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Tuesday, 26 April 2011

आबकारी अधिकारियों ने दिया 72 घंटे का अल्टीमेटम,excise, agitation, employee,

-ईटीओ रणजीत सिंह के खुदकुशी करने से  खफा अधिकारियों,
इंस्पेक्टरों, मिनीस्टरीयल स्टाफ और दर्जा चार ने दिया धरना
-कहा एफआईआर दर्ज कर, दोषी विजीलेंस अधिकारियों को निलंबित किया जाए
उप मुख्य  संवाददाता, पटियाला
राज्य के आबकारी एंव कराधान विभाग के अधिकारियों कर्मियों ने
आज विजीलेंस विभाग की कार्रवाईयों से नाराज पंजाब सरकार के
खिलाफ  अपना गुस्सा निकालते हुए एक्साइज कमिश्नर कार्यालय के बाहर
धरना लगा सरकार को 72 घंटे का अल्टीमेटम दे दिया है।
विभाग के एक एक्साइज एंड टेक्सेशन आफिसर रणजीत सिंह की कथित
रूप से रिश्वत लेते पकड़े जाने और बाद में जमानत पर रिहाई के बाद
मोहाली में उनके खुदकुशी कर लेने से गुस्साए अधिकारियों के
समर्थन में विभाग के इंस्पेक्टर व मिनीस्टरीयल स्टाफ और दर्जा चार
कर्मियों ने समर्थन जताते हुए धरने में भाग लिया है।
ईटीओ एसोसिएशन के प्रदेश प्रधान केएस धालीवाल ने कहा कि
सरकार यदि 72 घंटे के भीतर यदि ईटीओ रणजीत सिंह को मौत
को गले लगाने को मजबूर करने वाले विजीलेंस अधिकारियों के
 खिलाफ  एफआईआर दर्ज नहीं की जाती और दोषियों को निलंबित
नहीं किया जाता तो विभाग को पूरी तरह से ठप्प कर दिया जाएगा।
विभाग के रोजमर्रा के कामों के अलावा, कहीं  भी  जांच नहीं की
जाएगी और राज्य में सामान के प्रवेश पर होने वाली कर वसूली को
पूरी तरह से रोक दिया जाएगा।
ईटीओ एसोसिएशन के अलावा पूर्ण हड़ताल के आहवाहन में शामिल
होने का नारा एक्साइज इंस्पेक्टर एसोसिएशन व मिनीस्टरीयल स्टाफ और
दर्जा चार कर्मियों ने  भी  दिया है।
धरने को संबोधित करने वालों का कहना है कि रणजीत सिंह
विभाग के ईमानदार इंस्पेक्टर थे और जिस व्यक्ति से रिश्वत लेने के
मामले में उन्हें गिरफतार किया गया है उस व्यक्ति से पकड़े माल पर
दो लाख, 27 हजार रूपये कि पेनाल्टी लगाई गई थी और इसकी
बाकायदा रसीद काट कर माल को रिलीज करने के आर्डर भी  दिए जा
चुके थे लेकिन उक्त व्यक्ति ने ईटीओ को दो लाख  52 हजार रूपये
थमा दिए। तर्क दिया गया कि पैसे कम है या ज्यादा ये तो गिन कर ही
पता चलना था, ऐसे में ईटीओ को जानबूझ कर फंसाया गया है।
दिलचस्प है कि रिश्वत लेते पकड़वाने वाला व्यक्ति पहले भी  करीब दो
दर्जन बार पकड़ा जा चुका है और विभाग में 'पॉसर' के नाम से जाना
जाता है। इस घटना से करीब 15 दिन पहले इसी ईटीओ ने इसी व्यक्ति
को टेक्स चोरी में डेढ़ लाख  रूपये की पेनाल्टी ठोकी थी।

धरना वीवीआईपी स्टाइल में

राज्य सरकार के सबसे मलाईदार कहे जाने वाले आबकारी विभाग में लगे
वीवीआईपी स्टाइल के इस धरने को हालांकि बिना किसी पूर्व सूचना
के अचानक किए गए आहवान पर लगाया गया लेकिन इंतजाम पूरी तरह से
चाकचौबंद थे, प्रर्दशनकारियों के लिए धूप में छाया को टेंट,
गर्मी से राहत को पंखे ,आने पर चायपानी, और चारसौ लोगों के लंच
के लिए कैटरिंग की पूरी व्यवस्था की गई थी। शामियाना और सफेद
कवर लगी कुर्सियां कह रही थी कि धरना एक्साइज विभाग का है।

आयुक्तों ने भी  बनाई यूनियन

आमतौर पर कमिश्नर नाम जुडऩे के बाद संगठन की गतिविधियां हर
कोई कम कर लेता है पर ईटीओ रणजीत सिंह के खुदकुशी मामले
ने आबकारी विभाग के आला अधिकारियों में बदलाव ला दिया है।
विभाग के डिप्टी कमिश्नर व असिस्टेंट कमिश्नर स्तर के अधिकारियों
ने एसोसिएशन का गठन कर जसकरण सिंह बराड़ को प्रधान घोषित
कर दिया है। इस एसोसिएशन ने भी  आंदोलन को अपना समर्थन दे दिया
है।

Thursday, 7 April 2011

कर्मियों के आश्रित फिर चढ़े मुख्यालय पर, employee, pseb, pawercom, agitation, protest


-सफाई कर्मियों के धोखे में सुबह छह बजे सुरक्षा उपायों को धत्ता बताया
-कहा मांगे माने जाने तक जारी रहेगा मरणव्रत
उपमुख्य संवाददाता, पटियाला
पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड और पंजाब स्टेट ट्रांसमिशन कारपोरेशन लिमिटेड के माल रोड स्थित मुख्यालय की पांचवी मंजिल पर आज फिर एक बार सभी तरह के सुरक्षा प्रबंधों को धत्ता बता कर पंजाब राज्य बिजली बोर्ड के मृतक कर्मियों के आश्रित चढ़ बैठे है।

पानी की जगह इस बार हाथ में पैट्रोल की बोतलें हाथ में लेकर चढ़े इन आश्रितों में महिला सदस्य भी शामिल है। मृतक आश्रित संघर्ष कमेटी के भीम सिंह व हरविंदर सिंह का कहना है कि पावरकाम मुख्यालय पर चढ़े और गेट पर धरना दे रहे आश्रित इस बार पूरी तरह से मरणवृत पर है खाने पीने का  सवाल ही नहीं। साथ ही वे दावा करते है कि पिछली बार 72 घंटे उपर रहने के बाद उन्हें धोखे से उतर दिया गया था लेकिन इस बार हक लेने तक आंदोलन जारी रहेगा।

पावरकाम मुख्यालय पर कुछ महीनों के अंतराल में खुदकुशी की धमकी देकर चढऩे का यह पहला मामला नहीं है इससे पहले भी यहां पर आंदोलन होता रहा है। इससे पहले भी दो बार इसी तरह से प्रबंधन अपने सुरक्षा उपायों के चलते किरकिरी करवा चुका है। आज सुबह आश्रितों ने सफाई कर्मियों के धोखे में सुबह छह बजे सभी तरह के सुरक्षा उपायों को धत्ता बता दिया। आधिकारिक सत्रों अनुसार आश्रित अपने साथ लोहा काटने वाली आरी लाए और ताला काट कर आसानी से छत पर जा चढ़े।
दिलचस्प है कि पिछली बार मृतक कर्मचारियों के पांच आश्रितों ने धक्का मारा कर गेट तोड़ दिया था, जबकि इससे पहले की कार्यवाई में उन्हें किसी ने रोका ही नहीं था।

मालरोड स्थित पावरकाम मुख्यालय पर हालांकि प्रदेश भर कार्यालयों से काफी संख्या में लाल बत्ती वाली कारें अधिकारिक रूप से हर रोज पहुंचती हैं। यही वो मुख्यालय है जो 65 हजार से ज्यादा कर्मियों को नियंत्रित व संचालित करता है लेकिन इसकी सुरक्षा व्यवस्था में खामियों की कमी नहीं है। किए गए उपाय खोखले साबित हो रहे हैं। प्रबंधन का हाल कुछ ऐसा है कि न्यायालय के आदेश भी क्रियान्वित नहीं हो पाए।

सात मंजिला भवन में कभी एक महिला कर्मी का तलवार से गला काटने वाला पकड़ में नहीं आता। हथियार कैसे गए? किसी को पता नहीं, पांच घंटे तक एक संगठन पूरे मुख्यालय को बंधक बनाकर रखता है और हर कोई बेबस नजर आता है।

वहीं पावरकाम के प्रवक्ता का कहना है कि पिछली बार चढ़े आश्रितों को अस्थाई नौकरी दे दी गई है। लेकिन ये वो लोग है जो सोलीशियम लाभ ले चुके है। अब चुनावी वर्ष में ब्लैक मैलिंग पर उतर आए है। 16 अप्रैल,2010 से मृतकों के आश्रितों को नौकरी देने की नई नीति के सवाल पर वे कहते है कि पूर्व में हुई मृत्यु पर ये लागू नहीं होता। बिजली बोर्ड अब पावरकाम हो चुका है।
दूसरी ओर सूत्र बताते है कि जिला प्रशासन से डिप्टी कमीश्नर व एसएसपी की ओर से दौरे हो चुके है और बातचीत की जा रही है।