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Saturday, 7 July 2012

सांसद-सरकारें बदलते रहे, घग्गर उफनता रहा, Bottleneck; No govt. had solution for river Ghagger


गतिरोध: नदी पर्यावरण
-अकाली-भाजपा और कांग्रेस की सरकारें बनती बिगड़ती रही पर बाढ़ नहीं थमी
-1996 से हर चुनाव घग्गर की बाढ़ को मुद्दा बना जीते गए
भूपेश चट्ठा, पटियाला
तुम कांग्रेस के बल निकाल दो हम घग्गर के बल निकाल देंगे, तुसी कांग्रेस नूं चक्क दयो असी घग्गर नू चक दवांगे। 1993 में कहर बरपाने वाली घग्गर की बाढ़ के बाद आया 1996 का लोकसभा चुनाव विशुद्ध रूप से घग्गर के मुद्दे पर लड़ा गया। लेकिन घग्गर की बाढ़ का समाधान नहीं हो पाया।
 इसके बाद लगातार तीन लोकसभा चुनाव और इतने ही विधानसभा चुनाव होने के दौरान दो बार भयंकर बाढ़ फिर आई। बीते 12 में से मात्र दो मानसून सीजन को छोड़ दें तो हर साल बरसातें शुरू होते ही राजपुरा विधानसभा क्षेत्र का कुछ हिस्सा, घनौर, वर्तमान सनौर और पुराना डकाला, शुतराणा व समाना विधानसभा क्षेत्रों के 150 से 200 गांवों पर बाढ़ की तलवार लटक जाती है। आलम यह है कि इन क्षेत्रों के किसानों को अपनी धान की फसल का नष्ट होना सताता है तो अन्य गरीब दलित वर्ग को मजदूरी के लाले भी पड़ जाते हैैं।
 इतनी बड़ी आबादी और पंजाब हरियाणा सीमा पर बसे पटियाला संसदीय क्षेत्र का वोटर जहां नारों, दावों, वायदों, घोषणाओं, किए जाने वाले शिलान्यासों, अधिकारियों की विभिन्न स्तरों पर दी जाने वाली रिपोर्टों को 'चुनावी लारोंÓ का हिस्सा मान बैठा है और घग्गर की बाढ़ को अपनी बदकिस्मती।
 दिलचस्प है कि घग्गर की बाढ़ का स्थाई हल कभी नहीं तलाशा गया। इसके साईफनों की ना तो कभी पानी निकासी क्षमता बढ़ाई गई, इसकी खुदाई कर गहरी करने और हरियाणा की बीबीपुर झील से ओवर फ्लो होकर पानी को बहने से रोकने बांध मजबूत व ऊंचे नहीं किए गए। अकाली भाजपा गठबंधन सरकार में मुद्दा उछला तो केंद्र के कांग्रेसी हरियाणा के समर्थन में लगे रहे।
 संसद में 12 बार से अधिक घग्गर का मामला उठा इसे राष्ट्रीय मुद्दा बनाने का दावा एक ओर शिरोमणि अकाली दल करता है और कहता है कि उनके प्रयासों से अब योजना बन चुकी है प्रोजेक्ट पास हो गया है, केंद्र सरकार ने तो कुछ नहीं किया, वर्तमान सरकार 137 करोड़ रुपये की लागत से 35 किलोमीटर घग्गर को सुधारा गया है। 14 हजार क्यूसिक क्षमता का साइफन 25 हजार का किया गया। अगले चरण में जीटी रोड क्षेत्र में 418 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
केंद्रीय जल आयोग ने पिछले जुलाई में आई बाढ़ के बाद तीनों ही राज्यों को अपनी ओर से घग्गर को नियंत्रित करने वाली योजना के प्रस्ताव देने को कहा। पंजाब ड्रेनेज विभाग के आधिकारिक सूत्र बताते हैं कि उक्त विस्तृत प्रोजेक्ट के लिए तीनों ही राज्यों का एक संयुक्त सर्वेक्षण किया गया  घगगर के द्वितीय चरण को पूरा करने की अनुमति अब दी गई है। घग्गर का 22.5 किलोमीटर का खन्नौरी से मकरोड़ साहिब का पहला चरण  2009 में पूरा हो चुका है। 17.5 किलोमीटर के मकरोड़ साहिब से नीचे की ओर करहाली गांव तक का प्रोजेक्ट करीब करीब दस सालों  से लटक रहा है और मालवा क्षेत्र में अब तक हुआ लगभग हर चुनाव इसी मुद्दे पर लड़ा जाता रहा है।
बाढ़ नियंत्रित कब होगी इसका सटीक अंदाजा लगाना अभी मुश्किल है।