लोगो: मंहगाई को चपत
-23.33 रूपये में दो वक्त का खाना, सुबह का ब्रेकफास्ट और शाम की चाय मट्ठी शामिल
-घरेलू गैस सिलेंडर का भी नहीं होगा प्रयोग, बिजली के चुकाने होंगे तीन हजार रूपये
भूपेश चट्ठा, पटियाला
देश भर में जहां बढ़ती मंहगाई के खिलाफ आंदोलन चल रहे हैं और एक के बाद एक राजनीतिक दल मंहगाई पर अपनी रोटियां सेंक रहा है वहीं शिरोमणि अकाली दल भारतीय जनता पार्टी गठबंधन की राच्य की हाल ही में एक बार फिर आई सरकार के कार्यकाल में पटियाला के प्रतिष्ठित सरकारी गल्र्स कालेज की मेस में खाना सस्ता कर कई लोगों को पाठ पढ़ा दिया है।
याद रहे कि पटियाला के तत्कालीन महाराजों की ओर से अपनी प्रमुख महारानी के पूरे महल को देकर उत्तर भारत के इस हिस्से में शिमला के बाद गल्र्स कालेज की शुरुआत की गई थी। तब इसे वूमैन कालेज कहा जाता था।
गल्र्स कालेज के प्रबंधन ने किसी तरह के विवाद से बचने के लिए इस बार खुली कोटेशन आंमत्रित किए हैं और सभी के सामने ठेकेदारों के आवेदन खोले हैं। दिलचस्प है कि शहर में जहां हर तरफ दूध, दही, फल, सब्जी, दाल आदि के दाम बढ़ रहे हैं वहीं गल्र्स कालेज की मेस के लिए हुए ठेके में इस बार न्यूनतम बोली पिछले साल की तुलना में 40 रूपये कम रही है। इस बार मात्र 700 रूपये प्रति छात्रा प्रति माह की बोली हुई है जबकि पिछले साल यही दर 740 रूपये प्रति माह पर थी।
दिलचस्प है कि कालेज के होस्टल में रहने वाली हर छात्रा को एक दिन में 23 रूपये 33 पैसे एक दिन की डाइट के खर्च करने होंगे। इस राशि में शानदार दो वक्त का भोजन और सुबह का नाश्ता उपलब्ध होगा, जिसमें दूध-दही के साथ परोंठे व शाम को चाय के साथ मट्ठी अलग से होगी। इतना ही नहीं दो वक्त के खाने में भी किसी तरह की बोरियत ना हो इसके लिए वार के हिसाब से मीनू तय किया गया है। मंगलवार राजमांह के लिए है तो वीरवार कढ़ी चावल के लिए। यहीं पर मंहगाई की चपत समाप्त नहीं होती। छात्राओं के लिए खाने के बाद स्वीट् डिश का प्रबंध भी किया जाता है और गुलाब जामुन से लेकर खीर, हलवा, कस्टर्ड सब कुछ शामिल है।
प्रशासन की ओर से किए गए प्रबंधों में इस बार जिला प्रशासन के आदेशों का भी पूरा ख्याल रखा गया है। इसमें मेस में ठेकेदार की ओर से खर्च की जाने वाली बिजली के लिए कुल तीन हजार रूपये चुकाने होंगे जबकि अब तक गैस के मिलते आ रहे घरेलू एलपीजी सिलेंडर का प्रयोग भी सरकारी कालेज की मेस में नहीं होगा। यहां पर कामर्शियल गैस सिलेंडरों का उपयोग होगा। ऐसे में जहां मंहगाई से लड़ाई लड़ी गई है वहीं कानूनी दायर में रह कर हो यह भी सुनिश्चित किया गया है।