Tuesday, 29 November 2011

16 नवंबर को सजा, 25 को बरी और हर्जाना भी, electricity, open access, pserc, pspcl,

-नियमों के विपरीत बिजली कनेक्शन काटने के जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई भी होगी
-18.45 रूपये जुर्माने की वापसी छह दिसंबर तक और एक लाख रूपया हर्जाना देने के आदेश
-'ओपन एक्सेसÓ के तहत बाहर से बिजली लेने और पावरकाम बनने के बाद पहला मामला
भूपेश चट्ठा, पटियाला
'बड़े नामों को अक्सर देर से सजा क्यों मिलती है...Ó भ्रष्टाचार व मानव अधिकारों को लेकर बने और न्यायपालिका से लेकर पूरे सिस्टम पर बने और  टेलीविजन पर चल रहे इस विज्ञापन में संभव एक कमी भी है कि 'नाम बड़ा हो तो सजा देना भी आसान नहीं होताÓ और अगर तंत्र में निजी व्यवस्था शामिल हो जाए और नियम कानून लागू करने में एक भी कमी रह जाए तो सारा दांव उलटा पड़ जाता है और वो भी चंद दिनों में।
मनमर्जी से बिजली बिल भेजने और बकाया ना भरने और यहां तक कि किसी बिजली कर्मी के बनते 'मान-सम्मानÓ में थोड़ी भी कसर रहने पर सख्त परिणाम भुगताने के लिए कुख्यात रहे पूर्व पंजाब राच्य बिजली बोर्ड के पुराने दिन भी उसके साथ ही लद चुके हैं। बिजली अधिनियम 2003 के लागू होने के बाद बने पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड और पंजाब स्टेट पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन लिमिटेड बनने के बाद 'ओपन एक्सेसÓ के तहत अन्य राच्यों अथवा पंजाब के बाहर से इंडस्ट्री को सीधे बिजली लेने देने के निर्णय के बाद पहला मामला सामने आया है जब एक मामले में16 नवंबर को जालंधर की एक फैक्ट्री जेएमपी इंडस्ट्री को पीक लोड आवर में बिजली ड्रा करने पर 'सजाÓ के रूप में बिजली कनेक्शन से हाथ धोना पड़ा।
उक्त इंडस्ट्री पर 18.45 लाख रूपये का जुर्माना ठोकते हुए तीन किश्तों में जमा करवाने के आदेश भी जारी हो गए। इस पर कंपनी ने 6.15 लाख रूपये की एक किश्त जमा करवाने के साथ ही पंजाब स्टेट इलेक्ट्रिसिटी रेग्यूलेटरी कमीशन के पास अपील करते हुए अपना केस दायर कर दिया।
दिलचस्प है कि पीएसईआरसी ने सारी सुनवाई के बाद 25 नवंबर को कंपनी को बरी करने के साथ ही ग्राहक को नाहक परेशान करने व अवैध तरीके से नियमों के विपरीत कार्रवाई करने पर हर्जाना देने के आदेश भी जारी कर दिए।
पीएसईआरसी ने पीएसटीसीएल के चीफ इंजीनियर आरके शर्मा और ओपन एक्सेस के सुपरीटेंडिंग इंजीनियर एके मठारू पर नियमों के विपरीत बिजली कनेक्शन काटने पर कार्रवाई करने को भी कहा है। इसके अलावा 18.45 रूपये जुर्माने की राशि में से दी गई पहली किश्त की वापसी छह दिसंबर तक सुनिश्चित करने और एक लाख रूपया हर्जाना देने के आदेश भी दिए हैं।
वहीं पावरकाम प्रवक्ता का कहना है कि पीएसईआरसी के आदेशों अनुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई उक्त दोनों अधिकारियों के खिलाफ की जाएगी। साथ ही अधिकारी ये भी बताते हैं कि सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी रेग्यूलेटरी कमीशन के नियम पीक लोड के दौरान फ्रिक्वेंसी गिरने की स्थिति में भी बिजली लेने पर खामोश हैं, जबकि प्रदेश में 'ओपन एक्सेसÓ के तहत किसी भी इंडस्ट्री को तय सीमा से अधिक बिजली लेने की अनुमति नहीं है।
याद रहे कि उक्त इंडस्ट्री ने अपनी अपील में कहा कि ओपन एक्सेस में किए गए समझौते में यह कहीं नहीं कहा गया कि पीक लोड समय तक ही बिजली ली जाएगी। ऐसे में उसने बिजली ले कर गलत नहीं किया है। हालांकि बिजली इंजीनियर यह भी कहते हैं कि अगर फ्रिक्वेंसी च्यादा गिरे और उपभोक्ता लगातार बिजली लेते रहें तो ग्रिड के फेल होने का खतरा बन पड़ता है। संभव है कार्रवाई इसी स्थिति में की गई।

Monday, 28 November 2011

डॉलर की चढ़ाई से एक्सपोर्टरों की चांदी, doller-rupee, export

 -मार्च, 2009 के बाद पहली बार 52 रूपये के पार हुआ डालर
भूपेश चट्ठा, पटियाला
एक ओर जहां डॉलर के 21 नवंबर को 52 रूपये का स्तर तोडऩे के बाद रिजर्व बैंक आफ इंडिया के हाथ पांव फूल रहे हैं उस पर देश का शेयर बाजार ना केवल गिरते डालर के साथ नीचे आ रहा है अपितु बाजार को भी नीचे की ओर खींच रहा है। वहीं एक्सपोर्टर के चेहरे डॉलर की चढ़ाई के साथ खिलने लगे हैं।
फारेक्स ट्रेडिंग के बाजार से जुड़े जानकार बताते हैं  कि डॉलर के दाम का 45 रूपये से 50 रूपये के बीच में रहने से किसी को एतराज नहीं था और इसे ट्रेडिंग के अलावा आयात निर्यात के लिहाज से भी ठीक ही समझा जा रहा था। यही वो रेंज थी जिसे भारतीय बाजार ने पिछले दो सालों से होल्ड कर रखा था पर बीते दो महीनों अथवा भारत में सर्दी व त्यौहारी सीजन की शुरुआत के साथ ही डॉलर की तुलना में रूपये में गिरावट का सिलसिला शुरू हुआ जो इस सप्ताह भी जा रही है।
ट्रेड जंक्शन पर फारेक्स में डील करते रवि एस आहलुवालिया बताते हैं कि तीन मार्च को डालर ने 52 रूपये का स्तर तोड़ा था और अब इसी सप्ताह 21 नवंबर को में 52.37 तक जाने के बाद 52.18 रूपये पर बंद हुआ और 22 नवंबर को 52.69 का रिकार्ड बनाया है। तीन महीने में सात फीसदी की बढ़ोतरी के बाद दो दिनों में तीन फीसदी की बढ़ोतरी हो गई है। जिस तरह के हालात हैं और अंतरराष्ट्रीय बाजार में अगले छह महीनों में 54 रूपये के स्तर भी दिखाए जा रहे हैं। एक बार ये उपर निकला तो फि र उपर के स्तर का कुछ नहीं कहा जा सकता।
वहीं ब्रोकर आशीष गोयल कहते हैं कि पंजाब में बात लुधियाना की हो या अमृतसर की या फिर चंडीगढ़ के किसी ट्रेडर या कंपनी की च्यादातर ने 50 रूपये तक  डॉलर के जलाने की उम्मीद के साथ ही 'हैजिंगÓ कर रखी थी लेकिन 21 नवंबर को एक ही दिन मेंं दो फीसदी अथवा एक रूपये की गिरावट ने हर किसी का हिला कर रख दिया है, इसके अगले ही दिन 22 को फिर एक फीसदी की बढ़ोतरी हुई, लेकिन निर्यातकों को इसका लाभ तय है। तीन फीसदी की लाभ में अतिरिक्त बढ़ोतरी वो भी सीजन के दौरान कम नहीं आंकी जा सकती।
याद रहे कि पूरे ढ़ाई साल में डालर ने दस फीसदी का उतार और चढ़ाव देखा है ऐसे में दो फीसदी को आप बोनान्जा ही कहेंगे।

Thursday, 24 November 2011

सुनिए सरकार ! ये पत्थर कुछ कहता है, bye pass, southern, road,




शिलान्यास का सच दक्षिणी बाई पास
अधूरे काम : पिछली सरकार का सपना, इस सरकार में भी नहीं हुआ पूरा
एक दशक से ज्यादा मंत्रालयों की लड़ाई में लटका, अब छह साल से निर्माण में
 14 दिसंबर 2006 को 18 महीने में चालू करने की घोषणा से हुआ था शिलान्यास
भूपेश चट्ठा, पटियाला शाही शहर को भारी व सैनिक ट्रैफिक से मुक्त करने, चंडीगढ़ व अंबाला की ओर से आने वाले तथा समाना व संगरूर की ओर जाने वाले वाहनों को शहर के भीतरी यातायात में उलझने से बचाने के लिए बनाए जाने वाले दक्षिणी बाई पास का सपना सूबे की पिछली सरकार ने दिखाया था, लेकिन एक और सरकार का कार्यकाल पूरा होने के बाद भी यह पूरा नहीं हो सका है। राजपुरा रोड को संगरूर रोड से मिलाने के लिए 18.8 किलोमीटर लंबे बाई पास को जमीन से करीब 13 फीट ऊपर उठाकर बनाए जाने वाले इस कोरीडोर का मामला एक दशक से ज्यादा केंद्रीय वन व रक्षा मंत्रालय समेत राज्य के लोक निर्माण विभाग की लड़ाई में लटका रहा। इसके बाद सेना के बार्डर रोड आर्गेनाइजेशन को निर्माण की जिम्मेदारी दे दी गई। 2007 के राज्य विधानसभा चुनावों की आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू होने से ठीक पहले 14 दिसंबर 2006 को तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बाई पास का शिलान्यास कर दिया। नींव पत्थर रखने के तुरंत बाद बताया गया कि 80 करोड़ रूपये की अनुमानित लागत से यह बाई पास करीब 18 महीने में चालू हो जाएगा। यदि मौसम, खासकर मानसून के सीजन में बाढ़ की मार पड़ी तो चार-छह महीने और लग सकते हैं। हकीकत ये है कि बाई पास के नीचे से निकलने वाली सड़कों के लिए बनने वाले ओवर ब्रिज आज भी निर्माणाधीन हैं और आगामी विधानसभा चुनावों की आदर्श चुनाव आचार संहिता लगने को है। बाई पास के लिए क्रासिंग पर सर्विस रोड, लूप रोड और कोरीडोर बनाने, सड़क के दोनों ओर तारबंदी अथवा किसी तरह के एंगल लगा रेलिंग लगाए जाने जैसे काम अभी शेष हैं। इसके अलावा सड़क चूंकि पूरी तरह से अत्याधुनिक व भविष्य की संभावनाओं को ध्यान में रखकर बनाई जानी है और बड़े सैनिक वाहन इसका प्रयोग करेंगे, ऐसे में एक्सप्रेस हाईवे का रूप भी अभी दिया जाना है।

ना आम किसान को कमाई, ना लोगों को निवाला,vegitables, season, farmer, inflation


-मंहगी को अगेती लगा, दवा के दम पर वसूलते हैं मोटा मुनाफा
-50 के पार बिकी गोभी अब 'टोकेÓ से सस्ती

भूपेश चट्ठा, पटियाला
गोभी कभी पचास के पार होती है तो कभी पशुओं के चारे के बराबर आ जाती है। मटर की कीमत कभी तिहाई में पहुंचती है तो चंद सप्ताह बाद वही हरे रंग का मटर दहाई में भी नहीं आ पाता। दिलचस्प है कि सब्जी के दाम कब गिरेंगे? कब चढ़ेंगे? इसका अंदाजा हर किसान को होता है पर स्टीक अनुमान लगा जुआ खेलने वाले ही मोटी कमाई कर पाते हैं। ऐसे में आम किसान को कमाई नहीं होती और आम आदमी को सस्ती सब्जी तभी मिलती है जब जानवरों के चारे के बराबर आ जाती है।
सब्जियों के दामों में होने वाले उतार चढ़ाव पर 'दैनिक जागरणÓ ने पाया कि मंहगी बिकने वाली सब्जी को अगेती लगाया जाता है और दवाओं के दम पर उगा जिंदा रखा जाता है और फिर सीजन शुय होने से पहले ही मोटा मुनाफा भी वसूला जाता है। जबकि जल्द खराब होने वाली सब्जी पर रिस्क कम लेते हुए सीजन अनुसार ही काम करते है। सब्जी के दामों में होने वाले उतार चढ़ाव पर पूर्वानुमान लगाने में एक दो बार असफल रहने वाला आम किसान इस पंगे से दूर चला जाता है। जबकि आधुनिक पेस्टीसाइड व केमिकल डालने व टीके लगाने के अलावा पुराने देसी तरीके अपनाने वालों की भी कमी नहीं है। यहां तक कि देसी तरीके से तूड़ी के कुप में प्याज भर कर स्टोर किया जाता है और दाम बढऩे के बाद ही बाहर निकाला जाता है।
सब्जी कारोबारी बाबू लाल बताते हैं कि गोभी नवरात्र से दीपावली तक 50 के पार बिकने वाली गोभी अब पशुओं को डालने वाले 'टोकेÓ से सस्ती हो गई है। टोका सवा दो रूपये किलो बिक रहा है तो गोभी दस रूपये की ढ़ाई किलो पर आ गई है। मूली का भी यही हाल है। 120 रूपये किलो का मटर 60 पर आया आगे छह रूपये भी होगा जबकि मटर का प्रिजरवड दाना 60 रूपये किलो है।
हालांकि पीढिय़ों से फल सब्जी व फूलों के बीजों की खेती करते आ रहे प्लांट्स मैन एंड सीड्स के अब्दुल वाहिद कहते हैं कि दुनिया भर में मंहगाई बढ़ी है, डीजल, खाद, दवाएं, कृषि उपकरण सहित अन्य खर्चे बढ़े हैं लेकिन किसान को थोड़ा भी लाभ मिलता है तो शोर शुरू हो जाता है। जबकि होना तो यह चाहिए कि सरकार मार्केटिंग का पुख्ता प्रबंध करे।
वहीं फाइव एलीमेंट्स हैल्थ एंड एजूकेशनल सोसायटी के डा. जोगिंदर टाइगर कहते हैं कि जब, जो सस्ती हो तो समझो उसी का खाने का सीजन है और बिना जहरीले केमिकल के उपजी है। ऐसी सब्जी ही लाभकारी होती है जो प्राकृति के साये में उगे ना की प्राकृति के विपरीत जा कर।

Sunday, 20 November 2011

पंजाब में किसान यूनियन राजनीति गरमाई, farmer, confrence, politics,


-एक ने कहा सरकारी बंदे हैं, तो दूसरे ने कहा बहुराष्ट्रीय कंपनियां बनी हैं सपांसर
-देश भर के किसानों की महापंचायत 25 को अमृतसर में: लक्खोवाल
उपमुख्य संवाददाता, पटियाला
प्रदेश में पहली बार आयोजित की गई कंसोरटियम आफ इंडियन फारमर्स एसोसिएशन सीआईएफए की कांफ्रेंस ने किसान यूनियनों की राजनीति में गर्मी ला दी है। अब तक किसानों के मुद्दे पर एक दूसरे के साथ वैचारिक मतभेद रखने के बावजूद 'साड्डा ही बंदाÓ होने का दम भरने वाली यूनियनों ने एक दूसरे की कलई खोल दी है।
एक ओर जहां एसोसिएशन के राष्ट्रीय प्रधान के पद पर पहुंचे सतनाम सिंह बहरू के आज के शो से ठीक पहले भारतीय किसान यूनियन लक्खोवाल के प्रधान व पंजाब मंडी बोर्ड के चेयरमैन अजमेर सिंह लक्खोवाल ने मार्केट कमेटी के  कार्यालय में आ कर घोषणा कर दी की उनका संगठन देश भर के किसानों की महापंचायत का आयोजन 25 नवंबर को अमृतसर में करने जा रहा है। इसमें उत्तर भारत के 10 से 12 राच्यों के किसान नेता पहुंच रहे हैं।
इसी दौरान आयोजित संवाददाता सम्मेलन में सतनाम बहरू के कार्यक्रम में शामिल होने बारे पूछे जाने पर लक्खोवाल कहते हैं कि उन्हें बुलाया ही नहीं गया। साथ ही वे यह भी कहते हैं कि ये चंद सरकारी बंदों का झुंड है। जो सरकार के लिए ही काम करता है। यहां तक कि केंद्र सरकार के कृषि मंत्रालय में इन किसान नेताओं को आफिस तक दिया गया है। हालांकि पंजाब सरकार की ओर से स्वयं ली गई सुविधाओं पर वे कहते हैं कि यह मंडी बोर्ड के चेयरमैन के रूप में हैं ना किसान यूनियन को दी गई हैं।
दूसरी ओर भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां के जिला प्रधान डा. दर्शन पाल ने इसे प्रैस के माध्यम से कांग्रेस सांसद की ओर से चलाया जाने वाला प्रचार अभियान बताया है। डा. दर्शन पाल कहते हैं कि एक जागीरदार की बेटी और एक पूर्व राजा की पत्नि किसानों के मुद्दे कैसे समझ सकती है। जिन्हें सुलझाने का दावा कर रही है। साथ ही कहा है कि पूरा कार्यक्रम किसानों का खून चूसने वाली बहुराष्ट्रीय कंपनियों की ओर से प्रायोजित है। दिलचस्प है कि मंच पर लगे बैनर का हवाला भी स्पष्ट रूप से दर्शाने को दिया गया। जिस पर कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों को प्रायोजक के रूप में दिखाया गया है।
डा. दर्शन पाल का कहना है कि दूसरी ओर हरसिमरत कौर जैसी राजनीतिक रूप से शक्तिशाली महिला को बुलाना और किसानों का मंच उपलब्ध करवाना खुदकुशी करने वाले परिवारों की भावनाओं से खिलवाड़ करने बराबर है।

एक मंच से अलग सुरों में बोली, परनीत व हरसिमरत, farmer, confrence, politics,


...किसान सम्मेलन

भूपेश चट्ठा, पटियाला
कंसोर्टियम आफ इंडियन फार्मर्स एसोसिएशन की ओर से आयोजित किए गए सम्मेलन में एक ही मंच से और एक ही मुद्दे पर विदेश राज्य मंत्री परनीत कौर और सांसद हरसिमरत कौर बादल अलग अलग सुरों में बोली हैं। हालांकि दोनों ने ही अपनी अपनी सरकारों का बचाव करने और दूसरों को लपेटने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है।
कंसोरटियम के आठवें सम्मेलन में कांग्रेस से सांसद परनीत कौर ने जहां खुद को किसान की बेटी बता इस मंच से राजनीतिक लाभ ना लेने की बात कह पंजाब में तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के कार्यकाल में किसान हित में लिए गए निर्णय कि आठ घंटे मुफ्त व निर्विघन बिजली देने के अलावा किसानों को दिए जाने वाले ऋण पर ब्याज को 14.5 फीसदी से कम करवा 11 फीसदी पर लाने के लिए पीठ ठोकी और मीडिया को भी 'निर्देशितÓ कर दिया कि यहां से जाने वाला संदेश 'राजनीतिकÓ नहीं होना चाहिए। परनीत कौर ने जहां खुद को एक पार्टी की सदस्य व सरकार में होने के साथ अप्रत्यक्ष रूप से अपना एजेंडा रखा और मंच से कहा कि वे प्रधानमंत्री से मिलकर इस कमेटी के लोगों को मिलने का समय एक सप्ताह में दिलवाएंगी। अर्थशास्त्री व राज्य सभा सदस्य एमएस स्वामीनाथन की रिपोर्ट को लागू करने प्रति विचार विमर्श करवाया जाएगा।
वहीं शिरोमणि अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल ने जहां खुद को कृषि से जुड़ा होने हवाला दे किसानों के मंच से कांग्रेस व केंद्र को जमकर खरी-खरी सुनाई। संसद में अपनी ओर से उठाए गए किसानों के मुद्दों के साथ ही आंकड़ों के परिपेक्ष्य में हरसिमरत बादल ने कहा कि केंद्र जिन योजनाओं को अपनी बताता है वो पंजाब के पैसे से ही चल रही हैं। जितना टेक्स पंजाब से जाता है उसका 1.3 फीसदी ही पंजाब को अपने राज्य में विकास करने के लिए केंद्र लौटाता है। अगर दस फीसदी भी आ जाए तो पंजाब के हालातों में जमीन आसमान का अंतर होगा।
हरसिमरत ने सीधा हमला कर कहा कि देश का 1.98 फीसदी रकबे वाला पंजाब 60 फीसदी लोगों का पेट भी रहा है और केंद्र में ऐसे संस्थान है जो अतिरिक्त बफर स्टाक को संजोने में 27 हजार कारोड़ रूपये सालाना की दर से खर्च कर रहे हैं। जबकि 22 करोड़ लोग भूखे सोते हैं और सात हजार की हर रोज मौत हो रही है।
 इस कार्यक्रम की खास बात यह रही कि परनीत कौर ने बाहर निकलते ही प्रधानमंत्री से मिलवाने के सवाल पर कह दिया कि 'इसकी कोई समय सीमा नहीं है...कोशिश करते हैं...चार दिन तो नोटिस के ही हैंÓ। जबकि हरसिमरत ने कहा कि 'इनकी सरकार है ये लोग टिकट मांगने तो एक मिनट में मिल लेते हैं किसानों के मामले में आज तक समय नहीं मिला और आगे भी ऐसा ही चलेगाÓ।
दूसरी ओर केंद्रीय लाइब्रेरी में आयोजित किए गए सम्मेलन में प्रधान सतनाम सिंह बहरू ने कहा कि संसद के शीतकालीन सत्र में किसान चार से पांच दिन की विशेष चर्चा स्वामीनाथन की रिपोर्ट व किसानों के अन्य मुद्दो पर करवाने की मांग कर रहे हैं। चाहते हैं कि सत्ताधारी और विपक्ष दोनों के सांसद किसानों के मामलों पर अपनी स्थिति स्पष्ट करें।
महा सचिव पी चैंगल रेड्डी ने बताया कि आंध्र प्रदेश में एक लाख किसान खेती करना छोड़ गए हैं, क्योंकि गेहूं में ही दस हजार रूपये प्रति एकड़ का सालाना नुकसान हो रहा है।
 राजस्थान के किसान नेता कृष्ण कुमार ने कहा कि सरकार आज किसान केच्बच्चे को कम पौष्टिक आहार मिलने का तर्क दे मिड डे मील के नाम पर हाथ में कटोरा पकडऩे की आदत डाल रही है। सम्मेलन में उत्तर प्रदेश के योगेश दाहिया ने किसानों को मुआवजा देने के तरीके पर सवाल उठाया और कहा कि गैस पाइप लाइन बिछानी हो या बिजली के खंबे लगाने हो कंपनियां पेड़ कटने से नुकसान की भरपाई मात्र भी नहीं करती पेड़ लगाने की कीमत देना अभी दूर की कौड़ी है। कार्यक्रम में तामिलनाडू व महाराष्ट्र सहित कई राज्यों के किसानों ने कपास व चीनी सहित हर तरह की उपज के निर्यात खोलने की मांग रखी है।
हालांकि सम्मेलन में सांसद शरद पवार व नवजोत सिद्धू, पूर्व मुख्यमंत्री चंद्र बाबू नायडू सहित बड़ी संख्या में किसान हितैषी नेताओं के पहुंचने की संभावनाएं भी जताई जा रही थी।

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...बिजली


-दिसंबर में सर्दी तेज होने के साथ ही कट

-अभी आर्क इंडक्शन फर्नेस पर दो दिन और अन्य इंडस्ट्री पर एक दिन का साप्ताहिक कट चालू

भूपेश चट्ठा पटियाला

बिजली पानी पर सरकारें बदलने वाले पंजाब में विधान सभा के चुनाव होने में चंद महीने शेष हैं जबकि आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू होने में चंद दिन शेष रहते पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन को अपने बिजली उत्पादन की लाइफ लाइन समझे जाने वाले थर्मल प्लांटों को अनिवार्य वार्षिक मरम्मत के चलते एक के बाद एक सभी को बंद करना पड़ेगा। पावरकाम की ओर से मरम्मत शुरू करते ही बिजली ने झटके देने शुरू कर दिए हैं।

पावरकाम के आधिकारिक सूत्र बताते हैं कि 900 लाख यूनिट की मांग पर 825 की आपूर्ति है। दोनों में 75 लाख यूनिट का अंतर चल रहा है। हालांकि इसकी वजह पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को बताया जा रहा है, जिसके आदेश के बाद बठिंडा के श्री गुरू नानक देव थर्मल प्लांट के एक यूनिट को बंद कर दिया गया है। यूनिट के आयु पूरी करने के बाद से यह सीमा से अधिक प्रदूषण फैला रहा था।

कट फ्री धान का सीजन देने वाले पावरकाम को सर्दी की चिंता कुछ च्यादा बताई जा रही है। जिसके चलते इस साल तुलनात्मक रूप से प्लांटों की वार्षिक मरम्मत का कार्य जल्दी आरंभ भी कर दिया है। दिलचस्प है कि गेहूं की बिजाई के बाद दिसंबर अंत से शुरू होने वाला ये सिलसिला अक्सर मई अंत तक लटकता रहता है, लेकिन इस साल अब तक रोपड़ का एक यूनिट बंद कर मरम्मत की जा रही है। यह नवंबर अंत तक पुन: चालू हो जाएगा।

इसके अलावा पिछले डेढ़ साल से बंद चल रहा बठिंडा का पूर्ण जीर्णोद्धार पर गया एक अन्य यूनिट भी दिसंबर अंत तक अपनी बढ़ी क्षमता के साथ उत्पादन चालू कर देगा। सूत्रों का कहना है कि प्रबंधन की ओर से काम को दु्रत गति से निपटाने की हिदायत जारी हुए बताए जा रहे हैं। आम तौर पर 21 दिन चलने वाली मरम्मत को 18-19 दिनों में कर दिया जाए।

पंजाब में सर्दी के दिनों में बिजली उत्पादन की लाइफ लाइन कहे जाने वाले थर्मल प्लांटों के मरम्मत पर जाने के साथ ही पंजाब सर्दियों में अन्य पहाड़ी राच्यों को बैंकिंग की बिजली भी जमा करवाता है। अभी यह आंकड़ा 125 लाख यूनिट है। दोनों तरफ से पड़े वजन के बाद आर्क इंडक्शन फर्नेस पर दो दिन का और साधारण इंडस्ट्री पर एक दिन का अनिवार्य साप्ताहिक अवकाश लगा दिया गया है।

पावरकाम प्रवक्ता कहते हैं कि आम उपभोक्ता व कामर्शियल पर कोई कट नहीं है। कृषि क्षेत्र को पहले एक दिन के अंतर पर आठ घंटे बिजली दी जा रही थी अब गेहूं के सीजन में हर रोज चार घंटे कर दी गई है। इंडस्ट्री की ओर से अब तक 'ओपनÓ के माध्यम से खरीदी जा रही सीधी बिजली अब पावरकाम के माध्यम से ली जा रही है। वे स्वीकार करते हैं कि सर्दी तेज होने के बाद मांग और बढ़ सकती है।

वहीं पावरकाम के डायरेक्टर उत्पादन जीएस छाबड़ा कहते हैं कि इस साल अच्छे मानसून के बाद सर्दी में देरी हुई है। जिसके चलते मांग में धान के सीजन के बाद तेज बढ़ोतरी नहीं हुई। यही वजह है कि किसी तरह का मांग आपूर्ति का अंतर च्यादा नहीं है। साथ ही वे प्रबंधन को चुनावों से च्यादा तरजीह देते हैं।