-इंडस्ट्री नहीं, सबसे बड़ा कारण वाहनों का धुंआ है, देश का सर्वाधिक वाहन सघनता वाला शहर है लुधियाना
-पीपीसीबी के मास्टर प्लान पर नहीं हुई कार्रवाई
-डीजल के आटो चरणबद्ध तरीके से हटा सिटी बसें शुरू करने और सीएनजी वाहन लाने का है प्रस्ताव
-कामर्शियल क्षेत्र है सबसे ज्यादा प्रभावित
भूपेश चट्ठा, पटियाला
देश में सबसे अधिक प्रदूषित शहर का कलंक अपने माथे पर लेने वाले भारत के मैनचेस्टर लुधियाना शहर के प्रदूषण में पिछले सालों की तुलना में आंशिक रूप से गिरावट दर्ज की जा रही है, लेकिन आज भी वातावरण के नजरिए से स्वच्छ कहे जाने वाले शहर से यहां का प्रदूषण ढ़ाई गुणा ज्यादा है।
पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों पर आधारित शोध बताता है कि शहर में रेस्पीरेटरी सस्पेंडिड पार्टीक्यूलेट मैटेरियल की अधिकतम मात्रा 100 माइक्रो ग्राम प्रति क्यूबिक मीटर होनी चाहिए जबकि लुधियाना में यह 234 पर चल रही है। हालांकि पिछले साल इन दिनों में यह आंकड़ा 250 पर रहा था।
इसी प्रकार सल्फर डाई आक्साइड की अधिकतम सीमा 80 माइक्रो ग्राम प्रति क्यूबिक मीटर है और लुधियाना में यह 10 से ज्यादा नहीं है। जबकि नाइट्रोजन गैसों की मात्रा आठ चल रही है, जबकि पिछले साल ये 30 से 35 माइक्रो ग्राम के बीच थी।
शहर में पीपीसीबी चार स्थानों पर प्रदूषण की मानीटरिंग करता है। इनमें विश्वकर्मा मंदिर, मिल्क प्लांट, नाहर स्पीनिंग मिल और पीपीसीबी के शाम नगर स्थित क्षेत्रिय कार्यालय शामिल हैं। इनमें बस स्टैंड के साथ लगता शामनगर का कामर्शियल क्षेत्र है जहां आरएसपीएम की मात्रा 350 के भी पार है। इंडस्ट्री की तुलना में ये कामर्शियल क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित है।
दिलचस्प है कि आम धारणा के विपरीत शहर की आबोहवा में जहर घोलने का काम अब इंडस्ट्री कम कर रही है और आम आदमी के वाहनों का योगदान इसमें अब कहीं ज्यादा हो रहा है। पीपीसीबी के लुधियाना में तैनात पर्यावरण इंजीनियर करुनेश गर्ग अनुसार इंडस्ट्री प्रदूषण का एक स्थान पर टिका रहने वाला स्रोत है लेकिन इस पर एयर पाल्यूशन कंट्रोल डिवाइस लगे हैं और सभी पर सख्ती से कार्रवाई भी हो रही है। जबकि चलते फिरते वाहनों के प्रदूषण का उपाय नहीं है। शहर में इनकी संख्या लगातार और तेजी से बढ़ रही है। सबसे बड़ा कारण इन वाहनों का धुंआ है। लुधियाना देश का सबसे ज्यादा वाहन सघनता वाला शहर भी है।
दिलचस्प है कि पीपीसीबी ने लुधियाना को प्रदूषण से मुक्त करवाने मास्टर प्लान तैयार कर रखा है। आधिकारिक सूत्र बताते हैं कि राज्य सरकार के पास इसे भेजे हुए अरसा हो गया है लेकिन इस पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
आधिकारिक सूत्र बताते हैं कि डीजल इंजन से चलने वाले आटो रिक्शा को चरणबद्ध तरीके से हटा कर सिटी बसें शुरू करने की योजना मेट्रो की बात करने वाली सरकार के पास पड़ी है। इसी क्रम में दिल्ली की ही तर्ज पर सीएनजी वाहन विशेष रूप से कामर्शियल क्षेत्र में लाने का प्रस्ताव भी मास्टर प्लान के तहत ही है। पीपीसीबी के सचिव कहते हैं कि ये पाइप लाइन में है और जल्द ही शुरु हो जाएगी।
इसी क्रम में पीपीसीबी के चेयरमैन केएस पन्नू से लुधियाना के देश के सबसे अधिक प्रदूषण वाला शहर होने के संबंध में पूछे जाने पर वे स्पष्ट रूप से स्वीकार करते हैं कि प्रदूषण तो निसंदेह ज्यादा ही है और इसे छिपाया नहीं जा सकता। बोर्ड के प्रयास जारी हैं और जल्द परिणाम सामने होंगे।
No comments:
Post a Comment