Saturday, 7 July 2012

मोतीबाग में लोड ठीकठाक, जांच रूटीन मैटर: चेयरमैन, PSPCL checks electricity load at Motibag palace


-टूटी हुई सीलें जोड़ी गई: पावरकाम 
...विज्ञप्ति में कहा गया है कि यह स्पष्ट रूप से रूटीन मैटर है और मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल अथवा प्रदेश सरकार की किसी अन्य अथारिटी के निर्देशों पर नहीं किया गया है। यह पीएसपीसीएल के निर्देशों पर की गई जांच है।

भूपेश चट्ठा, पटियाला
'मोतीबाग पैलेस में लोड ठीक-ठाक है...पैलेस में जांचे जा रहे बिजली मीटर एक रूटीन मैटर है...किसी भी सूचना की पुष्टि करना कर्मियों का फर्ज है...यही किया जा रहा हैÓ पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड के चेयरमैन इंजी. केडी चौधरी ने 'दैनिक जागरणÓ के साथ बातचीत में उक्त टिप्पणी की है।
पंजाब प्रदेश कांग्रेस के प्रधान व पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की सरकार में विदेश राज्य मंत्री परनीत कौर के निवास स्थान मोतीबाग पैलेस में बिजली मीटरों की जांच करने आज फिर गई पावरकाम के डिस्ट्रीब्यूशन व इंफोर्समेंट विंग की टीम ने अपनी सात से आठ घंटे की जांच में क्या पाया? के सवाल पर पावरकाम चेयरमैन कहते हैं कि 'सब कुछ ठीक है। मीडिया में रिपोर्ट आती है या कहीं से कोई सूचना आती है तो जांच करना जरूरी है अैार यही किया गया है।Ó
प्रदेश भर में पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड की ओर से बिजली के मीटरों को घरों से बाहर निकाले जाने के चलाए जा रहे अभियान और पटियाला शहर में से एक लाख 17 हजार मीटरों में से लगभग सभी को घरों से बाहर करने  के बावजूद मोतीबाग पैलेस में से आज भी मीटर ना निकाले जाने की चेयरमैन इंजी. केडी चौधरी ने पुष्टि करते हुए कहा कि 'यह भी हो जाएगाÓ
वहीं देर सांय पावरकाम की ओर से जारी   गई विज्ञप्ति में कहा गया है कि मोतीबाग पैलेस में लगाए गए बिजली मीटरों क संदर्भ में सूचना आने अथवा सामान्य हालात में जांच करना पावरकाम के फील्ड कर्मियों का फर्ज है। इस मामले में भी ऐसा ही हुआ है। पावरकाम ने जहां सीलें नदारद पाई वहां पर उन्हे जोड़ दिया गया। इसी विज्ञप्ति में एक बार फिर दोहराया गया है कि यह स्पष्ट रूप से रूटीन मैटर है और मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल अथवा प्रदेश सरकार की किसी अन्य अथारिटी के निर्देशों पर नहीं किया गया है। यह पीएसपीसीएल के निर्देशों पर की गई जांच है।
वहीं पावरकाम के सूत्र बताते हैं कि पावरकाम के चेयरमैन इंजी. केडी चौधरी ने आज मुख्यमंत्री के समक्ष चंडीगढ़ में स्थिति स्पष्ट की है। जबकि पावरकाम की 14 सदस्यों की टीम ने जांच की है। इनमें दो एक्सीयन चार एसडीओ शामिल हैं। मोतीबाग पैलेस के लोड व 11 मीटरों की जांच की है। इनमें से एक एबी स्टड फार्म और आठ स्र्वेंट क्वाटरों और दो कैप्टन अमरिंदर सिंह के नाम हैं। इनमें से सर्वेंट क्वाटरों के मीटरों की सीलें टूटी पाई गई हैं।


मोतीबाग पैलेस में पावरकाम टीम को नहीं जाने दिया
-बिजली के कनेक्शन, लोड और मीटरों की जांच करने गई थी इंफोर्समेंट विंग टीम
-घर पर किसी के ना होने का हवाला दिया गया, सोमवार को फिर से होगी जांच: चेयरमैन
भूपेश चट्ठा, पटियाला
पंजाब प्रदेश कांग्रेस के प्रधान व पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और संयुक्त प्रगतीशील गठबंधन की सरकार में विदेश राज्य मंत्री परनीत कौर के निवास मोतीबाग पैलेस में पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड पावरकाम के इंफोर्समेंट विंग की टीम को आज रविवार को नहीं जाने दिया गया। सुरक्षा कर्मियों की ओर से कहा गया कि 'घर में कोई नहीं है...जब मालिक आ जाएं तभी आनाÓ।
सुरक्षा दस्ते की ओर से दिए गए इस टके से जवाब के बाद पावरकाम की टीम बिना कनेक्शनों की जांच किए ही लौट आई।
 पावरकाम के दस्ते ने मोतीबाग पैलेस के बिजली के कनेक्शनों, कुल लोड और मोतीबाग पैलेस में लगे 11 मीटरों की जांच करने उक्त टीम गई थी। इससे पहले टीम पैलेस के लोड का डाटा एकत्र कर चुकी है।
वहीं पावरकाम के चैयरमैन इंजी. केडी चौधरी ने इस संबंध में 'दैनिक जागरणÓ को बताया कि आज जांच करने गए अधिकारियों से घर पर किसी के ना होने का हवाला दिया गया है, ऐसे में आज जांच नहीं हो पाई है। साथ ही वे स्पष्ट करते हैं कि ये रूटीन जांच है, इसे आप छापामारी नहीं कह सकते। पावरकाम ने अपने कनेक्शन जांचने होते हैं और मीटरों की जांच करनी होती है। चैयरमैन ने कहा कि अब  सोमवार को फिर से जांच की जाएगी।
दूसरी ओर पावरकाम के सूत्र बताते हैं कि 11 में से आठ मीटरों की सीलें टूटी हुई पाई गई हैं। हालांकि ये सभी कैप्टन अमरिंदर के सरवेंट क्वाटरों की हैं, लेकिन है सभी पैलेस के परिसर में मौजूद हैं। दो कनेक्शन कैप्टन अमरिंदर सिंह के नाम हैं जबकि एक उनके एबी स्टड फार्म के नाम से है। सूत्र ये भी बताते हैं कि लोड अधिक पाए जाने की स्थिति में तीन साल के पुराने बिलों के अनुसार पेनाल्टी लगाई जाएगी। मौके पर धन राशि ना दिए जाने की सूरत में एफआईआर दर्ज की जाएगी।
उधर मोतीबाग पैलेस के कर्मियों का कहना है कि सरवेंट क्वाटर बंद पड़े हैं ऐसे में बिजली की रीडींग जीरो आना स्वभाविक है।

किसान व पुलिस प्रशासन में भिड़न्त 29 घायल, Farmers-Police clash leads to 29 injured


-पंचायती जमीन खाली करवाने पर विवाद भड़का
-घायलों में डीएसपी ग्रामीण जगजीत सिंह भी शामिल
भूपेश चट्ठा, पटियाला
बलबेड़ा व चरासों गांव में गांव व पुलिस प्रशासन के बीच आज मंगलवार को हुई भिड़ंत में दोनों पक्षों के 29 लोग घायल हो गए हैं। एक ओर जहां किसानों ने पंचायती जमीन खाली करवाने आए पुलिस व जिला प्रशासन के अधिकारियों पर पत्थर मारे हैं वहीं पुलिस की ओर से किसानों को खदेडऩे के लिए लाठी चार्ज करने से लेकर, आश्रु गैस के गोले छोडऩे, रबर की गोलियां दागने और पानी की फोहरों का इस्तेमाल करने के अलावा हवा में गोलियां भी चलाई गई हैं।
  दोनों गांवों की पंचायतों की करीब 140 एकड़ जमीन खाली करवाने जिला प्रशासन पिछले कुछ समय से प्रयासरत था। इससे पहले भी दो बार प्रशासन ने मौके पर जाकर जमीन खाली करवा खुली बोली के माध्यम से जमीन देने की कोशिश की लेकिन भारतीय किसान यूनियन एकता डकौंदा के समर्थन से जमीन पर काबिज लोगों ने इसका विरोध किया और प्रशासन को खाली हाथ लौटना पड़ा।
आज तीसरे प्रयास में प्रशासन ने बिना किसी घोषणा के बड़ी संख्या में पुलिस बल के साथ मौके पर जाकर जमीन खाली करने को कहा। हालांकि प्रशासन के इस प्रयास की जानकारी किसान यूनियन के नेताओं को पहले से थी, ऐसे में वे भी लगभग हर तरह से तैयारी के साथ मौके पर पहुंचे हुए थे।
पंचायत एंव विकास विभाग और राजस्व विभाग के अधिकारियों के साथ पहुंची पुलिस के साथ किसानों का दो बार टकराव हुआ है। इसमें 14 पुलिस कर्मी और 15 किसान घायल हुए हैं। इनमें डीएसपी ग्रामीण जगजीत सिंह भी शामिल हैं। वे कहते हैं कि उन्हें कुछ पता ही नहीं चला कब वे गिर पड़े और कब पत्थराव शुरू हो गया।
जबकि राजिंदरा अस्पताल में उपचाराधीन जोगिंदर कौर का कहना है कि उन्हें घर में से निकाल कर लाठियों से पीटा गया और ये काम पुरुष पुलिस कर्मियों ने किया है। इसी क्रम में किसानों का कहना है कि पुलिस ने उनका निशाना लगा कर गोलियां चलाई हैं। ब्लाक प्रधान सुखमिंदर सिंह अपनी जख्मी बांह दिखा कहते हैं कि उन्हें भी गोली लगी है।
इसी प्रकार सनौर के एसएचओ जगबीर सिंह पांव पर लगे जख्म को दिखा कहते हैं कि उनके पांव में छर्रा लगा है। दिलचस्प है कि बड़ी संख्या में दोनों पक्षों के घायलों के एक ही स्थान पर होने और घायल होकर उपचार करवाने के बावजूद दोनों पक्षों के हौंसले बुलंद हैं। एसएसपी पटियाला गुरप्रीत सिंह गिल व अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर अनिनदिता मितरा ने अस्पताल का देर सांय दौरा किया है।

बाक्स
बिना उकसावे के पुलिस ने हिंसा की: यूनियन
उपमुख्य संवाददाता, पटियाला
भारतीय किसान यूनियन एकता डकौंदा के जिला प्रधान डा. दर्शन पाल का कहना है कि पुलिस ने पंचायत व राजस्व विभाग के अधिकारियों के साथ आकर बिना उकसावे के हिंसा फैलाई है। डेढ़ घंटे के अंतराल में दो बार किसानों पर जुल्म ढाए गए। इसमें गोलियां बरसाना भी शामिल है। दर्जनों मोटर साइकिलों के साथ तोड़ फोड़ की गई है। यूनियन का कहना है कि 40-50 सालों से जिस जमीन को किसानों ने आबाद किया है और जब ये अन्न उत्पादन करने लगी है तो इसे छीना जा रहा है।


'मुख्यमंत्री हस्तक्षेप करें अन्यथा राज्य स्तरीय संघर्षÓ

फ्लैग: मामला शामलाट जमीन खाली करवाने का

उपमुख्य संवाददाता, पटियाला
बलबेड़ा व चरासौं गांव में शामलाट जमीन खाली करवाने को लेकर हुए विवाद पर 17 किसान व मजदूर संगठनों के नेताओं की कमेटी ने वीरवार को दोनों गांवों और अस्पताल का दौरा करने के बाद कहा है कि इस मामले में मुख्यमंत्री हस्तक्षेप करें। उनके संगठन को बुला कर बात करें और मामला हल करें। यह कार्य 25 जून को होने वाली बैठक में कर लिया जाए अन्यथा वे 26-27 जून को अपने नेताओं के साथ बातचीत कर राज्य स्तरीय संघर्ष करेंगे।
मामले की पड़ताल करने आई कमेटी का नेतृत्व करते बूटा सिंह बुर्जगिल ने मांग की है कि मामले को भड़काने में सबसे अधिक नकारात्मक भूमिका निभाने वाले सदर थाने के प्रभारी एएसपी धु्रमन एच निंबले और सनौर ब्लाक की बीडीओ जसवंत कौर को तुरंत तबदील किया जाए। इसी मौके पर उन्होंने अश्रु गैस के गोलों के खोल व एक रिवाल्वर के कारतूस का खोल भी दिखाया और आरोप लगाया कि महिलाओं और बुजुर्गों को घरों में से निकाल कर मार गया। जितने लोग अस्पताल में हैं उससे कहीं ज्यादा घरों में घायल पड़े हें।
प्रशासन की ओर से हाईकोर्ट के आदेशों पर 87 एकड़ जमीन खाली करवाने के सवाल पर कमेटी कहती है कि एक गांव में चार सौ एकड़ जमीन है तो दूसरे में 365 एकड़ और लगभग इतने ही परिवार हैं। सभी गरीब हैं, धनी कोई नहीं। इनमें 80 फीसद के पास खेती लायक जमीन नहीं है। जिला प्रधान डा. दर्शन पाल कहते हैं कि वे हाईकोर्ट नहीं जा रहे हैं। ये नीतिगत मामला है ऐसे में मुख्यमंत्री से ही हस्तक्षेप करने की मांग कर रहे हैं। चेतावनी के स्वर में वे यह भी कहते हैं कि जमीन वे किसी भी सूरत में खाली नहीं होने देंगे।

जमीन बे-आबाद थी, पंचायती नहीं
यूनियन का तर्क है कि प्रशासन जिस जमीन को पंचायती बता कर खाली करवाने की बात कह रहा है। वो पंचायतों के बनने से पहले और करीब 60 साल पहले बे-आबाद थी जिसे काश्त कर खेती लायक बनाया गया, ऐसे में पंचायती जमीन का हवाला देकर खाली नहीं करवाया जा सकता। तत्कालीन बिजली बोर्ड ने 20-20 साल पहले इसी जमीन पर इन्हीं लोगों के नाम कृषि क्षेत्र में बिजली कनेक्शन दे रखे हैं। 90 मोटरों के अलावा दो सौ से ज्यादा घरों के कनेक्शन भी चल रहे हैं। यूनियन कहती है कि 20 साल पुराना किराएदार नहीं निकाला जाता, ये 60 साल पुरानी जमीन खाली करवा रहे हैं।


दस मरे लोगों पर भी मामले दर्ज
सदर पुलिस थाने में पंचायत विभाग की जिस अधिकारी की शिकायत पर हत्या का प्रयास करने सहित अपराध की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है उनमें दस नाम ऐसे भी बताए जा रहे हैं जिनकी मौत हुए कई बरस बीत चुके हैं। यूनियन के महासचिव जगमोहन बताते हैं कि पुलिस ने बिना सबूत व बिना किसी तरह की जांच के मात्र उन लोगों पर ही मामला दर्ज कर दिया है जिनके नाम जमीन की गिरदावरी थी।

पावरकाम मुख्यालय में 'आउट साइडर्स' अलाउ नहीं!, No entry for ‘outsiders’ at PSPCL head office


-नहीं घुसने दिया मीडिया को, गेट पर पुलिस की तैनात
फोटो :
भूपेश चट्ठा, पटियाला
ेसेवा का अधिकार देने के साथ भ्रष्टाचार मुक्त पारदर्शी प्रशासन देने का दावा करने वाली पंजाब सरकार की सौ फीसद पूंजी वाली सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन व पंजाब स्टेट पावर ट्रांसमिशन लिमिटेड के गठन के बाद आए केंद्र के पहले किसी बड़े पदाधिकारी के लिए पावरकाम प्रशासन ने अपने मुख्यालय को किसी किले में तबदील कर दिया और अपने मुख्यालय में 'आउट साइडर्सÓ को तब तक 'अलाउÓ नहीं किया जब तक उनके मुख्य अतिथि गए नहीं। इस अवधि के दौरान पावरकाम के अधिकतर अधिकारियों ने फोन 'नॉट रिसपांसÓ पर लगे रहे। आज सोमवार को पावरकाम मुख्यालय में केंद्र सरकार के ऊर्जा सचिव उमाशंकर ने दौरा किया है।
 दिलचस्प है कि उनका यह दौरा भी 'पूर्ण पारदर्शिताÓ वाले ऑन लाइन सिस्टम को देखने के लिए किया गया बताया जा रहा है। जिसके तहत बिलिंग से लेकर शिकायत तक के निपटारे को पूरी तरह से पारदर्शिता के साथ करने का दावा पावरकाम की ओर से किया जा रहा है।
केंद्रीय सचिव के पावरकाम मुख्यालय के दौरे की 'तैयारियांÓ पिछले दो दिनों के कार्य के अवकाश के दौरान कर दी थी। साथ लगते एक पुराने फिल्म थियेटर परिसर में लगी झाडिय़ों को कुछ हद तक हटवा कर अपने कर्मियों के लिए पार्किंग बनाई और सुबह किसी के मुख्यालय पहुंचने से काफी पहले ही गेट पर पुलिस तैनात कर दी। जहां सीवरेज व पानी की लाइनें बिछाने से सड़क उखड़ी थी वहां रेड कारपेट बिछा दिया गया। अंदर जाने वालों की तलाशी लेना सुरक्षा की जरूरत थी तो गेट पर चुनिंदा कर्मियों को इस तरह से तैनात किया गया कि मीडिया कर्मियों की पहचान कर उन्हें अंदर जाने से रोका जा सके।
पाउरकाम के ही एक अधिकारी का कहना है कि गेट पर पुलिस की तैनाती मीडिया के लिए नहीं की गई थी मीडिया से दूरी बनाने के और भी उपाय हैं। ये तैनाती तो पावरकाम प्रबंधन से  गुस्साए कर्मियों, बेरोजगार लाइनमैनों, मृतक कर्मियों के आश्रितों और बिजली ना मिलने से पावर ग्रिडों पर ताले जडऩे वाले किसानों आदि को रोकने के लिए थी।
दिन भर फोन ना उठाने वाले लोक संपर्क विभाग के अधिकारियों से जब पावरकाम मुख्यालय के दरवाजे खुलने के बारे में पूछा गया तो बताया गया कि 'खुले हैंÓ। केंद्रीय ऊर्जा सचिव के दौरे पर बताया गया कि वो चले गए।  यहीं पर खबर क्या बनी? जैसे रटे रटाए औपचारिक सवाल पर भी लोक संपर्क विभाग शाम तक स्पष्ट नहीं था। कहा गया कि 'देखते हैंÓ क्या बनती है?


सांसद-सरकारें बदलते रहे, घग्गर उफनता रहा, Bottleneck; No govt. had solution for river Ghagger


गतिरोध: नदी पर्यावरण
-अकाली-भाजपा और कांग्रेस की सरकारें बनती बिगड़ती रही पर बाढ़ नहीं थमी
-1996 से हर चुनाव घग्गर की बाढ़ को मुद्दा बना जीते गए
भूपेश चट्ठा, पटियाला
तुम कांग्रेस के बल निकाल दो हम घग्गर के बल निकाल देंगे, तुसी कांग्रेस नूं चक्क दयो असी घग्गर नू चक दवांगे। 1993 में कहर बरपाने वाली घग्गर की बाढ़ के बाद आया 1996 का लोकसभा चुनाव विशुद्ध रूप से घग्गर के मुद्दे पर लड़ा गया। लेकिन घग्गर की बाढ़ का समाधान नहीं हो पाया।
 इसके बाद लगातार तीन लोकसभा चुनाव और इतने ही विधानसभा चुनाव होने के दौरान दो बार भयंकर बाढ़ फिर आई। बीते 12 में से मात्र दो मानसून सीजन को छोड़ दें तो हर साल बरसातें शुरू होते ही राजपुरा विधानसभा क्षेत्र का कुछ हिस्सा, घनौर, वर्तमान सनौर और पुराना डकाला, शुतराणा व समाना विधानसभा क्षेत्रों के 150 से 200 गांवों पर बाढ़ की तलवार लटक जाती है। आलम यह है कि इन क्षेत्रों के किसानों को अपनी धान की फसल का नष्ट होना सताता है तो अन्य गरीब दलित वर्ग को मजदूरी के लाले भी पड़ जाते हैैं।
 इतनी बड़ी आबादी और पंजाब हरियाणा सीमा पर बसे पटियाला संसदीय क्षेत्र का वोटर जहां नारों, दावों, वायदों, घोषणाओं, किए जाने वाले शिलान्यासों, अधिकारियों की विभिन्न स्तरों पर दी जाने वाली रिपोर्टों को 'चुनावी लारोंÓ का हिस्सा मान बैठा है और घग्गर की बाढ़ को अपनी बदकिस्मती।
 दिलचस्प है कि घग्गर की बाढ़ का स्थाई हल कभी नहीं तलाशा गया। इसके साईफनों की ना तो कभी पानी निकासी क्षमता बढ़ाई गई, इसकी खुदाई कर गहरी करने और हरियाणा की बीबीपुर झील से ओवर फ्लो होकर पानी को बहने से रोकने बांध मजबूत व ऊंचे नहीं किए गए। अकाली भाजपा गठबंधन सरकार में मुद्दा उछला तो केंद्र के कांग्रेसी हरियाणा के समर्थन में लगे रहे।
 संसद में 12 बार से अधिक घग्गर का मामला उठा इसे राष्ट्रीय मुद्दा बनाने का दावा एक ओर शिरोमणि अकाली दल करता है और कहता है कि उनके प्रयासों से अब योजना बन चुकी है प्रोजेक्ट पास हो गया है, केंद्र सरकार ने तो कुछ नहीं किया, वर्तमान सरकार 137 करोड़ रुपये की लागत से 35 किलोमीटर घग्गर को सुधारा गया है। 14 हजार क्यूसिक क्षमता का साइफन 25 हजार का किया गया। अगले चरण में जीटी रोड क्षेत्र में 418 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
केंद्रीय जल आयोग ने पिछले जुलाई में आई बाढ़ के बाद तीनों ही राज्यों को अपनी ओर से घग्गर को नियंत्रित करने वाली योजना के प्रस्ताव देने को कहा। पंजाब ड्रेनेज विभाग के आधिकारिक सूत्र बताते हैं कि उक्त विस्तृत प्रोजेक्ट के लिए तीनों ही राज्यों का एक संयुक्त सर्वेक्षण किया गया  घगगर के द्वितीय चरण को पूरा करने की अनुमति अब दी गई है। घग्गर का 22.5 किलोमीटर का खन्नौरी से मकरोड़ साहिब का पहला चरण  2009 में पूरा हो चुका है। 17.5 किलोमीटर के मकरोड़ साहिब से नीचे की ओर करहाली गांव तक का प्रोजेक्ट करीब करीब दस सालों  से लटक रहा है और मालवा क्षेत्र में अब तक हुआ लगभग हर चुनाव इसी मुद्दे पर लड़ा जाता रहा है।
बाढ़ नियंत्रित कब होगी इसका सटीक अंदाजा लगाना अभी मुश्किल है।

कहीं राजनीति तो कहीं बाबूशाही, Bottleneck; Politics & Babudum didn’t allow Plantation



गतिरोध-पौधारोपण
-गांव घलौड़ी में निगम ने नहीं की निशानदेही तो 11 एकड़ जमीन पर नहीं हुआ पौधारोपण
-लंग गांव में कब्जा कार्रवाई के छह नोटिसों के बाद भी पुलिस सहायता नहीं मिली
भूपेश चट्ठा, पटियाला
उत्तर भारत के सबसे कम प्रदूषण वाले शहरों में शामिल पटियाला में पौधरोपण करने के अभियान वन विभाग के स्तर पर सालों से ठंडे पड़े हैं। इन्हें सिरे चढ़ाने में कहीं राजनीति तो कहीं बाबूशाही अड़ंगा बनी हुई है।
घलौड़ी गांव में नगर निगम से वन विभाग को मिलने वाली 11 एकड़ जमीन की निशानदेही ना होने के चलते यह जमीन वन विभाग के पास नहीं आई और इस पूरे ही क्षेत्र में बड़े पैमाने पर होने वाला पौधारोपण बिलकुल नहीं हो सका है और क्षेत्र बंजर पड़ा है। सूत्र बताते हैं कि आसपास के खेतों का एरिया कुछ बढ़ा तो निगम का क्षेत्र कम हो गया। अब निगम वन विभाग को ऐसे ही जमीन अपने कब्जे में लेने को कह रहा है तो वन विभाग निशानदेही करवाने के बाद। दिलचस्प है कि 'दैनिक जागरणÓ ने अपने पिछले साल के गतिरोध कालम में भी यह मुद्दा उठाया था और हालात आज भी वैसे ही हैं। जबकि वन विभाग और लोकल बाडी विभाग में प्रक्रिया को अंतिम रुप दिया जा चुका है।
ठीक ऐसे ही कब्जा ना मिलने के कारण पौधारोपण ना होने का एक और उदाहरण इस साल जुड़ गया है। लंग गांव में हाईकोर्ट के आदेशों के बाद वन विभाग को मिली दस एकड़ जमीन पर पौधारोपण नहीं हो पाया है। यहां कारण यह है कि जिन लोगों का वर्तमान में जमीन पर कब्जा है उनकी राजनीतिक पहुंच उंची है। वन विभाग की ओर से कब्जा कार्रवाई के छह नोटिस जारी हो चुके है। हर बार पूरी डिवीजन से मजदूर व कर्मचारी ट्रैक्टर व अन्य वाहन बुलवा कर विभाग कब्जा लेने जाने की तैयारी करता है पर उसे प्रोटेक्शन के लिए पुलिस नहीं मिलती। कभी वीआईपी डयूटी आ जाती है तो कभी कोई अन्य कार्यक्रम। दिलचस्प है कि यहां राजस्व विभाग के अधिकारियों की तैनाती के अलावा एक डयूटी मेजिस्ट्रेट सहित 50 से 100 लोग पूरी तैयारी के साथ बैठे रह जाते है क्योंकि उन्हें पुलिस सहायता नहीं मिली होती या फिर अंतिम समय में कोई फोन आ जाता है और हजारों पौधे पेड़ बनने लगने से पहले ही लिफाफे का हिस्सा हो जाते हैं।
हालांकि विभाग ने जिले में दो लाख अधिक पौधों को लगाया अथवा बंटवाया गया है। विभाग की सनौर, पटियाला, समाना, मैंहस, सहित जिले में एक दर्जन नर्सरी हैं। जहां पर लोगों को पौधे कम रेट पर मुहैया करवाए जाते हैं। जहां पर आवला, बेहड़ा, बांस, पिपल, सुखचैन, जामुन, रीठा, बिल, गुलमोहर, जकरंडा, के अलावा अन्य किस्मों के पौधे उपलब्ध रहते हैं। जंगलात विभाग ने पौधारोपण को किसी तरह की कोई जमीन का अधिग्रहण नही किया है। विभाग ने भादसों भीड़, दंदराला, बीड़, अलावा अन्य सरकारी जगहों में पौधे लगाने का काम जरुर किया है।
वहीं पौधारोपण के नाम पर फोटो खिंचवाने वाले, चंदा व शोहरत बटोरने के अलावा खुद को ही खिताब दे स्वयंभू होने वाले समाजसेवी लोगों बहुत कम ऐसे हैं जिन्होंने फिर से पौधारोपण वाले स्थल का पुन: चक्कर लगाया हो। ऐसे में पौधे के पनपने की उम्मीद दस फीसद से भी नीचे आ जाती है। जानकार बताते हैं कि एक बार अगर जानवर किसी पौधे पर मुंह मार जाता है तो वो फिर उभर नहीं पाता। पौधों के पेड़ बनने के पीछे पानी ना मिलने के बाद दूसरी बड़ी रुकावट यही है।

Friday, 6 July 2012

पटियाला-चंडीगढ़ किलर रोड पर काम चालू हुआ, Bottleneck; Work starts on Patiala Chandigarh, the killer road


गतिरोध- सड़क
- अब अकालियों ने घोषणा को चंडीगढ़-पटियाला-बठिंडा तक बढ़ाया
-501 करोड़ रूपये के प्रोजेक्ट अलाट
-दो जगहों पर लगेगा टोल टैक्स
भूपेश चट्ठा, पटियाला
पटियाला-चंडीगढ़ रोड का 60-70 किलोमीटर का रास्ता कभी 45 मिनट में तय होता था, लेकिन बढ़ते ट्रैफिक ने यह समय बढ़ाकर दोगुना कर दिया। कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार वर्ष 2002 में आई तो तत्कालीन मुख्यमंत्री को अपने गृह जिले व गृहनगर से राजधानी तक जाने में परेशानी होने लगी। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने 20 मिनट की दूरी कम करने के लिए स्वयं तो हैलीकाप्टर का रास्ता चुन लिया, पर आम लोगों के लिए सड़क को फोर लेन करने की घोषणा कर दी। वादा किया गया कि जल्दी ही सड़क फोर लेन होगी, सड़क के बीच डिवाइडर होगा और दोनों और दो-दो गाडिय़ां आसानी से निकल सकेंगी। सरकारें बदल गई पर पटियाला-चंडीगढ़ किलर रोड बन तो नहीं पाई अलबत्ता इस पर काम जरूर चालू हो गया है। अब तक अड़ंगा बनी कुछ जरूरी मंजूरियां अब मिल गई हैं। पटियाला से जीरकपुर तक के रास्ते पर 501 करोड़ रूपयें का प्रोजेक्ट अलाट कर दिया गया है। बिजली, पानी व टेलीफोन की सर्विस लाइनें हटाने का काम शुरु हो गया है जबकि सड़क निर्माण 15 सितंबर से मानसून जाने के बाद चालू होगा। इसी प्रकार पटियाला से बठिंडा तक की सड़क के लिए 16 सौ  करोड़ का प्रोजेक्ट दिया गया है।
उल्लेखनीय है कि 'दैनिक जागरणÓ ने बीते साल अपने गतिरोध कालम के तहत एक जून को इस सड़क मुद्दा प्रमुखता से प्रकाशित किया था।
अब इस सड़क पर चंडीगढ़ तक जाने में दो जगहों पर टोल टेक्स लगा कर बिल्ट आन आपरेट के सिद्धांत पर निजी क्षेत्र के हवाले किया गया है। पंजाब सरकार के प्रस्ताव को केंद्रीय भूतल मंत्रालय से मंजूरी मिल गई है। राष्ट्रीय राजमार्ग 64 नंबर होने के चलते इसी मंजूरी की वजह से काम अटका था। राजपुरा से पहले और बनूड़ के पास दो जगहों पर टोल टैक्स भी लगेगा।
हालांकि 18 से 24 फुट चौड़ी सड़क पर दुर्घटनाएं बढ़ती रही और सड़क को किलर रोड का नाम मिल गया। शोर ज्यादा मचा तो सड़क को चौड़ा करने का कार्य शुरू हुआ। साढ़े 17 करोड़ रुपये की लागत से पांच सात फुट सड़क चौड़ी भी हो गई। अब तीन गाडिय़ां निकलने लायक हो गईं। वहीं तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पटियाला सरहिंद रोड को चौड़ा कर किलर रोड से ट्रैफिक का भार कम करने का प्रयास मात्र किया। इस सड़क पर पेड़ काटने की दुहाई दे पर्यावरण संजोए रखने की बात भी सामने रख दी गई।
 इसी दौरान पब्लिक प्राईवेट पार्टनरशिप का सिद्धांत आया इस 64 नंबर राजमार्ग के अलावा कई सड़कें दुरुस्त हुईं पर टोल टेक्स लग गया। राज्य में ऐसी सड़कों की संख्या 107 हो गई। पटियाला-समाना, पटियाला- नाभा रोड इसी नीति अधीन आ गए।
 कांग्रेस सत्ता से बाहर हुई तो प्रोजेक्ट ठंडा पड़ गया। शिरोमणि अकाली दल भारतीय जनता पार्टी गठबंधन सत्ता में आ गया। सरकार बने दो साल बीच चुके हैैं किलर रोड पर होने वाली दुर्घटनाओं की संख्या का ग्राफ एक बार फिर पुरानी स्थिति में आ गया। और तो और क्षेत्र में नए वाहनों का हो रहा रजिस्ट्रेशन तेजी से बढ़ता जा रहा है। मालवा बेल्ट से अकाली भाजपा गठबंधन को पिछले विधान सभा चुनाव में कड़ी हार का सामना करना पड़ा। अब अकाली भाजपा गठबंधन सरकार ने घोषणा का सिलसिला पटियाला से और डेढ़ सौ किलोमीटर आगे बढ़ते हुए बठिंडा तक कर दिया है। इसे अनुसार चंडीगढ़ से बठिंडा तक एक्सप्रेस हाईवे बनाया जाएगा।
दिलचस्प है कि इस सड़क पर भी करोड़ों खर्च होंगे पर इसी बीच चंडीगढ़ से बठिंडा तक सड़क की एक बार कारपेटिंग की जा चुकी है। पटियाला शहर से बहादुरगढ़ तक सड़क फोरलेन कांग्रेस के कार्यकाल में हो गई राजपुरा में भी थोड़ा क्षेत्र फोर लेन का है। बनूड़ में भी शहरी आबादी वाला हिस्सा फोर लेन हो चुका है। ऐसे ही स्थिति जीरकपुर से पहले और बाद में चंडीगढ़ तक की है। अब इन्हें मिलाया जा रहा है।

पीपीएससी ने घोषित किए परिणाम, मोहाली की अमनिंदर कौर टॉपर, Ppsc announces result Amninder kaur of Mohali tops


- 180 पदों के लिए हुई है भर्ती,  इन्हरीं में 38 पीसीएस कार्यकारी, 18 डीएसपी, 74 ईटीओ, छह तहसीलदार, पांच फूड सप्लाई अधिकारी, 15 बीडीओ, चार पंचायत अधिकारी, आठ असिस्टेंट रजिस्ट्रार, तीन लेबर अधिकारी, 13 रोजगार व प्रशिक्षण अधिकारी शामिल 
- पीसीएस व एलायड परीक्षा- 2009 के लिए 514 ने किया था टेस्ट पास
उपमुख्य संवाददाता, पटियाला
पंजाब पब्लिक सर्विस कमीशन ने लंबे इंतजार के बाद वीरवार को मुख्य परीक्षा के बाद लिए गए साक्षात्कार का परिणाम घोषित कर दिया है। मोहाली की अमनिंदर कौर 70.82 फीसद अंकों के साथ पीपीएससी की मेरिट लिस्ट में टॉपर रही हैं।
पीसीएस व एलायड परीक्षा- 2009 के लिए 514 उम्मीदवारों ने टेस्ट पास किया था। सफल उम्मीदवारों की मैरिट लिस्ट पीपीएससी ने अपनी वेबसाइट पर डाल दी है। फगवाड़ा की नयन ने आरक्षित वर्ग से दूसरा स्थान 65.81 फीसद अंकों से प्राप्त किया है। जबकि गुरुदासपुर के संजीव शर्मा ने 65.59 अंकों के साथ तीसरा स्थान पाया है। पटियाला की हरजोत कौर ने शारीरिक रूप से विकलांग श्रेणी में पहला स्थान प्राप्त किया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार 11 सालों के लंबे अंतराल के बाद ली गई परीक्षा के प्रीलिम पेपर में करीब आठ हजार उम्मीदवारों ने अपनी किस्मत आजमाई थी, इसमें से 2340 उम्मीदवारों ने प्रारंभिक परीक्षा पास कर मुख्य के लिए क्वालीफाई किया। कुल 180 पदों के लिए परीक्षा ली गई, इसमें विभिन्न विभागों में पीसीएस व एलायड सेवाओं और डीएसपी भर्ती किए जाने हैं। इन्हीं में 38 पीसीएस कार्यकारी, 18 डीएसपी, 74 ईटीओ, छह तहसीलदार, पांच फूड सप्लाई अधिकारी, 15 बीडीओ, चार पंचायत अधिकारी, आठ असिस्टेंट रजिस्ट्रार, तीन लेबर अधिकारी, 13 रोजगार व प्रशिक्षण अधिकारी शामिल हैं।
उल्लेखनीय है कि 1998 में ली गई पीपीएससी की परीक्षा के बाद सामने आए घोटाले के बाद केवल 2003 में परीक्षा ली गई वो भी उन उम्मीदवारों की पुन: परीक्षा थी जिन लोगों ने 1998 में तत्कालीन चेयरमैन रवि सिद्धू के समय में पीसीएस की परीक्षा में भाग लिया था। तत्कालीन सरकार ने 22 अप्रैल 2002 को रवि सिद्धू के कार्यकाल में भर्ती किए गए सभी 639 पदों को पुन: खाली कर दिया था।