Friday, 28 September 2012

मंडी बोर्ड के वाइस चेयरमैन ने दी खुली बहस की चुनौती


फ्लैग: मामला आढ़तियों के कमीशन को फ्रीज करने का
-कहा चेयरमैन लक्खोवाल सहित हर किसी किसान नेता बताए आढ़ती का कमीशन कम होने से किसान को क्या फायदा?
-नेताओं, नौकरशाहों के बाद पंजाब के किसान नेता मल्टी नैशनल कंपनियों के एजेंट बने
-पंजाब में घरेलू मार्केटिंग सिस्टम तोडऩे की साजिश
फोटो-चार
उपमुख्य संवाददाता, पटियाला
पंजाब मंडी बोर्ड के वाइस चेयरमैन रविंदर सिंह चीमा ने प्रदेश में आढ़तियों के कमीशन को फ्रीज करने की केंद्र की ओर जारी किए गए पत्र और इसके समर्थन में आए पंजाब के किसान नेताओं को खुली बहस की चुनौती दी है।
मार्केट कमेटी पटियाला के कार्यालय में जिला आढ़ती एसोसिएशन के साथ बैठक के बाद रविंदर चीमा ने कहा कि इसमें मंडी बोर्ड के चेयरमैन अजमेर सिंह लक्खोवाल सहित हर किसी किसान नेता से पूछते हैं कि उन्हें बताए कि आढ़ती का कमीशन कम होने से किसान को क्या और कितना फायदा होगा? आढ़ती को होने वाली आय का 90 फीसद हिस्सा खरीद एजेंसियों से आता है। यह कमीशन 27 रूपये हो या 33 किसान को उसकी फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य पूरा मिलेगा
किसानों को सीधे भुगतान के सवाल पर रविंदर चीमा कहते हैं कि चैक आढ़ती के माध्यम से जाए या किसान को सीधे दिया जाए। चैक उतने का ही रहेगा, इसमें कोई बदलाव नहीं होने वाला। पहले देश के नेताओं फिर नौकरशाहों को दवाब में लाने के बाद पंजाब के किसान नेताओं को मल्टी नैशनल कंपनियों ने कठपुतली बनाया है और ये लोग इनके एजेंट बन गए हैं। कंपनियां चाहती हैं कि पंजाब में घरेलू मार्केटिंग सिस्टम किसी तरह से तोड़ा जाए और ये सब कुछ इसी साजिश के तहत हो रहा है।
आढ़तियों की ओर से 18 फीसद ब्याज वसूले जाने की बात पर वे कहते हैं कि बैंक आढ़ती की लिमिट बनाते समय 15 फीसद सालाना की दर से ब्याज लेते हैं। इसके बाद आढ़ती ने मुनीम से लेकर अन्य खर्च करने होते हैं, जबकि सभी लिए गए कर्ज में से 95 फीसद की ही वापसी होती है।
मंडी बोर्ड में लिए गए सभी निर्णय सर्व सम्मति अथवा बहुमत से होने का दावा करने वाले चीमा से जब कहा गया कि चेयरमैन लक्खोवाल ने मंडी बोर्ड की ओर से ही आढ़तियों का कमीशन फ्रीज करने बाबत राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजा है। इस पर वे बताते हैं कि हाल ही में राज्य सरकार ने जब चेयरमैन का कार्यकाल बढ़ाया गया और पूरे बोर्ड का नहीं। इस तकनीकी कारण के चलते वे उक्त बैठक में भाग नहीं ले सके थे। हालांकि उक्त बैठक में अंतिम निर्णय राज्य सरकार पर ही छोड़ा गया है और ये उनका ही अधिकार है।


बाक्स
धरने फिलहाल स्थगित पर आंदोलन वापिस नहीं
पंजाब प्रदेश आढ़ती एसोसिएशन की ओर से केंद्र सरकार के खिलाफ धरने प्रदर्शन करने का कार्यक्रम फिलहाल स्थगित कर दिया गया है, लेकिन एसोसिएशन के प्रधान रविंदर सिंह चीमा ने वीरवार को पटियाला आढ़ती एसोसिएशन की बैठक में घोषणा की है कि आंदोलन वापिस नहीं लिया गया है। राज्य सरकार उनके साथ है और केंद्र को थोड़ा समय दिया जा रहा है।


चीनी की चोरी की तो आधा मूल जुर्माने में



-सरचार्ज सहित साढ़े पांच फीसद टेक्स की वसूली फिर भी
-पांच फीसद की बजाए वैट एक या दो फीसद लगता तो सरकार का राजस्व च्यादा बढ़ता: होल सेल शूगर एसो.

भूपेश चट्ठा, पटियाला
सरकारें बदलने में प्याज के बराबर खड़ी होने वाली चीनी की तस्करी की अथवा पंजाब में चोरी से लाने की कोशिश करते पकड़े गए तो समझो मूल का आधा जुर्माने में जाना तय है और इसके बाद सरचार्ज सहित साढ़े पांच फीसद टेक्स की वसूली फिर भी की जाएगी।
हरियाणा के साथ लगती पंजाब की सीमा पर कमोडिटी की तस्करी के मामले में सबसे कुख्यात कहे जाने वाले जिलों पटियाला, संगरूर प्रमुख है। हालांकि बठिंडा के पास डबवाली व राजस्थान के साथ लगते सांगरिया बार्डर भी इसमें शामिल  हैं, लेकिन चीनी का नाम आते ही पटियाला संगरूर का नाम आगे आ जाता है। प्रदेश में इस तरह के प्रयास आरंभ हो चुके हैं।
चीनी की तस्करी में लगे लोग भी हर संभव जोखिम उठाने को तैयार हैं। व्यवसाय के जानकार बताते हैं कि चीनी के दाम 35 से 40 रूपये प्रति किलो पर उसकी क्वालिटी के अनुसार प्रति क्विंटल 170 से 200 रूपये का टेक्स बनता है। एक सौ से दो सौ बोर ट्रक में लाने वालों को होने वाली कमाई का अंदाजा लगाया जा सकता है। जो चोर रास्तों से चंद हजार कमाने कई लाख रूपये दांव पर लगा रहे हैं।
अतिरिक्त आबकारी एंव कराधान आयुक्त लाजपाल सिंह जाखड़ बताते हैं कि करीब 15 दिन पहले स्टाक चैकिंग की गई थी इसमें तो कुछ खास नहीं निकला, लेकिन हाल ही में विभाग के मोबाइल विंग ने दो गाडिय़ां पकड़ी हैं। इससे लगता है कि कुछ लोगों ने चोर रास्तों से प्रयास शुरु किए हैं। राच्य की सीमा पर विभाग की पूरी निगाह है और चीनी की तस्करी करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। वे बताते हैं कि पहले तो जुर्माना खासा कम था लेकिन अब 55.5 फीसद है। ऐसे में साढ़े पांच फीसद का वैट बचाने के चक्कर में मूल के आधे से च्यादा कीमत का खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।
दूसरी ओर पटियाला होल सेल शूगर एसोसिएशन के प्रधान मोहन लाल बताते हैं कि सरकार को कोई नहीं रोक सकता लेकिन राज्य में चीनी पर लगाया गया टेक्स अगर एक या दो फीसद होता तो राजस्व में ज्यादा बढ़ोतरी होती। विभाग अथवा सरकार की ओर से अगर वैट में और बढ़ोतरी की जाती है तो तस्करी का बढऩा और राजस्व का गिरना तय है।

नहीं चले रनिंग वाटर पन बिजली


प्रोजेक्ट, पर सफाई शुरु
नहीं चले रनिंग वाटर पन बिजली प्रोजेक्ट, पर सफाई शुरु
-लहरा मुहब्बत का बंद यूनिट भी कर देगा उत्पादन शुरु
उपमुख्य संवाददाता, पटियाला
पंजाब सहित हरियाणा, दिल्ली व पूर्वी उत्तर प्रदेश को बिजली सप्लाई करने वाले सतलुज नदी पर बने रनिंग वाटर पन बिजली प्रोजेक्ट में से मंगलवार शाम तक कोई भी नहीं चल पाया है।
नदी में सिल्ट की मात्रा पांच हजार सस्पैंडिड पार्टीक्यूलेट मैटेरियल प्रति घन मीटर से उपर होने के अलावा पानी के बहाव के साथ पत्थर भी बह कर आने लगे। इनके प्लांट की टरबाइन से टकराने पर खासा नुकसान होने की संभावना रहती है। जिसकी वजह से 15 सौ मेगावाट के नाथपा-झाखड़ी प्रोजेक्ट को बंद करना पड़ा। इसी प्रकार इसी नदी पर पीछे की ओर बने चमेरा, करचम, वांगतू पन बिजली प्रोजेक्ट का भी उत्पादन रोकना पड़ा है। हालांकि इनसे बिजली लेने वाले पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड के अधिकारी बताते हैं कि उन्हें अब इस बात की जानकारी मिली है कि सिल्ट का स्तर कम होना शुरु हो गया है और प्रोजेक्ट में सफाई का काम शुरु कर दिया गया है। अगर सतलुज के कैचमेंट क्षेत्र में बारिश में कमी आती है, तो संभव है कि बुधवार को कुछ यूनिट में उत्पादन शुरु हो जाए।
वहीं प्रदेश के अपने उत्पादन पर पावरकाम के प्रवक्ता बताते हैं कि  लहरा मुहब्बत के श्री गुरु हर गोबिंद सिंह थर्मल प्लांट की बंद हुई यूनिट की बुआयलर टयूब को लगभग दुरुस्त कर लिया गया है। संभव है कि अगले कुछ घंटों में यह भी उत्पादन शुरु कर दे।
बिजली कटों के सवाल पर प्रवक्ता कहते हैं कि राज्य में कई क्षेत्रों बारिश होने की वजह से बिजली की मांग में करीब एक सौ लाख यूनिट की कमी आई है। जिसकी वजह से कट कम हुए हैं। 2050 लाख यूनिट पर चल रही मांग 1950 के आसपास रही है। लेकिन पन बिजली प्रोजेक्ट व पहाड़ी राज्यों से किए गए प्रबंध से मिल रही बिजली कट जाने से उपलब्धता 1750 लाख यूनिट ही रह गई है। हालांकि इसकी स्थिति में जल्द सुधार होगा।

सिल्ट से नाथपा-झाखड़ी के दो यूनिट ठप, पंजाब प्रभावित


-राजस्थान व उत्तरांचल से किए उपाय नाकाफी
-लहरा मुहब्बत की एक यूनिट ने भी उत्पादन बंद किया
भूपेश चट्ठा, पटियाला
कभी बारिश ना होने से बिजली की मांग बढ़ी तो परेशानी हुई और अब हिमाचल प्रदेश में सतलुज नदी के क्षेत्र में हुई भारी बारिश से पानी के साथ बह कर आई सिल्ट के चलते नाथपा-झाखड़ी पन बिजली परियोजना के दो यूनिटों ने काम करना बंद कर दिया है। जिससे कटी बिजली का प्रभाव पंजाब पर पड़ा है।
पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड के आधिकारिक सूत्र बताते हैं कि उत्तर भारत की चलते पानी की सबसे बड़ी 1500 मेगावाट की पन बिजली परियोजना नाथपा-झाखड़ी में पानी के साथ बह कर आई सिल्ट से खतरा पैदा हो गया है। जिसके चलते इसके दो यूनिट बंद करने पड़े हैं। तेज बारिश में कमी ना आने की स्थिति में अन्य यूनिट भी बंद किए जा सकते हैं। इस परियोजना से पंजाब, हिमाचल प्रदेश के अलावा दिल्ली व हरियाणा भी बिजली लेते हैं। पंजाब को मिल रही दो सौ मेगावाट बिजली फिलहाल आधी हो गई है।
उत्तरी ग्रिड के ठप होने के बाद हुई सख्ती और राजस्थान व उत्तरांचल में बारिश के बाद इन दोनों राज्यों के हिस्से की बिजली पंजाब ने स्थानीय स्तर पर किए बिजली प्रबंध के उपाय नाकाफी साबित हो रहे हैं। पंजाब ने इन राज्यों में बिजली की मांग कम होने के बाद केंद्रीय पूल में इनके हिस्से की चार सौ मेगावाट बिजली लेनी शुरु की है। ऐसे में दूर दराज के राज्यों से पंजाब को कम हुई बिजली की आपूर्ति इन दो राज्यों से हो गई है। केंद्रीय पूल से कुल मिल रही बिजली एक बार फिर एक हजार लाख यूनिट प्रतिदिन के पास आ गई है।
जबकि पावरकाम प्रवक्ता बताते हैं कि प्रदेश के अपने थर्मल प्लांटों में ये लहरा मुहब्बत के श्री गुरु हर गोबिंद सिंह थर्मल प्लांट की एक यूनिट ने भी उत्पादन बंद कर दिया है। तकनीकि खराबी के चलते 210 मेगावाट की कमी हो गई है। संभव है कि एक से दो दिनों में इसे चालू कर लिया जाएगा।
राज्य में बिजली की मांग जहां सर्वाधिक 23 सौ लाख यूनिट के पास से गिर कर 2050 लाख यूनिट पर आ गई है, जबकि आपूर्ति 1850 लाख यूनिट की जा रही है। पारा गिरने से एसी पर खपत कम हुई है पर मंगलवार को सरकारी कार्यालय, स्कूल, कालेज व अन्य प्रतिष्ठान खुलने से मांग बढऩी तय है।


फिजा के दिल को नहीं खोला मौत का राज


-दोबारा की गई जांच में भी नहीं हुआ खुलासा, दिल वापिस चंडीगढ़ भेजा
-कतरा भी खून नहीं था...हार्ट अटैक आया या नहीं खुलासा नहीं हुआ
-नहीं मिला कोई टीश्यू : डा. बल
भूपेश चट्ठा, पटियाला
पंजाब व हरियाणा की दो लगातार सरकारों में असिस्टेंट एडवोकेट जनरल के पदों पर रह चुकी और हरियाणा के पूर्व उप मुख्यमंत्री चंद्रमोहन से विवाह कर अनुराधा बाली से फिजां हुई, एडवोकेट का जीवन जितना जटिल रहा उतनी ही मौत भी पेचीदा हो गई है। फिजा के दिल ने दूसरी बार में भी उसकी मौत का राज नहीं खोला है।
मृत्यु के कारणों का पता लगाने पटियाला के गवर्नमेंट मेडिकल कालेज की पैथोलाजी लैब के विशेषज्ञ पहली बार में फिजा का दिल नहीं पढ़ पाए थे। विशेषज्ञों की ओर से पहले प्रयास में असफल रहने के बाद अब फिजा के दिल की दोबारा की गई जांच में भी कोई खुलासा नहीं हुआ है। इसके बाद उसके दिल को जहां वापिस चंडीगढ़ के उन्हीं डाक्टरों के पास भेज दिया है, जिनके यहां से पटियाला भेजा गया है। दिल वापिस लौटाने के साथ ही सील की हुई रिपोर्ट भी भेज दी गई है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि फिजा के दिल में एक कतरा भी खून नहीं था। और यह बेहद 'डीकंपोज्डÓ स्थिति में था। ऐसे में यह कहा नहीं जा सकता कि उसे हार्ट अटैक आया या नहीं। यह खुलासा भी नहीं हो पाया है कि हार्ट में रक्त जमने से कोई ब्लाकेज उपजा हो।
वहीं जांच कर रही टीम के डा. मनजीत सिंह बल ने बताया कि उन्हें दूसरी बार की जांच में भी कोई टिश्यू नहीं मिल पाया है ऐसे में वे किसी भी निश्कर्ष तक पहुंचने में खुद को असमर्थ पाते हैं। हालांकि कुछ नमूने मोहाली के निकट राज्य की केमिकल एग्जामीनेशन लैब में भी भेज गए हैं। विभाग के मुखी डा. बल कहते हैं कि दिल के बुरी तरह से सड़ जाने की वजह से भी दिक्कत आई है।

आम से फिर खास हो गया मोतीबाग पैलेस?


-चुनावों से छह महीने पहले वोटरों के लिए खुलते हैं दरवाजे
उपमुख्य संवाददाता, पटियाला
चुनावों से ठीक पहले राजतंत्र से सीधे लोकतंत्र के धरातल पर आने वाले मोतीबाग पैलेस अब एक बार फिर 'आम' से 'खास' हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस प्रधान व शहर से विधायक कैप्टन अमरिंदर सिंह और पटियाला लोक सभा सीट से सांसद व विदेश राच्य मंत्री परनीत कौर के घर में अब जाने के लिए आम आदमी को सुरक्षा जांच से निकलना पड़े या नहीं लेकिन अंदर प्रवेश के लिए पहले आम आदमी को विशिष्ट तंत्र के माध्यम से जरूर गुजरना पड़ेगा।
पैलेस की ही एक पूर्व समर्थक बताते हैं कि कार्यकर्ताओं व नेताओं के लिए पूर्व पटियाला रियासत के इस अंतिम पैलेस के दरवाजे नगर निगम चुनावों के बाद फीड बैक जानने हुए बैठक की रणनीति बनने के दौरान ही कर दिए गए थे। कांग्रेस के कार्यकर्ताओं और निगम चुनाव में विजेता रहे उम्मीदवारों के साथ मोतीबाग पैलेस  गए उनके स्मर्थकों को जब अंदर नहीं जाने दिया गया तब सुरक्षा कारणों का हवाला देकर कहा गया कि जिन लोगों को बुलाया ही नहीं गया उन्हें भला आने की जरूरत भी क्या थी, पहले से मना किया गया था, नाहक परेशान होने वाली बात है।
आज रविवार को मोतीबाग पैलेस में रखे गए एक संवाददाता सम्मेलन से ठीक पहले भी कुछ ऐसा ही हुआ जब पैलेस के दरवाजे पर सादी वर्दी में खड़े एक दरबान के हाथ में सूची थमा दी गई और आने वालों का नाम वेरीफाई किया जाने लगा। कुछ लोग रुके तो कुछ वापिस लौट गए। इस पर एक समर्थक ने बताया कि चुनावों से छह महीने पहले वोटरों के लिए ये दरवाजे खुलते हैं, अब चुनाव हो चुके हैं, ऐसे में ये बंद हैं। संभव है कि लोक सभा के मध्यावधि चुनाव पहले हों तो 2014 से पहले दरवाजे खुल सकते हैं। अगर किसी स्थिति में ऐसा नहीं होता है तो इससे पहले कोई संभावना नहीं है।

...अब ट्रैक्टर बेच नहीं होती शादी


जागरण एक्सक्लूसिव
-ट्रैक्टर की कीमत 70 हजार से बढ़कर अब चार-पांच लाख हुई तो जमीन 40 हजार से 40 लाख प्रति एकड़ हो गई
-किसान हुआ समझदार करवाने लगा आउट सोर्सिंंग
भूपेश चट्ठा, पटियाला
देश के नए ट्रैक्टरों की कुल खपत में से चंद साल पहले तक 24 फीसद हिस्सा रखने वाले पंजाबी किसानों के 'ट्रैक्टर प्रेमÓ में अब कमी आ गई है। इतना ही नहीं कभी बेटी की शादी के लिए सबसे आसान कहे जाने वाले 'ट्रैक्टर लोनÓ की चाहत भी नहीं रही है। दिलचस्प है कि इस सब के पीछे कारण कुछ और नहीं अलबत्ता रियल एस्टेट के दामों में उछाल और आटोमोबिल क्षेत्र के ठंडा रहना ही है।
पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला के समाज शास्त्र विभाग के पूर्व मुखी डा. पीएस जम्मू बताते हैं कि हरित क्रांति के दिनों में एक ट्रैक्टर की कीमत 70 हजार से बढ़कर अब चार-पांच लाख हो गई, पर जमीन की कीमत 40 हजार से 40 लाख प्रति एकड़ हो गई है। उन दिनों में 18 फीसद ब्याज पर लिया ट्रैक्टर लोन बेटी की शादी के लिए आसान रास्ता था, किसान अपना खर्च बढ़ा लेता था। ये सिलसिला पांच-दस साल पहले तक भी रहा है पर अब लोग पुराने ट्रैक्टर को प्राथमिकता देते हैं, वो भी एक लाख रूपये से कम के, कई मामलों में यह भी नहीं होता और 'आउट सोर्सिंंगÓ का जमाना है। सीजन आने पर ड्राइवर सहित सेवा ले ली जाती है और रखरखाव की सरदर्दी भी नहीं रहती।
अंताला गांव के गुरविंदर सिंह भिंडर बताते हैं कि फसल का एमएसपी कम था तो किश्त चुकाने कभी एक बीघा तो कभी दो बीघे जमीन बेची जाती थी, ऐसे में बैंक अधिकारी और उनके साथ आने वाली पुलिस किसी विलेन से कम नहीं थी। उनके गांव में ही पांच-छह ऐसे केस हैं जहां एक ही ट्रैक्टर किसानों के पांच पांच एकड़ खा गया। किश्तें टूटती गई और कभी पूरी नहीं हुई। पर अब हालात अलग हैं, अब बैंक अधिकारी खुद कहते हैं कि लोन ले लो, वे कई योजनाएं लाते और दिखाते हैं। बताते हैं कि पुराना लोन किस तरह से 'एडजस्टÓ होगा? और नया किस तरह से लिया जाएगा?  
वहीं राजपुरा रोड पर स्वराज ट्रेक्टर एजेंसी के मालिक विजय कपूर बताते हैं कि लोग अब ट्रेक्टर लोन लेने की बजाए जमीन के कागज रख बैंक से लिमिट बनवाते हैं, इसमें ब्याज भी कम पड़ता है, ऐसे में स्वभाविक है कि विवाह शादी के लिए ट्रेक्टर लोन लेना बीते जमाने की बात हो गई है। पांच सात साल पहले तक भी ऐसा होता था। अब भूमिगत जल स्तर गिरने पर बड़े ट्रेक्टर की मांग पानी खींचने के लिए बढ़ी है, अन्य की बिक्री में गिरावट दर्ज हुई है।
 सोशल साइंसेज एंड हैल्थ फोरम के डा. खोसला बताते हैं कि सरपल्स हुई अमीरी ने भी कई अवगुण दिमाग में डाल दिए हैं। जमीन के अनुपात में ट्रैक्टर चाहे ना मंहगा हुआ हो पर शादी का खर्च खासा बढ़ा लिया गया है। अब फसल लेने के बाद खेत की बजाए मैरिज पैलेस में शादी होती है, उम्र भर दहेज जुटाने की बजाए मॉल में शापिंग की जाती है। घर की बनी चीजों की बजाए अंग्रेजी ब्रांड पसंद किए जाते हैं। ऐसे में ट्रैक्टर लोन चाहे ना भी लिया जाए पर 'किल्लाÓ फिर भी बिकने को हो जाता है।