Monday, 4 June 2012

सस्ता हुआ सरकारी गल्र्स कालेज का खाना, Negative inflation at girl’s college hostel’ mess


 लोगो: मंहगाई को चपत
-23.33 रूपये में दो वक्त का खाना, सुबह का ब्रेकफास्ट और शाम की चाय मट्ठी शामिल
-घरेलू गैस सिलेंडर का भी नहीं होगा प्रयोग, बिजली के चुकाने होंगे तीन हजार रूपये
भूपेश चट्ठा, पटियाला
देश भर में जहां बढ़ती मंहगाई के खिलाफ आंदोलन चल रहे हैं और एक के बाद एक राजनीतिक दल मंहगाई पर अपनी रोटियां सेंक रहा है वहीं शिरोमणि अकाली दल भारतीय जनता पार्टी गठबंधन की राच्य की हाल ही में एक बार फिर आई सरकार के कार्यकाल में पटियाला के प्रतिष्ठित सरकारी गल्र्स कालेज की मेस में खाना सस्ता कर कई लोगों को पाठ पढ़ा दिया है।
 याद रहे कि पटियाला के तत्कालीन महाराजों की ओर से अपनी प्रमुख महारानी के पूरे महल को देकर उत्तर भारत के इस हिस्से में शिमला के बाद गल्र्स कालेज की शुरुआत की गई थी। तब इसे वूमैन कालेज कहा जाता था।
गल्र्स कालेज के प्रबंधन ने किसी तरह के विवाद से बचने के लिए इस बार खुली कोटेशन आंमत्रित किए हैं और सभी के सामने ठेकेदारों के आवेदन खोले हैं। दिलचस्प है कि शहर में जहां हर तरफ दूध, दही, फल, सब्जी, दाल आदि के दाम बढ़ रहे हैं वहीं गल्र्स कालेज की मेस के लिए हुए ठेके में इस बार न्यूनतम बोली पिछले साल की तुलना में 40 रूपये कम रही है। इस बार मात्र 700 रूपये प्रति छात्रा प्रति माह की बोली हुई है जबकि पिछले साल यही दर  740 रूपये प्रति माह पर थी।
दिलचस्प है कि कालेज के होस्टल में रहने वाली हर छात्रा को एक दिन में 23 रूपये 33 पैसे एक दिन की डाइट के खर्च करने होंगे। इस राशि में शानदार दो वक्त का भोजन और सुबह का नाश्ता उपलब्ध होगा, जिसमें दूध-दही के साथ परोंठे व शाम को चाय के साथ मट्ठी अलग से होगी। इतना ही नहीं दो वक्त के खाने में भी किसी तरह की बोरियत ना हो इसके लिए वार के हिसाब से मीनू तय किया गया है। मंगलवार राजमांह के लिए है तो वीरवार कढ़ी चावल के लिए। यहीं पर मंहगाई की चपत समाप्त नहीं होती। छात्राओं के लिए खाने के बाद स्वीट् डिश का प्रबंध भी किया जाता है और गुलाब जामुन से लेकर खीर, हलवा, कस्टर्ड सब कुछ शामिल है।
प्रशासन की ओर से किए गए प्रबंधों में इस बार जिला प्रशासन के आदेशों का भी पूरा ख्याल रखा गया है। इसमें मेस में ठेकेदार की ओर से खर्च की जाने वाली बिजली के लिए कुल तीन हजार रूपये चुकाने होंगे जबकि अब तक गैस के मिलते आ रहे घरेलू एलपीजी सिलेंडर का प्रयोग भी सरकारी कालेज की मेस में नहीं होगा। यहां पर कामर्शियल गैस सिलेंडरों का उपयोग होगा। ऐसे में जहां मंहगाई से लड़ाई लड़ी गई है वहीं कानूनी दायर में रह कर हो यह भी सुनिश्चित किया गया है।

घग्गर को दुरुस्त करना दूसरे ही चरण में अटका, Could not channelized river Ghagger


-दो दशकों में मात्र 17.5 किलोमीटर ही हो पाया चैनेलाइजेशन का काम
-केंद्र ने पटियाला, फतेहगढ़ साहिब और संगरूर के 12 शहरों के लिए घोषित किया 296.96 करोड़ का प्रोजेक्ट
फोटो: 4
भूपेश चट्ठा, पटियाला
दक्षिणी-पूर्वी पंजाब में बरसात के दिनों में लगभग हर दूसरे साल तबाही मचाने वाले घग्गर दरिया के 'बल-बिंगÓ निकालने के दावे प्रति दावे के नाम पर मालवा क्षेत्र में नारे लगते रहते हैं, लेकिन कई चरणों में होने वाला काम दूसरे ही चरण में अटक गया है। हालांकि साफ सफाई के नाम पर पूरे घग्गर दरिया को पंजाब व हरियाणा दोनों ने ही एक प्रकार से तिलांजली दे रखी है, लेकिन दोनों ही राज्य घग्गर दरिया का जहां कहीं से भी दोहन हो सकता करने में कोर कसर नहीं छोड़ रहे।
पंजाब में चंडीगढ़ व हिमाचल-हरियाणा   के पास जीरकपुर क्षेत्र में जहां तहां से रेता-बजरी निकालने का काम पंजाब की तरफ से इतना हुआ कि केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की ओर से रोक लगानी पड़ी। हालांकि पंजाब ने अपने जिलों एसएएस नगर, पटियाला, संगरूर, मानसा के बड़े भूभाग के लोगों को फलैश फ्लड से बचाने कहीं भी दरिया की सफाई व किनारे मजबूत करने अथवा तटबंधों पर काम शुरु नहीं किया है।
पंजाब व हरियाणा सीमा पर दोनों तरफ बहने वाले घग्गर के मामले में हरियाणा ने चीका रोड पर हांसी बुटाना नहर के नीचे बने साइफन से मिट्टी निकलाने और प्रति टिपर दो हजार रूपये तक में बेचने का काम बड़े पैमाने पर शुरु कर रखा है। बाकायदा टेंडर भी जारी किए गए हैं। सूत्र बताते हैं कि इसके अलावा अंबाला, कैथल जिलों से लेकर दक्षिणी छोर तक कहीं भी सफाई शुरु नहीं की गई है।
बाढ़ की मार सबसे अधिक झेलने वाले पटियाला व संगरूर जिलों में करीब दो सौ किलोमीटर क्षेत्र पर पड़ती है। इस सबके बावजूद घग्गर की बाढ़ नियंत्रण का कार्य दूसरे ही चरण में अटक गया है। पहले चरण में खनौरी से मकरोड़ साहिब के बीच मात्र 17.5 किलोमीटर नदी के चैनेलाइजेशन का काम मुक म्मल हुआ है।
दूसरे चरण के 21.7 किलोमीटर में मकरोड़ साहिब से पंजाब के कड़ैल अथवा हरियाणा के जाखल तक चैनेलाइज करने के बाद अन्य सहायक नदियों के किनारे पक्के करने के प्रोजेक्ट शुरु होने थे। इसी क्रम में हरियाणा राज्य की ओर से अपने क्षेत्र में बांध बनाने को पंजाब ने सुप्रीम कोर्ट में 70 गांवों के आठ फीट पानी में डूबने का हवाले दे आपत्ति जताई गई तो केंद्र की ओर से फरवरी में प्रोजेक्ट रोकने पर उपमुख्य मंत्री सुखबीर बादल ने मूणक में लोगों के साथ विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया।
इसके बाद केंद्र ने पटियाला, फतेहगढ़ साहिब और संगरूर के 12 शहरों के लिए 296.96 करोड़ का प्रोजेक्ट दिए जाने की घोषणा कर रखी है। इसमें डेरा बस्सी, बनूड़, राजपुरा, घनौर, पातड़ां, खनौरी, लहरा गागा, मूणक, फतेह गढ़ साहिब, नाभा, बसी पठाना, मंडीगोबिंद गढ़ के नाम शामिल हैं।

जीवनदायनी नदी हो गई डायन!, The river that gave birth turns to killer


- जहां कभी मछलियां पकडऩे के ठेके होते थे वहां पांव-खुर गलने लगे अब टयूबवेलों के पाइप भी नहीं टिकते
भूपेश चट्ठा, पटियाला
हिमाचल प्रदेश के डगशाई से शुरु हो पाकिस्तान तक बहने वाली घग्गर नदी से पंजाब-हरियाणा के अलावा राजस्थान भी प्रभावित होता है, लेकिन सबसे बड़ा हिस्सा पटियाला व संगरूर जिलों में है। करीब दो सौ किलोमीटर क्षेत्र में बहने वाली इस नदी में कभी मछली पकडऩे के लिए सरकारी स्तर पर ठेके हुआ करते थे। पर जीवन दायनी ये नदी अब करीब करीब डायन का रूप धारण कर गई है।
पंजाब व हरियाणा सीमा पर बहने वाली घग्गर नदी के एक तो अब बरसाती होकर रह गई है। जब भी पानी आता है तो बाढ़ के रूप इसके अलावा दस महीने इसमें बहने वाले पानी की हालत इन दिनों कुछ ऐसी हो गई है कि आसपास के खेतों में ट्यूबवेल के पाइप भी गलने लगे हैं और कई स्थानों पर अच्छे मैटल की और पानी में ही डूबने के लिए बनी मोटर भी जंग से जूझ रही होती है।
क्षेत्र में धर्मेहड़ी गांव के बाशिंदे हरदीप सिंह बताते हैं कि पहले घग्गर नदी का पानी सिंचाई के काम में भी आता था। नलकूप की जरूरत तो बाद के सालों में ही पड़ी है। लोग याद करते हैं कि अब पशु इस नदी के पास फटकते नहीं हैं। अगर मजबूरी में इंसानों को आना जाना पड़ जाए तो पांव गलने लग जाते है। गुरदयालपुरा बीड़ के पास मरोड़ी गांव के कश्मीर सिंह बताते हैं कि जो लोग आसपास पशु चराने ले आते है और नदी के एक से दूसरे छोर पर आना जाना पड़ जाए तो जानवरों के खुर तक गल जाते हैं। नदी का क्रिस्टल क्लीयर पानी अब काला-भूरा हो चुका है।
उल्लेखनीय है कि थापर यूनिवर्सिटी और पीपीसीबी के आठ सदस्यों दल की ओर से की गई छह साल पहले की गई मानीटरिंग में सामने आया कि नाइकेटा पेपर मिल मुबारकपुर से पहले लिए गए पानी के सैंपलों मे आर्गेनिक तत्वों, बीओडी सीओडी की मात्र क्रमश 4.2 व 10 माइक्रो ग्राम पाई गई। जिंक 0.46, कैल्शियम 28, मैग्नीशियम 20 एमजी पाया गया। जीरकपुर के आगे अंबाला-चंडीगढ़ पुल पर बीओडी 132, सीओडी 240 एमजी और कैल्शियम 160 व मैग्नीशियम 52 पर आ गया। जल जीवन गिरकर 20 फीसदी रह गया, किसी भी तरह की मछली इस पानी में 96 घंटों में मर जाती है। हालात इसके बाद से बिगड़े ही हैं और जीरकपुर के बाद घग्गर में पंजाब हरियाणा के बनूड़, घनौर, सनौर, अंबाला, राजपुरा, पटियाला आदी कई शहरों का सीवर आ मिलता है और दर्जन भर शराब व गत्ता फैक्ट्रीयां सहित कई इंडस्ट्री अपना योगदान दे रही हैं।

मुख्य आरोपी न्यायिक हिरासत में, जांच फिर ठुस्स, Main accused is in jail, police find no clue


फ्लैग: पंजाबी युनिवर्सिटी में फर्जी भर्ती घोटाला
दैनिक जागरण फालोअप
-एक सप्ताह तक दो बार रिमांड ले किसी का पता ना उगलवा पाई पुलिस, पहले दिन के बाद नहीं हुई कोई बड़ी रिकवरी
भूपेश चट्ठा, पटियाला

दो सौ लोगों को पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला व नहरी विभाग में नौकरी दिलवाने के नाम पर लाखों रूपये ठगने और युनिवर्सिटी परिसर में साक्षात्कार से लेकर नियुक्ति पत्र देने और पेरोल पर नाम दर्ज कर हस्ताक्षर तक करवा वेतन तक दे देने के मुख्य आरोपी के दो बार सात दिन से च्यादा पुलिस रिमांड में रहने के बाद अब न्यायिक हिरासत में पहुंच जाने के बाद पूरे प्रकरण की जांच एक बार फिर ठुस्स हो गई है।
दिलचस्प है कि मामले के मुख्य आरोपी अमरजीत सिंह कंग के अलावा उसके पत्नि बच्चे सहित करीब एक दर्जन लोगों को पुलिस ने आरोपी बनाया है, लेकिन कंग की पुलिस रिमांड में हुई 'सख्त जांचÓ के बावजूद पुलिस उसके किसी भी करीबी का पता ठिकाना नहीं जान पाई है। घर के ही रिश्तेदारों ने मुखिया को अपने गायब होने के बाद के छिपने के ठिकाने ना बताए हों ऐसा मानना मुश्किल लगता है। विदेश भाग जाने के भी पुख्ता सुराग नहीं है और पंजाब पुलिस के रिमांड पर एक सप्ताह से च्यादा रहने के बाद आरोपी कुछ ना उगले यह बात भी गले नहीं उतरती। पहले दिन की शानदार रिकवरी के बाद कोई कार्रवाई ना होना भी कई सवाल खड़े कर रहा है। याद रहे कि कंग को 24 मई को पुलिस ने पकड़ लिया और 26 मई को एसएसपी ने आरोपी से क्या क्या मिला का विस्तृत ब्योरा मीडिया के सामने रखा। इसमें 51 लाख रूपये की नगदी के अलावा दो कारें, दो कंप्यूटर, 50 जाली नियुक्ति पत्र, मोहरें व प्लाटों की रजिस्ट्रीयां बरामद की गई हैं। इन नियुक्ति पत्रों में युनिवर्सिटी के अलावा नहरी विभाग में कलर्क, सेवादार, ड्राइवर, व बेलदारों के नियुक्ति पत्र शामिल थे। गिरोह ने 69 कलर्क, 87 सेवादार, 6 ड्राइवर, चार पुलिस कंमाडो, नहरी विभाग में नौ बेलदार सहित करीब दो सौ लोगों से ठगी मारी है।
 वहीं 'दैनिक जागरणÓ की ओर से संपर्क किए जाने पर एसपी सिटी दलजीत सिंह राणा कहते हैं कि पहले दिन के बाद भी कुछ रिकवरी तो हुई है। किसी अन्य आरोपी के पकड़े जाने के सवाल पर वे कहते हैं कि अर्बन एस्टेट थाने के एसएचओ इस मामले पर रेड कर रहे हैं। जल्द ही कुछ लोगों की गिरफ्तारी होने की संभावना है।
इसी संबंध में अर्बन एस्टेट थाने के प्रभारी मनजीत सिंह कहते हैं कि मुख्य आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है और शुरुआती जांच में हुई रिकवरी के बाद च्यादा कुछ नहीं हुआ है। वे इस बात की भी पुष्टि करते हैं कि अन्य आरोपियों में से किसी ओर की गिरफ्तारी अभी नहीं हुई है।

ना विकास ना एंटी इंक्बेंसी, मुद्ïदा सिर्फ 'आउट साइडर्स', Outsiders the only issue in municipal election


निगम चुनाव
-करीबी रिश्तेदारों-मित्रों के दम पर जीतने की ताल ठोक रहे उम्मीदवार
-राजनीतिक दलों का एजेंडा नहीं सिर्फ भावनात्मक मुद्दे छाए हैं चुनाव पर
फोटो: निगम का लोगो लगाया जा सकता है
भूपेश चट्ठा, पटियाला
जमीनी स्तर पर चुनावी लोकतंत्र हो और शहर का हर इंसान प्रत्यक्ष रूप से जिस राजनीतिक सत्ता के साथ प्रभावी रूप से जुड़ा हो वहां चुनाव प्रचार के दौरान आम आदमी से जुड़ी कोई बात नहीं हो रही है। ना सत्ता पक्ष विकास की बात कर रहा है और ना विपक्ष एंटी इंक्बेंसी की। सत्ता की पहली सीढ़ी पर सिर्फ और सिर्फ एक ही मुद्ïदा छाया है वो है, 'आउट साइडर्सÓ।
दिलचस्प है कि इस मुद्दे से शिरोमणि अकाली दल, भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस सभी परेशान हैं, जबकि बहुजन समाज पार्टी ने पार्टी स्तर पर चुनाव ना लडऩे की घोषणा कर रखी है और पंजाब पीपल्स पार्टी चुनाव चिन्ह को लेकर जूझ रही है।
पटियाला नगर निगम के चुनावों में अकाली-भाजपा गठबंधन की पूरी तरह से कमान संभाल रहे जिले के इकलौते केबिनेट मंत्री सुरजीत सिंह रखड़ा स्वीकार करते हैं कि कुछ वार्डों में उम्मीदवार का आउट साइडर होना मुद्दा बन गया है और पार्टी एक दो जगहों पर रणनीति में बदलाव भी करने जा रही है। विकास की बात ना होने के सवाल पर वे कहते हैं कि अभी प्रचार शुरु हुआ है। आने वाले दिनों में गठबंधन सरकार की ओर से सवा पांच सालों में किए गए विकास को जनता के सामने रखा जाएगा।
दूसरी ओर हर उम्मीदवार अपने करीबी रिश्तेदारों-मित्रों के दम पर जीतने की ताल ठोक रहा है और विरोधी राजनीतिक विचारधारा से जुड़े रिश्तेदारों व व्यवसाय में साथ काम करने वालों का समर्थन मन व धन से खुलकर और तन से देर सवेर प्राप्त कर रहा है। इतना ही राजनीतिक दलों का एजेंडा कहीं दिखाई नहीं दे रहा और सिर्फ भावनात्मक मुद्दे छाए हैं। निगम चुनाव पर करीबी निगाह रखने वाले कहते हैं कि भाजपा और कांग्रेस जैसे राष्ट्रीय दलों का एजेंडा तो वैसे ही दिल्ली से चल कर पटियाला के निगम तक आते आते अप्रभावी हो जाता है, जबकि अकाली दल सिर्फ धर्म और क्षेत्र की राजनीति करता है जो शहरों में चल नहीं पाती। चुनावी विश्लेषक ये भी कहते हैं कि शहर में कांग्रेस हाल के विधान सभा चुनावों में बड़े अंतर से जीती है और अकाली दल ने प्रदेश में सत्ता फिर से पाई है। ऐसे में कांग्रेस का शहर में बड़ा वोट बैंक है और राज्य की सत्ता पर अकाली-भाजपा गठबंधन फिर से आया है। ऐसे में कुटुंब ही 'अपने बंदेÓ के लिए जी जान से काम करेगा यह तय है। पार्टी पालीटिक्स संभव है काम ना करे।

ना इंडस्ट्री ना प्लांट, फिर भी प्रदूषण से मुक्ति नहीं, No industry, no plant, still no relief from pollution


पर्यावरण दिवस आज
 जिस नदी अथवा ख्वाजा की पूजा करते बुजुर्ग करते थे उसमें सीवरेज डाल दिया गया

-शहर के फैंफड़े कहे जाने वाली बारांदरी के दुर्लभ पेड़ों की जड़ों में पेस्टीसाइड डाल सांस की नली में छेद करने में कोई कसर नहीं छोड़ी
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भूपेश चट्ठा, पटियाला
उत्तर भारत के दूसरे सबसे कम प्रदूषित शहर का दर्जा रखने वाले पटियाला शहर में ना तो जालंधर की तरह लेदर की इंडस्ट्री है और ना ही लुधियाना की तरह इलेक्ट्रोप्लेटिंग इंडस्ट्री और ना ही बठिंडा की तरह कोई थर्मल प्लांट ही लगा है जिससे सोचा जा सके कि 'विकास का पहिया घूमेगाÓ तो थोड़ा बहुत 'साइड इफेक्टÓ बर्दाश्त करना भी पड़ेगा। लेकिन ऐसा कुछ विकासोन्मुखी कारण ना होने के बावजूद शहर को प्रदूषण से मुक्ति नहीं मिल पाई है।
दिलचस्प है कि शहर के सबसे पुराने औद्योगिक क्षेत्र फैक्ट्री एरिया में अब फैक्ट्री तो कोई रही नहीं और प्लाट कट कर रिहायशी मकान बन पड़े हैं और कुछ यहां ना हुआ तो लोगों ने अपने घरों ा कूड़ा कचरा ही छोटी नदी में उड़ेलना शुरु कर दिया। शुरु में तो सड़क चौड़ी होती रही पर अब लगातार बनी रहने वाली दुर्गंध का कारण बन गई है।
वर्तमान में इंडस्ट्री का हब बनाए गए फोकल प्वाइंट में मार्बल व टाइलों के गोदाम ज्यादा है और उत्पादन करने वाली ईकाइयां कम हैं ऐसे में इंडस्ट्री से होने वाला प्रदूषण कम और वाहनों का धुआं यहां पर ज्यादा दिखाई देता है।
शहर भर के अस्पतालों व सेहत संस्थानों से निकलने वाली बायो मेडिकल वेस्ट को तो प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने दुरुस्त र दिया पर घरेलू कचरा उठवाने में नगर निगम के दावे ठुस्स ही रहें हैं। हालांकि सनौरी अड्डा के पास के डंपिंग ग्राउंड के आसपास के लोगों को राहत जरूर मिल गई है।
शहर की जिस नदी को बुआ का दर्जा प्राप्त था और जिसे समय समय पर यहां के महाराजा 'नत्थ व चूड़ाÓ चढ़ा कर शान्त रहने की गुहार लगाई जाती थी और जिसके  किनारे पर पटियाला बसा था, वो 'पटियाला की रावÓ अब पूरी तरह से गंदा नाला बन गई है। कारण एकमात्र है कि जिस नदी अथवा ख्वाजा की पूजा करते बुजुर्ग करते थे उसमें सीवरेज डाल दिया गया है।
शहर के फैंफड़े कहे जाने वाली बारांदरी में नए पेड़ लगाने के नाम पर अशोका गाड़ दिया गया जबकि आसपास रहने वाले रईसों पेड़ों के गिरे पत्ते पसंद नहीं है या कोई पेड़ कथित रूप से वास्तु दोष उत्पन्न करता है, तो इस शहर में ऐसे लोग भी हुए हैं जिन्होंने दुर्लभ पेड़ों की जड़ों में पेस्टीसाइड डाल कर एतिहासिक बारांदरी अथवा सांस की नली में छेद करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।

पर्यावरण दिवस पर संकल्प, environment day, resolution


 जिले का पर्यावरण दुरुस्त करना है: डिप्टी कमिश्नर जीके सिंह
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पटियाला के डिप्टी कमिश्नर और पर्यावरण पर अक्सर लिखते रहने वाले जीके सिंह इस साल पर्यावरण दिवस पर बधाई देने के साथ ही कहते हैं कि जिले की हवाओं को जहर मुक्त करना है, जिले के दरियाओं  और धरती को पूरी तरह से सुरक्षित करने की दिशा में पेस्टिसाइड मुक्त खेती को बढ़ावा देना और पौधारोपण के अभियान चलाए जाएंगे।

शहर को डंपिंग ग्राउंड से मुक्त करवाना है: मेयर अजीतपाल सिंह कोहली
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शहर को डंपिंग ग्राउंड से मुक्त करवाना है और शहर के हर नागरिक को प्रदुषण मुक्त स्वस्थ पर्यावरण उपलब्ध करवाना है। मेयर अजीतपाल सिंह कोहली कहते हैं कि अगले पर्यावरण दिवस से काफी पहले ही कूड़ा कचरा हटा दिया जाएगा। हर घर के बाहर से कूड़ा कचरा हटा कर शहर से बाहर ले जाया जाएगा। मेयर कहते हैं कि हम हर चीज पर्यावरण से लेते हैं ऐसे में हमारा भी फर्ज बनता है कि आसपास का पर्यावरण ठीक रखें और मेयर होने की स्थिति में उनकी जिम्मेदारी बढ़ जाती है।

यूनिवर्सिटी कैंपस को स्मोक फ्री बनाना है: वाइस चांसलर डा. जसपाल सिंह
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पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला के वाइस चांसलर डा. जसपाल सिंह कहते हैं कि उनका संकल्प है कि इस साल में वे यूनिवर्सिटी कैंपस को स्मोक फ्री बना दें। पर्यावरण की दिशा में कैंपस को और अधिक हरा भरा बनाने के प्रयास के अलावा पाठयक्रम में वे पर्यावरण को हिस्सा बनाना चाहते हैं। बताते हैं कि जूलोजी विभाग को अब जूलोजी व पर्यावरण विभाग करने के अलावा एमए पर्यावरण नाम से इस साल नया पाठयक्रम से शुरु किया गया है। इसी विषय पर सेमीनार इत्यादि भी करवा कर जागरुकता लाने का प्रयास करेंगे।

छप्पड़ों से प्रदूषित हो रहे भूमिगत जल को बचाना है: पंचायती राज मंत्री सुरजीत सिंह रखड़ा
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गांवों में छप्पड़ों अथवा दूषित पानी के तालाबों से प्रदूषित हो रहे भूमिगत जल को बचाने का सपना संजोए पंचायती राज व ग्रामीण विकास राच्य मंत्री सुरजीत सिंह रखड़ा कहते हैं कि इन तालाबों का पानी प्रदूषण मुक्त कर सिंचाई के काम लाने तक के प्रयास करने है और पंचायतों को साथ लेकर इसी मानसून में पौधे लगाने का कार्यक्रम है इससे ना केवल अच्छा लेंड स्केप होगा अपितु पर्यावरण भी बेहतर करने में सहयोग मिलेगा है। वे कहते हैं कि साढ़े बारह हजार गांव हैं एक में 50 पेड़ भी लग गए तो पंजाब हरा भरा हो जाएगा।


थर्मल प्लांटों में उपाय किए जा रहे हैं पौधारोपण भी करेंगे: चेयरमैन पावरकाम इंजी. केडी चौधरी
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 पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड के चेयरमैन इंजी. केडी चौधरी कहते हैं कि पावरकाम थर्मल प्लांटों में से प्रदूषण कम से कम करने के उपाय कर रहा है और आसपास के क्षेत्रों में पौधरोपण करवाया गया है। पिछले साल पावरकाम के विभिन्न कार्यालयों में एक लाख से अधिक पौधे लगाए थे। इस बार इससे भी सघन अभियान चलाया जाएगा। व्यक्तिगत संकल्प के नाम पर वे कहते हैं कि पर्यावरण का वे सदैव ख्याल रखते हैं और जीवन में अपनाया है।