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Friday, 21 December 2012

अब महिला शिक्षकों से छेड़छाड़ रोकने गाइड लाइन



-आईपीसी में दंड के क्या प्रावधान हैं, सर्कुलर में यह भी बताया गया
-दूर दराज के क्षेत्र में तैनाती से बचा जाए, एक स्थान पर सिंगल महिला की तैनाती ना हो, एक पुरुष कर्मी के साथ अकेली महिला कर्मी की डयूटी ना लगाई जाए
-10 निर्देशों में पंचायत सदस्यों, अधिकारियों और खुद महिलाओं से कहा गया क्या करें? और क्या ना करें?
भूपेश चट्ठा, पटियाला
स्कूल कालेजों में छात्राओं से बढ़ रही छेड़छाड़, दुव्र्यवहार यहां तक की दुष्कर्म की बढ़ रही घटनाओं के बाद अब महिला शिक्षकों के साथ ऐसी किसी दुर्घटना होने से पहले ही रोकने प्रदेश के डायरेक्टर जनरल आफ स्कूल एजूकेशन ने एहतियातन गाइड लाइन जारी कर दिए हैं।
इतना ही नहीं जारी किए गए दिशा निर्देशों में यह भी बताया गया कि कि भारतीय दंड संहिता के तहत महिलाओं के साथ किस प्रकार का दुव्र्यवहार करने पर आईपीसी में दंड के क्या प्रावधान हैं। कितनी सजा है? अथवा कितना जुर्माना हो सकता है? सर्कुलर में इसका भी विस्तृत ब्यौरा दिया गया है।
जारी किए गाइड लाइन में माना गया है कि महिला शिक्षकों को कई बार दूर दराज के क्षेत्रों में डयूटी पर जाना पड़ता है और कई स्थानों पर अकेले तैनाती के दौरान छेड़छाड़ अथवा मानसिक परेशानी से दो चार होना पड़ता है। ऐसी घटनाओं को सभ्य समाज के लिए कलंक बताते हुए इनसे सख्ती से निपटने को कहा गया है। शिकायत के लिए जहां डीजीएसई ने अपना ईमेल लिखा है वहीं मामला गंभीर होने की स्थिति सीधे फोन पर भी कहा जा सकता है। हालांकि महिलाओं की सुरक्षा की जिम्मेवारी समूचे समाज व सरकार की बताई गई है।
कहा गया है कि दूर दराज के क्षेत्र में महिला शिक्षक की तैनाती से बचा जाए, यहां पर पहल के आधार पर पुरुषों की तैनाती हो। जहां कहीं एक स्थान पर सिंगल महिला की तैनात हो, विशेष रूप से प्राइमरी स्कूलों में सुनिश्चित किया जाए कि आंगनवाड़ी सेंटर भी इन्हीं परिसर में काम करते हों। अगर ऐसा नहीं है तो पंचायतों से प्रार्थना है कि वो इन केंद्रों को शिफ्ट करवाएं।
महिला शिक्षकों को छुट्टी के बाद या देर सवेर रिपोर्ट लेने अथवा देने के लिए कार्यालय में ना बुलाया जाए। निर्देश में कहा गया है कि 'कई बार एक पुरुष कर्मी के साथ एक अकेली महिला कर्मी की डयूटी लगाने छेड़छाड़ की घटनाएं बढऩे के अवसर बढ़ जाते हैं।Ó यहां तक कि एक अकेली महिला शिक्षक को किसी भी स्कूल में तैनात ना किया जाए। कम से कम दो महिला शिक्षकों की एक स्कूल में नियुक्ति संबंधी निर्देशित किया गया है।
10 निर्देशों में से छठे में कहा है कि 'कई बार स्कूल प्रबंधन कमेटी, पंचायत सदस्य, स्कूल में आकर अथवा छुट्टी के समय गांव  के नौजवान टिप्पणियां करते है।Ó इस मामले में ब्लाक प्राइमरी शिक्षा अधिकारी समय समय पर जांच करें। जबकि ब्लाक रिसोर्स पर्सन व डिस्ट्रिक्ट रिसोर्स पर्सन के बारे में कहा है कि 'ये लोग भी कई बार स्कूल में आकर विजिटिंग रजिस्टर पर हस्ताक्षर नहीं करते...इससे स्पष्ट समझा जाए कि बुरी नीयत से आया हैÓ।
 अधिकारियों और खुद महिलाओं को ताकीद की गई है कि क्या करें? और क्या ना करें? इसके साथ ही शिकायत को तुरंत संबंधित इंस्पेक्शन टीम के समक्ष की जाए। ऐसा ना करने का मतलब असमाजिक तत्वों को शह देना होता है। इस जांच करने बनाई जाने वाली पांच सदस्यों की सैक्सुअल हरासमेंट कमेटी में तीन महिलाओं का होना भी जरूरी कर दिया गया है। जबकि पुलिस कार्रवाई करवाने की जिम्मेदारी बीपीईओ अथवा डीईओ की तय की गई है।



महिलाओं के खिलाफ जुर्म करने पर भारतीय दंड संहिता में सजा के प्रावधान
धारा 354 किसी महिला से जोर जबरदस्ती करना, छेड़छाड़ करना, परेशान करना तो दो साल की कैद या जुर्माना अथवा दोनों हो सकती हैं।
धारा 376 बलात्कार - किसी महिला से उसकी सहमति के बिना शारीरिक संबंध बनाने पर सात साल की कैद एवं जुर्माना हो सकता है।
धारा 376 (2बी) सरकारी कर्मचारी होते हुए अपनी स्थिति का गलत फायदा उठाते हुए किसी महिला से बिना सहमति शारीरिक संबंध बनाने पर दस साल की कैद एवं जुर्माने का प्रावधान।
धारा 493 किसी महिला को धोखे से यह यकीन दिलाकर कि अब वह उसकी पत्नी है, शारीरिक संबंध बनाने पर दस साल की कैद एवं जुर्माना अथवा दोनों सजाएं हो सकती हैं।
धारा 509 ऐसा कुछ कहना, इशारा करना जिससे महिला की लज्जा का अनादर हो तो एक साल की कैद या जुर्माना या दोनों सजाओं का प्रावधान।