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Wednesday, 27 July 2011

कंपनी से बिके नहीं आईटी प्लाट, अब सरकार बेचेगी, omex, IT park, land,



-ओमेक्स ने कहा उन्होंने तीन बार विज्ञापन दिए पर नहीं आया कोई खरीदार
-चार हजार लोगों को नौकरी देनी थी पर रिहयशी आवास के प्लाट ही बिके
भूपेश चट्ठा, पटियाला
प्रदेश की लगातार दो सरकारों के लिए पहले नाक का सवाल और बाद में सरदर्द बने सरहिंद रोड के औमेक्स सूचना तकनीकि प्रोजेक्ट में सात साल बीत जाने के बाद भी आईटी पार्क का एक भी प्लाट नहीं बिक पाया है।

दिलचस्प है कि पंजाब की वर्तमान शिरोमणि अकाली दल की सरकार ने  जहां कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में सूचना तकनीकि क्षेत्र में रोजगार बढ़ाने पटियाला में करीब 350 एकड़ क्षेत्र में आईटी सिटी बनाने का प्रोजेक्ट रियल एस्टेट व आईटी पार्क विकसित करने के क्षेत्र की जानी मानी कंपनी ओमेक्स से वापिस ले लेने का निर्णय ले लिया है। वहीं राज्य सरकार ने अब तय करना है कि आवासीय क्षेत्र विकसित करने वाली पंजाब अर्बन डवेलपमेंट एंड प्लानिंग अथारिटी, पूडा और पटियाला डवलेपमेंट अथारिटी में से किसे आईटी प्लाट बेचने की जिम्मेवारी सौंपे।

पूडा की एडीशनल चीफ एडमिनिस्ट्रेटर अमृत गिल कहती हैं कि ओमेक्स का जवाब उनके पास आ गया है। कंपनी का कहना है कि तीन बार विज्ञापन जारी करने के बाद भी कोई खरीददार नहीं आया है। ग्लोबल मंदी को भी इसका कारण बताया गया है। ओमेक्स से प्रोजेक्ट वापिस लेने के निर्णय में किसी रह की जल्दबाजी के सवाल पर अमृत गिल कहती हैं कि करीब 27 रिमांइडर भेजे गए हैं। ये कम नहीं होते समय भी काफी दिया गया। ग्लोबल मंदी की बात वे स्वीकार करती हैं और कहती हैं कि तय एग्रीमेंट को भी नकारा नहीं जा सकता।
आवासीय क्षेत्र विकसित करता रहा पूडा याद पीडीए किस तरह से कामर्शियल प्रोजेक्ट को सिरे चढ़ा पाएगा? इस पर पूडा की एडीशनल चीफ एडमिनिस्ट्रेटर कहती हैं कि सरकार ने तय करना है कि प्रोजेक्ट किसे सौंपे? लेकिन पूडा इस कार्य में भी सक्षम है।

याद रहे कि सरहिंद रोड पर बने इस प्रोजेक्ट के सभी आवासीय प्लाट अपनी मूल कीमत से करीब तीन गुना दामों पर बिक रहे हैं, लेकिन आईटी से संबधित रोजगार लाने की जिस शर्त पर प्रोजेक्ट सौंपा गया था उसमें से एक भी सिरे नहीं चढ़ा है और ना ही किसी को रोजगार मिला है। किसान से आठ से अट्ठाइस लाख रूपये प्रति एकड़ की दर से ली गई जमीन की कीमत यहां 18 हजार रूपये प्रति गज पर चल रही है।

जबकि पंजाब सरकार और कंपनी के बीच हुए समझौते के बाद जारी हुई संयुक्त घोषणा के मुताबिक आईटी सिटी में सूचना तकनीक क्षेत्र में चार हजार लोगों को रोजगार उपलब्ध करवाना था। रोजगार तो किसी को नहीं मिला अलबत्ता रिहायशी कालोनी जरूर बन गई।