भूपेश चट्ठा, पटियाला
पटाखे बनाने के सीजन में शिवाकाशी में बेमौसमी बारिश हुई हो या मजदूरों की कमी या फिर मालभाड़े में बढ़ोतरी, पटाखे क्यों महंगे हुए, इसके और भी कारण हो सकते हैं, लेकिन इसका सीधा लाभ इस बार पर्यावरण को मिला है। पर्यावरण के प्रति इंसान को जागरूक करने का जो काम स्वयंसेवी संस्थाएं, सरकारें और सरकारी संस्थान नहीं कर सके, वो काम आखिरकार महंगाई ने कर दिखाया है।
पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीपीसीबी) की ओर से दीपावली से पहले, दीपावली की रात और अगली सुबह राज्य में 22 स्थानों पर की गई मॉनीटरिंग के आंकड़ों का हालांकि विश्लेषण अभी किया जाना है, लेकिन दीपावली की अगली सुबह दमा के किसी भी मरीज के चेहरे की रौनक देखकर आप बता सकते हैं कि इस बार प्रदूषण के मामले में राहत है।
सोशल साइंसिस एंड हेल्थ फोरम के डा. पीपी खोसला कहते हैं कि नि:संदेह पटाखे कम चले और प्रदूषण कम हुआ है, कारण जो भी रहा हो पर लोगों को ज्ञान प्राप्त हो गया है। जो बजट पटाखों के लिए रखा जाता था, वह खाने-पीने की चीजों की तरफ गया और महिलाओं का रुझान एक बार फिर बर्तन से बेकरी की ओर बढ़ा है। नोट तुरंत जला कर धमाका करने के बजाय आम आदमी ने इसे कुछ दिन ज्यादा चलाने को महत्व दिया है।
पटाखा कारोबारी अमित शर्मा बताते हैं कि पिछले साल जितने पटाखे छह सौ में आते थे उसके लिए अब नौ सौ रुपये तक खर्च हो रहे हैं। पटाखों के लिफाफे का साइज वही है लेकिन लिफाफों की संख्या खासी कम रही है। पटाखे महंगे होने के कारण कुल व्यापार 30 फीसदी कम रहा है। साफ है कि पटाखे फोड़ने का चलन पिछले साल के मुकाबले 40 फीसदी तक गिरा है।
दिलचस्प है कि दीपावली की रात को चली तेज हवा ने कई शहरों में प्रदूषण से और राहत दे दी है। पीपीसीबी के डायरेक्टर डा. चरणजीत सिंह नाभा बताते हैं कि हवा चलने से रेस्पीरेटरी सस्पेंडिड पार्टीक्यूलेट मैटीरियल इधर उधर फैल जाता है। ऐसे ही नाइट्रेट व सल्फर गैसों के साथ हुआ है। शांत वातावरण में ये चीजें एक ही जगह पर या तो बैठ जाती हैं या मंडराती रहती हैं। हवा न चलती तो गर्द जमाने के लिए बारिश का इंतजार रहता। महंगाई के असर को लेकर वे इंकार नहीं करते लेकिन जागरुकता के मामले में डा. नाभा कहते हैं कि कड़ी मेहनत हो रही है, असर भी दिखेगा। संभव है कि प्रदेश के पांच प्रमुख शहरों से संवेदनशील, कामर्शियल अथवा आवासीय व इंडस्टि्रयल क्षेत्रों में की गई मॉनीटरिंग के आने वाले आंकड़े आपको चौंका दें।
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