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Friday, 16 November 2012

क्यों न मुफ्त बिजली बंद करे सरकार!


 युवा संपादक पेज के लिए
लोगो : पराली का जलाना
- प्रदूषण फैलाने वाले किसानों की बिजली सब्सिडी बंद करने की मांग उठने लगी
मिताली गोयल, पटियाला
पराली के जलाए जाने से हो रहे प्रदूषण से त्रस्त आम आदमी हालांकि खुलकर कुछ नहीं कह पा रहा, पर अब दबी जुबां से ये मांग जरूर करने लगा है कि जब सरकार कृषि क्षेत्र को मुफ्त बिजली देकर आम आदमी पर अतिरिक्त बोझ डालती है तो कम से कम पराली जलाकर प्रदूषण फैलाने वाले किसानों की मुफ्त बिजली क्यों न बंद कर दी जाए।
सोशल साइंसेज एंड हेल्थ फोरम के डा.पीपी खोसला कहते हैं कि पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड दो दशक से किसानों को 'जागरुकÓ करता आ रहा है। इस कड़ी में कानूनी रूप से भी धारा-144 के तहत प्रतिबंध लगाया गया है, लेकिन बीते साल वर्ष 2011 में 188 मामले दर्ज हुए तो इस साल इनकी संख्या दो सौ के थोड़ा ऊपर ही निकल पाई है। जबकि राज्य में 12 लाख से ज्यादा ट्यूबवेल कनेक्शन हैं और लगभग हर गांव में पराली जल रही है। डा.खोसला कहते हैं कि कुछ साल पहले पीपीसीबी ने ही उन सभी किसानों पर मामले दर्ज करने की बात कही थी, जहां पर आग लगने से औरों को नुकसान हुआ अथवा फायर बिग्रेड ने पहुंचकर आग पर काबू पाया हो। यहां तक कि रजिस्टर में शिकायत दर्ज होने के बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं हुई।
अगर सब सॉयल एक्ट के तहत धान की बिजाई नियंत्रित की जा सकती है तो कटाई क्यों नहीं? किसान को चेतावनी दें, खर्चा लगाने व कनेक्शन काटने की सलाह तक दे दी गई है तो पराली जलाने वालों को मुफ्त बिजली बंद क्यों नहीं हो सकी है।

बाक्स
...कहते हैं अधिकारी
मुख्य कृषि अधिकारी डा.बीएस सोहल कहते हैं कि किसान सबसे अधिक कानून मानने वाला समुदाय है। सब सॉयल एक्ट के तहत जब किसान से भूमिगत जल स्तर बचाने को धान की बिजाई 10 मई से और रोपाई 10 जून से करने को कहा गया तो उसने पूरे प्रदेश में बिना किसी विरोध के इसे लागू किया। ठीक ऐसे ही पराली जलाए जाने के बारे में किसान जागरुक है। कुछ सुधार हुआ है, बाकी भी विकल्प मिलते ही दिखाई देगा।

...कहते हैं किसान
पराली जलाए जाने को किसान भी न्यायोचित नहीं ठहराते, लेकिन उनका ये भी कहना है कि लोग उनकी परेशानी नहीं देखते। बाजार में और प्रदेश में पराली के गट्ठर बांधने वाली बेलर मशीनें हर तरफ उपलब्ध नहीं हैं। इसी प्रकार धान की कटाई के साथ ही गेहूं की बिजाई करने वाली हैप्पी सीडर जैसी मशीनें उपलब्ध नहीं है।
इस साल धान की बिजाई व रोपाई दोनो ही लेट हुई हैं। ऐसे में फसल की कटाई देरी में हो चुकी है। गेहूं का सीजन 25 अक्टूबर से शुरु हो चुका है, पर खेत खाली नहीं हुए। ऐसे में पराली जलाकर गेहूं की बिजाई करने के अलावा कोई और चारा बचा नहीं है।