Friday, 13 April 2012

मौसम की मार, किसान लाचार, wheat, bad weather, farmer,


 गेहूं की फसल में एक सप्ताह की और देरी
बारिश का असर
-प्रभावित क्षेत्र में अगेती गेहूं की उपज में एक से दो क्विंटल की गिरावट
-तकनीकि कारणों से सरकार से मुआवजे की उम्मीद नहीं
भूपेश चट्ठा, पटियाला
 गेहूं की फसल की कटाई के दिनों में चली तेज हवाओं के साथ आई बारिश ने सरकारी तौर पर देरी से चल रहे सीजन में कम से कम एक सप्ताह की और देरी कर दी है।
प्रदेश में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं की सरकारी खरीद एक अप्रैल से शुरु की गई है, हालांकि पंजाब में गेहूं की कटाई परंपरागत रूप से वैसाखी पर ही शुरु होती है। इस साल चले लंबे सर्द सीजन के चलते सरकारी सीजन की तुलना में परंपरागत सीजन पर उपज मंडियों में आनी थी। लेकिन बारिश का प्रत्यक्ष रूप से असर ये हुआ की खेत गीले होने के अलावा गेहूं में नमी की मात्रा बढ़ गई। तय मापदंड अनुसार नमी 12 फीसदी से अधिक होने पर एमएसपी पर गेहूं का बिकना भी संभव नहीं है।
मौसम की मार पर भारतीय किसान यूनियन एकता डकौंदा के प्रधान डा. दर्शन पाल कहते हैं कि गेहूं की अपेक्षा सरसों को नुकसान च्यादा हुआ है, पक्की हुई फसल अथवा अगेती लगी गेहूं के झाड़ में बारिश से एक से दो क्विंटल की कमी आ सकती है जबकि देरी से बिजाई वाली पछेती किस्में पानी से गिर गई हैं। इनकी कटाई में परेशानी आएगी।
दिलचस्प है कि सरकार की ओर से किसी तरह का मुआवजा मिलने की किसान को कोई संभावना नहीं है। मौसम की मार पर मुआवजा तभी दिया जा सकता है जब नुकसान कम से कम 25 फीसदी हुआ हो, ऐसे में तकनीकि कारण सामने हैं।
इसी क्रम में कंसोरटियम आफ इंडियन फार्मर्स एसोसिएशन के प्रधान सतनाम सिंह बहरू बताते हैं कि फिलहाल तो ईश्वर की कृपा से बच गए हैं पर लोगों में डर खासा है, संगरूर, मानसा जिलों में ओलों से नुकसान जरूर हुआ है। देरी से चल रहे सीजन में प्रदेश के शेष क्षेत्र में एक दम से कटाई का जोर पडऩे वाला है। तब प्रबंध करना मुश्किल होगा।
दूसरी ओर अब तक प्रदेश की मंडियों में मात्र नौ हजार टन गेहूं की आवक होने के चलते मंडियों में गेहूं का नुकसान नहीं हुआ है।

'बारिश व तेज हवाओं से फसल कई जगहों पर टेडी हो गई है, संभव है कि कंबाइन चलाने में दिक्कत आए, लेकिन झाड़ में कमी नहीं आएगी, क्षेत्र विशेष में नुकसान हुआ है। जहां कहीं ओले गिरे हैं, वहां दाने भी गिरे है और पौधे भी टूटे हैं, पर लंबे चले ठंडे मौसम के चलते कुल उपज पिछले साल की 112 लाख 68 हजार टन से च्यादा और 115 लाख टन से 120 लाख टन मंडियों में आने की उम्मीद हैÓ अजमेर सिंह लक्खोवाल, चेयरमैन पंजाब मंडी बोर्ड  

कणकां दी मुक गई राखी...wheat, season, late, start

-सरकारी तारीख से नहीं परंपरागत तिथि से शुरु होगा सीजन
-मंडियों में गेहूं आने में लग सकते हैं 10-12 दिन: मंडी अधिकारी
भूपेश चट्ठा, पटियाला
पंजाब के जाने माने कवि धनी राम चात्रिक की लोकप्रिय पंक्तियां 'कणकां दी मुक गई राखी जट्टा आई बसाखीÓ इस बार सही मायनों में चरितार्थ होने जा रही है। प्रदेश में रबी की फसल के लिए रहे उपयुक्त तापमान के चलते इस सीजन में गेहूं की फसल सरकारी खरीद की तारीख से शुरु ना होकर परंपरागत रूप से शुरु होने वाले तिथियों के सीजन पर ही शुरु होने जा रही है।
हाल के वर्षो में सामान्य रूप से एक अप्रैल से गेहूं की सरकारी खरीद शुरु होती है। औपचारिक रूप से समय इस बार भी यही है जब न्यूनतम समर्थन मूल्य पर राच्य की छह सरकारी खरीद एजेंसियां और केंद्र सरकार के एक संस्थान भारतीय खाद्य निगम की ओर से गेहूं की खरीद एक अप्रैल से ही शुरु हो रही है, लेकिन फसल के अब तक हरा होने व कहीं कहीं तो पानी लगा होने के चलते मंडियों में आने की संभावना अभी नजदीक नहीं है।
दक्षिणी पंजाब में गेहूं की मंडियों में आवक के सवाल पर पटियाला के जिला मंडी अधिकारी जीएस औलख बताते हैं कि इस बार सीजन देरी से ही शुरु होगा, चाहे सरकारी खरीद के आदेशों के चलते एक अप्रैल के हिसाब से ही तैयारियां की गई हैं, लेकिन मंडियों में गेहूं के आने की फिलहाल संभावना नहीं है। फसल पकने में कम से कम 10 से 12 दिन अभी और ले सकती हैं।
वहीं भवानीगढ़ रोड पर स्थित संसारपुर गांव के प्रोग्रेसिव किसान हरजिंदर बदेशां कहते हैं कि ये सही है कि फसल को पूरी तरह से पकने में अभी कुछ दिन लगेंगे लेकिन मौसम में किसी तरह की विपरीत परिस्थितियां उत्पन्न होती हैं तो हालात बदल भी सकते हैं। आसमान में बादल होने और बारिश की संभावना हुई तो किसान कंबाईन खेत में लेजाने से गुरेज नहीं करेगा बशर्ते खेत की जमीन सूखी हो और कंबाईन चल सकती हो।
दूसरी ओर मंडी बोर्ड के अधिकारी बताते हैं कि गेहूं के एमएसपी 1285 रूपये प्रति क्विंटल पर खरीद करने मंडियों में सभी तरह के प्रबंध किए जा चुके हैं। इनमें बिजली पानी के प्रबंध के टेंडर लगाए जाने के अलाव ग्रामीण स्तर पर मंडियों की सफाई का काम चल रहा है जिसे अगले दो दिनों में निपटा लिया जाएगा।

Tuesday, 10 April 2012

मानसून का असर खत्म, हर रोज एक फुट नीचे, mansoon effect is over, every day water level down by one feet


बांधों में पानी
-पिछले साल से भाखड़ा में 32 फुट, पौंग में 24 फुट, रणजीत सागर में आठ मीटर पानी कम, पर आवक तीस फीसदी च्यादा
भूपेश चट्ठा, पटियाला
देश भर में विशेष रूप से उत्तर भारत में पिछले साल रहने वाले बेहतरीन मानसून का असर खत्म अब पूरी तरह से खत्म हो चला है। अच्छे मानसून से लबालब भरे बांधों के खाली होने का सीजन शुरु हो गया है और भाखड़ा जैसे बड़े बांध का जल स्तर हरउ रोज एक फुट की गति से नीचे आ रहा है।
दिलचस्प है कि पिछले साल के अच्छे मानसून ने मंहगाई पर कितना असर डाला यह तो सामने नहीं आ पाया लेकिन सार्वजनिक क्षेत्र के कई बिजली बोर्ड व निगमों को पन बिजली उत्पादन के मामले में भारी राहत दी थी। एक ओर जहां ये बोर्ड व कंपनियां मंहगी बिजली खरीद करने से बची और घाटे को नियंत्रित रखने में कामयाब रही वहीं आम जनता भी बिजली कटों से करीब करीब मुक्त रही। वर्तमान शिरोमणि अकाली दल-भारतीय जनता पार्टी सरकार के एक बार फिर सत्ता में आने के चंद कारणों में बत्ती गुल ना होना भी माना जाता है। लेकिन इस सीजन में हालात लगभग बदले हुए हैं।
गर्मी के शुरु होने के बाद से पिछले दो सप्ताहों में बांधों का जल स्तर हर रोज एक फुट की गति से नीचे आ रहा है। पन बिजली उत्पादन के लिए बांधों के पानी पर निगाह रखने वाले पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड के आंकड़े बताते हैं कि जहां पानी के स्तर में तेज गिरावट दर्ज की जा रही है वहीं पिछले साल की तुलना में स्तर भी खासा नीचे आ चुका है। सबसे बड़े भाखड़ा बांध में पिछले साल के 1590 फुट से 32 फुट, पौंग में पिछले साल के 1345 फुट से 24 फुट और रणजीत सागर में पिछले साल आज ही के दिन नापे गए 504 मीटर से आठ मीटर पानी कम है।
बांधों में पानी की आवक इस साल तीस फीसदी च्यादा बनी हुई है। सतलुज-व्यास नदियों पर बनी भाखड़ा परियोजना में आवक 12 हजार क्यूसिक के पार है तो बीते साल साढ़े सात हजार क्यूसिक पर थी। इसी प्रकार पौंग में 15 सौ क्यूसिक के मुकाबले 21 सौ क्यूसिक पानी आ रहा है जबकि रावी नदी पर बने रणजीत सागर बांध में 34 सौ क्यूसिक की अपेक्षा 66 सौ क्यूसिक पानी आ रहा है। इतना ही नहीं इन बांधों से पिछले साल की तुलना में पानी छोडऩे का काम भी अब संयम से किया जा रहा है।


टेबल
बांध- भाखड़ा

25 मार्च, 2012- 1571 फुट,
25 मार्च 2011- 1598  फुट
26 मार्च- 1570 फुट
सात अप्रैल- 1559 फुट
आठ अप्रैल, 2012- 1558 फुट
आठ अप्रैल, 2011- 1590 फुट

विकास विभागीय: बल्ले बल्ले पार्षद की, municipal corporation, ward 6, dev. by dept. M.C enjoying popularity


वार्ड नंबर-6
-पानी के पाइप डले, पानी आया नहीं बिल आने लगे, टूटी रह गई सड़क
भूपेश चट्ठा, पटियाला
शहर के उत्तर-पूर्व में स्थित वार्ड नंबर छह संभव है कि इकलौता वार्ड ऐसा है जहां सरकारी विभागों के परिसरों व कालोनियों की संख्या सबसे च्यादा है। इस वार्ड की तुलना चंडीगढ़ के सर्वाधिक प्रतिष्ठित सेक्टर चार से किया जाए तो गलत नहीं होगा। यही वजह है कि हर विभाग ने अपने अपने स्तर जरूरी काम निपटाया और बल्ले बल्ले पार्षद की हो गई है।
आलम ये है कि विधान सभा चुनावों में कांग्रेस को बढ़त दिलाने वाले इस क्षेत्र में अकाली दल का पार्षद है और पिछले चुनाव में कांग्रेस का टिकट लेने से एक नेता के इन्कार करने के बाद एफसीआई के पूर्व अधिकारी को पार्टी ने मैदान में उतारा पर चुनाव के बाद से उनकी कोई गतिविधि नहीं है।
 सरकारी क्वार्टरों की ओर से वार्ड में प्रवेश करने पर सारा कुछ दुरुस्त लगता है लेकिन जैसे ही कालोनी खत्म होती है तो ठीक फुलकियां एनकलेव के गेट पर टूटी व नीची सड़क से स्वागत होता है। यहां पर दशमेश नगर एक्सटेंशन के सुखबीर सिंह और फुलकि यां एनकलेव के सेवा निवृत विंग कमांडर एएस बदवाल कहते हैं कि एनकलेव में तो कोई समस्या नहीं पर बाहर हल्की बारिश में पानी जमा हो जाता है जो कई दिनों तक कीचड़ की सूरत में यहीं रहता है। इस पर पार्षद कहते हैं कि नौ लाख का वर्क आर्डर जारी हो चुका है बस ठेकेदार काम नहीं कर रहा।
दिलचस्प है कि वार्ड में हाल ही के सालों में शहर में बनी चार प्रमुख सड़कों में से एक त्रिपड़ी मेन बाजार की टंकी से आगे की सड़क अब भी शानदार है लेकिन क्षेत्र के दुकानदार सड़क पर काउंटर लगाने से लेकर टेंट गाडने तक में कोई कसर नहीं छोड़ रहे। ऐसे में यहां पर भी पेच वर्क कर काम चलाया जा रहा है। महिंदर सिंह गांधी बताते हैं कि मेन बाजार के साथ ही वर्षों पहले स्कूल के लिए दान में दी गई कई बीघे जमीन को अब एक तरह से डंपिंग ग्राउंड बना दिया गया है। वेद प्रकाश, अवधेश यादव, परमजीत सिंह कहते हैं कि बारिश के दिनों में यहां से बीमारी फैलने का अंदेशा हमेशा बना रहता है। हर कोई यहां आकर गंदगी गिरा रहा है।
जबकि प्रीत नगर क्षेत्र के मनदीप सिंह, सुखविंदर सिंह व संजय वर्मा कहते हैं कि पार्षद ने खुद कह कर पानी के कनेक्शन दिलवाए थे पानी तो आया नहीं पर पानी के बिल आने लग गए है और सड़क बची नहीं है। इसी क्षेत्र में बनी सड़क की ढलान कुछ इस तरह से है कि बारिश का पानी प्रीत नगर में आ जाता है और निकलने का रास्ता नहीं बचता।
 
वार्ड के प्रमुख क्षेत्र

शहरी कालोनियों में प्रीत नगर, बिंदरा कालोनी, दशमेश नगर, त्रिपड़ी मेन बाजार का दाहिने ओर का हिस्सा शामिल है। जबकि सरकारी क्षेत्र में जिला प्रशासन के अधिकारियों के सरकारी क्वार्टर, फुलकियां एनकलेव, भाखड़ा नहर कालोनी, डेयरी फार्म, पोल्ट्री फार्म, मिनी सचिवालय, केंद्रीय जेल, और पुलिस लाइन वार्ड के प्रमुख क्षेत्र हैं।

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तीन टयूबवेल लगा पानी की किल्लत दूर की: पार्षद
वार्ड से शिरोमणि अकाली दल के पार्षद प्रभजीत सिंह डिक्सी क्षेत्र में विकास के नाम पर अपनी पीठ जम कर ठोकते हैं और जो काम नहीं करवा पाए उनकी चर्चा भी खुल कर करते है। कहते हैं कि तीन नए टयूबवेल लगा कर पीने के पानी की कमी दूर कर दी गई है। सड़कें लगभग ठीक हैं, मैन बाजार में पैच वर्क करवाया है, यहां कारपेटिंग की जरूरत है। दशमेश नगर में नया कम्यूनिटी सेंटर बनवाया, यहां की सात गलियों में इंटर लाकिंग टाइल्स लगाई है, फिर भी विकास को दो करोड़ रूपये की जरूरत है।


प्रिंसीपल मोहन सिंह प्रेम की याद में हर साल समृति लेक्चर होगा: डा. जसपाल, principle mohan singh prem


-हमेशा याद रहेगा प्रिंसीपल प्रेम का पंजाबी प्रति प्यार
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उपमुख्य संवाददाता, पटियाला
शिरोमणि पत्रकार व प्रसिद्ध साहित्यकार स्व. प्रिंसिपल मोहन सिंह प्रेम की याद में हर साल पंजाबी यूनिवर्सिटी में स्मृति लेक्चर का आयोजन करवाया जाएगा। ये विचार युनिवर्सिटी के वाइस चांसलर डा. जसपाल सिंह ने स्व. पिं्रसिपल मोहन सिंह की पहली बरसी पर रखे गए श्रद्धांजलि कार्यक्रम में रखे हैं।
डा. जसपाल सिंह ने कहा कि स्व. प्रेम ने जिस शिद्त से पंजाबी भाषा, संस्कृति और पंजाबियत की सेवा की है, आज वैसी ही शिद्त व वचनबद्धता की बेहद जरूरत है। पंजाबी को दीमक लग रहा है ऐसे में इस भाषा को प्रफुल्लित करने के लिए स्व. प्रेम जैसे व्यक्तित्व की जरूरत है। पंजाबी यूनिवर्सिटी ने भी किसी कौम की बौद्धिक अमीरी का सम्मान करने की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए स्व. प्रेम को आजीवन फैलोशिप से नवाजा था। वे हमेशा ही पीछे रह कर जनूनी स्तर पर कार्य करते रहे हैं। इसीलिए यूनिवर्सिटी उनकी याद को हमेशा जीवंत रखने के लिए स्मृति लेक्चर सहित अन्य प्रयास करेगी।
वहीं पटियाला ग्रामीण के विधायक ब्रहम महिंदरा ने कहा कि स्व. पे्रम ने सारा जीवन पंजाबी को अर्पित किया उनके जाने के बाद ऐसा प्रतीत होता है जैसे एक युग का अंत हो गया हो। पंजाब के पूर्व डिप्टी स्पीकर बीर दविंदर सिंह ने विद्यार्थी जीवन में स्व. प्रेम के समय हुई मुलाकातों का हवाले दे कहा कि वे पंजाबियत को ताउम्र समर्पित रहे है। इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के चेयरमैन व शिरोमणि अकाली दल के शहरी जत्थे के प्रधान इंद्रमोहन सिंह बजाज ने कहा कि जो सेवा उनकी ओर से की गई है उसकी याद सजीव रहनी चाहिए। पूर्व लोक संपर्क अधिकारी व विशलेषक उजागर सिंह ने बताया कि देश के बंटवारे के बाद स्व. प्रेम अपने पत्र मित्र जसदेव सिंह संधू के पास आए और दोनो ने मिलकर पंजाबी के लिए बेहतरीन काम किया।
इस अवसर विदेश राच्य मंत्री परनीत कौर व राच्य सभा सदस्य सुखदेव सिंह ढींडसा की ओर से शोक संदेश भेजे गए। इस अवसर पर  विश्व पंजाबी सेंटर के डायरेक्टर डा. दीपक मनमोहन सिंह, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पूर्व प्रधान व पिछड़ी श्रेणियां कमीशन के चेयरमैन प्रो. कृपाल सिंह बडूंगर अवतार सिंह नंनड़े प्रमुख रूप से उपस्थित रहे

गेहूं को सोना बनने में अभी समय लगेगा, wheat may take time to become gold


सर्दी गई, पर नहीं गई गेहूं की नमी
-खरीद मापदंड अनुसार 12 फीसदी हो नमी, पर मौसम ने 16 फीसदी की
-गेहूं पूरी तरह सुखा कर लाएं अन्यथा दाम में कटौती तय: खादय आपूर्ति विभाग
भूपेश चट्ठा, पटियाला
पंजाब में रबी की प्रमुख फसल गेहूं को फलने फूलने, तेज ठंड की जरूरत होती है, लेकिन इसे पकने के लिए मौसम का गर्म होना जरूरी है। इस साल लंबी चली सर्दियों का असर अब तक कायम है, हालांकि सर्दी के जाने के बावजूद गेहूं की नमी कम नहीं हो रही।
न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सरकारी खरीद शुरु हुए पांच दिन बीत जाने के बावजूद प्रदेश भर में नाममात्र गेहूं ही मंडियों में आई है जबकि खरीद का आंकड़ा नगण्य मात्र ही है। केंद्र सरकार की ओर से तय किए गए गेहूं के खरीद मापदंड अनुसार गेहूं में नमी की मात्रा 12 फीसदी से च्यादा नहीं होनी चाहिए, जबकि प्रदेश में गेहूं में ये आंकड़ा 16 फीसदी के आसपास बना हुआ है। दिलचस्प है  कि खाली पड़ी मंडी को देख कुछ उतावले किसान गेहूं की जल्द कटाई कर मंडी में ला जरूर रहे हैं लेकिन बिकने के नाम पर केवल इंतजार ही हाथ लग रहा है। हालांकि इन किसानों को फड़ की उपलब्धता आसानी से होने के चलते सुखाने को जगह मिल रही है।
गेहूं में नमी के सवाल पर कृषि विभाग के डिप्टी डायरेक्टर डा. बीएस सोहल बताते हैं कि पारे के 23 डिग्री सेल्सियस से उपर जाने के साथ ही पौधे पर से सीलन की बीमारियां झड़ जाती हैं और पश्चिम से चली हवाएं फसल को पका देती है। इस साल पार दो-तीन दिन पहले ही 35 डिग्री  के पार गया है। देरी से दूर हुई सर्दी की वजह से नमी अब भी बनी हुई है। संभव है कि अगले कुछ दिनों में गर्म मौसम से गेहूं की नमी देर हो और दाना सोने में तबदील हो।
वहीं खादय एंव आपूर्ति विभाग के सचिव डीएस ग्रेवाल कहते हैं कि अभी मंडियों में गेहूं की आवक नगण्य सी ही है। ऐसे में किसानों को चाहिए की खुले फड़ का इस्तेमाल करें और गेहूं को सुखा लें अन्यथा अधिक नमी आने की सूरत में दाम में कटौती तय है।
राच्य में खरीद के जोर ना पकडऩे क सवाल पर वे कहते हैं कि इस बार वैसाखी के पास ही  च्यादा गेहूं आना शुरु होगा, अभी सीजन शुरु ही हुआ है और इसी सप्ताह पारा चढ़ा है। ऐसे में फसल पकने की गति अब बढ़ेगी। अनुमान है कि पिछले साल की तुलना में सीजन अच्छा जाए।

Tuesday, 3 April 2012

जनता की खरी-खरी, नेताओं ने मांगी माफी, Leaders forced to listened grievances by riot victims



उपमुख्य संवाददाता, पटियाला
बलवंत सिंह राजोआना की फांसी की सजा के विरोध में हुए प्रदर्शन के दौरान हुए दंगों के ठीक पांच दिन बाद सोमवार को शिअद व कांग्रेसी नेता आर्यसमाज क्षेत्र में पहुंचे और घायल हुए व आर्थिक नुकसान झेल चुके लोगों से संपर्क साधा। हालांकि क्षेत्र के लोग इसे विशुद्ध रूप से नगर निगम के होने वाले चुनावों से जोड़ कर देख रहे हैं।
सांत्वना देने का विचार पहले कांग्रेस के रणनीतिकारों के मन में आया बताया जा रहा है। विदेश राज्य मंत्री परनीत कौर के पटियाला आगमन के साथ ही इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के पूर्व चेयरमैन केके शर्मा की टीम को जिम्मेदारी सौंपी गई और पांच बजे परनीत कौर की बैठक तय करवा दी गई। सभी तरफ सूचना प्रसारित होने के साथ ही अकाली दल के खेमे से भी संदेश पहुंचे तो मेयर अजीतपाल सिंह कोहली और इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के चेयरमैन इंद्रमोहन सिंह बजाज ने पीड़ितों से तीन बजे मिलने का समय ले लिया।
बैठक उसी धर्मशाला में हुई जहां खालिस्तान के नारे लगे थे। इसे लेकर लेकर दोनों पक्षों में जमकर संघर्ष हुआ था। बैठक में आल इंडिया हिंदू सुरक्षा समिति के महासचिव आशुतौष गौतम, सुभाष बर्मन, कुलदीप सागर, गौप बाई, एडवोकेट अमित जिंदल, जिनके वाहन क्षतिग्रस्त हुए उनमें रामा ठेकेदार व रमन और घर के शीशे टूटने वालों में बठ्ल जी, लाठी खाने वाले घायलों में मलहोत्रा जी, बंटा जी इत्यादि शामिल हुए। एकत्र हुए लोगों ने जम कर न केवल अपनी भड़ास निकाली वहीं मेयर पर यह आरोप भी लगा दिया गया कि दंगा करने वालों को एक पूर्व अकाली मंत्री की कथित रूप से शह है। वहीं मेयर कोहली और इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के चेयरमैन ने न केवल पूरी घटना की निंदा की अपितु जो हुआ उस पर माफी भी मांगी है। मेयर का कहना है कि वे इस क्षेत्र के ऋणी हैं और जब कभी जरूरत पड़ी तो वे सबसे पहले और आगे खड़े होंगे।
वहीं इन नेताओं से कहा गया कि यहां मामला हिंदू सिख का नहीं है। ऐतराज तो खालिस्तान के नारे लगाने से है। हर बार आर्यसमाज को ही लक्ष्य बना कर हमले किए जाते हैं, जबकि यहां नारे लगाने से खालिस्तान नहीं बनने वाला।
वहीं विदेश राज्यमंत्री परनीत कौर की ओर से पांच बजे आने के समय पर सभी लोग इंतजार करते रहे लेकिन विदेश राज्य मंत्री को एक कपड़ा व्यापारी के यहां रुकवा दिया गया। जहां पर वे काफी देर तक रुकीं। इतनी देर में बाजार के लोग धर्मशाला से निकल कर अपने घरों की ओर चले गए। यहां पर बायकाट करने की बात भी कही गई। प्रत्यक्षदर्षियों अनुसार जब तक परनीत कौर अपने कांग्रेसियों की टीम के साथ पहुंची तो धर्मशाला में क्षेत्र में रहने वाले चंद लोग ही रह गए, हालांकि आर्यसमाज चौक के आसपास कभी रहने वाले उनके साथ दंगों की वस्तुस्थिति पर चर्चा व समीक्षा जरूर करते रहे।