Friday, 29 July 2011

कांग्रेस की भूमिका नहीं पर मेरा वोट बादल के खिलाफ : कैप्टन अमरिंदर,sgpc, politics, capt. amrinder


कैप्टन बोले 
 कांग्रेसियों पर दर्ज 30 हजार केस रद करवाने के लिए आयोग गठित होगा 
 बूढ़े बादल ही ब्लू स्टार के जिम्मेदार : अमरिंदर 
 बिना नीलामी के दिए प्रोजेक्ट रद करेगी कांग्रेस 
उपमुख्य संवाददाता, पटियाला
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी(एसजीपीसी) के होने वाले चुनावों में कांग्रेस की कोई भूमिका नहीं होगी, पार्टी किसी को भी वोट डालने के लिए निर्देशित नहीं करेगी। कांग्रेस के प्रदेश प्रधान व पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने एसजीपीसी चुनावों में शुक्रवार को यहां पार्टी का स्टैंड स्पष्ट करने के साथ यह भी कहा है कि वे वोट बादलों के खिलाफ ही डालेंगे।
एसजीपीसी चुनावों में मतदान वोटर आई कार्ड से करवाए जाने के सवाल पर वे कहते हैं कि सत्ताधारी शिरोमणि अकाली दल(शिअद) ने एसडीएम स्तर के अधिकारियों से वोटें बनवाई, लेकिन यह एक दिखावा मात्र था। सभी वोटें जत्थेदारों के कहने पर बनी हैं, ऐसे में अपनाई गई प्रक्रिया ही गलत है।
वहीं, कांग्रेसी कार्यकत्र्ताओं की शिकायतें सुनने के लिए रखे गए कार्यक्रम में पूर्व मंत्री व विधायक ब्रह्म महिंदरा, लाल सिंह, तेज प्रकाश, पार्टी के जिला प्रधान प्रेम कृष्ण पुरी, हरदयाल कंबोज, केके शर्मा, कबीर दास, अजय थापर की मौजूदगी में कैप्टन अमरिंदर ने आश्वस्त किया कि कांग्रेसियों पर साढ़े चार साल में दर्ज किए गए 30 हजार केस रद करवाने के लिए वे एक आयोग का गठन करेंगे, जो एक ही समय में सारे केस रद करेगा।
दूसरी ओर, मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के साथ चल रहे आरोप प्रत्यारोप को आगे बढ़ाते हुए कैप्टन सिंह ने कहा कि प्रकाश सिंह बादल बूढ़े हो चुके हैं उन्हें कुछ याद नहीं रहता। संवाददाता सम्मेलन में जब ब्लू स्टार के लिए जिम्मेदार होने का एक नाम पूछा गया तो कैप्टन अमरिंदर ने फिर बादल व अकाली दल का नाम ले दिया और कहा कि बादल नियंत्रित समस्या चाहते हैं। वे कभी धर्म, पानी तो कभी चंडीगढ़ के नाम पर मोर्चे लगाते हैं। खुद गिरफ्तार हो डाक बंगले में जा बैठते हैं और लोगों को पिटवा देते हैं। हांसी बुटाना मामले पर भी वे ये ही कर रहे हैं। जिस मामले पर हाईकोर्ट में जाना चाहिए उस पर वे प्रधानमंत्री और पड़ोस के मुख्यमंत्री को पत्र लिखते हैं।
राज्य में बिना नीलामी के दिए गए बिजली उत्पादन प्रोजेक्ट पर कांग्रेस प्रधान कहते हैं कि ये सब कांग्रेस रद करेगी और पार्टी किसानों के साथ खड़ी है। किसानों को उचित मुआवजा देने के अलावा गलत तरीके से अलाट किए जा रहे हजारों करोड़ के प्रोजेक्टों की चार दिवारी भी नहीं बनेगी और सरकार का शासनकाल समाप्त हो जाएगा।
राज्य विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की तैयारियों पर वे कहते हैं कि चुनावी सर्वेक्षण जारी है। अच्छी रिपोर्ट है। जितने वाले की ही टिकट की सिफारिश की जाएगी, यह एक से ज्यादा भी हो सकती हैं। अंतिम निर्णय हाईकमान का होगा। उनकी पसंद में युवा और महिलाएं शामिल हैं।

Thursday, 28 July 2011

हांसी-बुटाना से कैनाल दफ्तर तक बीकेयू एकता डकौंदा सक्रिय, hansi-butana, farmer, union, punjab, politics,



- संस्थापक प्रधान की बरसी के बाद आई गतिविधियों में तेजी
- बिजली, पानी, बाढ़ हर मामले पर हुई सक्रिय
भूपेश चट्ठा, पटियाला
चुनावी साल में हर राजनीतिक दल सक्रिय होता है और हर तरह के दबाव समूह भी उठ आते हैं। कुछ ऐसी ही स्थिति भारतीय किसान यूनियन एकता डकौंदा ने पटियाला में पैदा कर ली है। हांसी बुटाना से एसई कैनाल दफ्तर तक बीकेयू एकता डकौंदा हर तरह सक्रिय हो उठी है।

हांसी बुटाना नहर और इसके साथ बन रही कंकरीट की दीवार के रूप में राष्ट्रीय स्तर का मुद्दा लगभग राजनीतिक दलों से छीन चुके इस किसान संगठन ने पंजाब व हरियाणा के छह दर्जन गावों को एक मंच पर ला महापंचायत बुलाने की घोषणा कर रखी है।

हरियाणा से लेकर केंद्र सरकार को दी गई चेतावनी कि आठ अगस्त तक नहर व दीवार का काम रोक कर क्षेत्र में बाढ़ की समस्या का निपटारा किया जाए अन्यथा भूख हड़ताल से जाम लगाने तक हर तरह से विरोध का सामना करने के लिए तैयार रहें। दिलचस्प है कि उक्त घोषणा के बाद से क्षेत्र के लोग बीकेयू के साथ भावनात्मक रूप से जुडऩे लग गए। इसके दो दिन के भीतर ही संगठन के प्रतिनिधि मंडल ने पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड से मिलकर किसानों की मोटरों के जारी हो रहे बिजली बिलों को बंद करने की तर्क सहित मांग रखी। साथ ही कृषि क्षेत्र के लिए पूरी आठ घंटे बिजली मांगी।

इतना ही नहीं अगले ही दिन जिले में नहरी पानी का मामला उठा लिया है। यूनियन की सन्नौर ईकाई ने एसई कैनाल के कार्यालय के बाहर धरना लगाया है। याद रहे कि संगठन संस्थापक प्रधान बलकार सिंह डकौंदा की हाल ही में मनाई गई बरसी के बाद गतिविधियों में खासी तेजी आई है।

इसी संबंध में वीरवार को प्रदर्शन करने वाले यूनियन के सन्नौर ब्लाक के प्रधान सुखमिंदर सिंह तुलेवाल मानते हैं कि किसानों की जायज मांगों पर वे आंदोलन कर रहे हैं और चुनावी वर्ष में अगर दबाव बना रहे हैं, तो गलत क्या है। हांसी बुटना सिर्फ मुद्दा नहीं है, इसे हटाया जाना क्षेत्र के लोगों की जरूरत है।

कांवडिय़ों ने कमाया पुण्य, जगाया शिव को,hindu, religion, lord shiv, kanvar, triyodashi


- जलाभिषेक सम्पन्न, रुद्राभिषेक जारी रहेंगे
- सावन में ही शिव ने किया था विषपान, अग्नि शांत करने कांवडिय़े लाते हैं गंगाजल
- निवास के करीबी मंदिरों में भी जाग जाते हैं शिवालय
उपमुख्य संवाददाता, पटियाला
सावन की त्रयोदशी पर वीरवार को शिवलिंग पर गंगा के पवित्र जल को अर्पित कर कांवडिय़ों ने जहां पुण्य कमाया है, वहीं शिव भूमि से दूर दराज के शिवालयों में भगवान शिव को जगा आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले शिवभक्तों के लिए भी पाप से मुक्ति प्राप्ति के रास्ते खोल दिए हैं।
भगवान शिव का सावन में जलाभिषेक करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण व अंतिम दिन पर शहर के हर शिवालय में भक्तों का तांता लगा रहा। मंदिरों में क्षेत्र के कांवडिय़ों के आने से न केवल उनके परिजनों मिलने वालों में खुशी की लहर थी, अपितु शिव भक्त हर की पौड़ी हरिद्वार से लाए गए गंगा जल के उनके करीबी मंदिर में आने से प्रसन्न रहे। राजपुरा रोड स्थित तुंगनाथ मंदिर से लेकर किला चौंक के शिवालय में श्रद्धापूर्वक जलाभिषेक किया गया है।
वहीं त्रयोदशी के महत्व पर महंत रवि कांत जी मुनी कहते हैं कि शास्त्रों अनुसार गौमुख से गंगा जल लेकर पहले नीलकंठ में जलाभिषेक करने और फिर रास्ते के मंदिरों में जलाभिषेक करते हुए त्रयोदशी के दिन उसी मंदिर में आ कर जलाभिषेक करने का प्रावधान है जहां से आपने यात्रा आरंभ की होती है। लेकिन कालांतर में हरिद्वार हर की पौड़ी से जल ला कर जलाभिषेक करने का चलन हो गया है। मंहत कहते हैं कि शिव ने सावन मास में ही विष पान किया था और विष की उस अग्नि को शांत करने के लिए प्रतिमा पर लगातार जल धारा प्रवाहित की जाती है। सावन में इसका महत्व सर्वाधिक होता है। त्रियोदशी को हालांकि कांवड़ से लाए गए गंगा जल का जलाभिषेक करने का अंतिम दिन होता है, लेकिन रुद्राभिषेक करने का क्रम जारी रहता है। वे बताते हैं कि इन दिनों में शहर में प्राचीन वामन अवतार मंदिर परिसर में स्थित पातालेश्वर मंदिर में काशी से विशेष रूप से बुलाए गए आचार्य ये रुद्राभिषेक पूरे विधि विधान से करवा रहे हैं। जिसका लाभ लिया जा सकता है।

Wednesday, 27 July 2011

पंजाब को नहर से आपत्ति पर बनाया पंजाबियों ने, hansi-butana, flood, punjabi emploment,


-'सोना देने वाले की जात नहीं पूछी जाती, ये पवित्र ही होता हैÓ
-बाढ़ पीडि़तों को ही दिया रोजगार बाढ़ लाने वाली नहर ने
 भूपेश चट्ठा, धर्मेहड़ी, पटियाला
कहते हैं कि सोना देने वाले की जात नहीं पूछी जाती ये पवित्र ही होता है और रहता भी है। पंजाब-हरियाणा के बीच पानी की लड़ाई में जहां दोनों राज्यों की सरकारों के बीच एक दूसरे को गलत साबित करने और नीचा दिखाने की प्रतिस्पर्धा चल रही है और विशेष रूप से पंजाब को हांसी बुटाना नहर से कड़ी आपत्ति है, लेकिन नाटकीय ढ़ंग से यह भी सही है कि इस नहर को बनाने वाले हाथ चाहे मिस्त्री के हों या मजदूर के दोनों में ही पंजाबियों के हैं। अलबत्ता ठेकेदार जरूर हरियाणा का है।

'दैनिक जागरणÓ के समक्ष ये लोग अपना मुंह खोल नाम बताने की बात करना तो दूर कैमरा हाथ से उपर होते ही पांव पकडऩे को हो जाते हैं। कहते हैं कि रोजगार मिला है... वो भी गांव के पास क्यों छीन रहे हो?... मजदूरी कर लेने दो। जबकि पंजाब की सीमा में किंतु नहर के सबसे करीबी गांव धर्मेहड़ी के गुरप्रीत सिंह बताते हैं कि आप मजदूर व मिस्त्रीयों की बात करते हो इस नहर की रात में चौकीदारी करने के लिए भी पंजाब के ही लोगों को नौकरी पर रखा गया है। वे बताते है कि उनका 'सीरीÓ रामा भी इनके रात में डयूटी पर जाता रहा है। छह हजार रूपये महीना की बंधी रकम थी पर एक दिन रात में सांप काट गया, फिर तबीयत खराब रहने लगी तो छोड़ दिया। अब भी गांव के ही कुछ लोग रात में नौकरी पर जाते है। याद रहे कि नहर पर पिछली बाढ़ में टटियाना गांव के पास जिस स्थान पर नहर टूटी थी उससे धर्मेहड़ी को ही सबसे ज्यादा राहत मिली थी आरोप ये भी लगे की इसी गांव के लोगों ने 'कार्रवाईÓ की थी।  

जानकार बताते है कि  पहले नहर का निर्माण, फिर साईफन में से मिट्टी निकालने और अब दीवार का निर्माण करने में जिन बड़े ट्रकों, टिपरों की सेवा हरियाणा के ड्रेनेज विभाग की ओर से ली जा रही है, उनमें से कई पटियाला जिले में ही तैनात रहे एक बड़े पुलिस अधिकारी के रिश्तेदार के हैं।

नहर के बाद अब कंकरीट की दीवार बनाने में मजदूर मिस्त्रीयों को रोजगार मिला है, उनमें से ज्यादातर की साइकलें पंजाब के नवां गांव से ही रोज सुबह निकलती हैं। इसी गांव के गुरविंदर सिंह औलख कहते उनका ड्राईवर भी भरे सीजन में ट्रैक्टर छोड़ गया था। नहर पर दिहाड़ी ठीक दी जा रही है मौसम ठीक हो तो ओवर टाइम भी मिलता है। आधा दिन भी काम हो जाए तो पैसे नहीं कटते। ऐसे में हर कोई जाना चाहता है।

दिलचस्प है कि पंजाब के सिंचाई मंत्री के दौरे और मीडिया नहर और दीवार के विवाद की खबरें प्रकाशित होने के बाद नए मजदूर लेने बंद कर दिए गए हैं। हालांकि बाढ़ पीडि़तों को ही रोजगार देने वाली नहर कब बाढ़ लाएगी और नहर से हुई कमाई कितनी बच पाएगी इस पर दबी जुबां से एक मजदूर कहता है कि हमारे पास बाढ़ में खोने के नाम पर इक्का दुक्का पशु हैं या फिर कोठा है। यही हमारी पूंजी है। क्या बचता है? और क्या खो जाता है? ये सब तो कुदरत पर निर्भर करता है, फिलहाल जिंदगी अच्छी चल रही है।

कंपनी से बिके नहीं आईटी प्लाट, अब सरकार बेचेगी, omex, IT park, land,



-ओमेक्स ने कहा उन्होंने तीन बार विज्ञापन दिए पर नहीं आया कोई खरीदार
-चार हजार लोगों को नौकरी देनी थी पर रिहयशी आवास के प्लाट ही बिके
भूपेश चट्ठा, पटियाला
प्रदेश की लगातार दो सरकारों के लिए पहले नाक का सवाल और बाद में सरदर्द बने सरहिंद रोड के औमेक्स सूचना तकनीकि प्रोजेक्ट में सात साल बीत जाने के बाद भी आईटी पार्क का एक भी प्लाट नहीं बिक पाया है।

दिलचस्प है कि पंजाब की वर्तमान शिरोमणि अकाली दल की सरकार ने  जहां कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में सूचना तकनीकि क्षेत्र में रोजगार बढ़ाने पटियाला में करीब 350 एकड़ क्षेत्र में आईटी सिटी बनाने का प्रोजेक्ट रियल एस्टेट व आईटी पार्क विकसित करने के क्षेत्र की जानी मानी कंपनी ओमेक्स से वापिस ले लेने का निर्णय ले लिया है। वहीं राज्य सरकार ने अब तय करना है कि आवासीय क्षेत्र विकसित करने वाली पंजाब अर्बन डवेलपमेंट एंड प्लानिंग अथारिटी, पूडा और पटियाला डवलेपमेंट अथारिटी में से किसे आईटी प्लाट बेचने की जिम्मेवारी सौंपे।

पूडा की एडीशनल चीफ एडमिनिस्ट्रेटर अमृत गिल कहती हैं कि ओमेक्स का जवाब उनके पास आ गया है। कंपनी का कहना है कि तीन बार विज्ञापन जारी करने के बाद भी कोई खरीददार नहीं आया है। ग्लोबल मंदी को भी इसका कारण बताया गया है। ओमेक्स से प्रोजेक्ट वापिस लेने के निर्णय में किसी रह की जल्दबाजी के सवाल पर अमृत गिल कहती हैं कि करीब 27 रिमांइडर भेजे गए हैं। ये कम नहीं होते समय भी काफी दिया गया। ग्लोबल मंदी की बात वे स्वीकार करती हैं और कहती हैं कि तय एग्रीमेंट को भी नकारा नहीं जा सकता।
आवासीय क्षेत्र विकसित करता रहा पूडा याद पीडीए किस तरह से कामर्शियल प्रोजेक्ट को सिरे चढ़ा पाएगा? इस पर पूडा की एडीशनल चीफ एडमिनिस्ट्रेटर कहती हैं कि सरकार ने तय करना है कि प्रोजेक्ट किसे सौंपे? लेकिन पूडा इस कार्य में भी सक्षम है।

याद रहे कि सरहिंद रोड पर बने इस प्रोजेक्ट के सभी आवासीय प्लाट अपनी मूल कीमत से करीब तीन गुना दामों पर बिक रहे हैं, लेकिन आईटी से संबधित रोजगार लाने की जिस शर्त पर प्रोजेक्ट सौंपा गया था उसमें से एक भी सिरे नहीं चढ़ा है और ना ही किसी को रोजगार मिला है। किसान से आठ से अट्ठाइस लाख रूपये प्रति एकड़ की दर से ली गई जमीन की कीमत यहां 18 हजार रूपये प्रति गज पर चल रही है।

जबकि पंजाब सरकार और कंपनी के बीच हुए समझौते के बाद जारी हुई संयुक्त घोषणा के मुताबिक आईटी सिटी में सूचना तकनीक क्षेत्र में चार हजार लोगों को रोजगार उपलब्ध करवाना था। रोजगार तो किसी को नहीं मिला अलबत्ता रिहायशी कालोनी जरूर बन गई।

अमर हो गए पटियाला के काले हिरण, black buck, dear park, zoo


-जंगल में कृष्ण मृग की उम्र आठ से 12 साल, यहां 13 साल में एक भी मौत नहीं
-ना मरते हैं ना पैदा होते हैं सरकारी आंकड़ों में
-छतबीड़ में एक नर 13 मादा हैं तो 15 साल में 59 काले हिरण पैदा हुए पटियाला में 125 की आबादी पर 56 ने जन्म लिया
भूपेश चट्ठा, पटियाला
इसे आप आंकड़ों की मृग मरीचिका कहें या फिर कुछ और लेकिन ये सत्य है कि देश में सलमान खान व नवाब पटौदी फैम काले हिरणों की सबसे च्यादा आबादी वाले पटियाला के डीयर पार्क में जो हिरण आए वो 'अमरÓ हो गए हैं। यहां पिछले कई सालों में हिरणों की मौत नहीं हुई है। यह अच्छी खबर हो सकती और यहां कोई हिरण पैदा ही नहीं हुआ इससे परिवार नियोजन वाले सबक भी सीख सकते हैं।

सैंट्रल जू अथारिटी की आधिकारिक वेब साइट अनुसार देश में काले हिरणों की सबसे ज्यादा आबादी पटियाला के डीयर पार्क में और इसके बाद जिले के ही छतबीड़ का नाम आता है। दोनों जगहों में कृष्ण मृग अथवा ब्लैक बग कहे जाने वाले काले हिरणों की जन्म मृत्यु दर में खासा अंतर है। छतबीड़ में एक नर व 13 मादा हैं तो पिछले 15 साल में यहां 59 काले हिरण पैदा हुए  हैं वहीं पटियाला में कुल 125 की आबादी पर मात्र 56 ने ही जन्म लिया है। छतबीड़ में जहां 15 सालों में 70 हिरणों की विभिन्न कारणों के चलते मौतें हुई, वहीं पटियाला में 13 साल में एक भी हिरण नहीं मरा है। दो सालों के आंकड़े दर्ज नहीं हैं।

याद रहे कि जंगल में कृष्ण मृग की उम्र आठ से 12 साल पिंजरें में ये साल दो साल और काट लेता है। दिलचस्प है कि पटियाला में 1995 से 2000 तक हिरणों की संख्या 26 रही और  2004-05 में ये बढ़कर 99 हुई और बीते साल 125 हो गई। अब 58 नर, 63 मादा और चार ऐसे भी हैं जिनके लिंग का अभी पता नहीं है।

वहीं विभागीय सूत्र बताते हैं कि कोई भी ऐसी सर्दी नहीं गुजरती जब ठंड की वजह से आठ से दस हिरण ना मरते हों, प्राकृतिक मौत होना एक अलग बात है। तीसरा सबसे बड़ा कारण पर हिरणों के बीच मादा को लेकर होने वाली लड़ाइयां हैं, जिनमें परस्पर सिर भिडऩे के दौरान जो चूक गया उसके सीने में सींग घुस जाता है, ऐसे में मौत तय हो जाती है। सूत्र कहते हैं कि मरे हुए हिरण का पोस्टमार्टम करवा कर संस्कार करने तक की लंबी प्रक्रिया है। इससे बचने वन अधिकारियों ने श्री भागवत गीता के सिद्धांत को प्रमुखता से अपना लिया कि 'ना कोई पैदा होता है और ना कोई मरता हैÓ। मादा हिरण को गर्भवती ही ना होने दो (सरकारी कागजों में) तो आबादी बढ़ेगी नहीं और वास्तव में जो आबादी बढ़ेगी वो मरने वाले एडजस्ट कर देंगे। सूत्र ये भी बताते हैं कि डीयर पार्क में अपनी निर्धारित संख्या से कई बार च्यादा भी हो जाते हैं। कहां जाते है? ये अभी तक रहस्य ही बना हुआ है।

इसी संबंध में चीफ वाइल्ड लाईफ वार्डन गुरबाज सिंह कहते हैं कि ये बात उनसे पूछो जो रिकार्ड अपडेट नहीं करते हम तो लगातार आंकड़े भेजते रहते हैं। किसी तरह की कोई गड़बड़ नहीं है। पार्क में संख्या च्यादा हो जाने के सवाल पर वे कहते हैं कि ये तो अच्छी बात है कि ख्याल रखा जा रहा है। अगर कहीं थोड़ा बहुत ऊंच नीच है तो ठीक किया जा सकता है। पर जो लोग निस्वार्थ ढ़ंग से काम ठीक कर रहे हैं उन उपर लांछन लगाना ठीक नहीं है। 

Saturday, 23 July 2011

सर्वदलीय बैठक का कोई औचित्य नहीं : बादल, hansi-butana,

भूपेश चट्ठा, सन्नौर, पटियाला
मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने कहा है कि विवादास्पद हांसी बुटाना नहर और इसके साथ बनाई जा रही कंकरीट की दीवार पर सर्वदलीय बैठक बुलाने का कोई औचित्य नहीं है। इससे कोई हल निकलने वाला नहीं है। मुख्यमंत्री शुक्रवार को 'दैनिक जागरण' के साथ विशेष बातचीत कर रहे थे।
सन्नौर विधान सभा क्षेत्र के लिए आयोजित संगत दर्शन कार्यक्रम के पहले दिन उन्होंने बताया कि दोनों ही मामले अब सर्वोच्च न्यायालय में चल रहे हैं। ऐसे में सर्वदलीय बैठक से कोई हल निकलने वाला नहीं है।
इस मौके पर मुख्यमंत्री पंजाब के कांग्रेसियों को नसीहत देने से भी नहीं चूके। उन्होंने कहा कि बेतुकी बयानबाजी के बजाय कांग्रेसी प्रधानमंत्री के पास जाकर अप्राकृतिक ढंग से बनाई गई नहर और जबरदस्ती बनाई जा रही दीवार का मामला उठाएं और पंजाब के हितों की रक्षा करें।
पंजाब के सिंचाई मंत्री जनमेजा सिंह सेखों के हरियाणा की सीमा में प्रवेश कर दी गई गिरफ्तारी की चुनौती पर बादल कहते हैं कि क्या हुआ अगर पंजाब का मंत्री हरियाणा में हो आया, यह देश सभी का है, कोई कहीं भी आ-जा सकता है। उन्होंने कहा कि भाखड़ा के पानी में पंजाब, हरियाणा के अलावा राजस्थान की भी हिस्सेदारी है। कोई भी निर्णय लेने से पहले तीनों राज्यों के बीच बात होनी चाहिए, लेकिन हरियाणा अपनी मर्जी चला रहा है।
पंजाब में केंद्रीय यूनिवर्सिटी बनाए जाने पर सरकार की ओर से लिए जा रहे यू टर्न पर मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया की इसकी पंजाब में जरूरत नहीं है। इसी क्रम में पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला के पूर्व वाइस चांसलर एसएस बोपाराय के मामले में हाईकोर्ट की ओर से पंजाब सरकार को 20 हजार रुपये जुर्माना किए जाने पर मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन लोगों ने पैरवी ढंग से नहीं की है, वे भुगतेंगे। कानून अपना काम करेगा।
दूसरी ओर, मुख्यमंत्री ने संगत दर्शन के दौरान संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि राज्य में जल्द चुनाव करवाए जाने की कोई संभावना नहीं है। हालांकि केंद्र सरकार एक सोची-समझी साजिश के तहत शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के चुनावों में रोड़े अटका रही है। बादल ने हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा से भी अपील की कि वे पंजाब को अपना भाई समझें।
बहुजन समाज पार्टी के साथ समझौते पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में कांग्रेस को हराने के लिए किसी भी विचार मिलने वाली पार्टी का साथ लिया जा सकता है, लेकिन मनप्रीत बादल ने गलत किया है। उसकी वापसी नहीं होगी।
कांग्रेस द्वारा राज्य सरकार की आलोचना पर बादल ने कहा कि पिछली कांग्रेस सरकार ने राज्य में सरकारी नौकरियों पर पाबंदी लगा दी थी, लेकिन उन्होंने पढ़े लिखे नौजवानों को नौकरियां देनी शुरू की हैं।