Wednesday, 31 August 2011

एडजस्ट हुआ स्व. टोहड़ा का गुट!, sgpc, politics, tohra,

भूपेश चट्ठा, पटियाला
शिरोमणि अकाली दल बादल में पंथ रत्न स्व. गुरचरण सिंह टोहड़ा के नेतृत्व में सर्व हिंद शिरोमणि अकाली दल के विलय के बाद एक हुए शिरोमणि अकाली दल में स्व. टोहड़ा के वफादारों को पूरा 'मान सम्मान' नहीं मिला तो प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा के नेतृत्व में अकाली दल लोंगोवाल का गठन हो गया। लेकिन हर चुनाव में पंथ रत्न के समर्थकों को महसूस होता रहा कि उन्हें दोयम दर्जे का ही समझा जा रहा है।
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के होने जा रहे चुनावों में पहली बार स्व. टोहड़ा गुट को पूरी तरह एडजस्ट किया गया है। एसजीपीसी की पटियाला जिले के सात विधानसभा क्षेत्रों में दस सीटें हैं। सन्नौर की दो सीटों में से महिला के लिए आरक्षित पर पंथ रत्न की पुत्री कुलदीप कौर चुनाव लड़ रही हैं, तो दूसरी सीट पर जसमेर सिंह लाछड़ू प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा के समर्थक हैं।
इसी प्रकार भादसों से सतविंदर सिंह टोहड़ा भी इसी गुट से हैं, तो स्व. टोहड़ा के ही वफादारों में से एक सुरजीत सिंह कोहली ने पटियाला शहर से शविंदर सिंह सभ्रवाल को उम्मीदवार बनवा लिया है। नाभा की दो सीटों में से एक कुलदीप नसूपुर को सुरजीत रखड़ा के कोटे से कहा जा सकता है, पर बात यहां पर भी पंथ रत्‍‌न के करीबियों की ही है। इसी क्रम में नाभा से महिला के लिए आरक्षित पर हरदीप कौर खाक व समाना से निर्मल सिंह हरिआउ और डकाला से जरनैल सिंह के नाम भी हैं, हालांकि डकाला से लाल सिंह देवीनगर के संपर्क सीधे हाईकमान से हैं। यही स्थिति राजपुरा से सुरजीत सिंह गढ़ी की है।
दिलचस्प है कि अकाली दल में पिछले चुनावों तक बैलेंस रखने के आधार पर ही शक्तियों का बंटवारा होता आया है पर सीधे हाईकमान से संपर्क रखने वालों की संख्या मात्र दो पर अटक जाने ने यह तय कर दिया है कि अब पार्टी गुटों से ज्यादा जीत को महत्व दे रही है।
भूपेश चट्ठा, पटियाला
शिरोमणि अकाली दल बादल में पंथ रत्न स्व. गुरचरण सिंह टोहड़ा के नेतृत्व में सर्व हिंद शिरोमणि अकाली दल के विलय के बाद एक हुए शिरोमणि अकाली दल में स्व. टोहड़ा के वफादारों को पूरा 'मान सम्मान' नहीं मिला तो प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा के नेतृत्व में अकाली दल लोंगोवाल का गठन हो गया। लेकिन हर चुनाव में पंथ रत्न के समर्थकों को महसूस होता रहा कि उन्हें दोयम दर्जे का ही समझा जा रहा है।
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के होने जा रहे चुनावों में पहली बार स्व. टोहड़ा गुट को पूरी तरह एडजस्ट किया गया है। एसजीपीसी की पटियाला जिले के सात विधानसभा क्षेत्रों में दस सीटें हैं। सन्नौर की दो सीटों में से महिला के लिए आरक्षित पर पंथ रत्न की पुत्री कुलदीप कौर चुनाव लड़ रही हैं, तो दूसरी सीट पर जसमेर सिंह लाछड़ू प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा के समर्थक हैं।
इसी प्रकार भादसों से सतविंदर सिंह टोहड़ा भी इसी गुट से हैं, तो स्व. टोहड़ा के ही वफादारों में से एक सुरजीत सिंह कोहली ने पटियाला शहर से शविंदर सिंह सभ्रवाल को उम्मीदवार बनवा लिया है। नाभा की दो सीटों में से एक कुलदीप नसूपुर को सुरजीत रखड़ा के कोटे से कहा जा सकता है, पर बात यहां पर भी पंथ रत्‍‌न के करीबियों की ही है। इसी क्रम में नाभा से महिला के लिए आरक्षित पर हरदीप कौर खाक व समाना से निर्मल सिंह हरिआउ और डकाला से जरनैल सिंह के नाम भी हैं, हालांकि डकाला से लाल सिंह देवीनगर के संपर्क सीधे हाईकमान से हैं। यही स्थिति राजपुरा से सुरजीत सिंह गढ़ी की है।
दिलचस्प है कि अकाली दल में पिछले चुनावों तक बैलेंस रखने के आधार पर ही शक्तियों का बंटवारा होता आया है पर सीधे हाईकमान से संपर्क रखने वालों की संख्या मात्र दो पर अटक जाने ने यह तय कर दिया है कि अब पार्टी गुटों से ज्यादा जीत को महत्व दे रही है।

चुनाव एक तरफा! प्रचार ठंडा, sgpc, election, campaign,



उपमुख्य संवाददाता, पटियाला : शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अगले महीने होने जा रहे चुनाव को लेकर पटियाला जिले में प्रचार अभी न के बराबर है। सिखों की सर्वोच्च संसद के लिए होने वाले मतदान, परिणाम और बनते बिगड़ते समीकरणों में भी किसी की दिलचस्पी नहीं बन पाई है। आम राय बन गई है कि चुनाव एकतरफा हो रहे हैं। ऐसे में चुनाव प्रचार भी उम्मीदवार के कार्यालय तक ही सीमित होकर रह गया है।
18 सितंबर को होने जा रहे मतदान को लेकर शहर में जहां नाममात्र की दिलचस्पी है वहीं थोड़ा बहुत उत्साह ग्रामीण क्षेत्रों व कस्बों में जरूर पाया जा रहा है। 26 अगस्त को नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि के तीन दिन बाद भी ज्यादा कुछ नहीं बदला है।
एसजीपीसी चुनाव पर करीब से नजर रखते आए पूर्व लोक संपर्क अधिकारी उजागर सिंह कहते हैं कि इस बार कांग्रेस पूरी तरह खामोश है, प्रत्यक्ष रूप से पार्टी भी किसी धड़े को समर्थन नहीं कर रही है और मुख्य अकाली दल को छोड़ अन्य दल अलग-अलग चुनाव लड़ रहे हैं। ऐसे में सत्ताधारी अकाली दल के पक्ष में मामला एक तरफ हो गया है।
इसी क्रम में भारतीय किसान यूनियन एकता डकौंदा के हरभजन सिंह धर्मेहड़ी विशलेष्णात्मक नजरीए से कहते हैं कि लोगों की जरूरतें आज भी मूलभूत हैं। आपके खेत और घर बाढ़ की चपेट में आने को हों तो आप राजनीति नहीं करेंगे, पहले आप जानमाल को बचाने ही निकलेंगे। पंजाब का काफी बड़ा हिस्सा पानी की संभावित मार से जूझ रहा है। एसजीपीसी का चुनाव जरूर जोर पकड़ेगा, लेकिन सितंबर के पहले सप्ताह के बाद। फिर भी दस दिन होंगे उम्मीदवारों को अपने विचार लोगों के सामने रखने को।
वहीं, पहली बार एसजीपीसी चुनाव में वोट डालने जा रहे नवा गांव के गुरविंदर सिंह औलख कहते हैं कि उम्मीदवारों के चुनावी कार्यालयों के बाहर गाड़ियां तो देख रहे हैं, लेकिन ये सड़कों पर दौड़ती नहीं दिखती। धर्म संसद के अलावा कोई और चुनाव होते तो अब तक मेला लगा होता। हो सकता है किसी बड़ी रैली के बाद जोर पकड़े पर अभी तक तो सब कुछ ठंडा ही है।




..तो बठिंडा जैसे दो थर्मल प्लांट के बराबर मिलेगी बिजली,save electricity, biomass, parali, paddy, straw, pollution,

भूपेश चट्ठा, पटियाला
 सितंबर चढ़ते ही पंजाब-हरियाणा में पराली का जिन्न बाहर निकलने को होता है। धान की फसल आई नहीं होती है पर पराली के धुएं से होने वाली परेशानी हर किसी को याद आने लगती है। अब आने वाले सालों में पंजाब का दामन पराली के दुष्प्रभाव से छूटना तय है। दमे से बेदम करने वाली यह पराली किसी प्लांट में जलेगी तो बठिंडा के थर्मल प्लांट जितने बड़े दो प्लांटों के बराबर बिजली पैदा होगी और वह भी बिना किसी प्रदूषण के।
 पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड की ओर से राज्य में गैरपरंपरागत स्रोतों से बिजली पैदा करने को उत्साहित करने के मद्देनजर बायोमास प्लांटों से बिजली का उत्पादन करने का लक्ष्य 815 मेगावाट कर दिया गया है। पावरकाम के अधिकारी बताते हैं अब तक राज्य में 190.45 मेगावाट बिजली इसी पराली से बनने लगी है। जिन बायोमास प्लांटों पर काम चल रहा है उनसे अगले साल मार्च तक 108 मेगावाट बिजली उत्पादन क्षमता और बढ़ जाएगी। याद रहे कि बठिंडा थर्मल प्लांट में उत्पादन की क्षमता 440 मेगावाट है। 
इनके अलावा को-जनरेशन में लगने वाले प्लांटों, जिनमें पराली के साथ-साथ कपास-नरमे की छट्टियां, सरकंडे, सरसों, इत्यादि फसलों का कचरा व गोबर को भी ईधन के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा, से 67 मेगावाट और बिजली पैदा करने अथवा फसलों के कचरे को ठिकाने लगाने की दिशा में काम चल रहा है। पावरकाम के सदस्य प्रबंधन गुरबचन सिंह बची कहते हैं कि इसी क्रम में सोलर उर्जा से नौ मेगावाट का उत्पादन हो रहा है और साढ़े चौदह मेगावाट पाइप लाइन में है। 2012 में गैर परंपरागत स्रोतों से कुल 300 मेगावाट ऐसी ही बिजली का उत्पादन और शुरू हो जाएगा।
कमर्शियल रेट के बराबर होते हैं रेट
 निजी क्षेत्र में गैर परंपरागत स्रोतों से बिजली पैदा करने को बढ़ावा देने और वातावरण को प्रदूषण मुक्त करने के उद्देश्य से इन प्लांटों से बनने वाली बिजली के लिए पावरकाम काफी उंची दरें चुकाता है। दरें तय करने का काम तो पंजाब स्टेट इलेक्टि्रसिटी रेग्यूलेटरी कमीशन ही करता है लेकिन अब तक तय की गई दरें कमर्शियल रेट के बराबर ही रही हैं। पावरकाम के अधिकारी कहते हैं कि फिर भी ये दरें शार्ट टर्म में केंद्रीय पूल से खरीदी जाने वाली दस रूपये प्रति यूनिट की बिजली से कम ही रहती है।

Friday, 26 August 2011

पांच सौ के नोट से उपर पव्वे की जांच! excise, check


-डिस्टलरियों-होल सेलरों पर नकेल पर ठेकेदारों की ठगी...
-आबकारी विभाग ने 16 चरणों की जांच शराब बोतलों पर लागु की
भूपेश चट्ठा, पटियाला
हुई मंहगी बहुत ही शराब के थोड़ी थोड़ी...पंकज उदास की ये लोकप्रिय गजल पंजाब सरकार को शायद पसंद ना आए। लेकिन राज्य सरकार की ओर से आबकारी कर से आय में 30 फीसदी सालाना की बढ़ोतरी का लक्ष्य पाने अब शराब की बोतल देसी हो या अंग्रेजी, पव्वा हो या अध्यिा की जांच पांच सौ रूपये के करंसी नोट से उपर ला खड़ी की है।
उपभोक्ताओं के साथ-साथ सरकारी खजाने लिए ये अच्छी खबर है कि ग्राहक को उच्च गुणवत्ता की शराब मिलेगी तो सरकार को राजस्व लेकिन आबकारी विभाग की ओर से 16 चरणों की जांच अथवा पहचान की सुरक्षा के जिन उपायों को शराब बोतलों पर लागु किया गया है उनसे शराब बनाने वाली डिस्टलरियों, वितरित करने वाले होल सेलरों पर तो इससे नकेल कसी गई है पर ठेकेदारों की ठगी रोकने में अभी  समय लगता दिख रहा है।
डिप्टी एक्साइज एंड टैक्सेशन कमिश्नर एलए खान ने 'दैनिक जागरण के साथ विशेष बातचीत में बताया कि शराब की हर शीशी पर उसका नंबर लगाए जाने के अलावा, बनाने वाली डिस्टलरी का नंबर और एक ऐसा जांच का कोड जिसके अधिकार उनके पास भी नहीं है, राज्य में सिर्फ कमिश्नर को ही इसके बारे में पता होगा। वि भागीय स्तर शक के आधार पर की जाने वाली जांच के अलावा बोतल पर लगने वाले होलोग्राम में इंटेगलियो प्रिंटिंग, माइक्रो प्रिंटिंग और इंटेगलियो नेनो प्रिंटिंग के साथ कुछ छिपी हुई इमेज  होगी। जिसकी पहचान हम करंसी नोट की तरह से कर सकेंगे। इसके किनारे पर पंजाब का 'पीÓ चमकेगा।
आयुक्त के हस्ताक्षर के साथ पिंक स्याही का गोला  है, जिसे रगडऩे पर स्पाट पर बढ़े तापमान के चलते रंग उड़ जाता है लेकिन तुरंत ही वापिस भी आ जाता है। खान  कहते हैं कि इसमें वाटर मार्क के अलावा नोट की तरह कुछ उभरे हुए हिस्से भी हैं जिससे इसे स्कैन नहीं किया जा सकता।
शराब अब गुड़ से बनने के बजाए नोटों से बनाए जाने और ऐसे ही पहचान के सुरक्षा उपायों के सवाल पर वे कहते हैं कि करंसी नोट में छिपे हुए फीचर ज्यादा होते हैं, जबकि बताए गए फीचर कम, जिन्हें बैंक के विशेषज्ञों को ही ज्यादा पता होता है। हमारे यहां तो एक-दो को छोड़ सुरक्षा के सभी उपायों का खुलासा किया गया है।
डीईटीसी खान कहते हैं कि विभाग चाहता है कि हर उपभोक्ता को पता हो... वो इसे देखे ...जागरुकता का कोई नुकसान नहीं है। डिस्टलरियों और होल सेलरों पर इसके लागु होने के बाद से कोई मामला नहीं आया है, इसने बड़े पैमाने पर होने वाली  गड़बड़ी रोक दी है। अब या तो ठेके पर गड़बड़ी करता पकड़ा जाएगा या फिर कोई तस्कर इधर उधर से बोतलों में हेर-फेर कर सकता है।


आय में 30 फीसदी बढ़ोतरी का उपाय है...
राज्य में आबकारी कर से आय को 728 करोड़ रूपये बढ़ाया गया है। वर्तमान वर्ष में 2461.78 करोड़ रूपये की आय से बढ़ाकर इसे 3190 करोड़ रूपये करने का लक्ष्य  रखा गया है। राज्य में पिछले एक साल में पिययकड़ों की सं या में 30 फीसदी का ईजाफा तो नहीं हुआ है पर आय बढ़ाने के उपाय जारी हैं।

Saturday, 20 August 2011

खबरदार ! दूसरा रिक्शा खरीदना अपराध, riksha, enviornment, law, ammendment,






विडंबना : 45 की उम्र के बाद रिक्शा चलाने की अनुमति नहीं देता पंजाब रिक्शा एक्ट

भूपेश चट्ठा, पटियाला : 
घर में आप अपनी सुरक्षा या शौक के लिए रायफल के साथ पिस्टल रखें तो कोई बात नहीं, मर्सडीज है और बीएमडब्ल्यू ले लें तो भी अलग से लाइसेंस लेने की जरूरत नहीं, एक दुकान या फैक्ट्री चलाते हैं और अपना व्यापार बढ़ाने व तरक्की करने के लिए एक और दुकान या फैक्ट्री खोलना चाहते हैं तो भी कोई बात नहीं। लेकिन यदि आप रिक्शा चलाकर अपना और बच्चों का पेट पालते हुए इसी काम को आगे बढ़ाना चाहते हैं या एक और रिक्शा लेना चाहते हैं तो यह अपराध है।
 ऐसा किए जाने पर आपका पहले वाले रिक्शे का लाइसेंस भी रद्द किया जा सकता है और बिना परमिट के सड़क पर दौड़ रहे रिक्शे को नष्ट किया जा सकता है। पंजाब रिक्शा एक्ट 1976 में कुछ इसी तरह के प्रावधान किए गए हैं। एक ओर जहां बेरोजगारी, मंहगाई की मार के बीच विकास की बात की जाती है, वहीं गरीब रिक्शा चालक को अपना विकास करने से यह अधिनियम रोक रहा है। केवल अपाहिज, विधवा और संस्थान ही अधिकतम पांच रिक्शा खरीद सकते हैं।
 पटियाला फाउंडेशन के तहत इनवायरमेंट फ्रेंडली ग्रीन कैब्स रिक्शा शुरू करने वाले रवि आहलुवालिया बताते हैं कि यह एक्ट 45 साल की उम्र आते ही चालक को रिटायर भी कर देता है। 45 साल की उम्र के बाद यदि आप रिक्शा चलाते हैं तो भी आप अपराधी हैं। कोई पेंशन नहीं, कोई बीमा नहीं और कोई ऐसा फंड नहीं, जिससे रिक्शा चालक रिक्शा चलाना छोड़ने के बाद अपना अपने परिजनों का पेट पाल सके। दिलचस्प है कि कोई अन्य वाहन चलाने के लिए राज्य सिर्फ न्यूनतम आयु सीमा ही तय करता है, अधिकतम नहीं। 
वहीं पंजाब हेरिटेज एंड टूरिज्म प्रमोशन बोर्ड के डिप्टी डायरेक्टर चर्चिल कुमार ने दैनिक जागरण को बताया कि एक्ट निश्चित रूप से विकास के सिद्धांत के खिलाफ है। इसमें बदलाव की जरूरत है। उनके विभाग ने इस संबंध में स्थानीय निकाय विभाग को लिखा है और अपनी ओर से प्रस्ताव भी भेजा है। वह बताते हैं कि प्रस्ताव में रिक्शा स्टैंड बनाने, एक व्यक्ति को एक से अधिक रिक्शा खरीदने की अनुमति देने और रिक्शा चालक यदि फिट है तो रिक्शा चलाने की वर्तमान सीमा 45 साल से बढ़ाने जैसी सिफारिशें की गई हैं

Wednesday, 10 August 2011

नलकूप हुए बूढ़े और अपाहिज,नए भी जवान नहीं under ground water, save electricity, tubewell, punjab,








जागरण विशेष 
 सिंचाई का दो तिहाई जिम्मा उठाने वाले ज्यादातर नलकूप अक्षम 
पंजाब में कृषि पंपों में बिजली बचत के स्टार रेटिंग का नहीं प्रावधान
भूपेश चट्ठा, पटियाला
पंजाब में कृषि की लाइफ लाइन कहे जाने वाले नलकूपों (पंप) में से कुछ बूढ़े हो चले हैं तो कुछ अपाहिजों की श्रेणी में हैं। कुल मिलाकर राज्य में सिंचाई का दो तिहाई जिम्मा उठाने वाले ज्यादातर नलकूप अक्षम हैं। हालांकि इन्हें निकाल फेंकना व्यवहारिक नहीं है, लेकिन आने वाले चुनावी वर्ष में जारी होने वाले नए कनेक्शनों के लिए भी किसी तरह की स्टार रेटिंग न होने से तय है कि नए कनेक्शन के तहत लगने वाले पंप भी जवान नहीं होंगे।



 पंजाब में नलकूपों के आंकड़ों की बात करें तो यहां कुल 12 लाख 86 हजार नलकूप हैं। इनमें से 11.91 लाख बिजली से चलने वाले हैं। पावरकॉम के अधिकारी बताते हैं कि ज्यादातर नलकूप जरूरत से अधिक क्षमता के हैं, जो ज्यादा गहराई से पानी खींचते हैं। इससे बिजली की खपत और बढ़ गई। इतना ही नहीं, पुराने पड़ चुके पंप अपनी क्षमता का मात्र 33 फीसदी ही पानी दे रहे हैं। इससे बिजली का करोड़ों यूनिट का नुकसान होने के साथ भूमिगत जल का भी अनावश्यक दोहन हो रहा है। इस बार दिए जाने वाले 75 हजार नए कनेक्शनों के साथ नलकूपों से सिंचाई का आंकड़ा 30 से बढ़कर करीब 36 फीसदी हो जाएगा। न्यूनतम पांच बीएचपी का एक पंप माना जाए तो 135 करोड़ रुपये की सब्सिडी का बोझ निकम्मे पंपों के लिए होगा। उत्तरी भारत के राज्यों में कृषि क्षेत्र में गिरते भूमिगत जलस्तर के सर्वेक्षण को आई विश्व बैंक की एक टीम के सामने पावरकॉम ने माना है कि अक्षम नलकूपों की वजह से करीब 12 सौ करोड़ रुपये की बिजली हर साल बर्बाद हो रही है। इसके अलावा राज्य में पानी के अनावश्यक दोहन से भूमिगत जल का स्तर गिर रहा है। पावरकॉम के ही एक अधिकारी बताते हैं कि कृषि में सालाना एक हजार करोड़ यूनिट बिजली की खपत होती है, तो चार सौ करोड़ यूनिट इसमें से फिजूलखर्च होता है। इसकी अनुमानित कीमत करीब 12 सौ करोड़ रुपये बनती है। इस फिजूलखर्च का मुख्य कारण बूढे़ हो चुके पंप हैं।

 वहीं पावरकॉम के डिप्टी चीफ इंजीनियर स्तर के एक अधिकारी चुनाव आचार संहिता के बीच आईएसआई मार्का और बीआईएस मापदंड की बात तो करते हैं, पर स्टार रेटिंग की नहीं। तर्क देते हैं कि हर पंप पर साधारण बल्ब हटाकर सीएफएल लगाने से पांच सौ मेगावाट बिजली बचाने की योजना पर काम चल रहा है। लेकिन इन बल्ब के दाम मैन्यूफैक्चरर्स ने पांच गुना तक बढ़ा दिए हैं। ऐसे में पंप के मामले में पंजाब एनर्जी डेवलपमेंट अथारिटी को उपाय सुझाने को लिखा गया है।

Monday, 8 August 2011

पटियालवी करेंगे इथियोपिया में एक लाख एकड़ में खेती agriculture, etiopia, amaricain attack and punjabi rettaliation, fun ville, joginder tyger











 
सुविधा : 18 फीट पर है पानी, साल भर बारिश और 8 डालर में एक हैक्टेयर जमीन 99 वर्ष की लीज पर













 15 अगस्त को इथियोपिया में सहमति पत्र पर हस्ताक्षर होंगे 
डकाला रोड में एक स्थान पर राजदूत ने की मुलाकात
उपमुख्य संवाददाता, पटियाला : स्वतंत्रता दिवस पर एक और नई सुबह होने जा रही है। पंजाब के ही एक किसान डा.जोगिंदर टाइगर अफ्रीका महाद्वीप के इथियोपिया देश में एक लाख एकड़ जमीन पर खेती करने जा रहे हैं। यह साधारण खेती न होकर एग्रोटेक खेती होगी, इसमें अनाज की फसल उगाने से लेकर दाल, फल, सब्जियां, पोल्ट्री, पिगरी व डेयरी प्रमुख रूप से शामिल होंगी। इसी संबंध में रविवार को डकाला रोड स्थित एक स्थान पर दक्षिण अफ्रीकी देश इथियोपिया के राजदूत दोरजे एस्फा ने क्षेत्र के किसानों से बात करने के अलावा डा.टाइगर के आर्गेनिक फार्म का भी अवलोकन किया। राजदूत ने बताया कि 15 अगस्त को इथियोपिया में सहमति पत्र पर हस्ताक्षर होंगे। डा.टाइगर की ओर से रखा गया प्रोजेक्ट हमारी सरकार ने मंजूर कर लिया है। इथियोपिया में 33 लाख हेक्टेयर भूमि खेती का इंतजार कर रही है और वे चाहते हैं कि पंजाबी इस काम में आगे आएं। संवाददाताओं के साथ बातचीत में उन्होंने बताया कि वे पंजाबियों की कृषि में मेहनत के मुरीद हैं और वे चाहेंगे कि और पंजाबी उनके दूतावास से संपर्क करें। जमीन की कीमतों पर दोरजे एस्फा कहते हैं कि उनके देश के पश्चिमी व केंद्रीय हिस्से में 18 फीट पर पानी है। साल भर बारिश होती है और 8 से 28 डिग्री के बीच तापमान रहता है। खेती के लिए बेहतरीन जगह है। दाम के मामले में आठ डालर में एक हेक्टेयर जमीन 99 साल की लीज पर दी जा रही है। इसमें से भी प्रोजेक्ट की कुल कीमत का 30 फीसदी ही देना होगा जबकि शेष 70 फीसदी फाइनांस हो जाता है। अफ्रीकी देशों में सुरक्षा और अकाल के सवाल पर वे कहते हैं कि 14 फीसदी विकास दर है। लोकतांत्रिक देश बने 20 साल हो गए हैं।