अमेरिका की बहुराष्ट्रीय कंपनी मानसेंटो ने कहा, हमने खोजा खरबूजे को, पेटेंट भी लिया
यूरोप में विरोध हुआ पर पंजाब व केंद्र सरकार सोई रही
खेती विरासत मिशन ने जागरूक करना शुरू किया
भूपेश चट्ठा, पटियाला
हकीम की तरह काम करने वाले भारतीय नीम के अमेरिका के हाथों में जाने और देश में सदियों से हाथ पीले करती आ रही हल्दी को कॉसमेटिक कंपनियों की ओर से टर्मरिक बता सारी परिस्थितियों को अपने पक्ष में तोड़ने मोड़ने की साजिशों के बीच विशुद्ध रूप से भारतीय कहा जाने वाला फल खरबूजा भी हमारा अपना नहीं रहा। इसने रंग बदल अमेरिकी कर लिया है। आने वाली पीढि़यां इसे अमेरिकी आविष्कार के रूप में देखेंगी।
पंजाब में पर्यावरण के साथ परंपरागत ज्ञान बचाने के प्रयास में लगे डा. अर्नेस्ट अलबर्ट विश्र्व बाजार में चल रही ताजा गतिविधियों पर बताते हैं कि रासायनिक खादों व बीजों का व्यापार करने वाली कंपनी मानसेंटो ने हाल ही में यूरोप में खरबूजे को अपना आविष्कार बता इसका पेटेंट ईपी 1962 578 भी ले लिया है, जबकि विशेषज्ञों का मानना है कि खरबूजा मूलत भारतीय बीज अथवा पौधा है। वे कहते हैं कि यूरोप में मानसेंटो का विरोध हो रहा है जबकि हम सोए हुए हैं। मानसेंटो का दावा बायो-पायरेसी या वनस्पति लूट खसूट का बनता है और यूरोप की किसान यूनियनें व संस्थाएं इसका विरोध भी कर रही हैं।
इसी संबंध में सोशल साइंसिस एंड हेल्थ फोरम के डा. पीपी खोसला बताते हैं कि प्रकृति में किसी चीज के बारे में ज्ञान प्राप्त कर लेने का मतलब यह नहीं है कि यह उक्त व्यक्ति की धरोहर हो गई है। कल ये लोग गीता का श्लोक पढ़ कर उसका भी पेटेंट करवाएंगे जबकि यह मान्य नहीं है। प्रकृति में जो कुछ मौजूद है वो सभी का है, किसी एक का नहीं हो सकता।
दूसरी ओर, पंजाब में परंपरागत खेती पर काम कर रहे स्वयं सेवी संगठन खेती विरासत मिशन ने इस ओर लोगों को जागरूक करना शुरू कर दिया है। मिशन का कहना है कि ये लोग सबसे पहले खरबूजे के बीज गायब करेंगे। पपीते में तो दिखने बंद हो ही गए हैं। हमें लाल टमाटर दिखा हमारे देसी टमाटरों को फिंकवाने वाली स्थिति में लाने वाली कंपनियों से लड़ने का एक ही तरीका है कि हम देसी बीजों को अपनी ही बाल्कनी के गमले में सुरक्षित कर लें या किसी खाली पड़े प्लाट में उगा कर अगली पीढ़ी को प्लाट के साथ सौंप सकते हैं। कम से कम यह कोशिश तो हो ही सकती है कि हम वो पपीता अथवा खरबूजा ही खाएं जिसमें बहुत सारे बीज हों।