उप मुख्य संवाददाता, पटियाला
नगर निगम की सीमा में अनधिकृत रूप से शराब बेच रहे गुड़ मंडी स्थित ठेके को आबकारी विभाग ने बंद करवा अगली कार्रवाई शुरू कर दी। हालांकि यह ठेका अब तक राज्य सरकार के आबकारी राजस्व को 50 लाख रुपये से ज्यादा की चपत लगा चुका है।
नगर निगम सीमा में शराब बेचने के लिए चार समूह बनाए गए हैं और 10 से 12 ठेकों के हर समूह के लिए लाइसेंस फीस 12.50 करोड़ रुपये है। अंग्रेजी व देसी का एक ठेका कम से कम एक करोड़ रुपये सालाना फीस पर आया है। ऐसे में एक अप्रैल से 20 सितंबर तक साढ़े पांच महीने से ज्यादा चले इस ठेके ने राजस्व को जमकर चूना लगाया है। हालांकि अधिकारियों को इस बाबत पहले भी शिकायतें मिलीं पर विभाग में मौजूद कुछ लोगों के चलते शराब बेचने वाले ठेकेदार सफलतापूर्वक आंख मिचौली खेलते रहे। विभाग के ही एक आला अधिकारी कहते हैं कि जब जाते थे तो बंद मिलता था पर बाद में फिर से खुला होने की शिकायत आ जाती। वहीं हाल ही में आबकारी एवं कराधान अधिकारी का कार्यभार संभालने वाले एसके गर्ग कहते हैं कि ठेका बंद है और अगली कार्रवाई की जा रही है।
दूसरी ओर कारोबार से जुड़े लोग और विभागीय सूत्र बताते हैं कि शहर व आसपास के क्षेत्रों में अधिकृत रूप से चल रहे शराब के कारोबार की लंबी फेहरिस्त है। इसमें सरहिंद रोड पर हरदासपुर के लिए मंजूर ठेका शहरी सीमा में गांव बारन में चल रहा है। आबकारी का ग्रामीण क्षेत्र में लाइसेंस शुल्क 35 लाख रुपये है तो शहर में एक करोड़ रुपये। ऐसे ही रेलवे स्टेशन पर विभाग से एक ठेका पास है पर अंग्रेजी व देसी के नाम पर दो अलग-अलग ठेके चलाए जा रहे हैं और दोनों पर दोनों तरह की शराब बिक रही है। इनमें एक ठेका पूरा तरह अवैध है जिससे राज्य सरकार को लाइसेंस का चूना तो लग ही रहा है उधर अन्य राजस्व की हानि भी हो रही है।