Tuesday, 4 December 2012

अगली गर्मियों की तैयारियों में लगा पावरकाम


-शार्ट टर्म समझौतों के टेंडर जारी, 18 हजार लाख यूनिट से ज्यादा बिजली खरीद करने का लक्ष्य
-बैंकिंग के माध्यम से करीब एक सौ लाख यूनिट पहाड़ी राज्यों के पास जमा करवानी शुरू
भूपेश चट्ठा, पटियाला
धान का सीजन अभी समाप्त हुआ ही है और सर्दी ने अभी पूरा जोर नहीं पकड़ा है लेकिन पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड को अगले साल आने वाली गर्मियों की चिंता सताने लगी है।
पावरकाम के आधिकारिक सूत्र बताते हैं कि इस साल उत्तरी ग्रिड के दो बार ठप होने के चलते उत्तर भारत के लगभग सभी राज्य अगली गर्मियों में बिजली खरीद करने के शार्ट टर्म समझौते करने में लगे हैं। चूंकि पंजाब ने पड़ौसी राज्य हरियाणा और उत्तर प्रदेश की तुलना में पिछले साल जल्द प्रबंध कर लिए थे जिसके चलते अन्य राज्यों को बिजली खरीदने में खासी मशक्कत करनी पड़ी और उत्तरी ग्रिड से ओवर ड्रा करने पर कई बार चेतावनियां जारी हुई और जुर्माने भी लगे हैं। लंबे चले सूखे की वजह से पंजाब के बिजली खरीद समझौते कम पड़ गए।
दिलचस्प है कि पहले प्रयास कर पंजाब लाभ में रहता आया है। अधिकारी बताते हैं कि गर्मियों में बिजली के मामले में अंतिम छोर पर होने की वजह से पंजाब के लिए यह जरूरी भी है। उत्तर भारत में शार्ट टर्म समझौतों के तहत कुछ साल पहले तक छह-सात रूपये प्रति यूनिट से सस्ती बिजली नहीं मिल पाती थी लेकिन पावरकाम ने कोयला, डीजल, गैस, फर्नेस आयल व रेलवे के ढुलाई भाड़े के दामों में बढ़ोतरी के बावजूद 2011 में 3.92 रूपये प्रति यूनिट की बिजली खरीदी तो इस साल 3.88 रूपये प्रति यूनिट की दर से। अगली गर्मियों के लिए शार्ट टर्म समझौतों के टेंडर जारी कर दिए गए हैं और इस साल खरीदी गई 18 हजार लाख यूनिट से ज्यादा बिजली खरीद करने का लक्ष्य भी रखा गया है।
इतना ही नहीं इन दिनों में पंजाब में बिजली की मांग कम होने के साथ ही प्रदेश ने अन्य को बैंकिंग के माध्यम से जमा करवानी शुरु कर दी है। करीब एक सौ लाख यूनिट पहाड़ी राज्यों हिमाचल प्रदेश, उत्तरांचल व जम्मू कश्मीर के पास हर रोज जमा करवाई जा रही है। पहाड़ों में सर्दियों में बिजली की मांग खासी बढ़ जाती है जबकि पानी जम जाने क चलते पन बिजली उत्पादन काफी गिर जाता है। इसी क्रम में दक्षिणी राज्यों को पंजाब फरवरी से बिजली देनी शुरू करेगा। दक्षिण के समुद्र तटीय राज्यों में धान की बिजाई फरवरी में शुरू होती है और जून जुलाई में दक्षिण में बिजली की कमी नहीं होती।  बार्टर नियम के तहत दी जाने वाली बिजली अगले साल दस जून से सितंबर अंत तक वापिस ली जाएगी।
वहीं पावरकाम के डायरेक्टर फाइनांस सुरेश अरोड़ा कहते हैं कि प्रदेश में बिजली का प्रबंध लगातार और समय पर होता रहा है। इस बार भी ऐसा ही होगा।

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