-राजस्थान व उत्तरांचल से किए उपाय नाकाफी
-लहरा मुहब्बत की एक यूनिट ने भी उत्पादन बंद किया
भूपेश चट्ठा, पटियाला
कभी बारिश ना होने से बिजली की मांग बढ़ी तो परेशानी हुई और अब हिमाचल प्रदेश में सतलुज नदी के क्षेत्र में हुई भारी बारिश से पानी के साथ बह कर आई सिल्ट के चलते नाथपा-झाखड़ी पन बिजली परियोजना के दो यूनिटों ने काम करना बंद कर दिया है। जिससे कटी बिजली का प्रभाव पंजाब पर पड़ा है।
पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड के आधिकारिक सूत्र बताते हैं कि उत्तर भारत की चलते पानी की सबसे बड़ी 1500 मेगावाट की पन बिजली परियोजना नाथपा-झाखड़ी में पानी के साथ बह कर आई सिल्ट से खतरा पैदा हो गया है। जिसके चलते इसके दो यूनिट बंद करने पड़े हैं। तेज बारिश में कमी ना आने की स्थिति में अन्य यूनिट भी बंद किए जा सकते हैं। इस परियोजना से पंजाब, हिमाचल प्रदेश के अलावा दिल्ली व हरियाणा भी बिजली लेते हैं। पंजाब को मिल रही दो सौ मेगावाट बिजली फिलहाल आधी हो गई है।
उत्तरी ग्रिड के ठप होने के बाद हुई सख्ती और राजस्थान व उत्तरांचल में बारिश के बाद इन दोनों राज्यों के हिस्से की बिजली पंजाब ने स्थानीय स्तर पर किए बिजली प्रबंध के उपाय नाकाफी साबित हो रहे हैं। पंजाब ने इन राज्यों में बिजली की मांग कम होने के बाद केंद्रीय पूल में इनके हिस्से की चार सौ मेगावाट बिजली लेनी शुरु की है। ऐसे में दूर दराज के राज्यों से पंजाब को कम हुई बिजली की आपूर्ति इन दो राज्यों से हो गई है। केंद्रीय पूल से कुल मिल रही बिजली एक बार फिर एक हजार लाख यूनिट प्रतिदिन के पास आ गई है।
जबकि पावरकाम प्रवक्ता बताते हैं कि प्रदेश के अपने थर्मल प्लांटों में ये लहरा मुहब्बत के श्री गुरु हर गोबिंद सिंह थर्मल प्लांट की एक यूनिट ने भी उत्पादन बंद कर दिया है। तकनीकि खराबी के चलते 210 मेगावाट की कमी हो गई है। संभव है कि एक से दो दिनों में इसे चालू कर लिया जाएगा।
राज्य में बिजली की मांग जहां सर्वाधिक 23 सौ लाख यूनिट के पास से गिर कर 2050 लाख यूनिट पर आ गई है, जबकि आपूर्ति 1850 लाख यूनिट की जा रही है। पारा गिरने से एसी पर खपत कम हुई है पर मंगलवार को सरकारी कार्यालय, स्कूल, कालेज व अन्य प्रतिष्ठान खुलने से मांग बढऩी तय है।
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