Saturday, 28 April 2012

निष्पक्ष चुनाव फोटो वाली मतदाता सूची बिना संभव नहीं, without, photo voter list; fair election, is not possible



फ्लैग: निगम चुनावों की दस्तक
-पांच बार के विधायक ब्रहम महिंदरा ने पंजाब सरकार व चुनाव आयोग के समक्ष रखी मांग
-पिछले स्थानीय निकाय के चुनावों में हुई गड़बड़ी का दिया हवाला
फोटो: 21
भूपेश चट्ठा, पटियाला
निकट आ रहे नगर निगम चुनावों की आहट अब स्पष्ट रूप से सुनाई देने लगी है और साथ ही पिछले चुनावों में क्या हुआ था? ये चिंता भी अब विपक्ष में बैठे कांग्रेसियों को सताने लगी है। ऐसे हालात में प्रदेश कांग्रेस के ही वरिष्ठ नेताओं ने तोड़ निकालने भी शुरु कर लिए है। इसकी शुरुआत पटियाला ग्रामीण के विधायक ब्रहम महिंदरा ने कर दी है।
'दैनिक जागरणÓ के साथ विशेष बातचीत में उन्होंने बताया कि निष्पक्ष चुनाव फोटो वाली मतदाता सूची बिना संभव नहीं है।
राच्य में पांच बार के विधायक ब्रहम महिंदरा कहते हैं कि पिछली बार निगम चुनावों में क्या हुआ था? इस बारे में किसी को बताने की जरूरत नहीं है, लेकिन सही भी सही है कि हाल ही में राच्य में सम्पन्न हुए  विधान सभा चुनाव तमाम आशंकाओं के बीच शांतिपूर्ण तरीके से सिरे चढ़े हैं। इसका सबसे बड़ा कारण वोटर लिस्ट में मतदाता की फोटो छपा होना रहा है। वोटर कार्ड के बाद मतदाता सूची ने कई चोर दरवाजे बंद कर दिए। बोगस वोटिंग रुकी और जाली वोट डालने को लेकर होने वाले झगड़े नहीं हुए।
तीन सरकारों में मंत्री रहे ब्रहम महिंदरा कहते हैं कि निसंदेह चुनाव आयोग को शांतिपूर्ण मतदान करवाने का श्रेय जाता है ऐसे में आयोग के साथ ही वे पंजाब सरकार से मांग करते हैं कि निगमों के होने जा रहे चुनावों में फोटो वाली मतदाता सूची का प्रयोग किया जाए।
आल इंडिया कांग्रेस कमेटी के सदस्य ब्रहम महिंदरा पिछले स्थानीय निकाय के चुनावों में हुई गड़बड़ी का हवाला देने के साथ ही कहते हैं कि राच्य सरकार को स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपराओं का पालन करना चाहिए और जनता की ओर से मौजूदा सरकार प्रति समय समय पर दिए जाने वाले फतवे को स्वीकार करना चाहिए ना कि अपनी मनमर्जी से जमीनी स्तर पर ही लोकतंत्र का गला घोंट देना चाहिए।

तीन दिन का नोटिस, फिर कोई सुनवाई नहीं , municipal corporation, roads, construction, notice



  फ्लैग: पांच शैडयूल सड़कों का मामला
-निगम ने कहा अवैध निर्माण गिराओ, नहीं तो हम तोड़ेंगे
- बाद में हर्जाना नहीं देने का जिक्र भी नोटिस में

उपमुख्य संवाददाता, पटियाला
  शहर की पांच शैडयूल सड़कों के आठ सौ दुकानदारों पर लटक रही अतिक्रमण की तलवार जहां की तहां है, हालांकि राहत का एक पखवाड़ा भी अभी नहीं गुजरा है कि नगर निगम प्रशासन ने दुकानदारों को तीन दिन का नोटिस जारी कर दिया है और साथ ही चेतावनी जारी की है कि इसके बाद फिर कोई सुनवाई नहीं होने वाली।
निगम की ओर से जारी किए गए नोटिस में दुकानदारों से कहा गया है कि मार्किंग के तहत तय किए गए अवैध निर्माण को वे खुद तीन दिनों के भीतर गिराएं अन्यथा निगम की ओर से यही कार्रवाई की जाएगी। इतना ही नहीं निगम ने नोटिस में यह चेतावनी भी जारी कर दी है कि तीन दिन बाद में किसी तरह का हर्जाना नहीं दिया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि शहर की पांच शैडयूल सड़कों के किनारे बनी कई सौ दुकानों पर हाईकोर्ट के आदेश के बाद कहर बरपना लगभग तय माना जा रहा है। नगर निगम ने संभावित रूप से कार्रवाई करने वाली इन दुकानों की निशानदेही कर चुका है। हर तोड़ी जाने वाली दुकान पर निगम के कर्मी लाल क्रास का निशान लगा हैं।
वहीं आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद 1076 दुकानों पर कार्रवाई होनी थी। इसमें से करीब  छह सौ दुकानदारों ने इसी महीने में दुकान का निर्माण 1996 से पहले होने के सबूत निगम के पास जमा करवा दिए हैं। इसमें बिजली पानी के बिल से लेकर, आयकर रिर्टन व अन्य लाइसेंस शामिल हैं। जबकि दो सौ के करीब दुकानें ऐसी हैं जो लंबे समय से बंद पड़ी हैं जिन्हें नोटिस नहीं दिया जा सका है। ऐसे में कार्रवाई की हद में आने वाली दुकानों का आंकड़ा तीन सौ के पास रह सकता है।

शेष दुकानों का पीडब्ल्यूडी करेगी अधिग्रहण?

दिलचस्प है कि जिस बात के लिए लगभग सभी दुकानदार जदोजहद कर रहे हैं उस पर मामले से जुड़े जानकार बताते हैं कि अंतत: शेष बची दुकानों का अधिग्रहण लोक निर्माण विभाग को करना पड़ेगा तभी सड़क को पूरी तरह से खोलने का काम सिरे चढ़ पाएगा। दुकानदार व सड़क किनारे पर आए होटल मालिक भी यही चाहते हैं कि उन्हें उचित मुआवजा मिल जाए। कहते हैं कि जब ये दुकानें गलत जगह पर थी तो बनने क्यों दी गई?, इसमें दुकानदारों का भला क्या कसूर है?

 88 फुट चौड़ी सड़क को 15-15 फुट और चौड़ा करनी है

शहर में ट्रैफिक को बेहतर बनाने और प्रवेश व बाहर जाने वाले प्रमुख रास्तों को और चौड़ा करने के मद्ेनजर सरहिंद रोड, राजपुरा रोड, संगरूर रोड, नाभा रोड व राजपुरा-सरहिंद बाईपास पर कार्रवाई होनी है। इन सड़कों की औसतन चौड़ाई लगभग 88 फु ट है और इन्हें दोनों तरफ 15-15 फुट चौड़ा किया जाना है। आलम ये है कि किसी सड़क पर दुकान पूरी ही खत्म हो जाती है तो कहीं पर पांच-सात फुट शेष बचती है, जबकि कुछ जगहों पर पांच-सात फुट ही तोड़ी जाएगी।

निगम से पास हैं नक्शे

शहर की लोक निर्माण विभाग की ओर पूर्व समय में बनाई गई जिन सड़कों पर से दुकानों को हटाया जाना है। उनमें से च्यादातर के नक्शे पास हैं और ये नक्शे नगर निगम ने विभिन्न प्रकार की औपचारिकताएं पूरी करने और सरकारी स्तर शुल्क ले, रसीद काट कर जारी किए हैं। ऐसे में इन्हें सीधे तौर पर अवैध नहीं कहा जा सकता, लेकिन हाई कोर्ट के आदेश हैं ऐसे में इनका बचना भी मुश्किल है।

प्रशासन मुस्तैद! काश हमेशा रहे accident, administration




-घायलों के पहुंचने से पहले पहुंची मेडिकल टीम
-मौत की सूचना के साथ ही एक लाख की सहायता राशि की घोषणा
भूपेश चट्ठा, पटियाला
दुर्घटना की स्थिति में घायल को सरकारी अस्पताल में लेजाने की प्राथमिकता होती है कि किसी तरह के कानूनी पचड़े में पडऩे पर हाथ उपर ही रहे पर सरकारी अस्पतालों की बदहाली की तस्वीर सामने आते ही घायलों को ले जाने वालों की हालत घायल से च्यादा गंभीर हो जाती है, लेकिन शनिवार को पटियाला-सरहिंद रोड पर हुई दुर्घटना की सूचना पहुंचने के साथ ही अस्पताल प्रशासन मुस्तैद हो गया। अस्पताल प्रशासन की मुस्तैदी देख हर कोई खामोशी से सोचने लगा काश हमेशा ही ऐसा रहे।
घायलों के अस्पताल पहुंचने से पहले ही सरकारी मेडिकल कालेज के प्रिंसिपल व मेडिकल सुपरिटेंडेंट डा. केडी सिंह, इमरजेंसी के प्रोफेसर इंचार्ज डा. अशोक शर्मा, सर्जरी विभाग के प्रोफेसर इंचार्ज डा. इंद्रजीत चावल अपनी टीम के साथ पहुंच गए। हर तरह की संभावित दवा का इंतजाम पहले से ही कर लिया गया। हालांकि घायल श्रद्धालुओं के साथ आ रहे जत्थे के अन्य सदस्य भी पहुंच गए लेकिन तब तक बिना किसी अफरा तफरी के फस्र्ट एड का प्रबंध हो गया।
डा. केडी सिंह बताते हैं कि उन्हें फतेहगढ़ साहिब के डिप्टी कमिश्नर की ओर से उन्हें घायलों का निशुल्क इलाज करने का संदेश मिल गया है लेकिन उन्होंने पहले से ही किसी को दवा लाने नहीं भेजा हर प्रकार की दवा इमरजेंसी में मौजूद है। किसी घायल के हैड इंजरी होने अथवा ट्रामा के हालत होने के सवाल पर वे बताते हैं कि अधिकतर घायलों की टांगे टूटी हैं और किसी की हालत गंभीर नहीं है। इनमें से किसी को पीजीआई ले जाने की जरूरत नहीं है। मुख्यमंत्री के आदेशों के बाद अब निशुल्क उपचार सहित अन्य सहायता जारी रहेगी।
दूसरी ओर 50 वर्षीय मृतक बीरो के परिवारजनों के लिए एक लाख रूपये की सहायता राशि की घोषणा उपचाराधीन बीरो की मौत की सूचना के चंद मिनट के भीतर ही आ गई। फतेहगढ़ साहिब के डिप्टी कमिश्नर ने मुख्यमंत्री की ओर से मृतक के परिवार को एक लाख रूपये की सहायता और घायलों का मुफ्त ईलाज की घोषणा कर पटियाला में यह संदेश भिजवा भी दिया। जिसका हर किसी ने खामोशी से स्वागत भी किया और एक बार फिर कहा 'काश हमेशा ही ऐसा रहे

ट्रक-बस की टक्कर में 22 श्रद्धालु घायल, एक की मौत


फोटो: 1 से 10
-डिप्टी कमिश्नर ने मुख्यमंत्री की ओर से मृतक के परिवार को एक लाख रूपये की सहायता और घायलों का मुफ्त ईलाज की घोषणा


उपमुख्य संवाददाता, पटियाला
पठानकोट के पास स्थित गुरुद्वारा श्री दोदड़ी साहिब की कमेटी के श्रद्धालुओं से भरी बस की सामने से आ रहे ट्रक से सीधी भिड़ंत होने पर एक महिला की राजिंदरा अस्पताल में मौत हो गई जबकि 15 घायलों में अधिकतर की टांगें टूट गई हैं। जबकि सात घायलों को फतेहगढ़ साहिब के अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। सभी लोग गुरुद्वारा श्री दुख निवारण साहिब में चल रहे  समागम में भाग लेने आ रहे थे।
गुरुदासपुर व पठानकोट क्षेत्र के विभिन्न गांवों के श्रद्धालुओं का जत्था पांच बसों में बैठ कर पटियाला की ओर आ रहे थे तो पटियाला से करीब 13 किलोमीटर पहले जख्वाली व रुड़की गांव के बीच जिला फतेहगढ़ साहिब के थाना मुलांपुर के अधीन एक स्थान पर सामने से आ रहे ट्रक से एक बस टकरा गई। जिससे हादसा हो गया।
प्राप्त जानकारी अनुसार दुर्घटना स्थल पर पहले से ही एक रेहड़ी व ट्रैक्टर के बीच टक्कर हो चुकी थी और दोनों ही वाहन सड़क पर एक ओर खड़े थे। जैसे ही करीब 50 श्रद्धालुओं से भरी बस नंबर पीबी-10 ए क्यू 9394 ने सड़क पर खड़े ट्रैक्टर को ओवरटेक करने का प्रयास किया तो पटियाला की ओर से आ रहे ट्रक नंबर पीबी-23 सी 3455 से आमने सामने की टक्कर हो गई। हादसा इतना च्यादा तेज गति से हुआ की टक्कर के बाद बस का मुंह घूम कर वापिस सरहिंद की तरफ हो गया।
घायलों में च्यादातर की उम्र 50 के आसपास है। वहीं घायलों की हालत खतरे से बाहर है। फतेहगढ़ साहिब के डिप्टी कमिश्नर ने मुख्यमंत्री की ओर से मृतक के परिवारजनों को एक लाख रूपये की सहायता राशि और घायलों के लिए मुफ्त उपचार की घोषणा कर दी है। पुलिस घायलों के ब्यान लेकर मामले की जांच कर रही है।
मुल्लांपर थाना प्रभारी जसविंदर सिंह टिवाणा ने बताया कि बस के ड्राइवर सुखमिंदर सिंह की दोनों टांगे टूट गई हैं। उसके सहित 16 घायलों को लाया गया है। जबकि ट्रक के ड्राइवर रजनीश सहित सात लोगों को फतेहगढ़ साहिब ले जाया गया है।
वहीं घायलों के साथ आए हरमिंदर सिंह बताते हैं कि बस का ड्राइवर उनका मिलने वाला है और दोदड़ी साहिब गुरुद्वारा की कमेटी के सदस्यों को हर 15 दिनों पर राच्य में होने वाले समागमों में भाग लेने के लिए लेकर जाता है। वे खुद तो पहली बार आए हैं पर बस में सवार च्यादातर लोग गुरुदासपुर जिले से हैं और काफी समय से धार्मिक यात्राएं कर रहे हैं। आज भी श्री दुख निवारण साहिब में चल रहे समागम में भाग लेने आए थे। सुखमिंदर की बस में सवारियां पूरी होने की सूरत में वे पिछली बस में बैठ गए थे।

बाक्स
 पटियाला में भर्ती घायल
सरताज सिंह 39, दयाल कौर 70, सुखमिंदर सिंह 55, रमन 30, कश्मीर कौर 55, करनेल सिंह 65, कुलदीप सिंह 60, अमरीक कौर65, शमशेर सिंह 26, जंगीर कौर 68 , गुरमीत कौर, अमरजीत सिंह 58, प्यारा सिंह 55, परमजीत कौर 30, रमनजीत 21 साल है।





Saturday, 21 April 2012

खराब मौसम में सड़क पर आई फसल, wheat on roads, as lifting got delayed


लोगो: गेहूं की खरीद
प्रशासन ने संसाधन झोंके, ओवर लोड मंडियों में डाइवर्ट किए अतिरिक्त साधन
 लिफ्टिंग बनी मुसीबत
भूपेश चट्ठा, पटियाला

गेहूं की सांझ संभाल का करीब करीब आधा काम किसान के पाले में से निकल कर अब सरकारी खरीद एजेंसियों के कर्मियों के पाले में आ गई है, लेकिन करवट बदलते मौसम में गेहूं की लिफ्टिंग मुसीबत बन पड़ी है और अधिकतर मंडियों में गेहूं परिसर से बाहर निकल कर सड़कों पर आ गई है।

पटियाला की मंडियों में जहां गेहूं की आवक हर दिन नए रिकार्ड बना रही है वहीं खरीद की गति भी खासी तेज है। ऐसे में मंडियों में गेहूं के अंबार लग रहे हैं और दिन भर सूर्य देवता की आंख मिचौली के बीच चढ़े पारे ने कर्मियों की भी सांसे सुखा रखी हैं।

प्राप्त आंकड़े बताते हैं कि जिले की 104 मंडियों में अब तक पांच लाख 10 हजार टन गेहूं की आवक हुई है और अब ये आंकड़ा पिछले साल के पांच लाख 54 हजार के करीब आ चुका है। इतना ही नहीं शुक्रवार को जहां गेहूं की आवक रिकार्ड के ठीक करीब एक लाख 16 हजार टन रही वहीं एक दिन की खरीद में पटियाला ने रिकार्ड बना दिया है। 20 अप्रैल के दिन एक लाख 24 हजार टन से च्यादा की खरीद की गई है।

जबकि लिफ्टिंग के मामले में आंकड़े बताते हैं कि 19 अप्रैल तक मंडियों में दो लाख 69 टन खरीदा गया गेहूं पड़ा था और इसमें आज हुई एक लाख 24 हजार टन खरीदी गई गेहूं और जुड़ गई। जिला प्रशासन यदि अपने सारे संसाधन लिफ्टिंग में लगाता है तो आंकड़ा एक दिन में 35 हजार पर ही आ पाता है। ऐसे में हालात आने वाले दिनों में सुधरने की संभावना ना के बराबर ही है।

जिला खादय एंव आपूर्ति विभाग की कंट्रोलर अंजुमन भास्कर का मंडियों में से खरीदी गई फसल की लिफ्टिंग पर कहना है कि खरीदी गई उपज की साथ की साथ ही ढुलाई करवाई जा रही है लेकिन साधनों की उपलब्धता सीमित है और बीते दो दिनों में गेहूं की रिकार्ड आवक हुई है, ऐसे में कुछ समय अवश्य लग सकता है। हालांकि जहां पर सड़क पर गेहूं आई है और मंडियों में रखने की जगह नहीं बची है वहां अतिरिक्त साधन भेजे जा रहे हैं जिससे दिक्कत ना हो।

वहीं जिला प्रशासन की ओर से ट्रक यूनियन को अधिक से अधिक ट्रक भेजने के निर्देश जारी किए गए हैं जिससे गेहूं की सीधी डिलीवरी रेलवे से करवाई जा सके। लिफ्टिंग के आंकड़ों में लगातार दर्ज हो रही गिरावट पर अब प्रशासन ये भी विचार कर रहा है कि जिले से चावल की ढुलाई कुछ समय के लिए रोक कर सिर्फ गेहूं को ही बाहर भेजने का काम किया जाए। कारण सिर्फ एक है कि गेहूं खुले में आ गया है और चावल अभी गोदामों में ही है।

राहत का दिन गुजरा, आफत आएगी आज?


  फ्लैग: पांच शैडयूल सड़कों का मामला
-दुकानदार उठाने लगे कीमती सामान
-निगम प्रशासन की लीपापोती भी जारी, जेल रोड सड़क होने लगी दुरुस्त
उपमुख्य संवाददाता, पटियाला
  शहर की पांच शैडयूल सड़कों के आठ सौ दुकानदारों पर लटक रही अतिक्रमण की तलवार जहां की तहां है, हालांकि राहत का अंतिम दिन आज जैसे तैसे गुजर गया है वहीं अब शहर की एक बड़ी आबादी को तथाकथित आफत का इंतजार है।

शनिवार को उच्च न्यायालय में इसी मामले की सुनवाई है और 21 अप्रैल को दोपहर 12 बजे ही भविष्य तय होगा। वहीं नगर निगम प्रशासन के संभावित रूप से चलने वाले डंडे को देखते हुए 'लाल क्रासÓ मार्किंग वाली दुकानों के दुकानदार ने अपनी शाप से कीमती सामान हटाना शुरु कर दिया है। दिलचस्प है कि इस तरह की कार्रवाई देर रात ही हो रही है। एक ओर दुकानदार अपनी तरफ से पूरी तरह से खुद को आश्वस्त बताना चाहते हैं और दूसरी तरफ किसी तरह का नुकसान भी झेलना नहीं चाहते। ऐसे में विकल्पों की तलाश हो रही है।

हमेशा उपलब्ध रहने वाले मेयर अजीतपाल सिंह कोहली से हालांकि इस संबंध में संपर्क करने के प्रयास असफल रहे लेकिन आधिकारिक सूत्र बताते हैं कि निगम प्रशासन की ओर से  लीपापोती भी जारी है। शैडयूल रोड में ही शामिल नाभा रोड में त्रिपड़ी की ओर मुडऩे वाली लाइटों से लेकर शुरु होने वाली जेल रोड की सड़क अब दुरुस्त होने लगी है। इसे लगभग हाईवे की तर्ज पर बोर्ड इत्यादि लगा कर तैयार कर दिया गया है, कारपेटिंग के साथ सड़क पर अतिरिक्त मशीनरी भी आ गई है। बताया जा रहा है कि सारे घटनाचक्र की मूवी बना कर प्रस्तुत की जाएगी और थोड़ा समय(निगम चुनाव निपटने तक पढ़ा जाए) मांगते हुए बताया जाएगा की कार्रवाई हो रही है। इसके बाद जो होना है वो होना ही है।

Tuesday, 17 April 2012

पानी, पर्यावरण और पेस्टीसाइड और प्राकृतिक खेती को बनाया एजेंडा, this doctor's priority is natural environment


 पृथ्वी के प्रहरी 3
-कम्यूनिटी मेडिसन के विशेषज्ञ है डा. अमर सिंह आजाद
-सेहत का ख्याल रखने का बेहतर तरीका आसपास का वातावरण खराब ना होने दो
फोटो:
भूपेश चट्ठा, पटियाला
पेश से डाक्टर और कम्यूनिटी मेडिसन के विशेषज्ञ व जाने माने पर्यावरणविद् डा. अमर सिंह आजाद ने अपने काम के साथ पंजाब के पानी, पर्यावरण और पेस्टीसाइड और प्राकृतिक खेती को ही एजेंडा बना लिया। डा. अमर सिंह आजाद हाल ही के सालों में पंजाब में बढ़ रहे कैंसर के मरीजों के कारणों की तलाश करने के दौरान भूमिगत पानी में यूरेनियम पाए जाने के खुलासे के बाद खासी चर्चा में आए।
हालांकि उनकी उपलब्धियों में पिछले करीब दस सालों में रेडियो टाक, टेलीविजन चैनलों पर चर्चा, अखबारों में आर्टीकल के अलावा 'पंजाब ईको क्राइसेजÓ जैसे गूगल के ग्रुप शामिल हैं, जहां पर्यावरण पर तीखी बहस जारी रहती है। लोगों को पेस्टीसाइड व केमिकल फर्टीलाइजर के बिना प्राकृतिक खेती पर जोर देने वाले डा. आजाद कहते हैं कि सेहत का ख्याल रखने का बेहतर तरीका आसपास का वातावरण खराब ना होने दो।
लोगों को जागरुक करने के अपने अभियान के तहत वे हर संपर्क सूत्र का प्रयोग करते हैं। निजी स्तर पर प्रयोगशालाओं, जिनमें विदेशी भी शामिल हैं, पानी, सिर के बाल जैसे नमूनों की जांच करवा कर अपनी बात तथ्यों सहित सामने रखते हैं। फोटो खिंचवा कर भाषण देने जैसे कामों से वे दूर ही रहते है।
वहीं जमीनी हालातों पर डा. आजाद कहते हैं कि पंजाब के अलावा हरियाणा व हिमाचल प्रदेश की इंडस्ट्री का टॉक्सिक जल, कई तरह के हैवी मैटल व रसायनिक तत्वों के साथ और यहां के शहरों का सीवरेज लगातार दरिया व बरसाती नालों में उड़ेला जा रहा है। जो प्राकृति के नियम के विपरीत है। जो पानी एक बार ले लिया जाता है, उसे वापिस नदी अथवा नाले में नहीं डाला जाता, उस पानी का शोधन कर खेती में सिंचाई के लिए प्रयोग करना होता है। लेकिन यहां पर सारी इंडस्ट्री लगाई ही नदी किनारे जाती है, सरकार सोई रहती है और खुद अनुमति देती जबकि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अपनी सारी उम्र में एक भी इंडस्ट्री अथवा प्रदूषण फैलाने वाले को सजा नहीं दिलवा पाता।
डा. आजाद कहते हैं कि जिस पानी की कसमें खाई जाती थी और जिस पर गीत लिखे जाते थे, वो बहता पानी तो कई साल पहले गंदा कर दिया अब तो रिस कर धरती के नीचे पहुंचा पानी बीमारियां दे रहा है।

सरकार को परामर्श

डा. आजाद सलाह देते हैं कि सरकार को हर दिशा में काम करना होगा। नियम कानून को सख्ती से लागू करने के अलावा, घटिया और पुरानी पड़ चुकी तकनीक को पंजाब आने से रोकना होगा। जिससे शराब फैक्ट्रीयों की बाढ़ ना आए, कोयला आधारित थर्मल प्लांट ना आएं। पेस्टीसाइड व रसायनिक खादों का प्रयोग कम कर प्राकृतिक खेती की ओर जाना और शहरों में बड़े पैमाने पर सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने होंगे। तभी जीवन चक्र में प्रवेश कर चुके टॉक्सिक ततव निकाले जा सकेंगे अन्यथा कैंसर के रूप में ये फूटते रहेंगे।

बीस साल पहले ही भांपा, पराली का कहर, 20 years ago he anticipated, burning paddy straw will harm productivity



 पृथ्वी के प्रहरी-2
-पर्यावरण वैज्ञानिक डा. चरणजीत सिंह नाभा ने  90 के दशक के आरंभ में पराली जलाने पर 'कृषि वैज्ञानिकों के विरोधÓ के बावजूद चेताया था
-20 वीं सदी आने पर पीपीसीबी ने डिप्टी कमिश्नरों को धारा 144 के तहत प्रतिबंध लगाने को लिखना शुरु किया
भूपेश चट्ठा, पटियाला
60 के दशक के मध्य में हरित क्रांति शुरु हुई तो पंजाब को खरीफ के मौसम की सबसे अधिक व नगद लाभ देने वाली धान की फसल मिल गई। पंजाब की संपन्नता का कारण भी यही है, ऐसे में धान की फसल के खिलाफ बोलने वाला स्वत: 'विलैनÓ हो जाता था।
याद रहे कि खरीफ की फसल में धान उगाने के बाद इसकी कटाई अक्टूबर के तीसरे सप्ताह तक जारी रहती है, साधारण किस्मों के अलावा बासमती उगाए जाने की सूरत में कटाई नवंबर तक भी खिंच जाती है। जबकि रबी की मुख्य फसल गेहूं की बिजाई करने का समय नवंबर ही होता है। ऐसे में धान के बाद खेत को खाली कर साफ करने के लिए धान की पराली को जलाने के अलावा कोई चारा भी मौजूद नहीं था। इस पर पंजाबी समाज में खेत में राख डालने को दवा के रूप में देखा जाता था। ऐसे में पराली को जलाने का नुकसान किसी को दिखाई नहीं दे रहा था।
धान विकास के साथ धान विनाश भी ले आया। इसी विनाश का अहसास पर्यावरण वैज्ञानिक डा. चरणजीत सिंह नाभा को बीस साल पहले ही हो गया था, संभव है कुछ और लोगों को यह ज्ञान प्राप्त हुआ हो लेकिन पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में कार्यरत डा. चरणजीत सिंह ने पराली जलाए जाने का मामला पहली बार 90 के दशक के आरंभ में ही उठाना शुरु कर दिया।

 डा. चरणजीत सिंह नाभा ने पराली जलाने पर 'कृषि वैज्ञानिकों के विरोधÓ के बावजूद चेताया था कि हम लोग अपने मित्र कीटों के साथ धरती के नीचे खाद बनाने वाली प्राकृतिक फैक्ट्री को भी हर साल पराली के साथ जला रहे हैं। निकट भविष्य में चाहे असर ना दिखे लेकिन लंबे समय में पराली जलाने से पर्यावरण को होने वाले नुकसान के अलावा धरती की उर्वरा शक्ति भी क्षीण हो जाएगी।

पीपीसीबी की बैठकों में मामला उठाने व इक्का दुक्का समाचार पत्रों में आर्टिकल लिखने के साथ ही डा. चरणजीत चर्चा में आ गए। विरोध भी हुआ पर लोगों ने इस दिशा में सोचना शुरु कर दिया। बीस साल पुरानी बातें याद कर डा. चरणजीत कहते हैं कि अगर आप प्राकृति के साथ चल कर अपना विकास करते हैं तो विकास कायम रहेगा अन्यथा छलावा ही है।
दिलचस्प है कि 20 वीं सदी आने पर पीपीसीबी ने डिप्टी कमिश्नरों को धारा 144 के तहत पराली को जलाए जाने पर  प्रतिबंध लगाने को लिखना शुरु किया। लेकिन तब भी कभी किसी पर कोई मामला दर्ज नहीं किया जाता था। यहां तक कि पराली जाने से भड़की आग से अन्य खेतों में हुए नुकसान का मुआवजा भी सरकारी खाते से निकल जाता था। इसके बाद भड़की आग पर फायर ब्रिगेड  बुलाने वालों की सूची तैयार करने और कार्रवाई करने के निर्देश जारी होने लगे। बीस साल पहले का युवा वैज्ञानिक डा. चरणजीत आज पीपीसीबी में डायरेक्टर लोक संपर्क हैं और कहते हैं कि बीस सालों में मात्र बीस फीसदी सफलता ही हासिल हुई है, लेकिन निराश नहीं है।