Sunday, 19 August 2012

करोड़ों के हीरे व सोने के आभूषण रीलीज, कोई पेनाल्टी नहीं, Police had to release diamonds and gold jewelry of 3 crores


उपमुख्य संवाददाता, पटियाला
शंभू पुलिस की ओर से वीरवार सुबह पंजाब सेल्स टैक्स बैरियर के पास पकड़े गए करोड़ों के हीरे व सोने के गहने आज रीलीज कर दिए गए हैं। आबकारी विभाग की ओर से मामले को वेरीफाई करने के बाद बिना कोई पेनाल्टी लगाए आभूषण लौटा दिए गए हैं।
 मोबाइल विंग के ईटीओ ओमिंदर सिंह ने पुष्टि करते हुए बताया कि विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को भी इस बात की जानकारी दी दी गई है। गहने पूरी तरह से जायज थे। ऐसे में उन पर किसी प्रकार का टेक्स नहीं बनता है। जिसके चलते गहने उनके मालिकों को सौंप दिए गए हैं।
उल्लेखनीय है कि शंभू पुलिस ने अपनी रूटीन चैकिंग के दौरान एक कार को रोक तलाशी के दौरान कार से करोड़ों रूपये के हीरे व सोने के जेवरात बरामद किए।
प्रारंभिक पूछताछ में व्यापारी ने बताया कि उक्त गहने तीन करोड़ के है व्यापारी का कहना है कि उक्त गहने लुधियाना स्थित एक फाइव स्टार होटल में आयोजित एक प्रदर्शनी के लिए ले जाया जा रहे थे जो नई दिल्ली के साउथ एक्सटेंनशन पार्ट 1 के यस च्वेलर्स से लाया जा रहा था।
इसी बीच थाना कांपलेक्स में पत्रकारों को डीएसपी घनौर दविंदर सिंह धूरी ने बताया कि आज सुबह सुबह थाना प्रभारी मंजीत सिंह अपने सहयोगियों के साथ सेल टैक्स बैरियर के पास नाका लगाया हुआ था जहां एक मंहगी ओडी कार जिस पर दिल्ली का पंजीकरण नंबर डीएल-3सी-एपी-0666 को रूकने का ईशारा किया पुलिस पार्टी ने जब गाड़ी की तलाशी ली तो गाड़ी में पिछले सीट पर एक लोहे की पेटी एवं साथ में एक और काला बैग पड़ा था जब पेटी को खोलने का कहा गया तो गाड़ी मालिक नीरज खन्ना मालिक यस च्वेलर्स, ग्रीन पार्क, साउथ एक्सटेंशन पार्ट -1 नई दिल्ली ने बताया कि पेटी में हीरे व सोने के जेवरात है जो वह लुधियाना स्थित एक 5 स्टार में आयोजित प्रदर्शनी में शामिल करने जा रहे हैं। पुलिस का कहना था कि उन्हें कार मालिक के जबाव से संतुष्टि नहीं मिली मौके पर प्रोपर कागजात एवं एंन्ट्री टैक्स की पर्ची एवं सही मुल्यांकण बारे नहीं बता पाए। पुलिस पार्टी ने गाड़ी को काबू कर उनके साथ एक अन्य ईनोवा गाड़ी में कुल 7 लोगों को काबू कर थाने ले आए और एक्साईज एंड टैक्सेशन विभाग को सूचित किया। थाने में पत्रकार वार्ता के दौरान ईटीओ ओमिंदर सिंह ने बताया कि अगर उक्त जेवरात प्रदर्शनी के लिए ले जाया जा रहा था तो पार्टी को चाहिए कि वह बैरियर पर वैट फार्म एसटी -36 भरना जरूरी था लेकिन व्यापारी ने ऐसा नहीं किया।



गेहूं-चावल का बायकाट खत्म, ढु़लाई शुरु होगी, Food grain agencies employs lift ban on rice-wheat transportation


-फूड सप्लाई विभाग के डायरेक्टर ने दिया आश्वासन नहीं करेंगे कार्रवाई
भूपेश चट्ठा, पटियाला
पंजाब की पांच खरीद एजेंसियों के कर्मियों की ओर से गेहूं व चावल की सप्लाई अन्य राच्यों को करने का 17 दिनों से जारी बायकाट उठा लिया गया है। पांचों खरीद एजेंसियों के कर्मियों की तालमेल कमेटी के साथ फूड सप्लाई विभाग के डायरेक्टर के साथ चंडीगढ़ में देर सांय तक हुई बैठक के बाद कर्मियों ने उक्त घोषणा की है।
तालमेल कमेटी के विधू शेखर भारद्वाज ने 'दैनिक जागरणÓ को बताया कि आज की बैठक में फूड सप्लाई विभाग के डायरेक्टर सतवंत सिंह जौहल ने उन्हें आश्वासन दिया है कि कर्मियों पर हड़ताल के दिनों में की गई किसी भी कार्रवाई पर कोई एक्शन नहीं लिया जाएगा। साथ ही उन्हें आश्वासन दिया गया है कि कर्मियों के  मामले केंद्र में फूड कारपोरेशन आफ इंडिया के पास उठाए जाएंगे। इसके बाद से बायकाट वापिस लेने का निर्णय लिया गया है। बैठक में सभी एजेंसियों के कर्मियों के प्रतिनिधि मौजूद थे।
कर्मियों की मांग है कि भंडारण के दौरान गेहूं में आई कमी की जिम्मेदारी सरकार ले और शैलर मालिकों के साथ गेहूं की संयुक्त कस्टडी बंद हो और सेवानिवृति पर मिलने वाले भत्ते जारी किए जाएं। जिसके चलते कर्मियों ने अन्य राज्यों को भेजी जाने वाली गेहूं की सपैशल का बायकाट पहले किया। फिर इसमें सड़क मार्ग से जाने वाली गेहूं को शामिल किया और सार्वजनिक वितरण प्रणाली, अंतोदया, एपीएल, बीपीएल और आटा दाल स्कीम का बायकाट भी कर दिया।
इतना ही नहीं केंद्र सरकार के संस्थान फूड कारपोरेशन आफ इंडिया की ओर से इस दौरान गेहूं की ढ़ुलाई रोक कर चावल की ढ़ुलाई अन्य राज्यों को किए जाने पर चावल को भी बायकाट में शामिल कर दिया गया।
उल्लेखनीय है कि खरीद एजेंसियों के कर्मी इस साल 22 जून से चंडीगढ़ में क्रमिक भूख हड़ताल पर हैं और 25 जुलाई को पटियाला, 27 जुलाई को फरीदकोट और 30 जुलाई को जालंधर में डिवीजन स्तर की रैलियां कर चुके हैं। इसके बाद वे एक अगस्त से पांच दिन के सामुहिक अवकाश पर चले गए। इसके बाद से धरने जारी है।

Tuesday, 14 August 2012

फिजा के दिल को नहीं पढ़ पाए विशेषज्ञ, दोबारा होगी जांच, Fiza’s heart in decomposed condition


-कतरा भी खून नहीं था...हार्ट अटैक आया या नहीं खुलासा नहीं हुआ
-मोहाली के निकट राज्य की केमिकल एग्जामीनेशन लैब में अब होगी जांच
भूपेश चट्ठा, पटियाला
पंजाब व हरियाणा की दो लगातार सरकारों में असिस्टेंट एडवोकेट जनरल के पदों पर रह चुकी और हरियाणा के पूर्व उप मुख्यमंत्री चंद्रमोहन से विवाह कर अनुराधा बाली से फिजां हुई, एडवोकेट का जीवन जितना जटिल रहा उतनी ही मौत भी पेचीदा हो गई है। मृत्यु के कारणों का पता लगाने पटियाला के गवर्नमेंट मेडिकल कालेज की पैथोलाजी लैब के विशेषज्ञ भी फिजा का दिल नहीं पढ़ पाए है। विशेषज्ञों की ओर से पहले प्रयास में असफल रहने के बाद अब फिजा के दिल की दोबारा जांच की जाएगी।
विशेषज्ञ बताते हैं कि फिजा के दिल में एक कतरा भी खून नहीं था। और यह बेहद 'डीकंपोज्डÓ स्थिति में था। ऐसे में यह कहा नहीं जा सकता कि उसे हार्ट अटैक आया या नहीं। यह खुलासा भी नहीं हो पाया है कि हार्ट में रक्त जमने से कोई ब्लाकेज उपजा हो।
वहीं जांच कर रही टीम के डा. मनजीत सिंह बल ने बताया कि वे टिश्यू की जांच कर रहे हैं और कुछ नमूने मोहाली के निकट राज्य की केमिकल एग्जामीनेशन लैब में भी भेज रहे हैं।
वे कहते हैं कि शुक्रवार तक वे रिपोर्ट भेज देंगे। विभाग के मुखी डा. बल कहते हैं कि दिल के बुरी तरह से सड़ जाने की वजह से भी दिक्कत आ रही है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि कारणों का पता नहीं लगेगा इसके लिए जांच पूरी होने का इन्तजार करना होगा। जांच कर रही टीम में डा. बल के अलावा डा. अनिल सूरी व डा. विजय कुमार बंदल भी शामिल हैं।

Monday, 13 August 2012

बात सोलह आने सच्ची हो तो जरूर कहो, If you are right, don’t keep quite say it firmly, Patwari proved


स्वतंत्रता के सारथी-अभिव्यक्ति का अधिकार

-एक पटवारी के चक्कर में उलझे एसएसपी स्तर के कई अधिकारी
-2009 में मौके के एसएसपी विजीलेंस से मांगे थे फरद के 20 रूपये
-मुख्यमंत्री ने अपने विशेष सचिव की सिफारिश पर छह अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज करने को कहा
फोटो:
भूपेश चट्ठा, पटियाला
'बात सोलह आने सच्ची हो तो जरूर कहो...ईश्वर पर विश्वास रखो...गलत काम मत करो...फिर परमात्मा के अलावा किसी से मत डरोÓ कुछ ऐसा ही संदेश रुड़की गांव के पटवारी मोहन सिंह भेड़पुरा देते हैं। राज्य सरकार के राजस्व विभाग में चौथी श्रेणी से उपर लेकिन ठीक से तीसरी श्रेणी का भी दर्जा प्राप्त ना करने वाले एक पटवारी ने साबित किया की सच, सच होता है और कमजोर से कमजोर व्यक्ति  भी दृढ़ता से बोले तो ताकतवर तो ताकतवर व्यक्ति का झूठ उसके आगे नहीं टिक पाता।
पटवारी मोहन सिंह की कहानी कुछ ऐसी है कि 2009 में मौके के एसएसपी विजीलेंस से उन्होंने एक जमीन की तबदीली पर ली जाने वाली फरद के लिए 20 रूपये मांग लिए। यहीं से परेशानियों, तनाव व अधिकार की लड़ाई का सिलसिला चल निकला। बकौल मोहन सिंह उक्त अधिकारी ने उसे पैसे तो दे दिए पर अगले ही दिन बुलवा भेजा। मुख्यमंत्री, एसजीपीसी तक पहुंची शिकायत का हवाला दे मोहन सिंह बताते हैं कि उन्हें कथित रूप से धमकाया गया, एक इंस्पेक्टर की डयूटी पक्के रूप से लगा दी, उसकी जमीन जायदाद के आंकड़े जुटाए गए। गुमनाम शिकायतें हुई।
अपने इरादों के पक्के भारतीय सैना के इस पूर्व सैनिक के कदम नहीं डगमगाए। मोहन सिंह याद करते हैं कि एक ओर उन पर दवाब बढ़ रहा था तो दूसरी ओर वाहे गुरु उन्हें बर्दाश्त करने की शक्ति देता गया। पटियाला से उठा मोगा ले जाया गया। मामला दर्ज कर लिया गया। अमृत भी भंग हुआ पर हार नहींं मानी अपनी बात उन्होंने श्री अकाल तख्त साहिब, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी और मुख्यमंत्री के पास रखने से लेकर मीडिया तक में उठाई। राजस्व विभाग के कर्मी भी उनके समर्थन में आए काम का बायकाट हुआ, हड़ताल भी हुई।
मामला आगे बढ़ता देख मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने अपने विशेष सचिव काहन सिंह पन्नू की अध्यक्षता में जांच बिठा दी। दिलचस्प है कि इस साल आई कमेटी की रिपोर्ट में की सिफारिशों पर हूबहू कार्रवाई करते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से छह अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज करने के आदेश जारी कर दिए गए हैं। हालांकि आदेश अभी लागू नहीं हुए है। वहीं उक्त एसएसपी व एक एसपी सेवा मुक्त हो चुके हैं जबकि एक इंस्पेक्टर से लेकर ज्वाइंट डायरेक्टर तक के कुल छह अधिकारियों पर तलवार लटक रही है।
याद रहे कि जमीन के एक अन्य मामले में करीब 12 साल पहले पटियाला जिले के रहने वाले तत्कालीन लोक निर्माण मंत्री के भाई से भी मोहन सिंह उलझ गए थे तब नौबत गोली चलने और सैंकड़ों लोगों की ओर से रास्ते जाम करने तक बात पहुंची थी। मोहन सिंह तभी अडिग थे और अपनी बात पर कायम थे और आज भी हैं।

Friday, 10 August 2012

पुलिस नहीं आई, भाग निकले चोर, Police came late; thieves escaped after firing in air



- अर्बन एस्टेट के फेस-दो में चोरी के दौरान नाकाम चोरों ने चलाई गोली
- लोगों ने घेरा डालकर पकडऩे का प्रयास किया पर पुलिस न आई
भूपेश चट्ठा, पटियाला
अर्बन एस्टेट के फेस-दो में बीती रात एक घर में चोरी के इरादे से घुसे चोरों के इरादे कामयाब नहीं हुए, पर भागने के प्रयास में उन्होंने देसी कट्टे से तीन राउंड गोलियां चलाई और भागने में सफल हो गए। फायरिंग में किसी को जानी नुकसान नहीं हुआ है। वहीं लोगों ने घेरा डालकर चोरों को पकडऩे का प्रयास किया। काफी देर तक कोशिशें जारी रहीं, लेकिन पुलिस के न आने की वजह से चोर बच निकले।
प्राप्त जानकारी के अनुसार अर्बन एस्टेट के फेस-दो में कोठी नंबर 2351 के मालिक के घर पर न होने की स्थिति में घर पर ताला लगा हुआ था। जिसका फायदा उठाकर रात करीब 12 बजे चोर उक्त कोठी में दाखिल हो गए। इसी बीच सामने के घर में रहते एक व्यक्ति ने पढ़ाई के दौरान उन्हें देख लिया और अपने पिता को जानकारी दी। इस पर उन्होंने मुहल्ले के लोगो को फोन पर बताया। लोगों ने कोठी को घेर लिया। चोरों को महसूस हुआ तो वे पिछले दरवाजे से भागने लगे, लेकिन शोर मचाने पर छत पर चले गए और करीब 20 मिनट तक घरों की छतों पर इधर से उधर दौड़ते रहे। जैसे ही मुहल्ले से बाहर निकलने को हुए...एक बार फिर शोर मच गया। इसके बाद चोरों ने तीन राउंड फायर किए और भाग निकले। फरार होने के बाद मौके पर पहुंची पुलिस व एसएसपी गुरप्रीत सिंह गिल, एसपी सिटी दलजीत सिंह राणा व अन्य अधिकारियों ने मौके का जायजा लिया। पुलिस ने आईपीसी की धारा 457, 436 व 380 व आम्र्स एक्ट के तहत अज्ञात लोगों पर मामला दर्ज कर लिया है। घटना के बाद से इलाके में दहशत का माहौल बना हुआ है। लोगों के मन में क्षेत्र में पुलिस पेट्रोलिंग न होने की स्थिति में पैदा हुई इस स्थिति को लेकर रोष बना हुआ है।

सूनी सड़कें, बंद बाजार और कामयाब विरोध, Deserted roads, shops shut and the protest is successful



फोटो:
उपमुख्य संवाददाता, पटियाला
पटियाला व्यापार बचाओ संघर्ष कमेटी की ओर से शहर को बंद रखने के किए गए आहवान के चलते शहर की लगभग हर सड़क सूनी नजर आई। बाजार करीब करीब बंद रहे और बाद दोपहर तक जहां बंद पूरी तरह से शांतिपूर्ण रहा वहीं दोपहर तक अधिकतर क्षेत्रों में दुकानें बंद ही रही।
बंद में हालांकि सरकारी स्तर पर श्री कृष्ण जन्म अष्टमी के चलते घोषित किए गए अवकाश ने भी पूरा योगदान दिया। जिसके चलते स्कूल कालेज व सरकारी कार्यालय, अद्र्ध सरकारी व अन्य व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रहे। संभव है कि सड़कों के खाली रहने की यह भी वजह रही और लोगों ने घर पर ही रहना बेहतर समझा।
सूनी सड़कों, बंद बाजार के बाद अपने स्तर कहे जाने वाले कामयाब विरोध का असर हाईकोर्ट पर कितना होता है? यह तो समय ही बताएगा पर कमेटी के आहवान पर दुकानदारों के सुबह आठ बजे शेरांवाला गेट पर पहुंचने की अपील थोड़ी देर से रंग लाई और शहर को बंद करवाने का कार्यक्रम भी अवकाश के दिन के हिसाब से ही चला। कमेटी के प्रधान राकेश गुप्ता, राकेश मंगला, जसप्रीत सिंह भाटिया, डा. धर्मवीर गांधी आदि ने कहा है कि उनका संघर्ष सीलिंग की लटकती तलवार हटने तक जारी रहेगा।

छोटी बारांदरी में की रैली

व्यापारियों के समर्थन में कांग्रेसी और अकाली दोनों ही छोटी बारांदरी में एक ही मंच पर नजर आए। इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के पूर्व चेयरमैन व कांग्रेस के नेता केके शर्मा, जिला कांग्रेस शहरी के प्रधान प्रेम किशन पुरी अपने नए पुराने पार्षदों के साथ कांगे्रस का वोट बैंक संभालने व्यापारियों के समर्थन में मंच पर आए तो शिरोमणि अकाली दल की ओर से पूर्व मंत्री सुरजीत सिंह कोहली ने कई मौजूदा पार्षदों के साथ अपनी नैतिक जिम्मेदारी निभाई। व्यापारियों की ओर से की गई इस रैली में बड़ी संख्या में दुकानदारों ने हिस्सा लिया।

 बस स्टैंड के पास लगाया जाम

बंद के समर्थकों ने दोपहर होते होते आखिरकार  बस स्टैंड पर आकर अपनी भड़ास निकाली। बस स्टैंड के गेट पर ताला उजडऩे के बाद बसों की आवाजाही बंद कर दी गई और साथ ही चौंक पर जाम लगा दिया गया। सरकारी बसों की सेवा तो एकबारगी पूरी तरह से ठप हो गई पर प्राइवेट बसों का नेटवर्क चलता रहा। इन बसों के मालिकों ने अपने गंतव्य स्थानों की ओर जाने वाले रास्ते में बस स्टैंड से कुछ ही दूरी पर सवारियां बिठानी शुरु कर दी और काम बदस्तूर जारी रहा।

शापिंग माल पर उतरना था गुस्सा पर रहा बंद

शहर के एकमात्र मालरोड स्थित शापिंग माल की हर दुकान पूरी तरह से टेक्स चुकाने और नक्शा पास करवाने के बाद बनी हुई है। माना जा रहा था कि इस शापिंग माल में दुकानें व अन्य व्यापारिक संस्थान खुलेंगे और ऐसे में कुछ लोगों का गुस्सा इस पर उतर सकता है। इसी आशंका को ध्यान में रखते हुए पुलिस ने भी विशेष इंतजाम किए लेकिन माल बंद रहा। जहां कई लोगों को खाली हाथ लौटना पड़ा वहीं 'उत्पातियोंÓ के इरादे भी सफल नहीं हुए।

आर्य समाज चौंक में हुई रैली

शहर के दुकानदारों ने आर्य समाज चौंक में व्यापार बचाओ संघर्ष कमेटी के बैनर तले रैली की है। इस अवसर पर कमेटी के नेताओं ने कहा कि शहर में 15 से 20 हजार दुकानें वर्षों से चलती आ रही है और इतने सालों तक हर तरह का टेक्स वसूलने के बाद आज अवैध करार दिया जा रहा है। इससे डेढ़ लाख लोगों की रोजी रोटी पर बन आई है।

Thursday, 9 August 2012

आढ़ती फायदे में खरीद एजेंसियां घाटे में, Grain commission agents are in profit but purchase agencies making loss



 -12 फीसद नमी की गेहूं खरीदी जाती है पर गर्मियों में 46 डिग्री पर खुले आसमान में होता है भंडारण
-सरकार ने हल ना निकाला तो हर कर्मी हो जाएगा चार्जशीट: कोर्डीनेशन कमेटी
-काम करने के नजरिए पर निर्भर करता है: आढ़ती एसोसिएशन
भूपेश चट्ठा, पटियाला
साल में दो बार किसान की फसल खरीदने और उसे भुगतान करवाने में मदद करवाने वाला आढ़ती 72 घंटे के लिए अनाज संभालता है और सदियों से व्यवसाय करता आ रहा है। धान व गेहूं की खरीद पर कुल मूल्य का ढ़ाई फीसद हिस्सा कमीशन के रूप में लेता है, जबकि खरीद एजेंसियां महीनों से लेकर सालों तक अनाज की संभाल करती है पर घाटे में चल रही है। इन एजेंसियों के कर्मियों ने इसके लिए मौसम को जिम्मेदार ठहरा दिया है।
राच्य सरकार की पांच खरीद एजेंसियों मार्कफैड, पंजाब एग्रो, पनसप, वेयर हाउसिंग कारपोरेशन, पनसीड, के कर्मियों की कोर्डीनेशन कमेटी का कहना है कि अनाज के भंडारण के दौरान होने वाली कमी में तापमान व नमी की भूमिका खासी है। 12 फीसद नमी की गेहूं की खरीद की जाती है पर 46 डिग्री पर खुले आसमान के नीचे भंडारण करने पर ये कम हो जाती है और इस कमी को 'चोरीÓ बता उनके सर मढ़ दिया जाता है।
 कोर्डीनेशन कमेटी के प्रधान भुपिंदर सिंह कहते हैं कि इस आलम में कोई भी कर्मी व अधिकारी चार्जशीट से नहीं बचने वाला। गेहूं भंडारण में प्रत्यक्ष रूप से जिम्मेदार ढ़ाई हजार कर्मियों में से एक हजार से अधिक पर चार्जशीट हो चुकी है। वर्तमान हालात में यह आंकड़ा दो हजार उसे उपर जाने वाला है। नई हुई भर्ती के 30 से 35 फीसद कर्मी इसी डर से नौकरी छोड़ चुके हैं।
इसी कमेटी के विधु शेखर भारद्वाज कहते हैं कि गर्म हवाओं से सूखी गेहूं डिस्पैच होते समय कम हो जाती है तो कर्मी पर एफआईआर दर्ज हो जाती है लेकिन सीलन बढऩे पर बढ़े वजन का लाभ कर्मी को नहीं दिया जाता। यही नार्मस हैं।
दिलचस्प है कि पंजाब मंडी बोर्ड के नाते चेयरमैन अजमेर सिंह लक्खोवाल यों तो किसानों व आढ़तियों का तकनीकि रूप से बराबर का प्रतिनिधित्व करते हैं, लेकिन आढ़तियों को मिलने वाले कमीशन के लगातार बढऩे से आपत्ति है। वे कहते हैं कि न्यूनतम समर्थन मूल्य के बढऩे के साथ ही बढ़ रही आढ़त को फ्रीज किया जाना चाहिए।
वहीं नई अनाज मंडी सरहिंद रोड की आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान गुरनाम सिंह लचकाणी कहते हैं कि एमएसपी का मार्केट फीस और आढ़त से कोई सीधा मेल नहीं है। एमएसपी के बाद ही दोनों चीजें जोड़ी जाती है, आढ़त कम होने से किसान को कोई लाभ नहीं होने वाला, जबकि खरीद एजेंसी के नुकसान में रहने और आढ़ती को हो रहे फायदे पर वे कहते हैं कि ये काम करने के नजरिए पर निर्भर करता है। हम प्राइवेट लोग हैं हमे पता है कि नफा और नुकसान दोनों हमारा ही है। ऐसे में काम किया जाता है, जबकि सरकारी आदमी का वेतन आना ही होता है। वे कहते हैं कि घर में हम एक भी पंखा अनावश्यक नहीं चलने देते जबकि आफिस में आसपास चलते पंखों को आफिस के बाद बंद करने की जिम्मेदारी चौकीदार पर छोड़ देते हैं।
 वह आगे कहते हैं कि पंजाब में 25 से 28 हजार आढ़ती काम कर रहे हैं और इतने ही इनके यहां मुनीम हैं। ढाई फीसद कमीशन से सरकार 56 हजार परिवारों को चपरासी का वेतन भी नहीं दे रही है। वहीं, विधु शेखर भारद्वाज बताते हैं कि राज्य सरकार की सभी खरीद एजेंसियां घाटे में और दिन-प्रतिदिन का आपरेशन चलाने के लिए बैंकों के लोन पर निर्भर हैं। हालांकि राज्य सरकार की तरफ पर इनकी 1400 करोड़ रुपये की देनदारी है और सालों से 12500 करोड़ रुपये एफसीआइ के पास फंसे पड़े हैं।