गमले में गार्डन:
-जहरीले रसायनों से दूर आर्गेनिक की चाहत से चलन बढ़ा
-एक गमला महीने मे दो बार सब्जी मंडी जाने से छुटकारा दिलाएगा, पूरी तरह से यूरो फाइव स्टैंर्डड की सब्जी
-शुरू में पोट्स में लगाने और खुद काम करने की सलाह
भूपेश चट्ठा, पटियाला
'पहले गार्डन में गमले हुआ करते थे, अब गमलों में ही गार्डन सिमट गया है।' बहुमंजिला फ्लैट के कमरे में रखे गमलों में पौधे दिखाता यह विज्ञापन मैट्रो शहरों का लाइफ स्टाइल दर्शाता है। पंजाब में कुछ साल पहले तो ऐसा सोचने वाले को ही पागल समझा जाता था। कृषि प्रधान राज्य में कम हो रहे कृषि क्षेत्र और आर्गेनिक सब्जियों के बढ़ रहे चलन ने अब छतों पर ही किचन गार्डन की शुरुआत करवा दी है।
यदि 600 वर्गफीट में विभिन्न किस्म की छह सब्जियों का प्रति सप्ताह दस से 15 किलो उत्पादन होता हो तो 1200 वर्ग फीट का गार्डन पांच लोगों के परिवार के लिए काफी है। अर्बन फार्मिग के विशेषज्ञ डा. बीएन विश्वनाथ कहते हैं कि रसायन मुक्त सब्जी, शुद्ध हवा के अलावा आपकी रसोई के कचरे को भी ठिकाने लगाएगी। सालभर के लिए आप आलू से बैंगन और टमाटर से नींबू तक का प्रबंध कर सकते है। उनका कहना है कि पहले महिलाएं और रिटायर्ड लोग ही बागवानी का काम करते थे लेकिन अब प्रोफेशनल लोग ज्यादा करने लगे है।
फूलों के बीजों के निर्यातक और सब्जियों के उत्पादन करवा डाईवर्सीफिकेशन की दिशा में काम और लाभदायक व्यापार चला रहे प्लांट्समैन सीड्स के एमडी अब्दुल वाहिद सलाह देते है कि बर्मी कंपोस्ट और केंचुए की खाद को मिट्टी में मिलाकर आप शुरुआत में एक फीट गहरे, डेढ़ फीट चौड़े और तीन फीट लंबे पॉट्स के साथ मेथी, पालक, धनिया, पोदीना, लहसुन, प्याज, हरी मिर्च आदि पैदा कर सकते है। लेकिन माली पर निर्भरता आपका अनुभव खराब कर सकती है। यह पश्चिमी देशों की अवधारणा है, इसलिए आपको भी खुद ही काम करने पर सफलता मिलेगी। समय और धूप का ख्याल ठीक से रहे तो एक गमला आपको महीने में दो बार सब्जी मंडी जाने से छुटकारा दिला देगा वो भी पूरी तरह से यूरो फाइव स्टैंडर्ड की सब्जी देगा।
कृषि विशेषज्ञ डा. बीएस सोहल कहते है कि प्रदेश के लगभग हर शहर में किचन गार्डन का चलन बढ़ा है, लोग बाथरूम के टब से लेकर बैटरी के खोल तक का प्रयोग कर रहे हैं। इसमें ध्यान रखने योग्य बात यही है कि बेल वाली सब्जी से परहेज करें इसे संभालने में दिक्कत आ सकती है। खर्च के नाम पर वे कहते हैं कि बीज के अलावा आपकी देखभाल ही इस पर आने वाला खर्च है और यह 15 मिनट से ज्यादा नहीं है बशर्ते शौक हो।
रसोई की वेस्ट को खाद के रूप में इस्तेमाल करने वाले पावरकॉम में सुपरिंटेंडेंट श्रीकांत शर्मा कहते हैं कि सब्जियों के जायके में ही तबदीली आ गई है। अपने बाग की गाजर मूली को खाकर उन्हें अपने गांव के खेत की याद आ जाती है।