मामला
उप मुख्य संवाददाता, पटियाला : कृषि क्षेत्र, अनुसूचित जाति और घरेलू क्षेत्र के कुछ अन्य वर्गो को मुफ्त बिजली देने के बदले में पंजाब सरकार की ओर से पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड को हर महीने एडवांस में दी जाने वाली सब्सिडी का भुगतान न किए जाने पर पंजाब स्टेट इलेक्टि्रसिटी रेगुलेटरी कमिशन के पास सरकार के खिलाफ याचिका दायर की गई है।
बिजली निगम के ही एक पूर्व सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर इंजी. गुरनेक सिंह बराड़ ने पीएसईआरसी के पास याचिका दायर कर मांग की है कि या तो सरकार सब्सिडी की राशि एडवांस में पावरकॉम को दे अन्यथा उपभोक्ताओं से पूरा शुल्क वसूलने के लिए आदेश जारी करे। चालू वित्त वर्ष के लिए इसी साल नौ मई को जारी किए गए शुल्क आदेश में कृषि व विभिन्न प्रकार के घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 4188.92 करोड़ रुपये की सालाना सब्सिडी बनती है, जिसे कि अग्रिम मासिक किस्तों में दिया जाना है। इसी स्थिति में सरकार मुफ्त में बिजली दे सकती है। दिलचस्प है कि इसके विपरीत राज्य सरकार 24 मई को एक अन्य आदेश जारी कर 981.93 करोड़ रुपये पिछले बकाये के रूप में एडजस्ट कर चुकी है। इंजी. गुरनेक सिंह ने पीएसईआरसी के आदेशों का हवाला देकर अपनी याचिका में कहा है कि हर महीने सरकार की ओर से 349.08 करोड़ रुपये एडवांस सब्सिडी के रूप में दिए जाने होते हैं। इस साल अप्रैल व मई माह में पावरकॉम को मात्र 380 करोड़ रुपये ही मिले हैं। 190 करोड़ प्रतिमाह सिर्फ दो महीने तक देने के बाद जून में एक पैसा भी जारी नहीं किया गया है। बिजली अधिनियम 2003 की धारा 65 के अनुसार यदि एडवांस में सरकार सब्सिडी की राशि नहीं देती है तो पीएसईआरसी सब्सिडी वापस लेने और पूरा शुल्क लगाने के आदेश जारी कर सकता है। 13 सितंबर 2007 के एक आदेश में पीएसईआरसी ने कहा है कि सब्सिडी का अग्रिम भुगतान कानूनन जरूरी है, जबकि लोन के खिलाफ सब्सिडी एडजस्ट करने की बात कहीं नहीं आती है। केंद्र सरकार की एक योजना के अनुसार पीएसईबी के केंद्रीय कंपनियों पर पड़े बकाये के लिए लंबे समय के बांड जारी करने को अधिकृत किया गया था और ये राशियां एक अक्टूबर 2001 से पहले की हैं। अब त्रिपक्षीय समझौते के तहत ऐसा नहीं किया जा सकता।
पूर्व इंजीनियर ने पीएसईआरसी के पास दायर की याचिका
या तो सब्सिडी एडवांस में दी जाए या पूरा शुल्क लगे : याचिकाकर्ता
उप मुख्य संवाददाता, पटियाला : कृषि क्षेत्र, अनुसूचित जाति और घरेलू क्षेत्र के कुछ अन्य वर्गो को मुफ्त बिजली देने के बदले में पंजाब सरकार की ओर से पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड को हर महीने एडवांस में दी जाने वाली सब्सिडी का भुगतान न किए जाने पर पंजाब स्टेट इलेक्टि्रसिटी रेगुलेटरी कमिशन के पास सरकार के खिलाफ याचिका दायर की गई है।
बिजली निगम के ही एक पूर्व सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर इंजी. गुरनेक सिंह बराड़ ने पीएसईआरसी के पास याचिका दायर कर मांग की है कि या तो सरकार सब्सिडी की राशि एडवांस में पावरकॉम को दे अन्यथा उपभोक्ताओं से पूरा शुल्क वसूलने के लिए आदेश जारी करे। चालू वित्त वर्ष के लिए इसी साल नौ मई को जारी किए गए शुल्क आदेश में कृषि व विभिन्न प्रकार के घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 4188.92 करोड़ रुपये की सालाना सब्सिडी बनती है, जिसे कि अग्रिम मासिक किस्तों में दिया जाना है। इसी स्थिति में सरकार मुफ्त में बिजली दे सकती है। दिलचस्प है कि इसके विपरीत राज्य सरकार 24 मई को एक अन्य आदेश जारी कर 981.93 करोड़ रुपये पिछले बकाये के रूप में एडजस्ट कर चुकी है। इंजी. गुरनेक सिंह ने पीएसईआरसी के आदेशों का हवाला देकर अपनी याचिका में कहा है कि हर महीने सरकार की ओर से 349.08 करोड़ रुपये एडवांस सब्सिडी के रूप में दिए जाने होते हैं। इस साल अप्रैल व मई माह में पावरकॉम को मात्र 380 करोड़ रुपये ही मिले हैं। 190 करोड़ प्रतिमाह सिर्फ दो महीने तक देने के बाद जून में एक पैसा भी जारी नहीं किया गया है। बिजली अधिनियम 2003 की धारा 65 के अनुसार यदि एडवांस में सरकार सब्सिडी की राशि नहीं देती है तो पीएसईआरसी सब्सिडी वापस लेने और पूरा शुल्क लगाने के आदेश जारी कर सकता है। 13 सितंबर 2007 के एक आदेश में पीएसईआरसी ने कहा है कि सब्सिडी का अग्रिम भुगतान कानूनन जरूरी है, जबकि लोन के खिलाफ सब्सिडी एडजस्ट करने की बात कहीं नहीं आती है। केंद्र सरकार की एक योजना के अनुसार पीएसईबी के केंद्रीय कंपनियों पर पड़े बकाये के लिए लंबे समय के बांड जारी करने को अधिकृत किया गया था और ये राशियां एक अक्टूबर 2001 से पहले की हैं। अब त्रिपक्षीय समझौते के तहत ऐसा नहीं किया जा सकता।