Friday, 21 December 2012
लोक सभा चुनाव: कैप्टन कंवलजीत की बेटी कांग्रेस में होंगी!
-विदेश राज्य मंत्री परनीत कौर के प्रयास तेज मुलाकात की
-मनप्रीत डौली ने भी किया दिल खोलकर स्वागत
-डेरा बस्सी में परनीत समर्थक दीपेंद्र सिंह ढिल्लों के अकाली हो जाने के बाद राजनीतिक संतुलन की जुगत
भूपेश चट्ठा, पटियाला
शिरोमणि अकाली दल का दिमाग कहे जाने वाले तेज तर्रार नेता स्व. कैप्टन कंवलजीत सिंह की बेटी मनप्रीत डौली जल्द ही कांग्रेस का हाथ थामने जा रही हैं विदेश राज्य मंत्री परनीत कौर के प्रयास जिस तरह से चल रहे हैं उनसे तय है कि अगले लोक सभा चुनाव से पहले अपने संसदीय चुनाव क्षेत्र अधीन आते डेराबस्सी, बनूड़ व कुछ हद तक राजपुरा में राजनीतिक संतुलन बनाने जा रही है।
डेराबससी से परनीत कौर के करीबी और खासा जनाधार रखने वाले दीपेंद्र सिंह ढिल्लों के इसी साल जुलाई में अकाली हो जाने के बाद से कांग्रेस इस क्षेत्र के बागी अकालियों पर डोरे डालने की कोशिश में लगी है। विदेश राज्य मंत्री परनीत कौर के इसी प्रयास का खुलासा डेरा बस्सी के निकट अमलाला गांव में घग्गर नदी पर बनने वाले पुल के लिए आयोजित किए गए कार्यक्रम में हुआ है। घड़ाम के बाबा बुल्ले शाह की ओर से रखे गए कार्यक्रम मनप्रीत कौर डौली व विदेश राज्य मंत्री के खासी करीब रही । नजदीकियां बढऩे के सिलसिले में जहां परनीत कौर की और से शुरुआत की गई बताई जा रही है वहीं मनप्रीत डौली ने भी इस प्रयास का दिल खोलकर स्वागत किया है। कार्यक्रम स्थल तक मनप्रीत कौर को कभी स्व. कैप्टन कंवलजीत के बेहद करीबी गुरकीरत सिंह थूही लेकर गए। याद रहे कि स्व. कैप्टल कंवलजीत की मौत के तुरंत बाद थूही ने अकाली दल छोड़ कांग्र्रेस का दामन थाम लिया था।
पटियाला संसदीय क्षेत्र में आता अमलाला गांव यों तो मोहाली जिले में आता है लेकिन इस पुल के बनने से पटियाला जिले के बनूड़ व स्व. कैप्टन कंवलजीत की कर्म भूमि बनूड़ से सीधा संपर्क हो जाएगा। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि मनप्रीत डौली भी घग्गर के इसी पुल से कांग्रेस में जाने का सफर लगभग पूरा कर चुकी हैं और अब परनीत कौर का 'आफरÓ ठुकराने की स्थिति में नहीं है। हालांकि मनप्रीत कौर कहती हैं कि उन्होंने अपना राजनीतिक भविष्य अभी तय नहीं किया है वे तो बाबा बुल्ले शाह की ओर से रखे गए कार्यक्रम में बुलाने पर भाग लेने आई हैं। वहीं परनीत कौर को उन्होंने बेहद अच्छी महिला बताया और कहा कि दोनों परिवारों में अच्छे रिश्ते रहे हैं। जबकि मंच से वे यह भी कहती हैं कि स्व. कैप्टन कंवलजीत की मृत्यु के बाद से उनके साथ सारा डेरा बस्सी ही अनाथ हो गया है।
डेरा बस्सी में परनीत समर्थक दीपेंद्र सिंह ढिल्लों के अकाली हो जाने के बाद इस विधान सभा क्षेत्र में राजनीतिक संतुलन की जुगत में कांग्रेस का निशाना भी सटीक है। अकाली दल से इसी साल टिकट ना मिलने की स्थिति में मनप्रीत कौर डौली ने अकाली दल छोड़ कर निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ा था। इसी प्रकार दीपेंद्र ढिल्लों ने कांग्रेेस का टिकट ना मिलने पर निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ा। जीते तो दोनों में से कोई नहीं पर वोट व समर्थन खासा जुटा गए।
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