अनाज खराब हुआ माना प्रमुख सचिव ने, दो मामले भी दर्ज, औरों पर भी कार्रवाई का आश्वासन
वर्तमान गति से तो सात महीने बाद गेहूं की फसल आने तक दो साल पुराना स्टाक भी नहीं हिलेगा
भूपेश चट्ठा, पटियाला
वर्ष 2008-09 का गेहूं पंजाब में पड़ा है, 2009-10 के गेहूं के साथ चावल और धान भी अभी तक यहीं है, डेढ़ सौ लाख धान की आवक होने को है और पांच महीने बाद 124 लाख टन गेहूं की फसल आ जानी है जिस गति से ढुलाई हो रही है उससे यह सर्किल कभी पूरा नहीं हो सकता। प्रदेश में अन्न भंडार की अभी यह अधूरी तस्वीर है चौंकाने वाली बात यह है कि देश भर में ज्यों ज्यों अनाज सडऩे को लेकर हो हल्ला बढ़ रहा है पंजाब से ढुलाई कम होती जा रही है। अब सारा सिस्टम धान को समेटने में लगा है।
मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के प्रमुख सचिव डीएस गुरू इसी भंडारण समस्या पर कहते है कि राज्य में क्षमता बढ़ाने के अलावा कोई और उपाय नहीं है। 70 लाख टन अनाज भण्डारण करने के टेंडर मांगे है और 101 लाख टन के आवेदन आ चुके है। जल्द ही अलाटमेंट कर दी जाएगी, और अनाज का खराब होना रोका जा सकेगा। राज्य में कितना अनाज पड़ा है इस पर उनका कहना है कि मात्रा खासी है और मुख्यमंत्री ने केंद्रीय कृषि मंत्री से भी बात की है और एफसीआई के अधिकारियों भी अब खाद्य आपूर्ति विभाग को भी हर संभव उपाय करने को कहा है।
अनाज खराब होने के जिम्मेदार लोगो पर कार्यवाई के सवाल पर डीएस गुरू कहते है कि दो मामले दर्ज किए जा चुके है शेष पर भी काम हो रहा है। किसी को बक्शा नहीं जाएगा।
सिर्फ मार्कफैड का ही उदाहरण लें तो वर्ष 2008-09 का एक लाख 73 हजार टन, 09-10 का दस लाख 69 हजार टन और इस साल का 21 लाख 66 हजार टन गेहूं अभी भी ढुलाई का इंतजार कर रहा है। जून के बाद से अलाट होने वाली ट्रेनों की संख्या लगातार कम हो रही है। याद रहे कि मार्कफैड के बाद पनसप, फिर पनग्रेन, वेयरहाउस और पंजाब एग्रो का नाम खरीद एजेंसियों के रूप में आता है। किसी के भी हालात अलग नहीं है।
राइस शेलर गेहूं से अटे है धान क्या स्कूलों में...
राज्य में गेहूं भंडारण की समस्या वर्षों से चलती आ रही है पिछले साल से विकराल रूप धारण कर गई तो इस बार अप्रैल में आई नई फसल को धान की मिलिंग कर चावल बनाने वाले शैलरों में स्टोर कर दिया गया। अब तक इन्हें खाली नहीं किया जा सका है, गेहूं से अटे पड़े शैलरों में जगह ना होने पर सवाल उठने लगे हैं कि मंडियों धान की सरकारी खरीद के बाद क्या इसे स्कूलों में रखा जाएगा।
स्टोरेज क्षमता बढ़ाने के अलावा उपाय
राज्य की खरीद एजेंसियों की कोआर्डीनेशन कमेटी के अध्यक्ष भुपिंदर सिंह कहते है कि मामला एक राच्य या एक एजेंसी का नहीं है पूरे देश का है ऐसे में हर व्यक्ति की भागीदारी जरूरी है। स्टोरेज के लिए गांव में ही किसान व सरपंच को इंतजाम करने के अलावा आढ़ती की सेवाएं ली जा सकती है। इसके लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य मासिक आधार पर तय हो जाए जिससे बिना कोई खर्च किए कालाबाजारी और जमाखोरी दोनों रूकेंगे भी और फायदा किसान को भी ले सकता है।
भुपिंदर सिंह सवाल करते हैं कि बीपीएल और एपीएल परिवारों के लिए पहले हम गेहूं खरीद कर गोदाम में भेजते हैं फिर वहां से निकाल कर सार्वजनिक वितरण प्रणाली में भेजा जाता है जबकि यह कार्य सीधा भी किया जा सकता है।
2007-08 में 2.90 लाख टन स्टोरेज क्षमता की प्लींथें तोड़ी
इस साल 48 हजार 315 टन अनाज को खाने योग्य ना रहने लायक बताने वाली सरकार की एक नीति के तहत 2007-08 में वेयरहाउसिंग कारपोरेशन ने पंचायती जमीन पर बनी दो लाख टन स्टोरेज क्षमता की प्लींथें तोडऩे के आदेश जारी कर दिए। विभागीय सूत्र बताते हैं कि छहरटा में तो अगले ही साल 40 हजार टन क्षमता की प्लींथें फिर उसी स्थान पर बना भूल सुधार कर लिया गया। जबकि प्रदेश में 30 लाख टन धान, 63 लाख टन चावल और 103 लाख टन गेहूं पड़ा है। राच्य में 95 लाख टन कवर्ड स्टोरेज क्षमता है तो 105 लाख टन खुले आसमान में भंडार करने की व्यवस्था है।