Showing posts with label banana. Show all posts
Showing posts with label banana. Show all posts

Wednesday, 5 January 2011

पंजाब के खेतों में मिली केले को राह

उत्पादन व क्षमता 6 600 करोड़ का है राज्य का बाजार, अपना योगदान मात्र दो करोड़ का
प्रदेश में 450 हेक्टेयर तक पहुंचा इस फल का रकबा
भूपेश चट्ठा, पटियाला
केले का नाम आते ही केरल की याद आ जाती है जहां समोसे में भी आलू की जगह केला डाल दिया जाता है। पंजाबी पकौड़ों में तो आलू प्याज ही रहेगा पर अब यहां केले अधीन रकबा बढ़ने लगा है।
राज्य में 450 हेक्टेयर में केले की खेती हो रही है। पिछले दो साल से इसके अधीन रकबा बढ़ रहा है। साल में दो बार होने वाली बिजाई में अब फरवरी के सीजन में केले का रकबा 600 हेक्टेयर तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। लुधियाना, मोगा, कोटकपुरा क्षेत्र में केले की खेती की ओर झुकाव ज्यादा रहा है तो पटियाला, फतेहगढ़ साहिब में भी उत्पादक बढ़े हैं।
पंजाब को भले ही एक अर्से से केले की फसल के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता रहा है। पर अब सोच बदलने के पीछे आर्थिक कारण ज्यादा आगे आए है। बाजार के जानकारों के अनुसार पिछले साल 600 करोड़ रुपये के केले की खपत की हुई थी। इसमें पंजाब की हिस्सेदारी दो करोड़ रुपये से भी कम रही है।
पंजाब कृषि विश्वविद्यालय ने वर्ष 2007 में ग्रेंड नेनो नामक टीशू कल्चर किस्म तैयार की थी। इसे दो साल तक सिर्फ प्रयोग के रूप में ही विभिन्न जगहों पर उगा कर देखा गया। इसके काफी अच्छे नतीजे सामने आये है। पिछले साल अगस्त में पंजाब में करीब 200 हेक्टेयर रकबे पर केले की बुआई हुई है। केले की बुवाई अगस्त-सितंबर माह में करनी ज्यादा ठीक रहता है। इससे प्रति हेक्टेयर उत्पादन 12 से 13 टन तक आने की संभावना है। वहीं फरवरी माह में केले की बुवाई करने से यह उत्पादन 9 से 10 टन तक रहता है।
राज्य में अब बनाना ग्रोअर एसोसिएशन भी बन गई है जिसे धान व गेहूं के मुकाबले केले की खेती काफी लाभदायक लग रही है। व्रत-त्योहारों के अलावा भी मंडियों में उन्हे केला बेचने में कोई दिक्कत नही हो रही। खर्चे निकाल प्रति एकड़ सवा लाख रुपये की आमदनी दे रहे केले अधीन हर उत्पादक अपना रकबा दोगुना कर रहा है।
पंजाब फार्मर कमीशन के सलाहकर डॉ. पी.एस रंगी के अनुसार केले के अधीन पंजाब के लुधियाना, पटियाला, अमृतसर में केले के अधीन रकबा ज्यादा बढ़ रहा है। इस साल किसानों को करीब 2.5 लाख केले के पौधे दिए गए है। किसानों को सब्सिडी के रूप में पहले दस हजार रूपये की सहायता आयोग की ओर से दी जा रही थी लेकिन अब इसे राष्ट्रीय बागवानी मिशन के अधीन लाए जाने के बाद करीब 18 हजार रूपये का लाभ दिया जा रहा है। केले का पौधा करीब 14 माह के बाद फल देना शुरु कर देता है। प्रति हेक्टेयर 3000 से 3500 पौधे लगाए जा सकते है।