Sunday, 20 November 2011

कैसे कटेगी सर्दी, रहेगी या होगी बत्ती गुल, electricity, winter, power, generation,

...बिजली


-दिसंबर में सर्दी तेज होने के साथ ही कट

-अभी आर्क इंडक्शन फर्नेस पर दो दिन और अन्य इंडस्ट्री पर एक दिन का साप्ताहिक कट चालू

भूपेश चट्ठा पटियाला

बिजली पानी पर सरकारें बदलने वाले पंजाब में विधान सभा के चुनाव होने में चंद महीने शेष हैं जबकि आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू होने में चंद दिन शेष रहते पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन को अपने बिजली उत्पादन की लाइफ लाइन समझे जाने वाले थर्मल प्लांटों को अनिवार्य वार्षिक मरम्मत के चलते एक के बाद एक सभी को बंद करना पड़ेगा। पावरकाम की ओर से मरम्मत शुरू करते ही बिजली ने झटके देने शुरू कर दिए हैं।

पावरकाम के आधिकारिक सूत्र बताते हैं कि 900 लाख यूनिट की मांग पर 825 की आपूर्ति है। दोनों में 75 लाख यूनिट का अंतर चल रहा है। हालांकि इसकी वजह पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को बताया जा रहा है, जिसके आदेश के बाद बठिंडा के श्री गुरू नानक देव थर्मल प्लांट के एक यूनिट को बंद कर दिया गया है। यूनिट के आयु पूरी करने के बाद से यह सीमा से अधिक प्रदूषण फैला रहा था।

कट फ्री धान का सीजन देने वाले पावरकाम को सर्दी की चिंता कुछ च्यादा बताई जा रही है। जिसके चलते इस साल तुलनात्मक रूप से प्लांटों की वार्षिक मरम्मत का कार्य जल्दी आरंभ भी कर दिया है। दिलचस्प है कि गेहूं की बिजाई के बाद दिसंबर अंत से शुरू होने वाला ये सिलसिला अक्सर मई अंत तक लटकता रहता है, लेकिन इस साल अब तक रोपड़ का एक यूनिट बंद कर मरम्मत की जा रही है। यह नवंबर अंत तक पुन: चालू हो जाएगा।

इसके अलावा पिछले डेढ़ साल से बंद चल रहा बठिंडा का पूर्ण जीर्णोद्धार पर गया एक अन्य यूनिट भी दिसंबर अंत तक अपनी बढ़ी क्षमता के साथ उत्पादन चालू कर देगा। सूत्रों का कहना है कि प्रबंधन की ओर से काम को दु्रत गति से निपटाने की हिदायत जारी हुए बताए जा रहे हैं। आम तौर पर 21 दिन चलने वाली मरम्मत को 18-19 दिनों में कर दिया जाए।

पंजाब में सर्दी के दिनों में बिजली उत्पादन की लाइफ लाइन कहे जाने वाले थर्मल प्लांटों के मरम्मत पर जाने के साथ ही पंजाब सर्दियों में अन्य पहाड़ी राच्यों को बैंकिंग की बिजली भी जमा करवाता है। अभी यह आंकड़ा 125 लाख यूनिट है। दोनों तरफ से पड़े वजन के बाद आर्क इंडक्शन फर्नेस पर दो दिन का और साधारण इंडस्ट्री पर एक दिन का अनिवार्य साप्ताहिक अवकाश लगा दिया गया है।

पावरकाम प्रवक्ता कहते हैं कि आम उपभोक्ता व कामर्शियल पर कोई कट नहीं है। कृषि क्षेत्र को पहले एक दिन के अंतर पर आठ घंटे बिजली दी जा रही थी अब गेहूं के सीजन में हर रोज चार घंटे कर दी गई है। इंडस्ट्री की ओर से अब तक 'ओपनÓ के माध्यम से खरीदी जा रही सीधी बिजली अब पावरकाम के माध्यम से ली जा रही है। वे स्वीकार करते हैं कि सर्दी तेज होने के बाद मांग और बढ़ सकती है।

वहीं पावरकाम के डायरेक्टर उत्पादन जीएस छाबड़ा कहते हैं कि इस साल अच्छे मानसून के बाद सर्दी में देरी हुई है। जिसके चलते मांग में धान के सीजन के बाद तेज बढ़ोतरी नहीं हुई। यही वजह है कि किसी तरह का मांग आपूर्ति का अंतर च्यादा नहीं है। साथ ही वे प्रबंधन को चुनावों से च्यादा तरजीह देते हैं।

पटियाला में पंजाब की दूसरी घुड़दौड़, horse riding, race, breading


- हार्स स्पोर्टस एंड ब्रीडर्स सोसायटी पंजाब का आयोजन

- विदेश राज्य मंत्री परनीत कौर करेंगी उदघाटन, विजेता को एक लाख रूपये

उपमुख्य संवाददाता, पटियाला

पंजाब के आधुनिक खेल इतिहास में घुड़दौड़ का अध्याय जुडऩे के बाद हार्स स्पोर्टस एंड ब्रीडर्स सोसायटी पटियाला जिले के कल्लर भैणी गांव में घोड़ों की दूसरी रेस का आयोजन करने जा रही है।

शनिवार को होने वाली रेस पर पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला के बिजनेस मैनेजमेंट विभाग के प्रोफेसर व एचएसबीएसपी के सदस्य सुमरिंदर सिंह सरां ने बताया कि राज्य में घोड़ों से संबधित खेलों को बढ़ावा देने व युवा प्रतिभाओं को आगे लाने और राष्ट्रीय पटल पर मुख्य धारा में आगे बढ़ाने का प्रयास किया गया है। घोड़ों की सेहत दुरुस्त रखने और पर्यटन को बढ़ावा देने वाले दो अन्य उद्देश्य स्वत: ही पूरे होंगे।

डकाला के पास स्थित गांव में सुबह नौ बजे शुरू होने वाली ये रेस 40 किलोमीटर की होगी और ये 20-20 किलोमीटर के दो चरणों करवाई जाएगी। रेस शुरू होने से पहले और 20 किलोमीटर का चरण समाप्त होने और रेस की समाप्ति पर घोड़ों का वेटरनरी चैकअप अनिवार्य रूप से किया जाएगा। यदि किसी स्थिति में घोड़े की तबीयत या सेहत में गड़बड़ी है तो आगे दौड़ में अनुमति नहीं दी जाएगी।

विदेश राज्य मंत्री परनीत कौर इस रेस का उदघाटन करेंगी। घुड़दौड़ क्षेत्र के अंतराष्ट्रीय स्तर के जज व सोसायटी के उपप्रधान कनर्ल सरप्रताप सिंह बताते हैं कि इससे घोड़ों की भारतीय नस्लों का संरक्षण करने में सहायता मिलेगी। हार्स ब्रीडिंग के स्तर उंचा उठाने और क्षेत्र में जागरुकता लाने का काम तेज हो जाएगा। वे कहते है कि पंजाब के अलावा राजस्थान व हरियाणा से 50-60 घोड़ों के इसमें भाग लेने की संभावना है। तीन इनामों में पहला एक लाख रूपये का, 51 हजार का दूसरा और 21 हजार का तीसरा इनाम रखा गया है। निशुल्क वेटरनरी और घोड़ों व राइडर के लिए खाने पीने की व्यवस्था के अलावा अन्य सहायता भी उपलब्ध करवाई जा रही है। वर्ष में दो बार ऐसे आयोजन किए जाएगें।

बासमती बढ़ी कीमत घटी, डाइवरसीर्फिकेशन को झटका, diversification, basmati, rice,

-केंद्र की नीति है अब बासमती नहीं आम धान आसानी से बिक रहा है: मंडी अधिकारी
-पिछले साल का बासमती अब भी व्यापारी के पास पड़ा है: राइस मिलर्स

भूपेश चट्ठा, पटियाला

चावल के मामले में पेट भरने व जीभ को स्वाद देने के साथ आपको सुगंधित खुशबू का अहसास देने वाला बासमती की आवक धान मंडियों में इस साल बढ़ी है लेकिन कीमत एक तिहाई तक गिर गई है। यानि खाने वालों की 'जरूरत के साथ इच्छाÓ पूरी करने वाला बासमती आने वाले सीजन 'किसान की जरूरतÓ और 'सरकार की डाइवरसीफिकेशन की इच्छाÓ पूरी नहीं कर पाएगा।

याद रहे कि धान की आम किस्मों करी तुलना में बासमती की बिजाई व रोपाई देरी से की जाती है और दस जून की बजाए जुलाई शुरू में आने वाली मानसून की बौछारों का इंतजार इसकी रोपाई कर लेती है। जिससे भूमिगत जल स्तर का नुकसान खासा कम रह जाता है।

पटियाला जिले की मंिडयों में जहां पिछले साल के पूरे सीजन में बासमती की आवक 60 हजार टन रही थी वहीं अब तक 61 हजार टन बासमती आ चुका है, जबकि धान की कुल औसत आवक का आंकड़ा पाने में एक लाख टन की अभी कमी है और सीजन के इन अंतिम दिनों में ज्यादातर धान बासमती अथवा इसके जैसी सुपरफाइन किस्मों की ही आवक होती है।

मंडी बोर्ड के आंकड़े बताते हैं कि सीजन में बासमती की कीमत 1575 से 1600 रूपये प्रति क्विंटल के बीच रही। इक्का दुक्का मामले में 1620 रूपये की बोली लगी है जबकि 2100 से 2200 रूपये की औसत बोली के बीच बिका बासमती बीते साल 2800 रूपये तक भी गया था।

दिलचस्प है कि पंजाब सरकार के मंत्रियों ने बासमती जैसी पीएयू-1121 किस्म के खिलाफ किसानों को खास 'जागरुकÓ भी किया था और ना लगाने की सलाह दी थी। याद रहे कि बासमती के अलावा दुनिया का ये सबसे लंबा चावल है और अरब देशों में खासा पसंद किया गया है।

इस साल हालत ऐसे हैं कि बासमती और 1121 लगभग एक जैसे दामों पर आ गए हैं जबकि सुपरफाइन किस्मों व 1121 का अंतर आठ सौ रूपये तक रहता रहा है।

जबकि मंडी बोर्ड के अधिकारी जीएस औलख बताते हैं कि केंद्र की नीति है, इसमें पंजाब कुछ नहीं कर सकता। पिछले साल बासमती व इसके जैसी किस्में बिक रही थी अब आम धान बिक रहा है। निजी खरीद काफी है। एफसीआई जैसे बड़े संस्थान को खरीद का मौका ही नहीं मिल पाया।

फैडरेशन आफ आल इंडिया राइस मिलर्स एसोसिएशन के प्रधान तरसेम सैणी कहते हैं कि पिछले साल व्यापारी वर्ग ने बासमती की खरीद खुल कर की लेकिन इसे बेचने में खासी परेशानी आई। पिछले साल की बासमती भी कई व्यापारियों के पास अब भी पड़ी है। वहीं आम धान के धड़ाधड़ बिकने का कारण इसके निर्यात का खोला जाना है।

पनीर-साग के देश में मशरूम हुई मशहूर, diversification, mushroom, vegitables,


- कम जगह में अधिक उपज, अधिक कमाई

-वेजीटेरियन लोगों की पहली पसंद बना है सनैक्स

-एमएसपी नहीं पर विवाह सीजन में सौ रूपये किलो के पार रहती है

भूपेश चट्ठा, पटियाला

पंजाबी खाने का नाम आते ही सरसों का साग मक्की की रोटी के साथ दिखाई देने लगता है। इसके साथ ही दूध से बने खाने सामने आते है, कार्यक्रम महत्वपूर्ण हो तो पनीर जरूरी है। बात नॉन वेजीटेरियन की हो तो चिकन सामने आ जाता है, लेकिन इन दिनों पनीर-साग के देश में मशरूम मशहूर हो रही है।

किसान के लिए कम जगह में अधिक उपज और अधिक कमाई देने वाली मशरूम वेजीटेरियन लोगों की पहली पसंद बन गई है। एक मैरिज पैलेस के मालिक सतपाल पूनिया बताते हैं कि कुछ साल पहले तक सब्जी में एक इंग्रेडिएंट के रूप में प्रयोग होती रही मशरूम अब हर विवाह कार्यक्रम में विभिन्न सनैक्स के रूप में अनिवार्य रूप से रखी जा रही है।

दिलचस्प है कि इसका न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं है पर विवाह सीजन में सौ रूपये किलो के पार रहती है। व्यवसाय से जुड़े व विशेषज्ञ के रूप में पहचान बना चुके अश्विनी बातिश बताते हैं कि सर्दी के साथ ही मशरूम की बिजाई का सीजन शुरू होता है और बड़े फार्म तैयार बीज को रोपाई के लिए आगे देते हें। याद रहे कि गेहूं के दाने को ट्रांसप्लांट कर इसकी बिजाई की जाती है। मार्केटिंग की तय व्यवस्था तो नहीं है पर हर मशरूम उत्पादक का पहला लक्ष्य चंडीगढ़ के 50 किलोमीटर के दायरे में मौजूद दो सौ से च्यादा मैरिज पैलेस रहते हैं। जहां से नगद कमाई की जाती है।

मशरूम की खेती में लगे नरिंदर शर्मा बताते हैं कि 16 बाई 16 फीट के कमरे में सवा सवा फीट की दूरी पर दस रैक लगाने में की गई बिजाई से हर रोज 80 किलो से एक क्विंटल तक मशरूम पैदा की जा सकती है। हालांकि कटाई के मामले में यहां खासी दक्षता की जरूरत पड़ती है। आप अपनी मर्जी से एक रात पहले नहीं काट सकते। ऐसा करने की स्थिति में इसका रंग बिगड़ जाता है और नई उगने वाली लटक जाती है। ऐसे में इसकी कटाई सुबह करीब तीन बजे शुरू होती है और परिवार के सदस्य ही इसमें जुटते हैं और सुबह पांच बजे तक मंडी में भेज दी जाती है।

याद रहे कि पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के मशरूम फार्म से 'तेगÓ ब्रांड बाजार में उतारा और टिन पैक में डिब्बा बंद की जिसे एक साल बाद तक भी प्रयोग किया जा सकता था।

दूसरी ओर डाइवरसीफिकेशन पर जोर देने वाले कृषि विभाग के डिप्टी डायरेक्टर डा. बीएस सोहल कहते हैं कि इसकी बिजाई आप खेत में मोटर के कोठे से लेकर, ट्रैक्टर अथवा जीन्स रखने वाले हाल में कर सकते हैं। ऐसे स्थानों में किसान जमीन से आठ फीट उपर तक ही जगह का प्रयोग करता है, इसके उपर के स्थान पर मशरूम की खेती हो सकती है।

आए दिन एक्सीडेंट पर कोई मामला दर्ज नहीं, parali, accidents, cases

पराली को जलाए जाने से रोकने कानून बीते एक दशक से लगातार बताया जा रहा है, पर दिलचस्प है कि अभी तक धारा 144 लगाए जाने और पराली जलाने पर लगाए पूर्ण प्रतिबंध के बावजूद पराली जलाने वाले किसानों पर इस साल एक भी मामला दर्ज नहीं किया गया है। हालांकि पिछले साल जिले में इनकी संख्या 11 थी। मसला इस बार वोटों का बताया जा रहा है।
हाल ही में तीन बच्चे जिंदा जल गए आए दिन एक्सीडेंट होते हैं। सड़क किनारे जली पराली से उठा धुआं किसी को भी अंधा करने में सक्षम है।
जलती पराली पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव डीएस गुरू कहते है कि किसान पर मामले दर्ज करना तो अंतिम विकल्प होना चाहिए बेहतर तो यह कि उसे प्रेरित किया जाए कि वो ऐसा ना करे। हालांकि पराली को लेकर बने कानून को और कड़ा करने अथवा किसी तरह का बदलाव करने पर टिप्पणी नहीं करते, कहते है कि जो है वो लागू रहेगा। धान की बिजाई रोपाई को नियंत्रित करने वाले सब सॉयल एक्ट के समान कड़ा कानून की संभावना पर चुनावी साल में कोई बोलने को तैयार नहीं है।


-पराली में आर्गेनिक तत्व कम और जहर ज्यादा

भूपेश चट्ठा, पटियाला

धान की फसल जल्द पक जाए तो अक्टूबर का शुरू नहीं तो मध्य तक बच्चों, बुजुर्गों और दमे-एलर्जी के मरीजों को खुली हवा में गैस चैंबर का सा अहसास होता है, लेकिन इस साल ये सिलसिला नवंबर में भी जारी है। इससे बचते तंदरुस्त कहे जाने वाले भी नहीं है आंखों में जलन, गले में खराश, जुकाम-खुजली तो आम हो जाता है। इन सब के पीछे कारण क्या है? यह भी सब को पता है कि खेतों में पराली जलाई जा रही है। इस पराली के साथ जल रहे केमिकल फर्टीलाइजर और पेस्टिसाइड ने इसके धुएं को इस कदर जहरीला बना दिया है कि बारूद का धुआं भी हलका लगने लगा है।

सोशल सांइसेज एंउड हेल्थ फोरम के डा. खोसला कहते है कि थोड़ी बहुत यह पहले भी जलती थी पर इतना बुरा हाल नहीं था कि आपको सांस लेने के लिए भी जगह की तलाश करनी पड़ती है। दोपहिया वाहन पर है तो सड़क युद्ध का मैदान नजर आती है और किसी काम को हाथ में लेते है तो आंख के साथ नाक भी टपकने लगती है। वे कहते है कि महत्वपूर्ण यह है कि जब गरीब बेघर तेज सर्दी से बचने के लिए घास फूस एकत्र कर अलाव तप रहा होता है तो आग में से एक भीनी सी खुशबू आ रही होती है। कुछ ऐसा ही अहसास गांव में चुल्हे पर पक रहे भोजन की बात हो या घर को धुंध कोहरे के दिनों में घर के आस पास पेड़ पौधों का कचरा जलाने की हो हमें धुआं परेशान करता। गोबर के उपले जलने को तो मेडिकेटिड धुएं तक का नाम दे उपचार तक करने के दावे होने लगते है।

वहीं लेखक केएस धालीवल कहते है कि आज पराली का नाम आते ही अस्थमे का तंदरुस्त हुआ मरीज भी दहल जाता है। एलर्जी की दवा बनाने वाली कंपनियों के लिए तो दिवाली का सीजन ही पंजाब हरियाणा में जलने वाली पराली से निकलता है और साल भर की कमाई इन्हीं दो महीनों में हो जाती है। एंटी एलर्जी दवाओं से कुछ नहीं होने वाला बेहतर है कि किसान या तो पेस्टिसाइड व केमिकल फर्टीलाइजर का प्रयोग छोड़ दें या फिर पराली जलाना छोड़ दें। वे कहते है कि इसमें पौधे वाली बात ही नहीं रही। आर्गेनिक तत्व कम ओर जहर ज्यादा हो गया है।

दिलचस्प है कि पराली के स्मोग से परेशान लोगों ने भी एक नायाब तरीका तलाश लिया है वे डाक्टरों के पिछले सालों में लिखी पर्ची को किसी मंत्र की तरह अपने पर्स में रखते है और सांस के उखडऩे के पहले अहसास में ही दवा शुरू कर देते है। जुकाम और आंखों में जलन बर्दाश्त करने की बड़ों को आदत हो गई है कि इन दिनों म त्योहारों की तरह ये भी होना है। जबकि बच्चों के लिए कोई हल नहीं निकला है।

मुख्यमंत्री-मंत्रियों का शहर में आखिरी जमावड़ा, akali, politics, SAD,


-श्री आनंदपुर साहिब में सिख हैरिटेज व चपड़ चिड़ी स्मारक, कबड्डी फाइनल लुधियाना, मोहाली में एयरपोर्ट, शहीदी जोड़ मेला फतेहगढ़ साहिब व संगरूर में होंगे कार्यक्रम

उपमुख्य संवाददाता, पटियाला

प्रदेश में विधान सभा चुनावों से पहले एतिहासिक शहर पटियाला में मौजूदा शिरोमणि अकाली दल-भारतीय जनता पार्टी गठबंधन सरकार का आखिरी शो शनिवार को होने जा रहा है। सरकार के इस जमावड़े में मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल दिन भर शहर में ही रहेंगे और उनके साथ प्रशासनिक अधिकारियों के अलावा अकाली-भाजपाई मंत्रियों, विभिन्न बोर्डों, निगमों के चेयरमैन, पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के वर्तमान व पूर्व प्रधान एक साथ दिखाई देने जा रहे हैं। संभव है कि शहर में ये वर्तमान सरकार का आखिरी जमावड़ा हो।

याद रहे कि अगले साल मार्च में नई विधान सभा का गठन होना है और संभव है कि फरवरी में चुनाव हों। इसके लिए दिसंबर में आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू हो जानी है। वर्तमान सरकार के पास बचे डेढ़ महीने में राच्य व राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रमों की लंबी फेहरिस्त है इसमें श्री आनंदपुर साहिब में सिख हैरिटेज व फतेहगढ़ साहिब के निकट चपड़ चिड़ी स्मारक, विश्व कबड्डी कप का फाइनल लुधियाना में, मोहाली में एयरपोर्ट का उदघाटन, शहीदी जोड़ मेला फतेहगढ़ साहिब व संगरूर में घल्लूघारा स्मारक के कार्यक्रम शामिल हैं।

ऐसे में स्व. करतार सिंह धालीवाल की बरसी पर पांच से सात अकाली-भाजपा के मंत्री, एसजीपीसी के प्रधान व धार्मिक नेताओं की उपस्थिति होगी दर्ज होना शहर का अंतिम बड़ा कार्यक्रम होगा। इसमें पूर्व केंद्रीय मंत्री सुखदेव सिंह ढ़ींडसा, कृषि मंत्री सुचा सिंह लंगाह, सिंचाई मंत्री जनमेजा सिंह सेखों, पूर्व मंत्री व पार्टी महासचिव बलविंदर सिंह भूंदड़, एसजीपीसी की पूर्व प्रधान बीबी जागीर कौर, प्रो. कृपाल सिंह बडूंगर, विक्रमजीत सिंह मजीठिया, भाजपा की ओर से अविनाश राय खन्ना, सतपाल गोसांई, मास्टर मोहन लाल जैसे नाम शामिल है। इसके साथ ही मुलाजिम भलाई विभाग, पनसीड, पनग्रेन इत्यादि सहित कई चेयरमैन शामिल होंगे।

वहीं जिला योजना बोर्ड के चेयरमैन और पार्टी के एनआरआई विंग के प्रधान सुरजीत सिंह रखड़ा कहते हैं कि उन्होंने सभी लोगों को आमंत्रित जरूर किया है पर पुष्टि सिर्फ मुख्यमंत्री की ही कर सकते हैं। हालांकि शेष गणमान्य व्यक्ति पूर्व में उनके मेहमान बनते रहे हैं। रखड़ा बताते हैं कि मुख्यमंत्री सुबह उनके यहां आएंगे और दोपहर के कार्यक्रम के बाद यहीं आराम करेंगे और शाम को पांच बजे हरपाल टिवाणा कला केंद्र का उदघाटन करेंगे।

सोने के रखवालों का शरीर हुआ मिट्टी, food, storage, grain, employee, fci, wheat,

-एफसीआई के गोदामों में काम करने वाले मजदूरों-कर्मियों का स्नायू तंत्र प्रभावित
-धरती पर, गेहूं की बोरी में, बोरियों के उपर, हवा में एयर चार्जिंग के लिए छिड़के रसायनों का असर

-मैलाथीन महीने में दो बार, डीडीवीपी 21 दिनों पर, डेल्टा मैथलीन तीन महीने पर और सल्फास सदा के लिए

भूपेश चट्ठा, पटियाला

अनाज के गोदामों में रखे गए सोने को संजोए रखने होने वाले रसायनों के छिड़काव ने इसके रखवालों का शरीर मिट्टी का बना दिया है। फूड कारपोरेशन आफ इंडिया सहित हर खरीद एजेंसी के गोदामों में रखी गई गेहूं से होने वाले प्रभाव से अंजान कोई नहीं है पर ईलाज के नाम पर भी च्यादा कुछ नहीं है।

गोदामों में रखी गई बोरियों में दवा डालने के अलावा इसकी जमीन व हवा को भी 'सुरक्षितÓ रखने के चक्कर में पूरा वातावरण जहरीला किया जाता है। एफसीआई के वीके बत्ता बताते हैं कि बोरी रखते ही इस पर डेल्टा मैथलीन का स्प्रे कर दिया जाता है। हर तीन महीने पर यह प्रक्रिया दोहराई जाती है। इसके तुरंत बाद खाली जगह में डीडीवीपी का छिड़काव होता है, एयर चार्जिंग के नाम पर किसी पतंगे को भी ना फटकने देने वाला यह स्प्रे 21 दिनों के अंतराल पर रिपीट होता है। हवा में उड़ती 'भुंडीÓ, 'भमक्कड़Ó इस वायु के संपर्क में आते ही जमीन पर ऐसे गिरते हैं मानों किसी ने एंटी एयरक्राफ्ट गन से गिराया हो।

इन सबके बावजूद यदि कीड़ा लगने की संभावना होने पर एल्मोनियम फास्फेट का प्रयोग होता है। ये वो गेहूं की बदनाम गोली है जिसे सल्फास कहते हैं और पंजाब में खुदकुशी करने वालों में प्रचलित रही है। वीके बत्ता बताते हैं कि इससे बीमारी की बात ना करें ये तो जान लेती है, गोली पानी के संपर्क में आते ही जहरीली गैसें छोड़ती है।

बात यहीं समाप्त नहीं धरती के नीचे से कार्रवाई करने वाले दीमक अथवा दाने में पैदा होने वाली 'सुसरीÓ के लिए मैलाथीन का स्प्रे महीने में दो बार जरूरी है, तभी गेहूं को बचाया जा सकता है कीट पतंगों और कीड़े मकौड़ों की जान लेने वाले ये रसायन इंसानों के लिए भी कम घातक नहीं हैं।

इसी क्रम में जतिंदरवीर सिंह कहते हैं कि कर्मियों को नियमित खांसी आम है, दमा और हाईपर टेंशन से शायद ही कोई बचा हो, लंबा समय रहने पर अस्थमा व सांस के रोग घेर लेते हैं। सरकार के पास दस्ताने व मास्क देने से च्यादा कुछ नहीं है। जबकि जालंधर जैसे मुख्य शहरों को छोड़ दें तो अन्य जगहों पर ऐसे अस्पतालों से ही कोई समझौते नहीं किए गए हैं जिसके तहत कर्मी जा कर चिक्तिसा जांच करवा सकें।

वहीं कम्यूनिटी मेडिसीन में एमडी और एपिडमोलोजिस्ट डा. अमर सिंह आजाद कहते हैं कि इन रसायनों से इंसान की बीमारी से लडऩे की क्षमता ही खत्म हो जाती है। जुकाम से लेकर कैंसर तक की हर बीमारी की पकड़ में ऐसा व्यक्ति जल्दी आता है। प्राकृति से हमें तोहफे में मिले इम्यून सिस्टम में कमजोरी आती जाती है। जिससे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता क्षीण हो जाती है।