Friday, 28 September 2012

नहीं चले रनिंग वाटर पन बिजली


प्रोजेक्ट, पर सफाई शुरु
नहीं चले रनिंग वाटर पन बिजली प्रोजेक्ट, पर सफाई शुरु
-लहरा मुहब्बत का बंद यूनिट भी कर देगा उत्पादन शुरु
उपमुख्य संवाददाता, पटियाला
पंजाब सहित हरियाणा, दिल्ली व पूर्वी उत्तर प्रदेश को बिजली सप्लाई करने वाले सतलुज नदी पर बने रनिंग वाटर पन बिजली प्रोजेक्ट में से मंगलवार शाम तक कोई भी नहीं चल पाया है।
नदी में सिल्ट की मात्रा पांच हजार सस्पैंडिड पार्टीक्यूलेट मैटेरियल प्रति घन मीटर से उपर होने के अलावा पानी के बहाव के साथ पत्थर भी बह कर आने लगे। इनके प्लांट की टरबाइन से टकराने पर खासा नुकसान होने की संभावना रहती है। जिसकी वजह से 15 सौ मेगावाट के नाथपा-झाखड़ी प्रोजेक्ट को बंद करना पड़ा। इसी प्रकार इसी नदी पर पीछे की ओर बने चमेरा, करचम, वांगतू पन बिजली प्रोजेक्ट का भी उत्पादन रोकना पड़ा है। हालांकि इनसे बिजली लेने वाले पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड के अधिकारी बताते हैं कि उन्हें अब इस बात की जानकारी मिली है कि सिल्ट का स्तर कम होना शुरु हो गया है और प्रोजेक्ट में सफाई का काम शुरु कर दिया गया है। अगर सतलुज के कैचमेंट क्षेत्र में बारिश में कमी आती है, तो संभव है कि बुधवार को कुछ यूनिट में उत्पादन शुरु हो जाए।
वहीं प्रदेश के अपने उत्पादन पर पावरकाम के प्रवक्ता बताते हैं कि  लहरा मुहब्बत के श्री गुरु हर गोबिंद सिंह थर्मल प्लांट की बंद हुई यूनिट की बुआयलर टयूब को लगभग दुरुस्त कर लिया गया है। संभव है कि अगले कुछ घंटों में यह भी उत्पादन शुरु कर दे।
बिजली कटों के सवाल पर प्रवक्ता कहते हैं कि राज्य में कई क्षेत्रों बारिश होने की वजह से बिजली की मांग में करीब एक सौ लाख यूनिट की कमी आई है। जिसकी वजह से कट कम हुए हैं। 2050 लाख यूनिट पर चल रही मांग 1950 के आसपास रही है। लेकिन पन बिजली प्रोजेक्ट व पहाड़ी राज्यों से किए गए प्रबंध से मिल रही बिजली कट जाने से उपलब्धता 1750 लाख यूनिट ही रह गई है। हालांकि इसकी स्थिति में जल्द सुधार होगा।

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