के 36 महीने बाद पिछले साल अगस्त में बीबी टोहरा को कैबिनेट रैंक का दर्जा दिया है।
इससे पहले परनीत कौर ने स्व. जोगिंदर कौर टोहरा की बेटी कुलदीप कौर टोहरा से मिल कर अफसोस प्रकट किया। इस अवसर पर पूर्व मंत्री व पंथ रत्न के जंवाई हरमेल टोहरा और जिला परिषद सदस्य व नाती हरिंदरपाल सिंह टोहरा भी मौजूद रहे। याद रहे कि स्व. बीबी जोगिंदर कौर टोहरा का वृद्धा अवस्था की एक बीमारी के बाद 82 साल की उम्र में 26 जनवरी को देहांत हो गया था।
उल्लेखनीय है कि पंजाब सरकार ने हाल ही में बहादुर पुर गांव में जत्थेदार टोहरा की स्मृति में स्मारक बनाने की घोषणा की है, हालांकि एसजीपीसी के दो पूर्व प्रधान बीबी जागीर कौर और प्रो. कृपाल सिंह बडूंगर और वर्तमान प्रधान अवतार सिंह मक्कड़ भी ऐसी ही घोषणाएं कर चुके है। लेकिन सिरे कोई भी नहीं चढ़ी। छह साल पहले बीबी जागीर कौर ने 2004 में मोहाली के गुरूद्वारा अंब साहिब में 'जत्थेदार गुरचरण सिंह टोहरा इंस्टीटयूट आफ एडवांस सिख स्टडीजÓ बनाने की घोषणा की तो प्रो. बडूंगर ने पंथ रत्न की याद में चंडीगढ़ के सेक्टर 44 में आईएएस व आईपीएस ट्रेनिंग इंस्टीटयूट की घोषणा की। जबकि जत्थेदार मक्कड़ ने चपड़चिड़ी में एक शैक्षिक संस्थान की घोषणा कर रखी है। यह भी कागजों में ही है।
इतना ही नहीं मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने भी 10 नवंबर 2005 को ऐसा ही शिलान्यास किया लेकिन बात आज भी वहीं पर रुकी है जहां से शुरू हुई थी।
Tuesday, 1 February 2011
पावरकॉम में अधिकारी तलाशने लगे उचित स्थान?
भूपेश चट्ठा, पटियाला
सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थान पंजाब राज्य बिजली बोर्ड का विघटन होने के बाद बने पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (पावरकॉम) और पंजाब स्टेट पावर ट्रांसमिशन लिमिटेड के गठन के बाद अब तक चलती शक्तियों के विभाजन की खींचतान संभवत: समाप्त हो गई है और करीब करीब हर कुर्सी के अधिकारों की सेटलमेंट होने के बाद कौन सी कुर्सी कहां रखी जाए यह तय होने लगा है। पावरकॉम के वरिष्ठ अधिकारियों जिनमें कुछ डायरेक्टर स्तर के भी हैं, ने मंगलवार को शक्ति विहार का दौरा किया है। आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि आज की सारी कसरत खाली कमरों की तलाश में की गई है। दिलचस्प है कि माल रोड के किनारे स्थित पावरकॉम मुख्यालय सत्ता का केंद्र है ऐसे में कोई भी डायरेक्टर स्तर का अधिकारी यहां से बाहर होना नहीं चाहेगा यदि होता भी है तो चंडीगढ़ से कम पर नहीं जाएगा ऐसे में पावरकॉम मुख्यालय में मौजूद कुछ सुपरीटेंडिंग इंजीनियर(एसई) अथवा इंजीनियर इन चीफ को प्रताप नगर के पास शेडों का रुख करवाया जा सकता है। याद रहे कि पावरकॉम का मुख्यालय तत्कालीन पेप्सू रियासत के हाईकोर्ट के विरासती भवन में है तो शेडों में मौजूद विभागों को पावरकॉम में ही काले पानी की संज्ञा दी जाती रही है।
उधर, पावरकॉम के प्रवक्ता का कहना है कि बोर्ड के समय में प्रबंधन के सदस्यों की संख्या आज की तुलना में काफी कम थी और अब कारपोरेट कल्चर लाने व कंपनियों में बंटने के बाद मुख्यालय में स्थान की कमी पाई जा रही है इसके उपाय किए जा रहे हैं। कौन कहां जाएगा? और कौन कहां रहेगा यह तो अभी निर्धारित नहीं किया जा रहा पर इतना तय है कि डायरेक्टर यहीं रहेंगे और स्थान प्रबंधन करने सिटिंग प्लान बनाया जा रहा है।
उधर, पावरकॉम के प्रवक्ता का कहना है कि बोर्ड के समय में प्रबंधन के सदस्यों की संख्या आज की तुलना में काफी कम थी और अब कारपोरेट कल्चर लाने व कंपनियों में बंटने के बाद मुख्यालय में स्थान की कमी पाई जा रही है इसके उपाय किए जा रहे हैं। कौन कहां जाएगा? और कौन कहां रहेगा यह तो अभी निर्धारित नहीं किया जा रहा पर इतना तय है कि डायरेक्टर यहीं रहेंगे और स्थान प्रबंधन करने सिटिंग प्लान बनाया जा रहा है।
यूथ अकाली दल की रैली, प्रधान कोई नहीं
भूपेश चट्ठा, पटियाला
उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल की विकास यात्राओं के बीच शिरोमणि अकाली दल की युवा इकाई द्वारा राज्य भर में अपनी उपस्थिति जताने के लिए शुरू की गई रैलियों के तहत पटियाला में युवा शिअद की रैली 10 फरवरी को होने जा रही है। दिलचस्प है कि पटियाला में सत्ताधारी दल की युवा इकाई की प्रधानगी करने वाला कोई नहीं है। हालांकि पार्टी के ही छात्र संगठन स्टूडेंट्स आर्गेनाईजेशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय प्रधान का दावा है कि पटियाला की रैली प्रदेश भर में रिकार्ड कायम करेगी।
वहीं यूथ अकाली दल का जिला प्रधान न होने के सवाल पर एसओआई के प्रधान व यूथ डेवलपमेंट बोर्ड के चेयरमैन गुरप्रीत सिंह राजू खन्ना कहते हैं कि पार्टी ने यूथ इकाई भंग कर दी थी और जिले के पूर्व प्रधान जसबीर सिंह जस्सी का गांव अब मोहाली जिले में जा चुका है। ऐसे में यूथ इकाई का जिला प्रधान तो कोई नहीं है पर सभी साथ मिलकर काम कर रहे हैं। इसमें मेयर अजीतपाल सिंह कोहली से लेकर हरिंदरपाल सिंह चंदूमाजरा तक सभी शामिल है। एसओआई का भी पूरा समर्थन है। इसी संबंध में आज भी कार्यकर्ताओं की बैठक की गई है जिसमें सभी हलका इंचार्ज और मार्केट कमेटियों के चेयरमैन व अन्य जिले से संबंधित चेयरमैन शामिल हुए।
दो साल पहले इन्हीं दिनों में पोलो ग्राउंड में हुई एसओआई की रैली को इस रैली से जोड़ने के सवाल पर राजू खन्ना कहते है कि वह रैली ऐतिहासिक थी और लोक सभा चुनावों से पहले प्रदेश भर में युवा शक्ति किसके साथ का संदेश दे गई थी, इसी तरह प्रदेश कांग्रेस प्रधान के गृह नगर में होने वाली यह रैली अगले विधान सभा चुनावों की दिशा तय कर देगी।
रैली में यूथ अकाली दल के संरक्षक विक्रमजीत सिंह मजीठिया युवा वर्ग को संदेश तो देंगे ही, लेकिन युवा शक्ति को संगठित करने और उनमें नेतृत्व क्षमता विकसित करने के लिए की जा रही इस रैली से ही नई भर्ती भी की जाएगी और उन कार्यकत्र्ताओं को भी सम्मानित किया जाएगा जिन्होंने पार्टी के लिए कार्य किया है।
अगले चुनावों में पार्टी युवा वर्ग को कितना प्रतिनिधित्व देगी, इस सवाल पर गुरप्रीत सिंह राजू खन्ना कहते है कि युवाओं का राज्य में प्रतिनिधित्व कर रहे विक्रमजीत सिंह मजीठिया ने 33 फीसदी टिकटों की अलाटमेंट युवाओं के बीच से करने की घोषणा कर रखी है यह सिरे चढ़ेगी और अगली विधान सभा 'थोड़ा और जवान' होगी। हालांकि पार्टी टिकट पाने वाले 'युवा' की उम्र सीमा कहां से शुरू होगी और कहां खत्म पर वे खामोश हो जाते है
उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल की विकास यात्राओं के बीच शिरोमणि अकाली दल की युवा इकाई द्वारा राज्य भर में अपनी उपस्थिति जताने के लिए शुरू की गई रैलियों के तहत पटियाला में युवा शिअद की रैली 10 फरवरी को होने जा रही है। दिलचस्प है कि पटियाला में सत्ताधारी दल की युवा इकाई की प्रधानगी करने वाला कोई नहीं है। हालांकि पार्टी के ही छात्र संगठन स्टूडेंट्स आर्गेनाईजेशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय प्रधान का दावा है कि पटियाला की रैली प्रदेश भर में रिकार्ड कायम करेगी।
वहीं यूथ अकाली दल का जिला प्रधान न होने के सवाल पर एसओआई के प्रधान व यूथ डेवलपमेंट बोर्ड के चेयरमैन गुरप्रीत सिंह राजू खन्ना कहते हैं कि पार्टी ने यूथ इकाई भंग कर दी थी और जिले के पूर्व प्रधान जसबीर सिंह जस्सी का गांव अब मोहाली जिले में जा चुका है। ऐसे में यूथ इकाई का जिला प्रधान तो कोई नहीं है पर सभी साथ मिलकर काम कर रहे हैं। इसमें मेयर अजीतपाल सिंह कोहली से लेकर हरिंदरपाल सिंह चंदूमाजरा तक सभी शामिल है। एसओआई का भी पूरा समर्थन है। इसी संबंध में आज भी कार्यकर्ताओं की बैठक की गई है जिसमें सभी हलका इंचार्ज और मार्केट कमेटियों के चेयरमैन व अन्य जिले से संबंधित चेयरमैन शामिल हुए।
दो साल पहले इन्हीं दिनों में पोलो ग्राउंड में हुई एसओआई की रैली को इस रैली से जोड़ने के सवाल पर राजू खन्ना कहते है कि वह रैली ऐतिहासिक थी और लोक सभा चुनावों से पहले प्रदेश भर में युवा शक्ति किसके साथ का संदेश दे गई थी, इसी तरह प्रदेश कांग्रेस प्रधान के गृह नगर में होने वाली यह रैली अगले विधान सभा चुनावों की दिशा तय कर देगी।
रैली में यूथ अकाली दल के संरक्षक विक्रमजीत सिंह मजीठिया युवा वर्ग को संदेश तो देंगे ही, लेकिन युवा शक्ति को संगठित करने और उनमें नेतृत्व क्षमता विकसित करने के लिए की जा रही इस रैली से ही नई भर्ती भी की जाएगी और उन कार्यकत्र्ताओं को भी सम्मानित किया जाएगा जिन्होंने पार्टी के लिए कार्य किया है।
अगले चुनावों में पार्टी युवा वर्ग को कितना प्रतिनिधित्व देगी, इस सवाल पर गुरप्रीत सिंह राजू खन्ना कहते है कि युवाओं का राज्य में प्रतिनिधित्व कर रहे विक्रमजीत सिंह मजीठिया ने 33 फीसदी टिकटों की अलाटमेंट युवाओं के बीच से करने की घोषणा कर रखी है यह सिरे चढ़ेगी और अगली विधान सभा 'थोड़ा और जवान' होगी। हालांकि पार्टी टिकट पाने वाले 'युवा' की उम्र सीमा कहां से शुरू होगी और कहां खत्म पर वे खामोश हो जाते है
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