भूपेश चट्ठा, पटियाला
पंजाब और जलती पराली का साथ इस साल थोड़ा कम हो यह उम्मीद हर पर्यावरण विद कर रहा है। 70 लाख एकड़ में उगने वाली धान की फसल का बेहतर बदल अगर कृषि वैज्ञानिक दे दें तो इससे आगे दुआ मांगना भी गलत होगा। लेकिन नए साल में यह उम्मीद किसान से तो की ही जा सकती है कि वो अपनी ही धरती पर अपने मित्र किटों व खुद के खेत में लगी प्राकृतिक रूप से खाद बनाने वाली फैक्ट्री को ना जलाएं। हालांकि अक्टूबर में जलने वाली पराली को रोकने राज्य सरकार दो साल पहले की तरह मामले दर्ज करेगी। ऐसी कामना आदर्श चुनाव आचार संहिता लगने से ठीक दो महीने पहले वोटतंत्र में करना बेतुका ही कहा जाएगा।
पराली के जलने से होने वाले प्रदूषण की खबर किसान को अब हो चुकी है बात तो बस इतनी सी है कि जिस तरह से पंजाब में पटाखे जलाने के चलन में पिछली दिवाली पर समझदारी दिखाई गई है, ठीक उसी तरह से पराली जलाने पर भी स्वैच्छिक रूप से प्रतिबंध लगाना होगा। पराली के मामले में 10 साल में मात्र 20 फीसदी क्षेत्र में ही पराली का जलना रूका है। इस बार चाहे कारण हैप्पी सीडर बने या कोई जुगाड़ तकनीक काम करे हर किसी की इच्छा है कि यह आंकड़ा कम से कम दोगुना हो जाए।
शिरोमणि अकाली दल-भारतीय जनता पार्टी का गठबंधन जिस तरह से भूमिगत जल स्तर को संजोने-संभालने बनाए व सफलता पूर्वक लागू किए गए सब सोएल एक्ट के रूप में पर्यावरण संरक्षण के लिए जाना जाएगा। इसमें धान की पराली को बायो फ्यूल के रूप में प्रयोग करने लग रहे प्रोजेक्टों के कमीशन होने में तेजी आए तो पीठ थपथपाने के कारण दो हो जाएंगे।
धान की बिजाई 10 मई और रोपाई 10 जून से करने के सकारात्मक परिणाम आने लगे हैं। बीते साल प्रदेश में 10 जून से दो दिन पहले हुई बारिश के चलते लिए गए लाभ को छोड़ दें तो कहीं भी रोपाई नहीं हुई है। ऐसे में बिजली पानी दोनों की बचत हुई। नए साल में धार्मिक लोगों से प्राकृति प्रति अपना धर्म निभाने और लिखने-पढ़ने वाले व बीमार, बुजुर्गो के प्रति अपना फर्ज निभाने की आस की जा रही है। ध्वनि प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश पुलिस व प्रशासन को याद रहें और लोगों को समझाने से ही इसकी शुरूआत की जा सकती है।