Showing posts with label black buck. Show all posts
Showing posts with label black buck. Show all posts

Wednesday, 27 July 2011

अमर हो गए पटियाला के काले हिरण, black buck, dear park, zoo


-जंगल में कृष्ण मृग की उम्र आठ से 12 साल, यहां 13 साल में एक भी मौत नहीं
-ना मरते हैं ना पैदा होते हैं सरकारी आंकड़ों में
-छतबीड़ में एक नर 13 मादा हैं तो 15 साल में 59 काले हिरण पैदा हुए पटियाला में 125 की आबादी पर 56 ने जन्म लिया
भूपेश चट्ठा, पटियाला
इसे आप आंकड़ों की मृग मरीचिका कहें या फिर कुछ और लेकिन ये सत्य है कि देश में सलमान खान व नवाब पटौदी फैम काले हिरणों की सबसे च्यादा आबादी वाले पटियाला के डीयर पार्क में जो हिरण आए वो 'अमरÓ हो गए हैं। यहां पिछले कई सालों में हिरणों की मौत नहीं हुई है। यह अच्छी खबर हो सकती और यहां कोई हिरण पैदा ही नहीं हुआ इससे परिवार नियोजन वाले सबक भी सीख सकते हैं।

सैंट्रल जू अथारिटी की आधिकारिक वेब साइट अनुसार देश में काले हिरणों की सबसे ज्यादा आबादी पटियाला के डीयर पार्क में और इसके बाद जिले के ही छतबीड़ का नाम आता है। दोनों जगहों में कृष्ण मृग अथवा ब्लैक बग कहे जाने वाले काले हिरणों की जन्म मृत्यु दर में खासा अंतर है। छतबीड़ में एक नर व 13 मादा हैं तो पिछले 15 साल में यहां 59 काले हिरण पैदा हुए  हैं वहीं पटियाला में कुल 125 की आबादी पर मात्र 56 ने ही जन्म लिया है। छतबीड़ में जहां 15 सालों में 70 हिरणों की विभिन्न कारणों के चलते मौतें हुई, वहीं पटियाला में 13 साल में एक भी हिरण नहीं मरा है। दो सालों के आंकड़े दर्ज नहीं हैं।

याद रहे कि जंगल में कृष्ण मृग की उम्र आठ से 12 साल पिंजरें में ये साल दो साल और काट लेता है। दिलचस्प है कि पटियाला में 1995 से 2000 तक हिरणों की संख्या 26 रही और  2004-05 में ये बढ़कर 99 हुई और बीते साल 125 हो गई। अब 58 नर, 63 मादा और चार ऐसे भी हैं जिनके लिंग का अभी पता नहीं है।

वहीं विभागीय सूत्र बताते हैं कि कोई भी ऐसी सर्दी नहीं गुजरती जब ठंड की वजह से आठ से दस हिरण ना मरते हों, प्राकृतिक मौत होना एक अलग बात है। तीसरा सबसे बड़ा कारण पर हिरणों के बीच मादा को लेकर होने वाली लड़ाइयां हैं, जिनमें परस्पर सिर भिडऩे के दौरान जो चूक गया उसके सीने में सींग घुस जाता है, ऐसे में मौत तय हो जाती है। सूत्र कहते हैं कि मरे हुए हिरण का पोस्टमार्टम करवा कर संस्कार करने तक की लंबी प्रक्रिया है। इससे बचने वन अधिकारियों ने श्री भागवत गीता के सिद्धांत को प्रमुखता से अपना लिया कि 'ना कोई पैदा होता है और ना कोई मरता हैÓ। मादा हिरण को गर्भवती ही ना होने दो (सरकारी कागजों में) तो आबादी बढ़ेगी नहीं और वास्तव में जो आबादी बढ़ेगी वो मरने वाले एडजस्ट कर देंगे। सूत्र ये भी बताते हैं कि डीयर पार्क में अपनी निर्धारित संख्या से कई बार च्यादा भी हो जाते हैं। कहां जाते है? ये अभी तक रहस्य ही बना हुआ है।

इसी संबंध में चीफ वाइल्ड लाईफ वार्डन गुरबाज सिंह कहते हैं कि ये बात उनसे पूछो जो रिकार्ड अपडेट नहीं करते हम तो लगातार आंकड़े भेजते रहते हैं। किसी तरह की कोई गड़बड़ नहीं है। पार्क में संख्या च्यादा हो जाने के सवाल पर वे कहते हैं कि ये तो अच्छी बात है कि ख्याल रखा जा रहा है। अगर कहीं थोड़ा बहुत ऊंच नीच है तो ठीक किया जा सकता है। पर जो लोग निस्वार्थ ढ़ंग से काम ठीक कर रहे हैं उन उपर लांछन लगाना ठीक नहीं है।